Paeonia lactiflora एक बहुवर्षीय शाकीय फूलदार पौधा है, जो पीओनिएसी कुल से संबंधित है और मध्य तथा पूर्वी एशिया का मूल निवासी है। इसका प्राकृतिक विस्तार पूर्वी तिब्बत से लेकर उत्तरी चीन और पूर्वी साइबेरिया तक फैला हुआ है।
यह पौधा अपने बड़े, कटोरीनुमा फूलों और औषधीय इतिहास के कारण सदियों से मानव संस्कृति में विशेष स्थान रखता है, जो इसे केवल एक सजावटी पौधे से कहीं अधिक बनाता है।
पहचान और रूप
चीनी चपरासी की पहचान इसके बड़े, गोल फूलों की कलियों से होती है, जो देर वसंत में यानी उत्तरी गोलार्ध में मई के महीने में खुलती हैं। यह पौधा लगभग 50 से 70 सेंटीमीटर ऊँचा और उतना ही चौड़ा होता है।
इसकी पत्तियाँ 9-खंडों वाली होती हैं और 20 से 40 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। फूल कटोरीनुमा या प्याले के आकार के होते हैं, जिनका व्यास 8 से 16 सेंटीमीटर तक हो सकता है। इनमें 5 से 10 पंखुड़ियाँ होती हैं, जो सफेद, गुलाबी या गहरे लाल रंग की हो सकती हैं, तथा इनके बीच पीले रंग के पुंकेसर स्पष्ट दिखाई देते हैं।
ये फूल सुगंधित होते हैं, जो इनकी एक और पहचान बनाते है और तितलियों को आकर्षित करने में सहायक है।
वितरण और आवास
चीनी चपरासी जंगलों और घास के मैदानों में पाई जाती है, जो लगभग 400 से 2,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होते हैं। इसके प्राकृतिक आवासों में सूखी खुली पथरीली ढलानें, नदी के किनारे और विरल वनों के किनारे शामिल हैं।
मासिक अवलोकन आँकड़ों में मई से जुलाई के महीनों के दौरान इसकी उपस्थिति सबसे अधिक दर्ज की गई है, जो संभवतः इसके फूलों के खिलने के मौसम से मेल खाती है। यह आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि इसकी जनसंख्या या पूर्ण वितरण क्षेत्र का प्रमाण हैं।

उपयोग और मानव संबंध
चीनी चपरासी का उपयोग सदियों से औषधीय और सांस्कृतिक दोनों संदर्भों में होता रहा है। प्राचीन चीनी चिकित्सा में इसकी जड़ों, विशेष रूप से श्वेत चपरासी की जड़ों का उपयोग मासिक धर्म संबंधी अनियमितताओं और सूजन जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता था।
प्राचीन यूनान और रोम में भी इस पौधे की जड़ों और बीजों का उपयोग मिर्गी से लेकर किडनी की पथरी जैसी विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता था। इसका नाम यूनानी पुराणकथाओं के देवताओं के चिकित्सक पीऑन के नाम पर रखा गया है, जिससे इसे उपचार और रक्षा का प्रतीक माना गया।
चीन में आठवीं शताब्दी से इसे फूलों के राजा का दर्जा मिला और यह स्वास्थ्य, राजसत्ता तथा समृद्धि का प्रतीक बन गया। इसे करुणा, रक्षा और उपचार, दोनों शारीरिक और आध्यात्मिक, का भी प्रतीक माना जाता है।
रोचक तथ्य
- इस पौधे का नाम यूनानी पुराणकथाओं के देवताओं के चिकित्सक पीऑन के नाम पर पड़ा है।
- चीन में इसे आठवीं शताब्दी में फूलों के राजा का सम्मान दिया गया था।
- एक यूनानी कथा के अनुसार, अप्सरा पीओनिया की असाधारण सुंदरता से ईर्ष्या करने वाली एफ्रोडाइट से जुड़ी एक कहानी भी इस पौधे के नाम से जुड़ी है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- शाकीय पौधा
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Magnoliopsida
- गण
- Saxifragales
- कुल
- Paeoniaceae
- वंश
- Paeonia
- प्रजाति
- Paeonia lactiflora
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits



