Cornus mas पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी यूरोप और दक्षिण-पश्चिम एशिया का मूल निवासी एक झाड़ीनुमा या छोटे वृक्ष जैसा पौधा है, जो डॉगवुड परिवार Cornaceae से संबंध रखता है।
IUCN द्वारा इस प्रजाति को 'सबसे कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि वर्तमान में इसके अस्तित्व पर कोई गंभीर खतरा नहीं है।
यह प्रजाति अपने शुरुआती वसंत में खिलने वाले पीले फूलों, स्वादिष्ट लाल फलों और असाधारण रूप से सघन लकड़ी के कारण सदियों से मानव जीवन के साथ जुड़ी रही है, जो इसे बगीचों से लेकर प्राचीन शस्त्रागारों तक उपयोगी बनाती है।
पहचान और रूप
Cornus mas की पहचान की सबसे आसान कड़ी इसके फूल हैं: फरवरी से मार्च के बीच, पत्तियों के निकलने से भी पहले, शाखाओं पर 10 से 25 फूलों के गुच्छे खुलते हैं। हर फूल छोटा (5–10 मिमी व्यास) होता है और उसमें चार पीली पंखुड़ियाँ होती हैं।
यह एक पर्णपाती झाड़ी या छोटा वृक्ष है जो 5 से 12 मीटर ऊँचाई तक बढ़ता है। तने गहरे भूरे रंग के होते हैं जबकि नई टहनियाँ हरी दिखाई देती हैं। पत्तियाँ आमने-सामने (opposite) क्रम में लगती हैं, 4–10 सेंटीमीटर लंबी और 2–4 सेंटीमीटर चौड़ी होती हैं, आकार में अंडाकार से आयताकार तथा किनारे सामान्यतः बिना कटाव (entire margin) के होते हैं।
फल एक आयताकार लाल ड्रूप (drupe) होता है, जो लगभग 2 सेंटीमीटर लंबा और 1.5 सेंटीमीटर व्यास का होता है, जिसके भीतर एक ही बीज होता है।
सजावटी बागवानी में इसके शुरुआती पीले फूलों की तुलना अक्सर Forsythia से की जाती है, हालांकि Cornus mas के फूल आकार और चमक में उतने प्रभावी नहीं होते, फिर भी पूरा पौधा परिदृश्य में समान प्रभाव देने के लिए उगाया जाता है।
वितरण और आवास
Cornus mas पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी यूरोप और दक्षिण-पश्चिम एशिया के क्षेत्रों का मूल निवासी है।
GBIF से प्राप्त मासिक अवलोकन आँकड़े इस प्रजाति की उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि इसकी वास्तविक बहुतायत या पूर्ण वितरण-क्षेत्र। इन आँकड़ों में मार्च (लगभग 24,400 अवलोकन) और अगस्त (लगभग 24,200 अवलोकन) में दो स्पष्ट शिखर दिखते हैं, जबकि नवंबर और दिसंबर में यह संख्या घटकर लगभग 1,500 और 1,200 रह जाती है। यह प्रवृत्ति संभवतः पौधे के फूलने के मौसम (फरवरी–मार्च) और गर्मियों में फल पकने के समय के साथ मेल खाती है, जब पौधा अधिक दृश्य और पहचान में आसान होता है, जबकि सर्दियों में पत्ती-रहित अवस्था में इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है।

उपयोग और मानव संबंध
Cornus mas का फल खाने योग्य है और मध्य से देर गर्मियों में गहरे लाल या चमकीले पीले रंग का होकर पकता है; कच्चा फल कसैला होता है। पका हुआ फल क्रैनबेरी और खट्टी चेरी के मिश्रण जैसा अम्लीय स्वाद देता है। ईरान में इसे गर्मियों का ताज़ा फल माना जाता है और इसमें औषधीय गुण होने की मान्यता है, वहाँ इसे सुखाकर, नमकीन बनाकर या फल-चमड़ा (fruit leather) के रूप में बच्चों की मिठाई या खट्टे मसाले की तरह भी उपयोग किया जाता है। पूर्वी यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में भी यह फल प्रचलित है, जिसे मुख्यतः जैम बनाने में उपयोग किया जाता है। अज़रबैजान में इससे अचार, पेय या चावल में मिलाने की सामग्री बनाई जाती है, आर्मेनिया में इससे वोदका, रोमानिया और मोल्दोवा में 'कोर्नाता' नामक मादक पेय, तथा बुल्गारिया में 'कोम्पोत' तैयार किया जाता है। परंपरागत चीनी चिकित्सा में इस फल को Cornus officinalis के फल के साथ मिलाकर 'शानझूयू' (山茱萸) कहा जाता है और इसे 'जिंग' को संरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाता है।
इस वृक्ष की लकड़ी असाधारण रूप से सघन होती है और अधिकांश अन्य काष्ठीय पौधों की लकड़ी के विपरीत पानी में डूब जाती है, जिसके कारण यह औज़ारों के हत्थे और मशीनों के पुर्जे बनाने के लिए मूल्यवान मानी जाती है। सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व से यूनानी कारीगर इसकी लकड़ी का उपयोग भाले, बरछे और धनुष बनाने में करते थे, और मैसीडोन के राजा फिलिप द्वितीय व बाद में सिकंदर महान की सेना अपने पैदल सैनिकों के लिए प्रयुक्त 'सैरिसा' भाले के मुख्य निर्माण पदार्थ के रूप में इसी लकड़ी का उपयोग करती थी—इतना अधिक कि यूनानी भाषा में इस वृक्ष का नाम चौथी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की कविता में 'भाला' के लिए पर्याय के रूप में प्रयुक्त होता था। इटली के मारेम्मा क्षेत्र के घोड़े पर सवार चरवाहे (बुत्तेरी) परंपरागत रूप से इसी लकड़ी से बनी 'मात्सारेल्ला' या 'बास्तोने' नामक छड़ी रखते हैं, जिसे स्थानीय बोली में 'कोर्नियोलो' कहा जाता है।
यूरोप में इसे सजावटी पौधे के रूप में भी उगाया जाता है; इसे 1548 में विलियम टर्नर ने केवल सुनकर जाना था, लेकिन 1551 तक हैम्प्टन कोर्ट पैलेस में इसका एक पौधा मौजूद था। 'ऑरिया' (पीली पत्तियाँ और फूल, लाल फल), 'गोल्डन ग्लोरी' (प्रचुर पीले फूल, चमकदार लाल बेरी) और 'वेरिएगाटा' (चितकबरी पत्तियाँ, चमकदार लाल फल) जैसी किस्मों को रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का 'अवार्ड ऑफ गार्डन मेरिट' प्राप्त हुआ है।
रोचक तथ्य
- प्राचीन काल में इस वृक्ष की लकड़ी को उसकी कठोरता के कारण अत्यंत मूल्यवान माना जाता था, और औज़ारों तथा हथियारों के निर्माण में इसके उपयोग ने इसे शक्ति और अजेयता का प्रतीक बना दिया।
- प्राचीन यूनानी वनस्पतिशास्त्री थियोफ्रास्टस ने कॉर्नेल वृक्षों को दो प्रकारों में बाँटा था—'नर' और 'मादा'—और लकड़ी की अधिक कठोरता के कारण Cornus mas को 'नर' कॉर्नेल वृक्ष माना जाता था।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
संकटमुक्त
पारिस्थितिकी
वृद्धि का रूप
- झाड़ी



