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Gentiana lutea

Gentiana lutea

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

पहाड़ी घास के मैदान में उगा एक ऊँचा जेंटियाना पौधा, जिसके तने पर बड़े अंडाकार पत्तों के जोड़े और शीर्ष पर पीले तारे-नुमा फूलों के गुच्छे दिखाई देते हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

एक नज़र में

इसके लिए जाना जाता है
पर्वतघास का मैदानशाकीय पौधा
वर्गीकरण
संघ
Tracheophyta
वर्ग
Magnoliopsida
गण
Gentianales
कुल
Gentianaceae
वंश
Gentiana
प्रजाति
Gentiana lutea

Gentiana lutea अपने वंश Gentiana की आदर्श प्रजाति (टाइप स्पीशीज़) है, यानी संपूर्ण जेंटियाना वंश का वर्णन इसी पौधे के आधार पर किया गया था। यह मध्य और दक्षिणी यूरोप के पहाड़ों की मूल निवासी है, जिसमें आल्प्स, कार्पेथियन, पिरेनीज़, अपेनाइन तथा बाल्कन प्रायद्वीप के पहाड़ शामिल हैं।

यह Gentianaceae कुल और Gentianales गण से संबंधित एक संवहनी (वैस्कुलर) फूलदार पौधा है, जो Magnoliopsida वर्ग और Tracheophyta संघ का हिस्सा है। ऊँचे पहाड़ी ढलानों पर उगने वाला यह बहुवर्षीय पौधा अपनी सीधी, मज़बूत बढ़वार के लिए पहचाना जाता है।

यह प्रजाति सदियों से यूरोपीय लोक-परंपराओं और औषधीय प्रयोगों में महत्वपूर्ण रही है, जिसके कारण इसे जानना केवल वानस्पतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी रुचिकर बनता है।

पहचान और रूप

इस पौधे की सबसे स्पष्ट पहचान इसके सीधे, ऊँचे तने पर लगे बड़े-बड़े विपरीत जोड़ी वाले पत्तों और तने के ऊपरी भाग पर गुच्छों में लगे पीले फूलों से होती है। यह एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा है जो 1 से 2 मीटर (3.3–6.6 फुट) तक ऊँचा हो सकता है।

इसके पत्ते चौड़े भाला-नुमा से अंडाकार आकार के, चिकने (रोमविहीन) होते हैं और 10–30 सेंटीमीटर लंबे तथा 4–15 सेंटीमीटर चौड़े होते हैं, जो तने पर जोड़ों में सामने-सामने लगते हैं।

फूल पीले रंग के, 18–24 मिलीमीटर लंबे होते हैं, जिनकी कोरोला (पंखुड़ी-नलिका) लगभग आधार तक विभाजित होकर 5 से 7 पतली पंखुड़ियों में बंटी होती है। ये फूल तने के ऊपरी भाग पर 3 से 10 फूलों के गुच्छों (व्होर्ल) में एक साथ खिलते हैं, और इनका फूलना जून से अगस्त के बीच होता है।

यह पौधा मुख्यतः चूने-प्रधान (कैल्केरियस) मिट्टी वाले घास के मैदानों में पाया जाता है, जो इसकी पहचान में अन्य समान दिखने वाली प्रजातियों से अंतर करने में सहायक हो सकता है।

वितरण और आवास

Gentiana lutea मध्य और दक्षिणी यूरोप के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों की प्रजाति है, जो आल्प्स, कार्पेथियन पर्वत (जहाँ यह दुर्लभ है), पिरेनीज़, अपेनाइन तथा बाल्कन प्रायद्वीप के पहाड़ों में फैली हुई है।

यह प्रजाति आमतौर पर घासयुक्त अल्पाइन और उप-अल्पाइन चरागाहों में उगती है, विशेष रूप से चूने-प्रधान (कैल्केरियस) मिट्टी में, और यह समुद्र तल से 2500 मीटर तक की ऊँचाई पर पाई जा सकती है।

GBIF से मिले मासिक उपस्थिति आँकड़ों में जुलाई महीने में सबसे अधिक (लगभग 39,555) दर्ज घटनाएँ मिलती हैं, जबकि जून और अगस्त में भी संख्या ऊँची रहती है और सर्दियों के महीनों में यह घटकर बहुत कम हो जाती है। यह पैटर्न संभवतः गर्मियों में पौधे के फूलने और सुगमता से दिखाई देने की अवधि से जुड़ा हो सकता है, लेकिन यह आँकड़ा केवल उपस्थिति दर्शाता है, न कि जनसंख्या या पूर्ण भौगोलिक विस्तार का माप है।

Gentiana lutea के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
39,555
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

उपयोग और मानव संबंध

इस पौधे की जड़ अपनी असाधारण कड़वाहट के लिए प्रसिद्ध है, जो इसके पूरे शरीर में पाई जाती है। जड़ में मौजूद सेकोइरिडॉइड ग्लाइकोसाइड्स — अमारोजेंटिन और जेंशियोपिक्रिन — इसके लिए जिम्मेदार हैं, और अमारोजेंटिन को प्राकृतिक रूप से मिलने वाले सबसे कड़वे यौगिकों में गिना जाता है, जिसका उपयोग वैज्ञानिक रूप से कड़वाहट मापने के आधार के रूप में भी होता है।

जेंटियन जड़ का उपयोग लंबे समय से हर्बल बिटर्स (कड़वी औषधियों) के रूप में और कई पारंपरिक औषधीय उत्पादों में किया जाता रहा है। इसकी जड़ें लगभग 30 सेंटीमीटर लंबी और 2.5 सेंटीमीटर व्यास की होती हैं, हालाँकि कुछ जड़ें 90 सेंटीमीटर तक लंबी और 5 सेंटीमीटर मोटी भी हो सकती हैं; इनका रंग पीला-भूरा होता है। इन्हें शरद ऋतु में खोदकर सुखाया जाता है। इसका उपयोग शराब बनाने में भी किया गया है, और फ्रांस में इससे कई कड़वी लिकर, जैसे कांताल क्षेत्र की Salers और लिमोज़िन क्षेत्र की Avèze, बनाई जाती हैं। संरक्षित दर्जे के कारण अब इसे जंगल से इकट्ठा करने के बजाय ऑवेर्न्य क्षेत्र में विशेष रूप से उगाया जाता है। 1860 के दशक की पशु-चिकित्सा फार्माकोपिया में भी इसे पाचन-वर्धक (स्टोमैकिक) के रूप में उपयोगी माना गया था।

मध्य युग में इसका उपयोग विभिन्न मंत्र-तंत्र और अनुष्ठानों में किया जाता था, अक्सर महँगे मैंड्रेक की जगह पर, और इसे शक्ति व दृढ़ता का प्रतीक माना जाता था। पौधे का नाम इलिरियन राजा गेंशियस के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें इस जड़ी के टॉनिक गुणों की खोज का श्रेय दिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में यह प्रजाति संकट में है, इसलिए इसके उपयोग में सावधानी बरतने और Centaurium erythraea जैसी संबंधित प्रजातियों को विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह दी जाती है।

रोचक तथ्य

  1. Gentiana lutea अपने पूरे वंश Gentiana की आदर्श (टाइप) प्रजाति है, यानी वंश का वर्णन मूल रूप से इसी पौधे के आधार पर हुआ था।
  2. इसकी जड़ में मिलने वाला यौगिक अमारोजेंटिन प्रकृति में पाए जाने वाले सबसे कड़वे पदार्थों में से एक है, इतना कि इसे कड़वाहट मापने के वैज्ञानिक मानक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  3. मध्य युग में इसे अक्सर महँगे मैंड्रेक पौधे के स्थान पर मंत्र-तंत्र और अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता था।
  4. पौधे का नाम इलिरियन राजा गेंशियस से जुड़ा है, जिन्हें माना जाता है कि उन्होंने इस जड़ी के टॉनिक गुणों की खोज की थी।
  5. यह पौधा 2008 में जारी अल्बानियाई 2000 लेक के नोट पर छपा है, जिसके दूसरी ओर राजा गेंशियस की तस्वीर भी है।
  6. कार्पेथियन पर्वतों में यह प्रजाति काफी दुर्लभ मानी जाती है, जबकि आल्प्स और पिरेनीज़ जैसे क्षेत्रों में यह अधिक सामान्य रूप से पाई जाती है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • पर्वत
  • घास का मैदान

वृद्धि का रूप

  • शाकीय पौधा

फ़ोटो

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पहाड़ी घास के मैदान में उगा एक ऊँचा जेंटियाना पौधा, जिसके तने पर बड़े अंडाकार पत्तों के जोड़े और शीर्ष पर पीले तारे-नुमा फूलों के गुच्छे दिखाई देते हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipedia