साइबेरिया में उत्पन्न हुआ Crepis tectorum सन् 1890 में कनाडा लाया गया और तब से यह उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से में एक आक्रामक प्रजाति के रूप में फैल चुका है।
यह Asteraceae कुल का एक वार्षिक या शीतकालीन-वार्षिक पौधा है, जिसकी ऊँचाई 30 से 100 सेंटीमीटर तक होती है। इसके एक शाखादार, रोमरहित तने पर बारी-बारी से लगी पतली पीली पत्तियाँ इसे पहचानने में मदद करती हैं।
यह पौधा खेती वाले क्षेत्रों और सड़कों के किनारे तेज़ी से फैलने तथा वहाँ की मिट्टी व अन्य वनस्पतियों को प्रभावित करने की अपनी क्षमता के कारण ध्यान देने योग्य है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे पहचानने योग्य विशेषता इसका लंबा, सीधा तना और डैंडिलायन जैसे पीले फूल हैं, जो देखने में एकल फूल लगते हैं परंतु वास्तव में इनमें कई किरण-पुष्पक (रे फ्लोरेट्स) होते हैं, आमतौर पर 30 से 70 तक।
पत्तियाँ नुकीली और कटावदार होती हैं, जिनकी लंबाई 10 से 15 सेंटीमीटर और चौड़ाई लगभग 4 सेंटीमीटर तक होती है। किशोर अवस्था में पौधे की पत्तियाँ एक गुच्छे (रोसेट) के रूप में उगती हैं, और तने में कभी-कभी दूधिया सफेद रस भी पाया जाता है।
यह शुरुआती अवस्था में डैंडिलायन जैसा दिख सकता है, लेकिन इसकी पत्तियों के निचले किनारों पर नीचे की ओर मुड़े हुए दांत इसे अलग पहचान देते हैं। बीजपत्र अंडाकार होते हैं जबकि पहली सच्ची पत्तियाँ अधिक लंबी और डंठलयुक्त होती हैं।
पौधे के परिपक्व होने पर प्रत्येक तने पर कई फूल सिर खिलते हैं, और बीज बनने के बाद फूल की जगह एक सफेद, रुई जैसा सिर बन जाता है। बीज गहरे बैंगनी-भूरे रंग के शुष्क फल (एकीन) होते हैं, जिन्हें पैप्पस नामक बालों की सहायता से हवा द्वारा फैलाया जाता है।
वितरण और आवास
Crepis tectorum मूल रूप से यूरोप, उत्तरी और मध्य एशिया के विस्तृत क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें रूस, कज़ाख़स्तान, मंगोलिया और चीन के कुछ हिस्से शामिल हैं।
यह अब कनाडा, ग्रीनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी भागों, जिसमें अलास्का भी शामिल है, में प्राकृतिक रूप से स्थापित हो चुका है। अल्बर्टा, सास्काचेवान और मैनिटोबा के पार्कलैंड क्षेत्र में यह आम रूप से पाया जाता है।
यह पौधा बंजर भूमि, जोती गई या कम जुताई वाली भूमि, चारा व घास के खेतों और सड़क किनारों में उगता है। यह चूनेयुक्त और चूनारहित दोनों प्रकार की मिट्टी में पनप सकता है, लेकिन सबसे अच्छी वृद्धि पोषक तत्वों से भरपूर चिकनी व दोमट मिट्टी में होती है; यह शुष्क, मोटे कणों वाली मिट्टी में भी अच्छी तरह पनपता है। बीज अंकुरण के लिए तापमान सीमा 2 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच होती है, और बीज को मिट्टी में लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर होना चाहिए।
उपलब्ध अवलोकन आंकड़े गर्मियों के महीनों में इस पौधे की उपस्थिति की अधिकता दर्शाते हैं, जो इसके फूलने के मौसम से मेल खाता है, परंतु ये आंकड़े केवल उपस्थिति दर्ज करते हैं, जनसंख्या या पूर्ण फैलाव का माप नहीं हैं।

वृद्धि और स्वरूप
Crepis tectorum एक वार्षिक पौधा है, जो एक ही मौसम में अंकुरित होकर, बढ़कर और बीज बनाकर अपना जीवनचक्र पूरा करता है। यह शीतकालीन-वार्षिक रूप में भी उग सकता है, जिससे पौधा अनुकूल परिस्थितियों में सर्दी से पहले अंकुरित होकर अगले मौसम में परिपक्व होता है।
परिपक्व पौधा 30 से 100 सेंटीमीटर ऊँचाई तक पहुँचता है, जिसका एकल, शाखादार तना इसके वृद्धि स्वरूप की पहचान है। किशोर अवस्था में यह पत्तियों के एक गुच्छे के रूप में रहता है, जो बाद में एक लंबे तने में विकसित होता है जिस पर कई फूल सिर खिलते हैं।
पारिस्थितिकी और संबंध
Crepis tectorum के पीले फूलों की ओर कई प्रकार के कीट आकर्षित होते हैं, जिनमें मधुमक्खियाँ प्रमुख हैं, विशेष रूप से भौंरे इसके फूलों पर बार-बार देखे जाते हैं। इसके अतिरिक्त छोटी मक्खियाँ और विभिन्न जंगली मधुमक्खी प्रजातियाँ भी इसके फूलों पर आती हैं, हालांकि फूल पर आना परागण का प्रमाण नहीं माना जाता।
यह पौधा कई कीटों का आहार भी बनता है, जिनमें टिड्डे और झींगुर जैसे कीट, तथा एफिड जैसे रस चूसने वाले कीट शामिल हैं; भेड़ें भी इसे चरती देखी गई हैं।
पारिस्थितिक दृष्टि से यह पौधा एक आक्रामक प्रकृति रखता है—यह अन्य पौधों के साथ जंगल में उगता तो है, पर मानव नियंत्रण के बिना यह आसपास की मिट्टी और वनस्पति को नुकसान पहुँचाते हुए किसी क्षेत्र पर हावी हो सकता है।
उपयोग और मानव संबंध
Crepis tectorum को आधुनिक चिकित्सा, आयुर्वेद और विभिन्न स्थानीय या लोक परंपराओं में संभावित संदर्भों के साथ जोड़ा गया है, हालांकि इसके विशिष्ट पारंपरिक या औषधीय उपयोगों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
रोचक तथ्य
- यह पौधा 1890 में साइबेरिया से कनाडा लाया गया था और तब से एक आक्रामक प्रजाति के रूप में फैल चुका है।
- इसे हाथ से उखाड़ा जा सकता है, हालांकि रासायनिक तरीकों से इसका नियंत्रण अधिक प्रभावी माना जाता है।
- यह जून से सितंबर तक फूल देता है, और इसके फूल उभयलिंगी होते हैं, यानी एक ही फूल में नर और मादा दोनों अंग होते हैं।
फ़ोटो
तस्वीरें via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., by Полина Полежанкина via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Robyn Perkins via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., और by Matt Berger via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0. से हैं; हर तस्वीर पर श्रेय दिया गया है।
पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- शाकीय पौधा
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Magnoliopsida
- गण
- Asterales
- कुल
- Asteraceae
- वंश
- Crepis
- प्रजाति
- Crepis tectorum
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Plants of the World Online Native range, life form and climate (WCVP)
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- trophiCH
- Schwarz et al. 2021
- EuPPollNet



