यह वृक्ष हवा के तेज़ झोंकों और समुद्री तट की नमकीन फुहारों को इस हद तक सहन कर लेता है कि जहाँ देशी वृक्ष बौने रह जाते हैं, वहाँ भी यह पूर्ण आकार में विकसित हो जाता है।
Acer pseudoplatanus, जिसे अंग्रेज़ी में 'sycamore' या 'sycamore maple' कहा जाता है, सैपिनडेसी परिवार का एक बड़ा, पर्णपाती, चौड़ी पत्ती वाला मेपल वृक्ष है। यह मध्य यूरोप और पश्चिमी एशिया का मूल निवासी है और IUCN द्वारा 'संकटमुक्त' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
मूल क्षेत्र से बाहर यह वृक्ष ब्रिटेन, स्कैंडिनेविया, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक बस चुका है, जहाँ कुछ जगहों पर इसे आक्रामक प्रजाति भी माना जाता है। इसकी अनुकूलन क्षमता, तेज़ी से फैलने वाले पंखदार बीज और सदियों पुराना सांस्कृतिक महत्व इसे जानने लायक वृक्ष बनाते हैं।
पहचान और रूप
इस वृक्ष की सबसे उपयोगी पहचान इसकी पाँच-खंडों वाली हथेली-आकार (palmate) पत्तियाँ हैं, जिनके किनारे मोटे दाँतेदार होते हैं। परिपक्व अवस्था में यह वृक्ष 20 से 35 मीटर ऊँचा हो सकता है, जिसकी शाखाएँ चौड़ा, गुंबदाकार मुकुट बनाती हैं। युवा वृक्षों की छाल चिकनी और भूरे-स्लेटी रंग की होती है, लेकिन उम्र के साथ यह खुरदरी होकर पपड़ीदार टुकड़ों में टूटती है, जिससे भीतर की हल्की भूरी से गुलाबी छाल दिखाई देने लगती है।
कलियाँ आमने-सामने (opposite) जोड़ों में लगती हैं, अंडाकार और नुकीली होती हैं; इनकी शल्क हरी होती हैं जिनके किनारे और सिरे गहरे भूरे रंग के होते हैं और लंबाई 0.5 से 1 सेंटीमीटर तक होती है। पत्तियाँ गिरने के बाद तने पर घोड़े की नाल जैसे निशान (leaf scars) रह जाते हैं। पत्तियाँ 10 से 25 सेंटीमीटर लंबी-चौड़ी, चमड़े जैसी बनावट वाली, ऊपर गहरे हरे और नीचे हल्के रंग की होती हैं, जिनकी मोटी शिराएँ नीचे की सतह पर उभरी रहती हैं। पत्ती का डंठल (petiole) 5 से 15 सेंटीमीटर लंबा और अक्सर लाल रंग का होता है। कुछ खेती की गई किस्मों (cultivars) में पत्तियाँ बैंगनी या पीले रंग की भी होती हैं।
फूल पीले-हरे रंग के होते हैं और मई-जून में, पत्तियों के निकलने के बाद, 10 से 20 सेंटीमीटर लंबे लटकते हुए गुच्छों (panicles) में खिलते हैं, जिनमें प्रत्येक गुच्छे पर लगभग 60 से 100 फूल होते हैं। फल जोड़ी में पंखदार बीज (samara) होते हैं, जिनका बीज भाग 5 से 10 मिलीमीटर व्यास का और पंख 20 से 40 मिलीमीटर लंबा होता है।
इन पंखों की पहचान यह है कि वे एक-दूसरे से लगभग समकोण (right angle) पर जुड़े होते हैं, जबकि Acer platanoides और Acer campestre में पंख लगभग आमने-सामने होते हैं और Acer saccharum में लगभग समानांतर। इसके अतिरिक्त, यह प्रजाति चतुर्गुणित (tetraploid, 2n=52) है, जबकि A. campestre और A. platanoides द्विगुणित (diploid, 2n=26) हैं।
वितरण और आवास
Acer pseudoplatanus का प्राकृतिक क्षेत्र मध्य और पूर्वी यूरोप तथा पश्चिमी एशिया तक फैला है, जिसमें अल्बानिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, चेक गणराज्य, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, इटली, लिथुआनिया, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, दक्षिणी रूस, स्पेन, स्विट्जरलैंड और पूर्व यूगोस्लाविया के क्षेत्र शामिल हैं। अपने मूल निवास में यह वन और झाड़ीदार बाड़ों (hedgerows) में उगता है।
यह ब्रिटेन में संभवतः ट्यूडर काल में, 1500 ईस्वी तक, लाया गया और पहली बार जंगली रूप में 1632 में केंट में दर्ज किया गया। तब से इसकी अनुकूलन क्षमता इतनी अधिक रही है कि आज यह ब्रिटेन के 89.7% हेक्टाड्स (क्षेत्रीय इकाइयों) में मौजूद है, जो किसी भी देशी वृक्ष प्रजाति से अधिक है। यह स्वीडन में लगभग 1770 में हॉलैंड से लाए गए बीजों के साथ पहुँचा और आज नॉर्वे के ट्रोम्सो, आइसलैंड के रेक्याविक और फैरो द्वीपों के टोर्शेवन जैसे उत्तरी क्षेत्रों तक फैल चुका है।
लगभग 1870 में इसे संयुक्त राज्य अमेरिका में लाया गया और न्यूयॉर्क तथा न्यू जर्सी में लगाया गया; 21वीं सदी की शुरुआत तक यह चौदह अमेरिकी राज्यों और चार कनाडाई प्रांतों में प्राकृतिक रूप ले चुका था। यह ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, चिली और मदेइरा के लॉरेल वनों में भी पहुँचाया गया, जहाँ इसके प्रचुर बीज उत्पादन के कारण यह कई स्थानों पर देशी वनस्पति को पीछे धकेलते हुए आक्रामक (invasive) प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया है, विशेषकर न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में।
GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े जून और जुलाई में सबसे अधिक (लगभग 1,78,000 और 1,80,000 अवलोकन) और जनवरी-फरवरी में सबसे कम दर्ज होते हैं। यह पैटर्न वृद्धि-ऋतु में अधिक अवलोकन गतिविधि को दर्शाता है, न कि वृक्ष की वास्तविक बहुतायत या पूर्ण वितरण क्षेत्र को।

पारिस्थितिकी और संबंध
अपने मूल निवास में Acer pseudoplatanus बर्च (Betula), बीच (Fagus) और फर (Abies) वनों का एक स्वाभाविक घटक है, लेकिन यह वन रोपणों, परित्यक्त खेतों, रेलवे किनारों, सड़क किनारों और झाड़ीदार बाड़ों जैसे अशांत आवासों में भी तेज़ी से फैल जाता है। इसकी जड़ें मृदा कवक Glomus hoi के साथ विशिष्ट माइकोराइज़ल संबंध बनाती हैं, जो मिट्टी से फॉस्फोरस के अवशोषण को बढ़ाता है।
इसकी पत्तियाँ कई पतंगों के लार्वा के लिए भोजन का स्रोत हैं, जिनमें साइकामोर मॉथ (Acronicta aceris), मेपल प्रोमिनेंट (Ptilodon cucullina) और प्ल्यूम्ड प्रोमिनेंट (Ptilophora plumigera) शामिल हैं। पत्तियाँ एफिड्स को भी आकर्षित करती हैं, जो बदले में लेडीबर्ड और होवरफ्लाई जैसे शिकारी कीटों को खींचती हैं। फूल प्रचुर मात्रा में मकरंद और पराग उत्पन्न करते हैं जो मधुमक्खियों व अन्य कीटों को आकर्षित करते हैं, जबकि इसके बीज छोटे स्तनधारियों जैसे वोल तथा पक्षियों द्वारा खाए जाते हैं।
यह वृक्ष कई रोगों के प्रति संवेदनशील भी है, जैसे कवक Cryptostroma corticale से होने वाला 'सूटी बार्क रोग', जो शाखाओं को मुरझाकर मार सकता है, तथा Rhytisma acerinum से होने वाला 'टार स्पॉट' रोग, जिसमें पत्तियों पर पीली सीमा वाले काले धब्बे बनते हैं। गैल माइट्स जैसे Eriophyes macrorhynchus पत्तियों पर छोटे लाल गॉल बनाते हैं, और कभी-कभी गिलहरियाँ शाखाओं की छाल छीलकर उन्हें सुखा देती हैं।
उपयोग और मानव संबंध
इस वृक्ष की लकड़ी सफ़ेद या मलाईदार रंग की, बारीक दाने वाली और मज़बूत होती है, जो उम्र के साथ सुनहरी हो जाती है। इसे किसी भी दिशा में काटा और तराशा जा सकता है, इसलिए इसका उपयोग संगीत वाद्ययंत्रों, फर्नीचर, फर्श और रसोई के बर्तनों जैसे चम्मच, कटोरे और चॉपिंग बोर्ड बनाने में होता है क्योंकि यह भोजन पर रंग नहीं छोड़ती। लहरदार बनावट वाली लकड़ी को सजावटी विनियर के रूप में अधिक मूल्यवान माना जाता है और परंपरागत रूप से वायलिन तथा फ्लेमेंको गिटार के पिछले हिस्से, गर्दन व स्क्रॉल बनाने में उपयोग होती है।
इसे काटने पर तने या जड़ों से नई वृद्धि होती है, इसलिए इसे कॉपिसिंग (coppicing) द्वारा खंभों और छोटी लकड़ी के उत्पादन के लिए उगाया जाता है; कटाई के पहले वर्ष में ही नए अंकुर 1.3 मीटर तक बढ़ सकते हैं। इसके फूलों से मधुमक्खियाँ प्रचुर मकरंद और पराग एकत्र करती हैं, जिससे एक सुगंधित, हल्के रंग का शहद बनता है, और वसंत में इसका रस दोहन कर सिरप और पेय बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता रहा है। शहरी प्रदूषण, तटीय हवा और सर्दियों में सड़क पर डाले जाने वाले नमक के प्रति सहनशीलता के कारण इसे पार्कों, सड़कों और तटीय हवा-रोधक (windbreak) के रूप में व्यापक रूप से लगाया जाता है।
सांस्कृतिक रूप से इस वृक्ष को कई परंपराओं में उर्वरता, प्रेम और सुरक्षा से जोड़ा गया है; नॉर्स पौराणिक कथाओं में इसे प्रेम व उर्वरता की देवी फ्रेया से और प्राचीन ग्रीस में विवाह व मातृत्व की देवी हेरा से जोड़ा जाता था। स्कॉटलैंड में इसे कभी फांसी के लिए पसंद किया जाता था क्योंकि इसकी निचली शाखाएँ शायद ही कभी भार सहते हुए टूटती थीं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसके बीज या नए अंकुर खाने वाले घोड़ों में 'एटिपिकल मायोपैथी' नामक प्रायः घातक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
रोचक तथ्य
- नॉर्स पौराणिक कथाओं में इस वृक्ष को प्रेम, उर्वरता और युद्ध की देवी फ्रेया से जोड़ा जाता था।
- प्राचीन ग्रीस में इसे विवाह और मातृत्व की देवी हेरा का प्रतीक माना जाता था।
- ग्रीक पौराणिक कथाओं में मेपल वृक्षों को युद्ध के देवता एरीज़ और भय के देवता फोबोस से भी जोड़ा जाता था, संभवतः इनकी पत्तियों की नुकीली नोकों और रक्त-लाल रंगत के कारण।
- A. pseudoplatanus 'Brilliantissimum' नामक किस्म अपनी युवा पत्तियों के चमकीले सामन-गुलाबी रंग के लिए विशेष है और रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का 'अवार्ड ऑफ गार्डन मेरिट' पाने वाली एकमात्र साइकामोर किस्म है।
- 1850 से पहले चेल्सी की एक नर्सरी में बेची गई एक झुकी हुई (weeping) किस्म, A. pseudoplatanus var. pendulum, का अब कोई ज्ञात जीवित नमूना नहीं बचा है।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
संकटमुक्त
पारिस्थितिकी
आवास
- वन
वृद्धि का रूप
- वृक्ष



