Pilobolus crystallinus को सामान्यतः "गोबर तोप" या "टोपी फेंकने वाली" फफूंद कहा जाता है, और यह नाम इसकी असाधारण क्षमता से आता है — यह अपने बीजाणु-पात्र को 2 मीटर तक की दूरी पर दाग सकती है, जबकि इसका पूरा शरीर मात्र 2 से 4 सेंटीमीटर ऊँचा होता है।
यह फफूंद म्यूकोरेल्स गण की सदस्य है और इसकी विशेषता यह है कि यह अपने बीजाणुओं को वनस्पति की सतह पर चिपका देती है, ताकि उन्हें चरने वाले पशु खा लें। इस तरह यह अपने जीवनचक्र को पूरा करने के लिए शाकाहारी प्राणियों पर निर्भर करती है।
यह छोटी सी फफूंद अपनी असामान्य यांत्रिक संरचना और तीव्र गतिशील प्रक्रिया के कारण वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प अध्ययन का विषय रही है।
फलन काय और पहचान
इस फफूंद की पहचान इसके विशिष्ट छह-चरणीय विकास क्रम से होती है, जिसे पहली बार मैकविकर ने 1942 में और बाद में ओओटाकी और सहयोगियों ने 1993 में विस्तार से वर्णित किया। प्रारंभिक चरण में स्पोरैंजियोफोर अपने शीर्ष पर लंबा होता है पर घूमता नहीं, इसके बाद उसके ऊपर एक स्पोरैंजियम (बीजाणु-पात्र) विकसित होता है और वृद्धि कुछ समय के लिए थम जाती है।
इसके बाद स्पोरैंजियम के नीचे एक उप-स्पोरैंजियल वेसिकल फूलने लगता है, जबकि बीजाणु परिपक्व होता है और नीचे की कवक-तंतु (हाइफा) लंबी होती रहती है। अंतिम चरण में यह वेसिकल फट जाता है और स्पोरैंजियम को हवा में दाग देता है।
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर स्पोरैंजियम की सतह दो भिन्न आकारों के क्रिस्टलों से ढकी पाई गई है। इनमें से बड़े क्रिस्टल कांटों को घेरते हैं जिनके बीच में एक छिद्र होता है।
यह फफूंद सामान्यतः सतह के नीचे ही विकसित होती है, क्योंकि इसके हाइफा ऑक्सीजन के प्रति संवेदनशील होते हैं, जो इनकी चौड़ाई में वृद्धि को रोकता है।
वितरण और आवास
Pilobolus crystallinus की उपस्थिति वर्षभर दर्ज की जाती है, हालांकि इसके देखे जाने की संख्या मौसम के अनुसार बदलती रहती है। उपलब्ध अवलोकनों में सितंबर के महीने में सबसे अधिक संख्या दर्ज हुई है, जिसके बाद अक्टूबर में भी अवलोकन तुलनात्मक रूप से अधिक रहे, जो संकेत देता है कि पतझड़ के मौसम में इसकी उपस्थिति अधिक प्रमुखता से देखी जाती है।
ये अवलोकन केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि इसकी संख्या या इसके संपूर्ण प्राकृतिक विस्तार को। इसलिए इनसे इसकी वास्तविक बहुतायत या पूरे भौगोलिक फैलाव का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

रोचक तथ्य
- इसका सामान्य नाम "गोबर तोप" या "टोपी फेंकने वाली" फफूंद इसी विशेषता से पड़ा है कि यह अपने बीजाणुओं को वनस्पति पर चिपका देती है, जिन्हें बाद में शाकाहारी पशु खा लेते हैं।
- रुचिकर बात यह है कि "पिलोबोलस" नाम एक अमेरिकी नृत्य मंडली को भी दिया गया है, जिसकी स्थापना 1971 में डार्टमथ कॉलेज में हुई थी और जो अपनी रचनात्मक तथा शारीरिक रूप से कलात्मक प्रस्तुतियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हुई।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Mucoromycota
- वर्ग
- Mucoromycetes
- गण
- Mucorales
- कुल
- Pilobolaceae
- वंश
- Pilobolus
- प्रजाति
- Pilobolus crystallinus
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract



