वसंत की शामों में पेड़ों और घरों की बत्तियों के आस-पास भिनभिनाते हुए सुनाई देने वाला यह भृंग, Melolontha melolontha या सामान्य कॉकचेफ़र है, जो स्कारेबाइडी परिवार का एक सदस्य है। यह यूरोप का मूल निवासी है और अपने निकट संबंधी Melolontha hippocastani के साथ कई समानताएं रखता है, हालांकि आनुवंशिक रूप से यह ऐतिहासिक रूप से भिन्न प्रजाति मानी जाती है।
यह भृंग अपने लंबे भूमिगत जीवन चक्र और कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण ध्यान देने योग्य है, जहाँ इसके लार्वा वर्षों तक मिट्टी में छिपे रहकर फसलों की जड़ें खाते हैं।
पहचान और रूप
सबसे पहचानने योग्य विशेषता इसका गहरा काला पैबंटम है, जो इसे भूरे पैबंटम वाले M. hippocastani से अलग करता है। वयस्क भृंग 25 से 30 मिलीमीटर लंबे होते हैं, जिनका सिर गहरे रंग का और एंटीना खंडित होता है। शरीर के ऊपरी भाग पर लाल-भूरे रंग के एलिट्रा और काला पेट होता है, जिसके किनारे आंशिक रूप से सफेद होते हैं।
नर और मादा के बीच अंतर एंटीना की संरचना में स्पष्ट दिखता है: नर के एंटीना पर सात पत्ती जैसे चपटे विस्तार होते हैं, जबकि मादा में केवल छह होते हैं।
लार्वा का विकास तीन चरणों में तीन से चार वर्षों में होता है। पहले चरण (L1) में यह 10 से 20 मिलीमीटर लंबा होता है, दूसरे वर्ष (L2) में 30 से 35 मिलीमीटर तक बढ़ता है, और अंतिम चरण (L3) में 40 से 46 मिलीमीटर तक पहुंचता है। पूर्वी यूरोप के कुछ क्षेत्रों में एक चौथा चरण (L4) भी देखा गया है। लार्वा का शरीर सफेद होता है, पेट के अंत में काला रंग होता है जो C के आकार में मुड़ा होता है, तथा इसका सिर भूरा और मजबूत जबड़ों वाला होता है।
वितरण और आवास
कॉकचेफ़र यूरोप में व्यापक रूप से फैला हुआ है, विशेष रूप से उन शीतोष्ण क्षेत्रों में जहां लार्वा के विकास के लिए उपयुक्त मिट्टी की स्थिति उपलब्ध है। यह तुर्की और काकेशस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी देखा गया है।
यह भृंग नरम, छायादार मिट्टी वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करता है और अक्सर कृषि भूमि पर पाया जाता है। भौगोलिक बाधाएं और जलवायु परिस्थितियां इसके फैलाव को सीमित करती हैं; उदाहरण के लिए, यह टाइरॉल के पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं पाया जाता क्योंकि यह आल्प्स की ऊंचाई और सर्दियों के कम तापमान में जीवित नहीं रह सकता।
यह भृंग अपने उभरने के स्थान से 2 से 3 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं उड़ता और उस खेत या घास के मैदान के नजदीक ही रहता है जहां यह जन्मा होता है।

व्यवहार और जीवनशैली
रात और शाम के समय यह भृंग सक्रिय रहता है, पेड़ों के आस-पास भिनभिनाता और चीं-चीं करता हुआ उड़ता है, तथा अक्सर घरों की बत्तियों के पास भी देखा जाता है। कुछ भृंग किसी एक पेड़ पर ही टिक जाते हैं जबकि अन्य भोजन की खोज में पूरे जंगल में घूमते हैं।
संभोग साथी खोजने में पौधों से निकलने वाले हरी पत्ती के वाष्पशील यौगिक (GLV) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो मादा द्वारा छोड़े गए यौन फेरोमोन टोलुक्विनोन के प्रभाव को बढ़ाते हैं। केवल नर भृंग इन GLV यौगिकों की ओर आकर्षित होते हैं और इनका उपयोग उन पत्तियों की पहचान के लिए करते हैं जिन पर मादा भोजन कर रही होती है। झुंड बनाने के व्यवहार के दौरान नर पत्तियों के आस-पास मंडराते हैं जबकि मादा टहनियों और शाखाओं पर भोजन करती रहती है।
लार्वा अंडे से निकलने के 4 से 6 सप्ताह बाद जड़ों को कुतरना शुरू करते हैं और तीन से चार वर्षों में वयस्क बनते हैं, सर्दियों में गहराई में बुर्ज बनाकर शीतनिद्रा में चले जाते हैं। प्रति वर्ग मीटर 1,000 से अधिक लार्वा की घनत्व पर मिट्टी को स्पष्ट नुकसान पहुंचता है, और दूसरे विकास चरण में लार्वा स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इनके आंत में मौजूद एंजाइम और सूक्ष्मजीव इन्हें विभिन्न प्रकार के भोजन, जैसे कम ऊर्जा वाले पदार्थ, सड़ते कार्बनिक तत्व और ताज़ी बढ़ती जड़ों का उपयोग करने में सक्षम बनाते हैं।
आहार और पोषण
वयस्क भृंग अप्रैल और मई में एकल रूप से भोजन की खोज में उड़ते हैं और पतझड़ी तथा फलदार पेड़ों की पत्तियां खाते हैं, विशेष रूप से ओक, मेपल, शाहबलूत, बीच, बेर और अखरोट के पेड़ों की। बड़ी संख्या में होने पर ही वयस्क भृंग हानिकारक माने जाते हैं, परंतु लार्वा फसलों को कहीं अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
लार्वा खेत के पौधों की छोटी जड़ों को कुतरते हैं और बिना भेदभाव के भोजन करते हैं, जिसमें अनाज, घास, पेड़ और चुकंदर की जड़ें शामिल हैं। वे एक दिन में 30 सेंटीमीटर तक घूमते हुए फसल की जड़ों के बड़े हिस्सों को खा जाते हैं। कॉकचेफ़र लार्वा मुख्य रूप से नई, ताज़ी मिट्टी की जड़ों को खाते हैं और सामान्यतः सड़ते कार्बनिक पदार्थ नहीं खाते।
प्रजनन और जीवन चक्र
प्रजनन चक्र हार्मोन और पर्यावरण के संयोजन से प्रेरित होता है; दिन का समय और मौसम मादाओं में अंतःस्रावी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करते हैं, जिससे मादा शक्तिशाली फेरोमोन छोड़ती है जिन्हें नर अपने बड़े एंटीना से पहचानते हैं। संभोग मुख्यतः मई के अंत और जून के आरंभ में होता है और कई घंटों तक चलता है।
अप्रैल या मई में तापमान अनुकूल होने पर नर मिट्टी से बाहर निकलते हैं। शाम को नर जंगल के किनारों पर पेड़ों के समूहों के आस-पास झुंड बनाते हैं, जबकि मादा अपनी यौन परिपक्वता तक पत्तियां खाते हुए एक ही स्थान पर रहती हैं। नर लगभग 10 से 20 दिनों तक साथी की खोज करते हैं।
संभोग के बाद परिपक्व मादा खेतों में लौटकर मिट्टी में 15 से 25 सेंटीमीटर गहराई में 10 से 38 अंडों के समूह में अंडे देती हैं और 2 से 4 दिनों तक अंडों की रक्षा के लिए मिट्टी पर रहती हैं। इस यात्रा में केवल एक तिहाई मादाएं ही जीवित बचती हैं, परंतु बचने वाली दूसरी और कभी-कभी तीसरी बार भी झुंड बनाकर अंडे देने लौटती हैं। अंडों के परिपक्व होने में तापमान के अनुसार भिन्नता आती है—27 डिग्री सेल्सियस पर 5 से 8 दिन और 32 डिग्री सेल्सियस पर 23 से 32 दिन लगते हैं।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
वन क्षेत्रों में कॉकचेफ़र की उपस्थिति और व्यवहार मिट्टी के तापमान, नमी और वनस्पति के प्रकार से गहराई से प्रभावित होते हैं। गर्म तापमान और अधिक नमी इनकी उपस्थिति को बढ़ाती है, परंतु यही स्थितियां लार्वा के लिए हानिकारक भी हो सकती हैं क्योंकि इससे सूखने का खतरा बढ़ जाता है। पतझड़ी पेड़ों और झाड़ियों वाले वन क्षेत्र इनके जीवित रहने और प्रजनन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करते हैं।
