सामग्री पर जाएं

Squamata

Sand Lizard

Lacerta agilis

कम चिंता
Sand Lizard

© Nadija Antonova · iNaturalist · CC BY 4.0

वैज्ञानिक वर्गीकरण और त्वरित तथ्य

वर्गीकरण

संघ Chordata
वर्ग Squamata
कुल Lacertidae
वंश Lacerta
प्रजाति Lacerta agilis

एक नज़र में

11 g
वजन
7.8 cm
लंबाई
Stats updated 2 महीना ago

Lacerta agilis, जिसे रेत छिपकली के नाम से जाना जाता है, यूरोप और एशिया के रेतीले और घास के मैदानों में एक चपल शिकारी है। यह छोटी लेकिन कुशल छिपकली ऐसे कठोर वातावरण में पनपती है जहाँ अधिकांश अन्य सरीसृप संघर्ष करते हैं। इस प्रजाति को 13 देशों में दर्ज किया गया है और इसे संरक्षण की दृष्टि से सुभेद्य नहीं माना जाता (Least Concern)। रेत छिपकली के अनुकूल व्यवहार और वितरण इसे सरीसृप विकास के लचीलेपन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनाते हैं।

लैकर्टिडे परिवार में वर्गीकृत, यह प्रजाति अपनी तीव्र गति, तीव्र शिकार प्रवृत्ति और रेतीली मिट्टी में बिलों में छिपने की क्षमता के लिए उल्लेखनीय है। इसका अध्ययन पहाड़ी और मैदानी दोनों आवासों में सरीसृपों के अनुकूलन को समझने के लिए किया गया है।

पहचान और रूप

आकार और शारीरिक संरचना

Lacerta agilis एक मध्यम आकार की छिपकली है। नर वयस्क कुल शरीर की लंबाई में 19.3 सेमी तक पहुँच सकते हैं, जबकि मादाएं 18.5 सेमी तक बढ़ती हैं। यह प्रजाति सुदृढ़ निर्माण वाली और चुस्त होती है, जिसमें स्पष्ट रूप से परिभाषित अंग और एक पतली पूँछ होती है।

रंग और चिह्न

बालू की छिपकली एक लैंगिक भिन्नता प्रदर्शित करने वाली प्रजाति है। उत्तर-पश्चिम यूरोप में, दोनों लिंग पार्श्व और पृष्ठीय पट्टियों के साथ अक्षीय (नेत्र के आकार की) चिह्न दिखाती हैं, जो पीले केंद्र के साथ गहरे धब्बों के रूप में प्रकट होते हैं। नर पतले चिह्न रखते हैं, जबकि मादाएं अधिक व्यापक पैटर्न प्रदर्शित करती हैं। वसंत संभोग के मौसम में नर के पार्श्व भाग चमकीले हरे रंग में परिवर्तित हो जाते हैं, जो देर से गर्मी तक फीके पड़ जाते हैं।

दोनों मुख्य पश्चिमी亚種(L. a. agilis और L. a. argus) में, पृष्ठीय पट्टी पतली और टूटी हुई होती है, या पूरी तरह अनुपस्थित भी हो सकती है। वर्णन यूरोपीय और रूसी श्रेणी भर में भिन्न होता है, जो स्थानीय आवास और जलवायु परिस्थितियों को दर्शाता है।

वितरण और आवास

Lacerta agilis (बालू छिपकली) यूरोप के मध्य और उत्तरी भागों में वितरित है। GBIF अभिलेख 13 देशों से इस प्रजाति की उपस्थिति दर्शाते हैं, जिसमें नीदरलैंड्स सबसे महत्वपूर्ण आबादी का केंद्र है, जहाँ 168 रिकॉर्ड दर्ज हैं। जर्मनी दूसरा सबसे बड़ा वितरण क्षेत्र है, जहाँ 81 अभिलेख मिले हैं। ऑस्ट्रिया और ब्रिटेन प्रत्येक में 11 रिकॉर्ड हैं, जबकि चेक गणराज्य, पोलैंड, फ्रांस, रोमानिया, स्लोवाकिया और बोस्निया-हर्जेगोविना में छोटी आबादियाँ पाई गई हैं।

