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Cuculus canorus

Cuculus canorus

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

LCसंकटमुक्त
भूरे-सलेटी रंग का एक लंबी पूंछ वाला पक्षी, बाज़ जैसी सीधी उड़ान शैली के साथ, किसी खुली शाखा पर पंख झुकाए और पूंछ ऊँची किए बैठा हुआ।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

वज़न
0.112–0.112 kg
जीवनकाल
≤ 12.9 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Aves
गण
Cuculiformes
कुल
Cuculidae
वंश
Cuculus
प्रजाति
Cuculus canorus

Cuculus canorus एक बाध्य ब्रूड परासाइट है, यानी यह अपना घोंसला नहीं बनाता बल्कि मादा दूसरी प्रजातियों के घोंसलों में अंडे देकर उनकी परवरिश पर पूरी तरह निर्भर रहती है। यह चूजा जन्म के तुरंत बाद मेज़बान के अंडों और चूजों को घोंसले से बाहर धकेल देता है ताकि उसे पूरा भोजन और देखभाल मिल सके।

यह पक्षी कुक्कू-गण (Cuculiformes) का सदस्य है, जिसमें रोडरनर, अनी और कूकल जैसे पक्षी भी शामिल हैं। यह यूरोप और एशिया में ग्रीष्मकालीन प्रवासी है और सर्दियों में अफ्रीका चला जाता है। IUCN रेड लिस्ट में इसे "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, फिर भी इसकी प्रजनन-रणनीति और मेज़बान प्रजातियों के साथ चलने वाली विकासात्मक होड़ इसे पक्षी जगत की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक बनाती है।

पहचान और रूप

सबसे उपयोगी पहचान-चिह्न इसकी उड़ान शैली है: सलेटी, दुबला शरीर और लंबी पूंछ इसे उड़ते समय स्पैरोहॉक जैसा दिखाती है, जिसमें पंखों की फड़फड़ाहट नियमित होती है। शरीर की लंबाई चोंच से पूंछ तक 32–34 सेंटीमीटर होती है, जिसमें पूंछ 13–15 सेंटीमीटर लंबी होती है और पंखों का फैलाव 55–60 सेंटीमीटर तक जाता है। पैर छोटे होते हैं। नर का वज़न लगभग 130 ग्राम और मादा का लगभग 110 ग्राम होता है। प्रजनन काल में यह अक्सर किसी खुली शाखा पर पंख झुकाकर और पूंछ ऊँची किए बैठा दिखाई देता है।

वयस्क नर पूरी तरह स्लेटी रंग के होते हैं; गला का स्लेटी रंग छाती तक फैला रहता है और वहाँ से नीचे की धारीदार त्वचा में स्पष्ट सीमा बनती है। आँख की पुतली, आँख के चारों ओर का घेरा, चोंच का आधार और पैर पीले रंग के होते हैं। स्लेटी मादाओं में धारियों का पृष्ठभूमि रंग गुलाबी-बफ़ या बफ़ होता है, और कभी-कभी पंखों पर हल्के भूरे-लाल धब्बे भी दिखते हैं।

एक भूरा-लाल (रूफ़स) रंगरूप भी मिलता है, जो वयस्क मादाओं में कभी-कभी और किशोर पक्षियों में अधिक बार देखा जाता है — माना जाता है कि यह नर पक्षियों की छेड़छाड़ या मेज़बान पक्षियों द्वारा घेरे जाने से बचाव के लिए विकसित हुआ हो सकता है। रूफ़स मादाओं में गहरे स्लेटी या काली धारियाँ रूफ़स धारियों से पतली होती हैं, जबकि किशोर रूफ़स पक्षियों में ठीक इसका उल्टा होता है। किशोर पक्षियों की सबसे स्पष्ट पहचान गर्दन के पीछे सफ़ेद धब्बा और पंखों के सफ़ेद किनारे हैं।

यह प्रजाति ओरिएंटल कुक्कू से बहुत मिलती है, जिसके पंख औसतन थोड़े छोटे होते हैं; यह समानता रूफ़स रंगरूपों में भी बनी रहती है, जिससे लगता है कि यह विशेषता दोनों प्रजातियों में एक साझा पूर्वज से आई हो।

वितरण और आवास

यह खुले क्षेत्रों का पक्षी है और सभी प्रकार के वनों, दलदलों, हीथ भूमि और अल्पाइन क्षेत्रों सहित विविध आवासों में पाया जाता है, जिसमें ऊँचाई की सीमा 3,800 मीटर तक जाती है। इसका आवास चुनाव मुख्यतः भोजन की उपलब्धता पर निर्भर करता है, और यह घास के मैदानों, खेतों, कस्बों तथा उपनगरीय क्षेत्रों में भी देखा जाता है।

यह यूरोप और एशिया में एक व्यापक ग्रीष्मकालीन प्रवासी पक्षी है, जो अप्रैल में यूरोप पहुँचता है और सितंबर में लौटकर अफ्रीका में सर्दियाँ बिताता है। बारबाडोस, संयुक्त राज्य अमेरिका, ग्रीनलैंड, फ़रो द्वीप, आइसलैंड, इंडोनेशिया, पलाऊ, सेशेल्स, ताइवान और चीन जैसे देशों में भी इसे भटके हुए पक्षी (वैग्रेंट) के रूप में दर्ज किया गया है।

1995 से 2015 के बीच ब्रिटेन में इसके वितरण में उत्तर की ओर बदलाव देखा गया है — इंग्लैंड में संख्या में 69% की गिरावट आई, जबकि स्कॉटलैंड में 33% की वृद्धि हुई, जो जलवायु या आवास से जुड़े बदलावों का संकेत हो सकता है।

मासिक उपस्थिति के आँकड़े केवल देखे जाने के रिकॉर्ड दर्शाते हैं, आबादी का नहीं, फिर भी इनमें मई और जून में सबसे अधिक दर्ज संख्या (क्रमशः लगभग 9,56,889 और 5,38,710) दिखती है, जो यूरोप में इसके प्रजनन-काल में पहुँचने और सक्रिय रहने के समय से मेल खाती है; सर्दियों के महीनों (नवंबर से जनवरी) में यह संख्या घटकर कुछ हज़ार ही रह जाती है, जो इसके अफ्रीका प्रवास की पुष्टि करती है।

Cuculus canorus के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
9,56,889
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

यह सामान्यतः एकाकी स्वभाव का पक्षी है; प्रजनन काल के बाहर नर और मादा दोनों अलग-अलग रहते हैं, न गाते हैं और न ही एक-दूसरे से संपर्क रखते हैं, और अपना अधिकांश समय भोजन खोजने और नए क्षेत्रों की तलाश में बिताते हैं। अफ्रीका से यूरोप की ओर प्रवास के दौरान ये अपनी प्रजाति के साथियों के प्रति अधिक सामाजिक हो जाते हैं, लेकिन प्रवास स्वयं रात के समय और एकाकी रूप से किया जाता है, जिसमें जंगल, खेत और दलदली भूमि पड़ावों के रूप में इस्तेमाल होते हैं।

प्रजनन काल में नर और मादा दोनों अपने-अपने क्षेत्र (टेरिटरी) बनाते हैं, लेकिन नर लगातार अपने क्षेत्र की रक्षा करते हैं जबकि मादा ऐसा नहीं करती। दोनों के भोजन-क्षेत्र अलग-अलग होते हैं और वे अपने प्रजनन-क्षेत्र में भोजन नहीं करते। अंडे देने वाली मादाओं का औसत गृह-क्षेत्र (होम रेंज) लगभग 27.3 हेक्टेयर होता है, जबकि गैर-अंडे देने वाले पक्षियों का यह क्षेत्र औसतन 36.7 हेक्टेयर तक फैला होता है।

एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वयस्क पक्षी अपने चूजों के अंडों से निकलने से बहुत पहले ही अफ्रीका लौट जाते हैं। इसका मतलब है कि युवा कुक्कू बिना किसी मार्गदर्शन के, केवल सहज (इनेट) प्रवृत्ति के सहारे अफ्रीका का रास्ता खोजते हैं — एक ऐसा कौशल जो इस प्रजाति के प्रवासी व्यवहार की सबसे विशिष्ट कड़ी मानी जाती है।

संचार

नर का मुख्य गीत "गू-को" ध्वनि है, जो सामान्यतः किसी खुली शाखा से गाई जाती है। प्रजनन काल में नर यह ध्वनि 1 से 1.5 सेकंड के अंतराल पर, दस से बीस की श्रेणियों में और हर श्रेणी के बीच कुछ सेकंड के विराम के साथ दोहराता है। अप्रैल में यह गीत घटते हुए स्वर (माइनर थर्ड) से शुरू होता है और मौसम बढ़ने के साथ अंतराल चौड़ा होकर मेजर थर्ड और फिर फोर्थ तक पहुँच जाता है; जून में पक्षी "अपनी धुन भूल जाता है" और अन्य असामान्य स्वर भी निकालने लगता है। तेज़ी से पुकारते समय पंख झुक जाते हैं, और किसी संभावित मादा के पास होने पर नर अक्सर अपनी पूंछ को इधर-उधर हिलाता है या शरीर को झुका देता है।

मादा की पहचान उसकी तेज़, बुदबुदाती (बबलिंग) पुकार से होती है। नर की आवाज़ आवास के अनुसार भी बदलती है — जंगलों में रहने वाले नर धीमी आवाज़ में बोलते हैं, जबकि खुले मैदानी इलाकों के नर तेज़ आवाज़ में पुकारते हैं।

मेज़बान के घोंसले में पलने वाले चूजे मेज़बान माता-पिता की विशेष पुकारों को पहचानना सीख जाते हैं और केवल उनकी खतरे की आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अनुकूलन इसलिए विकसित हुआ है ताकि मेज़बान माता-पिता चूजे को अधिक बार भोजन दें।

आहार और पोषण

आहार मुख्यतः कीट-पतंगों पर आधारित है, जिनमें बालदार सुंडियाँ (हेयरी कैटरपिलर) प्रमुख हैं — ये सुंडियाँ अपने कड़वे स्वाद के कारण अधिकतर अन्य पक्षियों द्वारा नहीं खाई जातीं, लेकिन Cuculus canorus इन्हें सहजता से खा जाता है। इसके भोजन में झींगुर, बीटल, लार्वा और ड्रैगनफ़्लाई भी शामिल हैं।

एक अलग और उल्लेखनीय आहार-आदत यह है कि मादा कुक्कू मेज़बान पक्षियों के अंडे और चूजे भी खा जाती है, जो इसके ब्रूड-परासाइट स्वभाव से सीधे जुड़ा हुआ है। इस तरह इसका आहार सामान्य कीटभक्षी व्यवहार और अवसरवादी अंडा-भक्षण, दोनों को मिलाकर बनता है।

घोंसला और प्रजनन

Cuculus canorus में स्थायी जोड़े नहीं बनते; नर और मादा दोनों प्रजनन काल (अप्रैल से सितंबर) में कई साथियों के साथ संबंध बनाते हैं और वर्ष में केवल एक ही प्रजनन काल होता है। प्रेमालाप के दौरान नर लगातार पुकारते हुए पंख फैलाते हैं, पूंछ को पंखे की तरह खोलते हैं और सिर हिलाते हैं, जबकि मादा बुदबुदाती आवाज़ निकालती है।

यह प्रजाति अपना घोंसला नहीं बनाती; मादा हर साल किसी मेज़बान प्रजाति का घोंसला चुनकर उसमें अंडा देती है। एक मादा एक प्रजनन काल में पचास तक घोंसलों का दौरा कर सकती है, लेकिन कुल मिलाकर केवल बारह से बाईस अंडे ही देती है, और हर दूसरे दिन एक अंडा देती है। औसत अंडा लगभग 22×16 मिलीमीटर आकार का और लगभग 3.2 ग्राम वज़न का होता है, और इसका रंग मेज़बान प्रजाति के अंडों के रंग से मेल खाने के लिए बदलता रहता है — मादाएँ इसी आधार पर विशेष "जेन्स" (gentes) समूहों में बँटी होती हैं जो किसी खास मेज़बान प्रजाति को लक्षित करती हैं। अंडा देने से पहले मादा मेज़बान के घोंसले से एक अंडा हटा देती है।

सौ से अधिक मेज़बान प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं:

  • उत्तरी यूरोप में मीडो पिपिट, डनॉक और यूरेशियन रीड वार्बलर सबसे सामान्य मेज़बान हैं।
  • मध्य यूरोप में गार्डन वार्बलर, मीडो पिपिट, पाइड वैगटेल और यूरोपीय रॉबिन।
  • फ़िनलैंड में ब्रैम्बलिंग और कॉमन रेडस्टार्ट।
  • हंगरी में ग्रेट रीड वार्बलर, जहाँ एक अध्ययन में 64% घोंसले परजीवित पाए गए।

मेज़बान माता-पिता ही अंडे सेते हैं और चूजों को भोजन देते हैं; कुक्कू माता-पिता सेने, भोजन देने या पालन-पोषण में कोई भूमिका नहीं निभाते। अंडे 11 से 13 दिनों में फूटते हैं, और चूजा तुरंत मेज़बान के अंडे या चूजों को घोंसले से बाहर धकेल देता है ताकि उसे पूरा भोजन मिल सके। चूजा 17 से 21 दिनों में घोंसला छोड़ देता है, फिर भी छह से आठ हफ़्तों तक मेज़बान माता-पिता के आसपास रहकर उनसे भोजन प्राप्त करता रहता है। सितंबर में युवा पक्षी मेज़बान माता-पिता को छोड़कर अफ्रीका की ओर उड़ जाते हैं। नर और मादा दोनों लगभग दो वर्ष की आयु में यौन परिपक्वता प्राप्त करते हैं।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

यह प्रजाति अपने ब्रूड-परासाइट स्वभाव के कारण अपने पारिस्थितिकी तंत्र में एक जटिल भूमिका निभाती है। मीडो पिपिट, यूरेशियन रीड वार्बलर और डनॉक जैसी मेज़बान प्रजातियों को यह सीधे नुकसान पहुँचाती है, क्योंकि उनके अंडे और चूजे घोंसले से बाहर धकेल दिए जाते हैं या मादा कुक्कू द्वारा खा लिए जाते हैं।

दूसरी ओर, इसका आहार — जिसमें बालदार सुंडियों (Creatonotus gangis जैसी प्रजातियाँ) की बड़ी मात्रा शामिल है — फसलों और फलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों की संख्या को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।

यह पक्षी स्वयं भी परजीवियों का मेज़बान बनता है: इसमें पंख की जूँ (Columbicola) पाई जाती है, जो घोंसले के मेज़बान माता-पिता से नहीं बल्कि घोंसला छोड़ने के बाद अन्य वयस्क पक्षियों के सीधे संपर्क से मिलती है। इसके अलावा Sternostoma वंश का एक कण (माइट) इसके नाक के गुहा में पाया गया है।

संरक्षण और खतरे

IUCN रेड लिस्ट में Cuculus canorus को "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि इसके वैश्विक विलुप्त होने का तत्काल खतरा नहीं है। BirdLife International (2012) की रिपोर्ट के अनुसार कुछ क्षेत्रों में इसकी आबादी घट रही है, जैसा कि इंग्लैंड में देखी गई 69% की गिरावट से भी स्पष्ट होता है, लेकिन यह गिरावट अभी इतनी गंभीर नहीं मानी जाती कि प्रजाति की स्थिरता को खतरा हो।

यह प्रजाति अमेरिका के प्रवासी पक्षी संधि अधिनियम (Migratory Bird Treaty Act) के अंतर्गत संरक्षित है, जिसके तहत इस पक्षी, इसके अंगों या अंडों को रखना, बेचना या उनका व्यापार करना गैरकानूनी है। हालाँकि इसे अमेरिकी संघीय सूची या CITES में कोई विशेष दर्जा नहीं दिया गया है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

प्राचीन यूनानी पौराणिक कथाओं में यह पक्षी विवाह का प्रतीक माना जाता था — कहा जाता है कि ज़्यूस ने हेरा से प्रेम-प्रस्ताव के समय स्वयं को कुक्कू पक्षी में बदल लिया था, और हेरा ने उस बदहाल पक्षी पर दया करके उसकी देखभाल की; इसी कारण यह पक्षी हेरा को समर्पित माना जाता है। जापानी लोककथाओं में इसे अधूरे प्रेम और गहरी विरह-वेदना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

यूरोप में इसकी पुकार सुनना पारंपरिक रूप से वसंत के आगमन का पहला संकेत माना जाता है। इंग्लैंड की 13वीं सदी की प्रसिद्ध रचना "Sumer is icumen in" में इसे वसंत और ग्रीष्म के आरंभ के प्रतीक के रूप में गाया गया है, और शेक्सपियर ने अपने नाटक "लव्स लेबर्स लॉस्ट" में इसकी पुकार को विवाहित पुरुषों का उपहास करने से जोड़ा है। स्कॉटलैंड में वसंत की पहली कुक्कू-पुकार से जुड़े "गौक स्टोन्स" नामक स्थान भी परंपरा में मिलते हैं, और इसी पक्षी की आवाज़ की नकल करने के लिए यंत्रीकृत "कुक्कू घड़ी" बनाई गई।

मानव उपयोग की दृष्टि से, यह पक्षी रास्पबेरी, वाइबर्नम और हनीसकल जैसी फसलों को नुकसान पहुँचाने वाली सुंडियों को खाकर एक प्राकृतिक कीट-नियंत्रक की भूमिका निभाता है। ध्यान देने योग्य है कि भारत में मानसून के अग्रदूत के रूप में जानी जाने वाली "चातक" कुक्कू असल में एक अलग प्रजाति, जैकोबिन कुक्कू (Clamator jacobinus), है, न कि Cuculus canorus।

रोचक तथ्य

  1. अरस्तू ने इस पुरानी धारणा को खारिज किया था कि सर्दियों में कुक्कू पक्षी बाज़ में बदल जाता है, यह बताते हुए कि इसके पंजे और चोंच किसी शिकारी पक्षी जैसे नहीं होते।
  2. इस पक्षी की पुकार की नकल करने वाली मशहूर "कुक्कू घड़ी" यंत्रीकृत घंटियों और नलियों से इसकी बोली दोहराती है।
  3. हॉलीवुड की क्लासिक कॉमेडी जोड़ी लॉरेल एंड हार्डी की थीम धुन "डांस ऑफ द कुक्कूज़" इसी पक्षी की पुकार पर आधारित रचना है।
  4. इसका औसत जीवनकाल लगभग 12.9 वर्ष तक पहुँच सकता है।
  5. स्कॉटलैंड में वसंत की पहली कुक्कू-पुकार से जुड़ी परंपरा में "गौक स्टोन्स" नामक स्थानों का उल्लेख मिलता है।
  6. एक पुराने अंग्रेज़ी लोकगीत में इसका वर्णन मिलता है कि यह "अपनी आवाज़ साफ़ करने के लिए छोटे पक्षियों के अंडे चूसती है" — जो इसकी अंडा-भक्षण आदत की ओर इशारा करता है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • आर्द्रभूमि
  • वनभूमि
  • पर्वत
  • घास का मैदान

व्यवहार

  • निशाचर
  • एकांतप्रिय
  • क्षेत्रीय
  • प्रवासी

आहार

  • कीटभक्षी

फ़ोटो

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भूरे-सलेटी रंग का एक लंबी पूंछ वाला पक्षी, बाज़ जैसी सीधी उड़ान शैली के साथ, किसी खुली शाखा पर पंख झुकाए और पूंछ ऊँची किए बैठा हुआ।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of LifeAnimal Diversity WebAnAge