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Cornus sanguinea

Cornus sanguinea

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

गहरे भूरे-लाल तनों वाला एक मध्यम आकार का पर्णपाती झाड़ी, जिसकी अंडाकार पत्तियाँ, सफेद फूलों के गुच्छे और काले गोल बेरी दिखाई दे रहे हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0
वर्गीकरण
संघ
Tracheophyta
वर्ग
Magnoliopsida
गण
Cornales
कुल
Cornaceae
वंश
Cornus
प्रजाति
Cornus sanguinea

इसकी टहनियाँ सर्दियों में गहरे खूनी-लाल रंग की हो जाती हैं, जिससे यह पर्णपाती झाड़ी सूखी शाखाओं के बीच भी आसानी से पहचानी जा सकती है।

Cornus sanguinea Cornaceae कुल का एक पर्णपाती झाड़ी है, जो अधिकांश यूरोप और पश्चिमी एशिया में पाया जाता है — इंग्लैंड और मध्य स्कॉटलैंड से लेकर पूर्व में कैस्पियन सागर तक। इसे व्यापक रूप से एक शोभादायक (ऑर्नामेंटल) पौधे के रूप में भी उगाया जाता है।

यह झाड़ी सिर्फ बगीचों की शोभा तक सीमित नहीं है — इसकी लकड़ी और छाल का उपयोग हज़ारों वर्षों से मनुष्य करते आए हैं, जबकि इसके काले बेरी पक्षियों और छोटे स्तनधारियों के लिए महत्वपूर्ण भोजन स्रोत बनते हैं।

पहचान और रूप

Cornus sanguinea की सबसे पहचानने योग्य विशेषता इसकी गहरी हरी-भूरी टहनियाँ हैं, जो सर्दियों में गहरे लाल रंग की हो जाती हैं। यह एक मध्यम से बड़े आकार का पर्णपाती झाड़ी है, जो 2 से 6 मीटर की ऊँचाई तक बढ़ता है।

इसकी पत्तियाँ आमने-सामने (opposite) लगी होती हैं, 4–8 सेंटीमीटर लंबी और 2–4 सेंटीमीटर चौड़ी, अंडाकार से आयताकार आकार की और पूर्ण किनारों वाली होती हैं। ऊपरी सतह हरी और निचली सतह हल्की पीली-हरी होती है, जबकि पूरी पत्ती पर छोटे, सख्त रोमों के कारण खुरदरा स्पर्श मिलता है।

फूल द्विलिंगी (hermaphrodite) होते हैं, आकार में केवल 5–10 मिलीमीटर, चार मलाईदार सफेद पंखुड़ियों के साथ, और 3–5 सेंटीमीटर व्यास के घने गुच्छों में खिलते हैं। इन फूलों का परागण कीटों द्वारा होता है।

फल एक गोलाकार, काले रंग की बेरी है जिसका व्यास 5–8 मिलीमीटर होता है और इसके भीतर एक ही बीज पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इन्हें कभी-कभी "डॉगबेरी" भी कहा जाता है।

वितरण और आवास

Cornus sanguinea का प्राकृतिक वितरण अधिकांश यूरोप और पश्चिमी एशिया को कवर करता है, इंग्लैंड और मध्य स्कॉटलैंड से लेकर पूर्व में कैस्पियन सागर तक फैला हुआ।

यह पौधा हल्की गर्म, सूर्य-प्रकाशित जगहों को प्राथमिकता देता है, हालांकि यह छाया भी सहन कर सकता है। वितरण क्षेत्र के दक्षिणी हिस्सों में यह पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है, जबकि स्कैंडिनेविया जैसे ठंडे क्षेत्रों में यह समुद्र-तल के नज़दीक ही उगता है। यह हल्की, अक्सर क्षारीय मिट्टी में पनपता है और विशेष रूप से नदी किनारों, छायादार क्षेत्रों तथा खड्डों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े मई में सबसे अधिक (लगभग 1,22,586 अवलोकन) दर्ज होते हैं और जून-जुलाई तक ऊँचे बने रहते हैं, इसके बाद घटते जाते हैं। ये आँकड़े केवल उपस्थिति के रिकॉर्ड हैं, बहुतायत, जनसंख्या आकार या पूर्ण प्राकृतिक विस्तार का माप नहीं, इसलिए इन्हें केवल मौसमी सक्रियता के संकेत के रूप में सावधानी से देखा जाना चाहिए।

Cornus sanguinea के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
1,22,586
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

पारिस्थितिकी और संबंध

Cornus sanguinea अक्सर जंगलों के किनारों, पुनर्जनन से गुजर रहे वनों और कँटीली झाड़ियों वाली सीमाओं में अन्य काँटेदार प्रजातियों — जैसे Clematis vitalba, Crataegus monogyna, Malus sylvestris, Prunus spinosa, Rubus idaeus और Rubus ulmifolius — के साथ मिलकर उगता है।

यह बीजों के साथ-साथ जड़ों से निकलने वाले प्रकुंरों और भूमिगत तनों (stolons) के ज़रिए भी फैलता है, जिससे यह घनी झुरमुटों का निर्माण करने में सक्षम होता है। कुछ परिस्थितियों में यह इतने आक्रामक ढंग से फैल सकता है कि इसे आक्रामक (invasive) माना जाता है।

इसकी पत्तियाँ कुछ कीट-पतंगों, जैसे केस-बेयरिंग मॉथ (Coleophora anatipennella), के लार्वा को भोजन प्रदान करती हैं, जबकि इसकी काली बेरियाँ कई स्तनधारियों और असंख्य फल-भक्षी चिड़ियों का प्रमुख आहार बनती हैं — कई पक्षी इन्हें मानव-उगाए गए फलों से भी अधिक पसंद करते हैं।

उपयोग और मानव संबंध

प्राचीन सेल्टिक पौराणिक कथाओं में मादा Cornus को "Sanguinaria" के नाम से जाना जाता था; ग्रीष्म संक्रांति के दौरान इसकी पत्तियाँ रक्त-रंग की हो जाती थीं, जो रक्त और जीवन के निरंतर चक्र का प्रतीक मानी जाती थीं, और इसे हृदय के प्रतीक के रूप में देखा जाता था।

इसकी छाल में प्रचुर मात्रा में टैनिन पाया जाता है, जिसका उपयोग परंपरागत चिकित्सा में मलेरिया और बेबीसियोसिस के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा कुनैन के विकल्प के रूप में किया जाता रहा है। छाल से चाय जैसा पेय दर्द और बुखार के लिए बनाया जाता था, जबकि पत्तियों से बने पुल्टिस को घावों पर लगाया जाता था।

इसकी सीधी, मजबूत शाखाओं का उपयोग तीर, कटार और सींक बनाने में होता रहा है — 1991 में इटली-ऑस्ट्रिया की सीमा पर मिले प्रागैतिहासिक धनुर्धर "ओत्ज़ी द आइसमैन" के पास भी इसी लकड़ी से बने तीर के डंडे पाए गए थे। इसकी सख्त, घनी और तेल जैसी चमकदार लकड़ी का उपयोग औद्योगिक क्रांति से पहले उत्तरी यूरोप में लकड़ी की खीलें ("dags"), डौल और पेग बनाने में होता था — इसी से इसके अंग्रेज़ी नाम "डॉगवुड" की उत्पत्ति मानी जाती है। आज इसकी बागवानी किस्में, जिन्हें "विंटर फायर" कहा जाता है, शरद ऋतु में नारंगी-पीली पत्तियों और सर्दियों में चमकीले लाल तनों के लिए उगाई जाती हैं, और जैविक बागवानी व परमाकल्चर में फलदार पक्षियों को आकर्षित कर बगीचों को कीटों से बचाने के लिए भी लगाई जाती हैं।

रोचक तथ्य

  1. Cornus वंश में उत्तरी अमेरिका का Cornus florida और दक्षिणी यूरोप का Cornus mas (कॉर्नेलियन चेरी) जैसी करीबी प्रजातियाँ भी शामिल हैं।
  2. प्राचीन सेल्टिक परंपरा में इस पौधे को "Sanguinaria" कहा जाता था और इसे हृदय का प्रतीक माना जाता था।
  3. इसकी छाल में मौजूद टैनिन के कारण इसे कभी मलेरिया-रोधी दवा कुनैन के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता था।

फ़ोटो

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गहरे भूरे-लाल तनों वाला एक मध्यम आकार का पर्णपाती झाड़ी, जिसकी अंडाकार पत्तियाँ, सफेद फूलों के गुच्छे और काले गोल बेरी दिखाई दे रहे हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipedia