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Gyromitra esculenta

Gyromitra esculenta

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

गहरे भूरे रंग की मस्तिष्क-जैसी अनियमित, झुर्रीदार टोपी और मोटे सफेद वृंत वाला कवक फलनकाय, जो शंकुधारी वन की रेतीली मिट्टी पर खड़ा है।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

एक नज़र में

इसके लिए जाना जाता है
वनवनभूमिपर्वतअशांत भूमि
वर्गीकरण
संघ
Ascomycota
वर्ग
Pezizomycetes
गण
Pezizales
कुल
Discinaceae
वंश
Gyromitra
प्रजाति
Gyromitra esculenta

स्कैंडिनेविया में Gyromitra esculenta को कभी "खाद्य शैल मोरेल" कहा जाता था, लेकिन यह नाम भ्रामक है, क्योंकि इस कवक में जायरोमिट्रिन नामक विष होता है जो जानलेवा साबित हो सकता है।

यह Ascomycota संघ का एक कवक है, जो Discinaceae परिवार और Pezizales क्रम में आता है। इसका फलनकाय एक अनियमित, मस्तिष्क-आकार की गहरे भूरे रंग की टोपी है, जो 10 सेंटीमीटर तक ऊँची और 15 सेंटीमीटर तक चौड़ी हो सकती है और एक मोटे सफेद वृंत पर टिकी होती है जो 6 सेंटीमीटर तक ऊँचा होता है। यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका में व्यापक रूप से पाया जाता है और सामान्यतः वसंत तथा गर्मियों की शुरुआत में शंकुधारी वृक्षों के नीचे रेतीली मिट्टी में उगता है।

खाद्य परंपरा और घातक विष के बीच का यह द्वंद्व इसे किसी भी वनस्पति-प्रेमी के लिए एक चेतावनी भरा और जानने योग्य विषय बनाता है।

फलन काय और पहचान

इस कवक की पहचान का सबसे स्पष्ट लक्षण इसकी अनियमित, मस्तिष्क-जैसी टोपी है, जो आरंभ में चिकनी होती है परंतु उम्र बढ़ने के साथ अधिक झुर्रीदार हो जाती है। टोपी भूरे रंग की होती है, जिसमें कभी-कभी लालिमायुक्त, चेस्टनट, बैंगनी या सुनहरे रंगों की झलक दिखती है, और परिपक्व होने पर यह काली पड़ जाती है। कैलिफ़ोर्निया के नमूनों में टोपी अधिक लाल-भूरी पाई गई है, और आकार में यह 12 सेंटीमीटर या उससे अधिक ऊँची तथा चौड़ी हो सकती है।

वृंत टोपी से कई बिंदुओं पर जुड़ा रहता है और 3 से 6 सेंटीमीटर ऊँचा तथा 1 से 5 सेंटीमीटर चौड़ा होता है। पुराने विवरणों में इसे ठोस बताया गया है, जबकि सही मोरेल (Morchella प्रजातियाँ) का वृंत खोखला होता है; हालाँकि एक आधुनिक स्रोत के अनुसार इस कवक का वृंत भी खोखला हो सकता है, जो इस विशेषता को अनिश्चित बनाता है।

गंध सुहावनी और फलों जैसी बताई गई है, जबकि स्वाद हल्का होता है। बीजाणु मुद्रण सफेद रंग का होता है, और पारदर्शी बीजाणु अंडाकार आकार के, 17 से 22 माइक्रोमीटर लंबे होते हैं।

वितरण और आवास

यह कवक शीतोष्ण शंकुधारी वनों की रेतीली मिट्टी में उगता है, और कभी-कभी पर्णपाती वनों में भी पाया जाता है। शंकुधारी वृक्षों में यह अधिकतर चीड़ (Pinus प्रजातियों) के नीचे मिलता है, कभी-कभी एस्पन (Populus प्रजातियों) के नीचे भी। इसकी वृद्धि का मुख्य समय अप्रैल से जुलाई तक रहता है, जो अन्य कवकों की तुलना में जल्दी है, और यह कभी-कभी पिघलती बर्फ के साथ ही उग आता है। किसी वर्ष यह प्रचुर मात्रा में मिल सकता है, तो किसी अन्य वर्ष दुर्लभ रहता है।

यह उन स्थानों पर अधिक पाया जाता है जहाँ भूमि को छेड़ा गया हो, जैसे खुले मैदान, नाले, धारा-किनारे, लकड़ी-कटान क्षेत्र, हल चलाई गई भूमि, वन-अग्नि से प्रभावित क्षेत्र और सड़क किनारे। फ़िनलैंड में शौकीन लोग इस कवक से संक्रमित समाचार-पत्र को शरद ऋतु में मिट्टी में दबाकर अगले वसंत में मशरूम इकट्ठा करने की परंपरा भी अपनाते रहे हैं।

भौगोलिक दृष्टि से यह कवक उत्तरी अमेरिका के पर्वतीय और उत्तरी शंकुधारी वनों, जैसे सिएरा नेवाडा और कैस्केड पर्वतश्रेणी में अधिक प्रचुर है, परंतु महाद्वीप में मेक्सिको तक दक्षिण में भी पाया जाता है। मध्य यूरोप में यह सामान्य है, पूर्वी यूरोप में कम, और पर्वतीय क्षेत्रों में समतल भूमि की तुलना में अधिक मिलता है। इसे उत्तरी आयरलैंड, पश्चिमी तुर्की के उशाक प्रांत और तुर्की के दक्षिणी तट पर अंताल्या प्रांत के काश़ के निकट भी दर्ज किया गया है।

GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़ों में अप्रैल और मई के महीनों में स्पष्ट वृद्धि दिखती है, जो इसके वसंतकालीन फलन से मेल खाती है; हालाँकि ये आँकड़े केवल उपस्थिति के अभिलेख हैं, न कि प्रचुरता या पूर्ण वितरण-क्षेत्र का प्रमाण।

Gyromitra esculenta के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
6,900
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास

फ़िनलैंड में युद्धोत्तर काल की पारंपरिक रसोई में इसे कुछ समुदायों में वसंत का स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता था। परंतु सौ से अधिक वर्षों से इसके विषैले प्रभाव ज्ञात रहे हैं; प्रारंभ में विशेषज्ञों ने इसे कवक की स्वाभाविक विषाक्तता के बजाय किसी व्यक्ति-विशेष की एलर्जी या गलत पहचान का परिणाम माना था, क्योंकि एक ही व्यंजन से कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता था और कोई पूरी तरह अप्रभावित रहता था।

आज इसे संभावित रूप से घातक कवक के रूप में व्यापक मान्यता मिली है। इसमें मौजूद जायरोमिट्रिन विष की मात्रा भौगोलिक रूप से भिन्न होती है; उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में विषाक्तता की घटनाएँ दुर्लभ हैं, जबकि पूर्वी यूरोप और स्कैंडिनेविया में ये अधिक बार सामने आती हैं। 1971 के एक पोलिश अध्ययन के अनुसार यह प्रजाति उस समय वर्ष भर होने वाली कवक-जनित मौतों में से लगभग 23 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार पाई गई थी। बीसवीं सदी के मध्य से मृत्यु-दर घटी है; स्वीडन में विषाक्तता की घटनाएँ सामान्य हैं, परंतु 1952 से 2002 के 50 वर्षों में कोई जानलेवा मामला दर्ज नहीं हुआ। स्पेन में इसे उपयोग से पहले सुखाने की व्यापक प्रथा के कारण विषाक्तता दुर्लभ है, फिर भी जब विषाक्तता होती है तो मृत्यु-दर लगभग 25 प्रतिशत तक पहुँचती है।

शोधकर्ताओं ने जायरोमिट्रिन की बहुत कम मात्रा वाली किस्में खोजी हैं और इस कवक को संवर्धन में सफलतापूर्वक फलनकाय तक उगाया गया है, जिससे भविष्य में सुरक्षित किस्मों पर शोध की संभावना बनती है। आधुनिक खाद्य सुरक्षा जागरूकता और मायकोलॉजिकल शोध ने इस कवक को मुख्यधारा की खाद्य संस्कृति से लगभग बाहर कर दिया है।

रोचक तथ्य

  1. स्कैंडिनेविया में इसे "खाद्य शैल मोरेल" कहा जाता है, फिर भी इसकी घातक विषाक्तता के कारण इसे फ़्यूगू मछली जैसे खतरनाक भोजन से जोड़ा जाता है।
  2. वैज्ञानिकों ने जायरोमिट्रिन की बहुत कम मात्रा वाली किस्में खोजी हैं और इस कवक को नियंत्रित संवर्धन में सफलतापूर्वक फल देने तक उगाया है।
  3. फ़िनलैंड के युद्धोत्तर पारंपरिक भोजन में इसे वसंत का व्यंजन माना जाता था, परंतु आधुनिक खाद्य सुरक्षा जागरूकता ने इसे धीरे-धीरे मुख्यधारा की रसोई से बाहर कर दिया।

पारिस्थितिकी

आवास

  • वन
  • वनभूमि
  • पर्वत
  • अशांत भूमि

फ़ोटो

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गहरे भूरे रंग की मस्तिष्क-जैसी अनियमित, झुर्रीदार टोपी और मोटे सफेद वृंत वाला कवक फलनकाय, जो शंकुधारी वन की रेतीली मिट्टी पर खड़ा है।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipedia