कुछ Pinus longaeva पेड़ 4,000 वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। यह चीड़ परिवार का एक सदस्य है और पौधों के जगत में बीज वाले कॉनिफ़र वर्ग से जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में इसे न्यूनतम चिंता वाली प्रजाति माना गया है। यह कैलिफ़ोर्निया, नेवादा और यूटा के ऊँचे पहाड़ों में मिलता है, जहाँ सर्दी ठंडी और गर्मी सूखी रहती है।
सन 1987 में नेवादा ने इस चीड़ को अपने राज्य वृक्षों में से एक घोषित किया। इसकी कठोर जीवनशैली और लंबी उम्र इसे पढ़ने योग्य बनाती है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान सुइयों का गुच्छा है। हर गुच्छे में पाँच सुइयाँ होती हैं, जो 2.5 से 4 सेंटीमीटर लंबी, मोटी और मज़बूत होती हैं। बाहरी सतह गहरे हरे से नीले-हरे रंग की होती है, जबकि अंदरी सतह पर एक चमकीली सफ़ेद पट्टी होती है।
यह एक मध्यम आकार का पेड़ है, जो 5 से 15 मीटर ऊँचा हो सकता है। तने का व्यास 2.5 से 3.6 मीटर तक पहुँच सकता है। युवा पेड़ों की छाल चमकीली नारंगी-पीली और पतली होती है, जो तने के आधार पर परतदार दिखती है।
पुराने पेड़ों की छाल लालामी-भूरी और गहरी दरारों वाली होती है। ऊँचाई पर उगने वाले पेड़ अक्सर टेढ़े-मेढ़े और बौने दिखते हैं। बहुत पुराने पेड़ों में जीवित ऊतक की केवल एक पतली पट्टी जड़ों को कुछ जीवित शाखाओं से जोड़ती है।
शंकु अंडाकार-बेलनाकार होते हैं और बंद होने पर 5 से 10 सेंटीमीटर लंबे व 3 से 4 सेंटीमीटर चौड़े होते हैं। पहले ये हरे या बैंगनी होते हैं और 16 महीने में नारंगी-भूरे रंग के हो जाते हैं। हर शल्क पर 2 से 5 मिलीमीटर लंबा काँटेदार शूल होता है। मादा शंकुओं के गहरे बैंगनी रंग के काँटे ही इसके नाम का आधार हैं।
रॉकी पर्वत के बिस्टलकोन चीड़ में सुइयों पर छोटे सफ़ेद राल के धब्बे दिखते हैं, जो इसमें नहीं होते। फ़ॉक्सटेल चीड़ से इसे अलग करने के लिए शंकु के काँटों की लंबाई देखी जाती है, जो इसमें 2 मिलीमीटर से अधिक होती है, और शंकु का आधार गोल होता है, शंकुधारी नहीं।
वितरण और आवास
यह प्रजाति संयुक्त राज्य अमेरिका के यूटा और नेवादा तथा कैलिफ़ोर्निया के पूर्वी भाग में मिलती है। कैलिफ़ोर्निया में यह केवल व्हाइट पर्वत, इनियो पर्वत और पानामिंट श्रेणी में है। नेवादा में यह लास वेगास के पास के स्प्रिंग पर्वत से लेकर उत्तर में रूबी पर्वत तक अधिकांश ऊँची श्रेणियों में फैली है।
यह मुख्यतः ऊँचे पहाड़ों के ऊपरी भाग और वृक्षरेखा के पास शुद्ध जंगल बनाती है। निचले ढलानों पर यह लिम्बर चीड़ और सिंगलीफ़ पिनियन के साथ उगती है। कम घने स्टैंड बनते हैं, जिनमें छत्र केवल 15 से 50 प्रतिशत भूमि ढकता है।
यह मुख्यतः पतली, चट्टानी मिट्टी पर उगती है, जो चूना-पत्थर या डोलोमाइट से बनी होती है। ढलान अक्सर 10 से 50 प्रतिशत तक खड़ी होती हैं, और यह दक्षिण व पश्चिम की ओर वाले सूखे, तेज़ हवा वाले ढलानों को पसंद करती है।
यह 2,200 से 3,700 मीटर की ऊँचाई पर कैलिफ़ोर्निया में, 2,400 से 3,300 मीटर पर नेवादा में और 2,195 से 3,265 मीटर पर यूटा में मिलती है। इसकी निचली सीमा पिछली सदियों में नीचे खिसकी है, और जलवायु परिवर्तन इसके बचाव क्षेत्र को और सीमित कर रहा है।

पारिस्थितिकी और संबंध
यह प्रजाति आग के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। इसकी राल भरी छाल तेज़ी से जल उठती है, और शिखर की आग लगभग निश्चित रूप से इसे मार देती है। फिर भी इसकी आबादी बहुत लचीली है, और इसके प्राथमिक उत्तराधिकारी होने के कारण आग के बाद यह तेज़ी से फिर उग आती है।
बड़ी आगें इन क्षेत्रों में बहुत कम होती हैं और इसके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए मुख्य खतरा नहीं हैं। निचली ऊँचाई पर मिश्रित प्रजाति वाले जंगलों में भारी ईंधन और मानव-जनित आग के स्रोत पास होने से जोखिम अधिक रहता है। गर्म मौसम से निचले और मध्य ऊँचाई के घने जंगलों में आग की आवृत्ति बढ़ सकती है।
क्लार्क के नटक्रैकर पक्षी इसके बीजों के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं। ये पक्षी शंकुधारी बीज जमीन में छिपाते हैं, और जो बीज खोदे नहीं जाते वे उग जाते हैं। इसी कारण कई बार एक ही जड़ से कई तने निकलते हैं, जो इस प्रसार के प्रमाण माने जाते हैं।
यह अच्छी मिट्टी में कमज़ोर प्रतिस्पर्धी है, पर कठिन भूभाग में फलती-फूलती है। ऊँचाई पर डोलोमाइट मिट्टी में यह अक्सर प्रमुख प्रजाति होती है, जहाँ कुछ ही पौधे उग पाते हैं। इसके साथ लिम्बर चीड़, पोंडेरोसा चीड़ और सफ़ेद फ़र भी रहते हैं।
उपयोग और मानव संबंध
यह पेड़ कुछ जनजातियों के लिए पवित्र माना जाता है, और इसकी उपस्थिति को आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्व से जोड़ा जाता है।
सामान्य रूप से चीड़ की प्रजातियाँ लोककथाओं में अमरता, स्थिरता और लचीलेपन से जुड़ी रही हैं। यह संबंध इनके कठिन परिस्थितियों में टिके रहने के गुण से जुड़ा माना जाता है।
कैलिफ़ोर्निया का प्राचीन बिस्टलकोन चीड़ वन और नेवादा का ग्रेट बेसिन राष्ट्रीय उद्यान इस पेड़ की रक्षा के लिए संरक्षित क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में लकड़ी काटना और उसे इकट्ठा करना प्रतिबंधित है।
रोचक तथ्य
- चेरी लेडी नाम की एक बौनी किस्म इसी प्रजाति से विकसित हुई है। इसे 2006 में अमेरिका की यात्रा के दौरान जादूगरनी की झाड़ू नामक विकृति के रूप में खोजा गया था।
- इस पेड़ की आधुनिक संस्कृति में लोकप्रियता असामान्य रूप से बढ़ी है, और यह बागवानी में भी सीमित पर नया स्थान पा रहा है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Pinopsida
- गण
- Pinales
- कुल
- Pinaceae
- वंश
- Pinus
- प्रजाति
- Pinus longaeva
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits



