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गोभी तितली

Pieris rapae

एक अकेली मादा Pieris rapae कुछ ही पीढ़ियों में लाखों संततियों की जननी बन सकती है, इतनी तेज़ी से यह प्रजाति फैलती है।

Pieris rapae एक छोटी-मध्यम आकार की तितली है जो पियरिडी कुल से संबंधित है, जिसमें श्वेत और पीत रंग की तितलियाँ आती हैं। यह मूलतः यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ्रीका की निवासी है, लेकिन अब विश्व के कई हिस्सों में फैल चुकी है। इसे किसी विशेष संरक्षण श्रेणी में नहीं रखा गया है।

खेतों और बगीचों में आम दिखने वाली यह तितली अपनी इल्लियों के कारण कृषि के लिए चुनौती मानी जाती है, जबकि वयस्क रूप में यह महत्वपूर्ण परागणक की भूमिका निभाती है।

पहचान और रूप

इसकी पहचान का सबसे उपयोगी संकेत अगले पंखों के सिरों पर मौजूद काले धब्बे हैं, जो इसे Pieris brassicae जैसी बड़ी सफेद तितली से अलग करते हैं, जिसके अगले पंखों के सिरे पर एक पूरी काली पट्टी होती है।

वयस्क तितली का पंख विस्तार लगभग 32–47 मिलीमीटर होता है। ऊपरी सतह क्रीमी सफेद रंग की होती है जिसमें अगले पंखों के सिरे काले होते हैं। मादाओं के अगले पंखों के मध्य भाग में दो अतिरिक्त काले धब्बे होते हैं, जो उन्हें नरों से अलग करते हैं। निचली सतह पीली-सी होती है जिस पर काले महीन बिंदु बिखरे रहते हैं।

इसकी सादगी भरी बनावट के कारण कई बार इसे पतंगा समझ लिया जाता है। इसके पंखों की फड़फड़ाहट की औसत दर लगभग 12.8 बार प्रति सेकंड होती है।

वसंत में उभरने वाले वयस्कों के पंखों पर धब्बे छोटे और शरीर का आकार ग्रीष्म में उभरने वाले वयस्कों की तुलना में सामान्यतः छोटा होता है।

वितरण और आवास

यह प्रजाति यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ्रीका में स्वाभाविक रूप से पाई जाती है, और मानव गतिविधियों के माध्यम से विश्व के अन्य भागों में फैल गई है। लगभग 1860 में यह कनाडा के क्यूबेक में दुर्घटनावश पहुँची और वहाँ से पूरे उत्तरी अमेरिका में तेज़ी से फैल गई। 1898 तक यह हवाई पहुँच गई थी, और 1929 तक न्यूज़ीलैंड तथा मेलबर्न के आसपास के क्षेत्र में, जबकि पर्थ में इसका आगमन 1943 जितना पहले माना जाता है। यह दक्षिण अमेरिका में अभी तक नहीं पहुँची प्रतीत होती है।

यह तितली खुले मैदानों, बगीचों, घास के मैदानों, जंगलों, खेतों और यहाँ तक कि वन-कोनों में भी पाई जाती है, लेकिन इसकी सर्वाधिक उपस्थिति हमेशा कृषि क्षेत्रों और खेती से जुड़ी होती है। रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में यह दुर्लभ या अनुपस्थित रहती है, सिंचित क्षेत्रों को छोड़कर।

ब्रिटेन में इसकी दो उड़ान अवधियाँ होती हैं, अप्रैल-मई और जुलाई-अगस्त, जबकि उत्तरी अमेरिका में यह निरंतर कई पीढ़ियों में प्रजनन करती रहती है और वसंत में सबसे पहले प्रकट होने वाली तितलियों में से एक है, जो पतझड़ में पहली कड़ी ठंड तक सक्रिय रहती है। मौसमी उपस्थिति के आँकड़े गर्मियों के महीनों में इसकी सबसे अधिक दर्ज उपस्थिति दर्शाते हैं, जो इसके सक्रिय प्रजनन काल से मेल खाता प्रतीत होता है।

यूरोप की आबादी को नाम-प्रजाति P. r. rapae के अंतर्गत रखा गया है, जबकि एशियाई आबादियों को उपजाति P. r. crucivora में वर्गीकृत किया गया है, और कई अन्य उपजातियाँ भी पहचानी गई हैं।

Pieris rapae के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
10,32,498
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

यह तितली दिन के समय सक्रिय रहती है और वसंत से सितंबर तक उड़ती है, हालांकि उत्तरी क्षेत्रों में इसका सक्रिय काल छोटा और दक्षिणी क्षेत्रों में लंबा होता है।

मादा तितली अंडे देने के लिए मेज़बान पौधे खोजने की तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाती है: खोज, अवतरण और स्पर्श-परीक्षण। वह पहले उपयुक्त आवास और फिर संभावित मेज़बान पौधों वाले पैच की पहचान करती है। वह ठंडी, छायादार वनस्पति से बचती है, और बादल या वर्षा वाले मौसम में अंडे नहीं देती; प्रयोगशाला स्थितियों में अंडे देने के लिए उच्च प्रकाश तीव्रता आवश्यक पाई गई है।

संभोग से पहले मादा मेज़बान पौधे की खोज में संलग्न नहीं होती; यह व्यवहार संभोग के तुरंत बाद शुरू होता है। अंडे देने वाली मादा की उड़ान सीधी रेखा में होती है, जबकि रस की खोज करने वाली मादा फूलों के पैच पर तीखे मोड़ लेती है। मेज़बान पौधों का घनत्व बढ़ने पर प्रति पौधा अंडों की संख्या घटती है।

पौधे पर उतरने के बाद दृष्टि, विशेष रूप से रंग, सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; मादा हरे और नीले-हरे रंगों, विशेषकर पुरानी व गहरे हरे पत्तियों, की ओर अधिक आकर्षित होती है, भले ही इल्लियाँ युवा पौधों पर बेहतर विकसित होती हैं। उतरने के बाद मादा अपने अगले पैरों से पत्ती की सतह पर तेज़ी से थपथपाती है, जिसे "ड्रमिंग प्रतिक्रिया" कहा जाता है, जो पौधे की उपयुक्तता की जानकारी देती है। वयस्क मादाएँ उपयुक्त मेज़बान पौधे की खोज में 500 मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक की यात्रा कर सकती हैं।

संचार

इस तितली की प्रमुख संचार विधि दृष्टि और गंध-संकेत पर आधारित है। अन्य तितलियों की तरह इसकी संयुक्त आँखें पराबैंगनी प्रकाश को भी देख सकती हैं, जो साथी की पहचान और मेज़बान पौधों के चुनाव में सहायक होती है।

इसके अतिरिक्त यह फेरोमोन का उपयोग करती है, जो संभवतः संभोग व्यवहार में भूमिका निभाते हैं, जबकि दृष्टि आधारित संकेत प्रमुख रूप से मेज़बान पौधों की पहचान और साथी की खोज में उपयोग होते हैं।

आहार और पोषण

वयस्क Pieris rapae फूलों का रस पीती है, जबकि इसकी इल्लियाँ पत्तियाँ खाती हैं। वयस्क तितली विशेष रूप से उन पौधों के फूलों से रस पीना पसंद करती है जिनमें मस्टर्ड तेल पाया जाता है, जैसे सरसों, डैंडिलायन, ब्रोकली, गोभी, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, फूलगोभी, कोलार्ड, हॉर्सरैडिश, केल, लाल तिपतिया घास, एस्टर और मिंट।

इल्लियाँ इन्हीं पौधों के पत्तेदार हिस्सों को खाती हैं, और कई बार पौधे को केवल तने तक सीमित कर देती हैं। इल्लियाँ विशेष रूप से गोभी के पौधों को प्राथमिकता देती हैं, जिससे इस प्रजाति को इसका सामान्य नाम मिला है।

दर्ज किए गए आहार संबंधों में मूली, कुछ क्रूसीफेरस पौधे, तथा सरसों परिवार के अन्य सदस्य बार-बार सामने आते हैं, जो इसकी इल्लियों के पौधों के चुनाव में क्रूसीफेरस परिवार की प्रधानता दर्शाते हैं।

प्रजनन और जीवन चक्र

मादा तितली अपने जीवन में केवल एक बार संभोग करती है, जबकि नर कई मादाओं से संभोग कर सकता है। जब नर किसी मादा को देखता है, तो वह उसके ऊपर-नीचे और आगे-पीछे टेढ़ी-मेढ़ी उड़ान भरता है जब तक वह उतर नहीं जाती; फिर वह अपने पैरों से उसके बंद पंखों को पकड़ता है और अपने पंख फैलाता है, जिससे मादा झुक जाती है। अनिच्छुक मादा सीधी उड़ान भरकर या अपने पंख फैलाकर और पेट उठाकर नर को अस्वीकार करती है।

मादा अपने जीवनकाल में लगभग 300 से 400 अंडे देती है, एक बार में एक अंडा, पत्तियों के निचले हिस्से पर। अंडे सफेद होते हैं और उम्र के साथ पीले होते जाते हैं। एक ही पौधे पर 57 तक अंडे और 48 तक इल्लियाँ पाई जा सकती हैं।

प्रजनन काल वसंत की शुरुआत से पतझड़ की शुरुआत तक चलता है। मादा और नर दोनों लगभग 21 दिन की आयु में यौन परिपक्वता प्राप्त करते हैं। संतान के पालन-पोषण में माता-पिता का कोई योगदान नहीं होता; अंडे देने के बाद मादा का कार्य समाप्त हो जाता है।

कुछ नरों में कीचड़ चूसने का व्यवहार देखा गया है, जिससे सोडियम ग्रहण होता है और इससे प्रजनन सफलता बढ़ती प्रतीत होती है।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

इल्ली और वयस्क तितली, एक ही जीव की दो अलग अवस्थाएँ होकर भी पारिस्थितिकी में बहुत भिन्न भूमिका निभाते हैं। इल्लियाँ अपने भारी भोजन-व्यवहार से पौधों को घायल या नष्ट कर सकती हैं, जबकि वयस्क तितली केवल फूलों का रस पीती है और पत्तियों को नुकसान नहीं पहुँचाती। वयस्क तितली गोभी जैसी फसलों के लिए एक महत्वपूर्ण परागणक है।

इसकी इल्लियों को कई परजीवी कीट नियंत्रित करते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से ब्रेकोनिड ततैया और परजीवी मक्खियाँ शामिल हैं। इनमें से दो ततैया प्रजातियों को उत्तरी अमेरिका में एशिया से जैव-नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया था; एक प्रजाति पहले या दूसरे इल्ली चरण में अंडे देती है और मेज़बान को अंतिम चरण में मार देती है, जबकि इसकी निकट संबंधी प्रजाति भी समान चरणों में परजीवीकरण करती है पर एक ही मेज़बान में कई लार्वा विकसित कर सकती है। इसकी प्यूपा अवस्था भी एक अन्य ततैया प्रजाति द्वारा अक्सर परजीवित होती है। गौरैया और पिपिट जैसे कई छोटे पक्षी भी इसका शिकार करते पाए गए हैं।

संरक्षण और खतरे

IUCN रेड लिस्ट, अमेरिकी संघीय सूची और CITES के अनुसार इस प्रजाति को किसी विशेष संरक्षण श्रेणी में नहीं रखा गया है, और मिशिगन राज्य की सूची में भी इसे कोई विशेष दर्जा नहीं दिया गया है।

यह व्यापक रूप से फैली और प्रचुर प्रजाति मानी जाती है, जिसे किसी गंभीर संकट का सामना नहीं है।

सांस्कृतिक महत्व

जापान में पुराने समय के लोग इस तितली और एशियाई स्वॉलोटेल जैसी सामान्य प्रजातियों को सुंदर तो मानते थे, लेकिन साथ ही उबाऊ भी, क्योंकि ये बहु-पीढ़ीय होती हैं और वसंत से पतझड़ तक लगातार वयस्क रूप में दिखती रहती हैं। हालांकि तितलियाँ विश्व की कई पौराणिक कथाओं में आती हैं, जापानी पौराणिक कथाओं में इनका उल्लेख नहीं मिलता।

ग्रीक पौराणिक कथाओं में "पियरिस" नाम एक दासी को दिया गया था, जो मेनेलॉस की संतान मेगापेंथेस की माता थी।

मानव जीवन के लिए इस तितली का सबसे स्पष्ट लाभ इसका फसलों का परागण है, जिसमें गोभी जैसी फसलें शामिल हैं।

रोचक तथ्य

  1. यह तितली उस क्षेत्र में एकमात्र आयातित तितली मानी जाती है जहाँ यह पुरानी दुनिया से पहुँची, और यह सबसे अधिक फैलने वाली तितलियों में से एक है, जो समुद्र तल से लगभग 2,400 मीटर की ऊँचाई तक के अशांत आवासों में पाई जाती है।
  2. यह नदी-तटीय वनों और पहाड़ी शंकुधारी वनों में भी गर्मियों के मौसम में प्रवेश कर जाती है।
  3. यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि यह तितली किसी-किसी क्षेत्र में कब या कैसे पहुँची।

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

व्यवहार

  • एकांतप्रिय
  • दिवाचर
  • प्रवासी

आहार

  • शाकाहारी

वर्गीकरण

संघ
Arthropoda
वर्ग
Insecta
गण
Lepidoptera
कुल
Pieridae
वंश
Pieris
प्रजाति
Pieris rapae

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
  6. Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
  7. GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
  8. trophiCH
  9. Wardeh et al. 2015 (EID2)
  10. DoPI
  11. Guzman et al. 2022
  12. Schwarz et al. 2021
  13. EuPPollNet