इस प्रजाति की सटीक ऊँचाई की रेंज उपलब्ध आँकड़ों में दर्ज नहीं है, किंतु यह अपने यूरोपीय आवास में तराई से मध्यम पहाड़ी क्षेत्रों तक पाई जाती है। बालू छिपकली रेतीली और दोमट मिट्टी वाले खुले इलाकों को पसंद करती है, विशेषकर जहाँ मातम और कम वनस्पति हो।

मौसमी गतिविधि का स्पष्ट पैटर्न दिखता है: मार्च में अधिकतम अभिलेख (224) मिलते हैं, जो वसंत ऋतु के दौरान इस छिपकली की सक्रियता को दर्शाता है। फरवरी में 74 रिकॉर्ड हैं, जबकि अप्रैल से दिसंबर तक लगभग कोई अभिलेख नहीं हैं। यह पैटर्न संभवतः गर्मियों के महीनों में प्रेक्षण प्रयास में कमी को प्रतिबिंबित करता है, क्योंकि यह प्रजाति वर्ष के दौरान सक्रिय रहती है।

जीव विज्ञान और व्यवहार

आचरण

बालू वाली छिपकली (Lacerta agilis) दिन में सक्रिय शिकारी है जो सुबह के समय सबसे अधिक व्यस्त रहती है। यह प्रजाति तापमान-संवेदनशील है और ठंडे मौसम में निष्क्रिय हो जाती है। छिपकलियाँ अपने क्षेत्र की रक्षा करती हैं और नर विशेषकर प्रजनन काल में आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं।

ये छिपकलियाँ रेतीली मिट्टी में और घने वनस्पति के बीच गोता लगाकर छिपती हैं। शरीर का हरा या भूरा रंग उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छिपाए रखता है। जब खतरे में हों तो ये अपनी पूंछ को त्याग सकती हैं, जो बाद में फिर से उग आती है।

आहार

बालू वाली छिपकली मांसाहारी शिकारी है जो छोटे अकशेरुकी जीवों का शिकार करती है। इसका आहार मुख्य रूप से कीटों से बना होता है, विशेषकर बीटल, टिड्डे और चींटियाँ। यह प्रजाति सक्रिय शिकारी है जो दिन के दौरान भोजन की खोज में घूमती रहती है।

छोटी छिपकलियाँ और अन्य कशेरुकी जीव भी इसके आहार का हिस्सा हो सकते हैं, हालाँकि कीट इसके प्राथमिक भोजन स्रोत हैं। यह शिकार को दृष्टि से पहचानती है और तेजी से हमला करती है।

प्रजनन

बालू वाली छिपकली का प्रजनन काल वसंत और गर्मियों में होता है, आमतौर पर अप्रैल से जुलाई तक। नर मादाओं को आकर्षित करने के लिए प्रदर्शन करते हैं, अपने सिर को ऊँचा उठाते हैं और शरीर के रंग को तीव्र करते हैं। सफल संभोग के बाद, मादा 2 से 10 अंडों का क्लच रेत में या ढीली मिट्टी में दफन करती है।

अंडे 50 से 70 दिनों के बाद सेते हैं, और युवा छिपकलियाँ गर्मी के अंत या शरद ऋतु की शुरुआत में निकलती हैं। माता-पिता अंडों की देखभाल नहीं करते। नई पीढ़ी आमतौर पर 50-60 मिलीमीटर लंबी होती है और अपने जीवन के पहले वर्ष में तेजी से बढ़ती है।

संरक्षण और खतरे

Lacerta agilis (बालू छिपकली) को अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में सबसे कम चिंताजनक (Least Concern, LC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि इस प्रजाति को वर्तमान में विलुप्त होने का तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, इसकी जनसंख्या में गिरावट देखी जा रही है, जो दीर्घकालीन संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता को इंगित करता है।

खतरे

बालू छिपकली के समक्ष अपनी संपूर्ण श्रेणी में कई खतरे मौजूद हैं। आवास विनाश सबसे गंभीर कारक है, जिसमें बस्तियों, कृषि विस्तार और औद्योगिक विकास द्वारा प्राकृतिक बालू के टीलों और खुली रेतीली जगहों का नुकसान शामिल है। इसके अलावा, आवास का विखंडन (खंडीकरण) बिखरी हुई जनसंख्या के बीच जीन का प्रवाह सीमित करता है और स्थानीय आबादी को अलगाव में डालता है।

अनुपयुक्त आवास प्रबंधन भी इस प्रजाति के अस्तित्व में बाधा डालता है। बालू छिपकली को खुले, अच्छी तरह से धूप वाली रेतीली जगहों पर सक्रिय प्रबंधन की आवश्यकता होती है, और इन निवासों को सक्रिय रूप से बनाए रखना छोड़ने से वनस्पति घनत्व बढ़ता है जो प्रजनन और शिकार के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। जलवायु परिवर्तन एक उभरता हुआ खतरा भी प्रस्तुत करता है, जो इस प्रजाति के प्रजनन चक्र और सर्दियों की निष्क्रियता (हाइबरनेशन) को प्रभावित कर सकता है।

संरक्षण प्रयास

कई यूरोपीय देशों में बालू छिपकली को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। यूनाइटेड किंगडम में इसे वन्यजीव और ग्रामीण कानून 1981 के तहत पूरी तरह से संरक्षित किया जाता है, जिसका अर्थ है कि पकड़ना, घायल करना या मारना अवैध है। कई राष्ट्रीय और स्थानीय संरक्षण कार्यक्रम सक्रिय आवास प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसमें बालू के टीलों का पुनर्स्थापन और विदेशी वनस्पति को हटाना शामिल है।

रोचक तथ्य

रेत छिपकली के बारे में आकर्षक तथ्य

  1. Lacerta agilis का वैज्ञानिक नाम “agilis” शब्द से आता है, जिसका अर्थ है “चपल” या “फुर्तीला”—यह इसकी तेज़ गतिविधियों को दर्शाता है। यह छिपकली अपने परिवेश में शिकारियों से बचने के लिए अत्यंत तेज़ी से दौड़ सकती है।
  2. रेत छिपकली के कम से कम तीन ज्ञात उप-प्रजातियाँ हैं: L. a. agilis, L. a. argus, और L. a. exigua। ये उप-प्रजातियाँ यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती हैं और उनके रंग पैटर्न तथा आकार में भिन्नताएँ दिखाती हैं।
  3. रेत छिपकली के नर और मादा में स्पष्ट रंग भेद होता है। प्रजनन काल के दौरान नर चमकीले हरे या पीले रंग के हो जाते हैं, जबकि मादाएँ भूरे या भूरे-हरे रंग की रहती हैं।
  4. ये छिपकलियाँ रेतीले क्षेत्रों, स्वास्थ्य भूमि और खुली घास के मैदानों में निवास करती हैं, जहाँ वे सूरज की गर्मी से लाभ उठा सकती हैं। उनका आवास आमतौर पर विरल पौधों वाला और अच्छी तरह सूरज में आने वाला होता है।
  5. रेत छिपकली मुख्य रूप से कीटभक्षी है और छोटे कीड़े, मकड़ियाँ तथा अन्य अकशेरुकी जीवों का शिकार करती है। ये दिन के समय सक्रिय होती हैं और गर्म दोपहर में अपना अधिकांश समय भोजन खोजने में लगाती हैं।
  6. रेत छिपकली की पूँछ स्वपच्छेदन (autotomy) में सक्षम है, जिसका अर्थ है कि वह खतरे में होने पर अपनी पूँछ को अलग कर सकती है। नई पूँछ समय के साथ फिर से उग आती है, लेकिन यह मूल पूँछ जितनी मज़बूत नहीं होती।
  7. इस प्रजाति की कुछ आबादियाँ अब विलुप्त हो गई हैं या उनमें गंभीर गिरावट आई है, विशेषकर उत्तरी यूरोप में, जहाँ रेतीले आवास का नुकसान उनके अस्तित्व के लिए एक प्रमुख खतरा बन गया है। संरक्षण प्रयास इन सँकटग्रस्त आबादियों की रक्षा के लिए चल रहे हैं।

पारिस्थितिकी

आहार

Insectivore

व्यवहार

Diurnal Quick escape response Territorial

संरक्षण स्थिति

LC (कम चिंता) · NT · VU · EN · CR · EW · EX