यूरोपीय छछूंदर कॉकचेफ़र का एक प्रमुख प्राकृतिक शिकारी है, जो अपनी तीव्र सूंघने की क्षमता और खुदाई कौशल से लार्वा का पता लगाता है और उनकी आबादी को नियंत्रित करने में सहायक होता है। वयस्क भृंगों का शिकार ग्राउंड बीटल और चींटियां करती हैं, जबकि भूमिगत लार्वा का शिकार क्लिक बीटल करते हैं। खेत की जुताई के बाद स्टार्लिंग, कौवे और गल पक्षी भी लार्वा खाते हैं।
Dexia rustica नामक परजीवी मक्खी मिट्टी में हाइबरनेट कर रहे लार्वा को अपना पोषक बनाती है; मिट्टी में लगभग 30 से 35 सेंटीमीटर गहराई पर 10 प्रतिशत से अधिक लार्वा एक से छह मक्खी के अंडों से परजीवित हो सकते हैं, जो वसंत में लार्वा की मृत्यु का कारण बनते हैं।
संरक्षण और खतरे
इस प्रजाति को किसी विशेष संरक्षण स्थिति की आवश्यकता नहीं है। IUCN रेड लिस्ट, अमेरिकी संघीय सूची और CITES में इसे कोई विशेष दर्जा नहीं दिया गया है, जो दर्शाता है कि इसकी आबादी पर वर्तमान में कोई गंभीर खतरा दर्ज नहीं है।
सांस्कृतिक महत्व
इस भृंग से मनुष्यों को कोई सकारात्मक लाभ नहीं मिला है, परंतु यह सदियों से बच्चों के खेल का हिस्सा रहा है। प्राचीन यूनान में लड़के इसके पैरों में धागा बांधकर इसे उड़ाते हुए आनंद लेते थे, और विक्टोरियन काल के अंग्रेज़ लड़के इसके पंख में पिन चुभाकर खेलते थे। निकोला टेस्ला ने याद किया था कि बचपन में उन्होंने चार कॉकचेफ़र भृंगों को जोड़कर एक "इंजन" बनाया था।
यह भृंग हांस क्रिश्चियन एंडरसन की "थम्बेलिना" और मादाम द'ऑल्नॉय की "प्रिंसेस रोज़ेट" जैसी परीकथाओं में दिखाई देता है, और जर्मन बाल गीत "माइकेफ़र फ्लीग!" में भी इसका उल्लेख मिलता है, जिसकी उत्पत्ति तीस वर्षीय युद्ध के समय से जुड़ी है। 1750 से 1780 के दशक में महिलाओं के परिधानों पर इसके पंखे जैसे एंटीना से प्रेरित सजावटी किनारी को "सूरसिल्स डी हैनेटन" कहा जाता था, और यूरोप में कॉकचेफ़र सूप नाम का एक पकवान भी बनाया जाता रहा है।
रोचक तथ्य
- थॉमस हार्डी की 1899 की कविता एन अगस्त मिडनाइट में उल्लिखित "डम्बलडोर" को कुछ लोग इस भृंग का ही एक नाम मानते हैं।
- रॉयल नेवी के चार जहाज़ों का नाम HMS Cockchafer रखा गया था।
- 1762 में एटिएन लुई जॉफ्रॉय ने Melolontha नाम का उपयोग किया था, परंतु उनकी पुस्तक को आगे खारिज कर दिया गया, और इस नाम की मान्यता अंततः जोहान क्रिश्चियन फैब्रिसियस के 1775 के प्रकाशन से मिली।
फ़ोटो
तस्वीरें via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., by Maciej Boenisch via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Tilgate Zoo via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Barry Stewart via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Natasha March via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Frank Ashwood via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Will Taylor via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., और by agreiner99 via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0. से हैं; हर तस्वीर पर श्रेय दिया गया है।
पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Arthropoda
- वर्ग
- Insecta
- गण
- Coleoptera
- कुल
- Scarabaeidae
- वंश
- Melolontha
- प्रजाति
- Melolontha melolontha
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet



