Celastrus orbiculatus एक काष्ठीय लता है, जो सेलास्ट्रेसी कुल का सदस्य है। यह पौधा जंगल के किनारों, झाड़ियों और खुले स्थानों में फैलकर पेड़ों और देशी वनस्पति पर दबाव डालता है।
यह मूल रूप से पूर्वी एशिया का पौधा है। इसका प्राकृतिक क्षेत्र रूसी सुदूर पूर्व, चीन, कोरिया और जापान तक फैला है। अमेरिका के कई पूर्वी राज्यों में यह बाहर से आकर स्वयं फैल चुका है।
यह पौधा इसलिए अध्ययन के योग्य है क्योंकि इसकी सफलता इसकी तेज़ वृद्धि, ऊँचाई पाने की क्षमता और मिट्टी के सूक्ष्मजीवों से बने संबंधों में छिपी है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान इसकी पतली, लचीली बेलें हैं, जिनकी छाल चाँदी जैसी से लेकर लालिमा लिए भूरी होती है। पत्तियाँ गोल और चमकीली होती हैं, जिनकी लंबाई 2 से 12 सेंटीमीटर तक होती है। इनके किनारे दाँतेदार होते हैं और ये बेलों पर एकांतर क्रम में लगती हैं।
बेलों का व्यास आम तौर पर 1 से 4 सेंटीमीटर होता है। अगर वृद्धि में बाधा न आए, तो बेलें 10 सेंटीमीटर से अधिक मोटी हो सकती हैं। कटी हुई बेल में वार्षिक वलय दिखते हैं, जिनकी संख्या 20 से अधिक हो सकती है।
छोटे हरे फूल कक्षीय गुच्छों में लगते हैं। फल एक तीन-कपाटीय सम्पुट होता है, जो खुलकर चमकदार लाल बीजचोल दिखाता है। ध्यान रहे कि इस पौधे के सभी भाग विषैले माने गए हैं।
वितरण और आवास
इसका प्राकृतिक क्षेत्र समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय पूर्वी एशिया है, जिसमें चीन, जापान, कोरिया, मंचूरिया और रूसी सुदूर पूर्व शामिल हैं। अमेरिका में यह पूर्वी राज्यों में पाया जाता है, जहाँ यह लुइज़ियाना से लेकर मेन तक और रॉकी पर्वतों तक फैला है।
अमेरिका में यह मिश्रित चौड़ी पत्ती वाले जंगलों और उनके किनारों में सबसे अधिक मिलता है। यह देवदार वाले जंगलों, झाड़ीदार क्षेत्रों, पुराने खेतों और तटीय दलदलों के किनारों पर भी दिखता है। सड़कों के किनारे और शहरी क्षेत्रों में भी यह आम है, जहाँ से यह आसपास के जंगलों में फैल सकता है।
मिट्टी की दृष्टि से यह नम और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी पसंद करता है। मिट्टी का पीएच आम तौर पर 5.6 से 6.5 के बीच रहता है, पर यह कुछ अधिक अम्लीय मिट्टी में भी उगता है। यह पूरी तरह संतृप्त या अत्यधिक सूखी मिट्टी में अच्छी तरह नहीं पनपता।
अमेरिका में इसकी ऊँचाई समुद्र तल से 1,400 मीटर तक दर्ज है। कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में यह ढलानों के नम हिस्सों में अधिक मिलता है, जबकि सूखी दक्षिणी ढलानों पर कम दिखता है।

वृद्धि और स्वरूप
यह एक बहुवर्षीय लता है, जो तेज़ी से बढ़ती है। इसका स्वरूप बेल जैसा होता है, और यह अकेले उगने पर घनी झाड़ियाँ बना लेती है।
किसी पेड़ के पास उगने पर इसकी बेलें तने के चारों ओर लिपटकर लगभग 12 मीटर की ऊँचाई तक चढ़ जाती हैं। परिपक्व अवस्था में इसकी लंबाई लगभग 9.1 मीटर तक पहुँच सकती है।
बेलों की मोटाई समय के साथ बढ़ती है। खुले और बिना बाधा वाले स्थानों में बेलें 10 सेंटीमीटर से अधिक मोटी हो सकती हैं और उनकी वार्षिक वलय गणना से उम्र का अनुमान लगता है।
पारिस्थितिकी और संबंध
इस लता की सफलता का एक बड़ा कारण इसका कवक-मूल सहजीवी संबंध है। यह कुछ विशेष कवकों के साथ जड़ों में साझेदारी बनाती है, जिससे फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों को सोखने में मदद मिलती है। प्रयोगों में पाया गया कि कम फॉस्फोरस वाली मिट्टी में इन कवकों की उपस्थिति से इसकी वृद्धि अधिक होती है। इससे यह जड़ों की बजाय तने और पत्तियों में अधिक ऊर्जा लगा पाती है।
यह बेल अपने आसपास के पौधों पर भी असर डालती है। यह ऊँचाई तेज़ी से बढ़ाकर छाया बना देती है, जिससे नीचे की देशी वनस्पति को प्रकाश कम मिलता है। इसकी बेलें पेड़ों की शाखाओं को भारी बनाकर उन्हें बर्फ़ के नुकसान के प्रति कमज़ोर कर सकती हैं। कुछ अध्ययनों में यह भी देखा गया कि यह पड़ोसी पौधों से पोषक तत्व खींच सकती है।
एक आक्रामक कीट भी इसे अपना पोषक पौधा बनाता है। पतंगों की एक प्रजाति Yponomeuta sociatus इसे मुख्य रूप से परजीवी के रूप में प्रभावित करती है। अन्य जाति का माहू कभी-कभार ही इस पर दिखता है।
खेती और देखभाल
यह पौधा हल्की से मध्यम छाया में उगता है, पर अधिक छाया इसे सहन नहीं होती। इसे खुली धूप वाले स्थान पर लगाना बेहतर है। इसकी वृद्धि बहुत तेज़ होती है, इसलिए इसे लगाते समय जगह का ध्यान रखें।
मिट्टी का पीएच 5 से 7.5 के बीच ठीक रहता है। यह मध्यम सूखा सहन करता है, पर संतृप्त मिट्टी में अच्छी तरह नहीं पनपता। यह -38.9 डिग्री सेल्सियस तक का न्यूनतम तापमान सहन कर सकता है।
अगर इसकी बेलों को किसी ढाँचे पर चढ़ने दिया जाए, तो यह सुंदर आवरण बनाती है। इसे पड़ोसी पेड़ों से दूर रखना ज़रूरी है, क्योंकि ये बेलें उन्हें दबा सकती हैं।
उपयोग और मानव संबंध
इसे सजावटी पौधे के रूप में उगाया जाता है। ब्रिटेन में इसे बागवानी का एक प्रमुख पुरस्कार मिला है।
इसकी बेलें टिकाऊ और मज़बूत होती हैं, इसलिए इनसे टोकरियाँ बुनने की सामग्री मिलती है। इसकी रेशेदार भीतरी छाल से मज़बूत रस्सी बनाई जाती है।
पशुओं द्वारा इसकी पत्तियाँ चरने के बावजूद उन पर कोई असर न होने की बात दर्ज है। फिर भी इसके फलों के विषैले होने के कारण सावधानी ज़रूरी है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- बेल
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Magnoliopsida
- गण
- Celastrales
- कुल
- Celastraceae
- वंश
- Celastrus
- प्रजाति
- Celastrus orbiculatus
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- Plants of the World Online Native range, life form and climate (WCVP)
- USDA Plants US plants: growth habit and growing conditions
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- Wardeh et al. 2015 (EID2)



