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Fratercula arctica

Fratercula arctica

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

VUसुभेद्य
चट्टान पर खड़ा एक अटलांटिक पफिन, जिसके सिर और पीठ पर चमकदार काले पंख, चेहरे पर हल्के धूसर रंग के धब्बे, सफेद वक्ष, नारंगी-लाल व धूसर रंग की बड़ी त्रिकोणीय चोंच, और चमकीले नारंगी पैर व जाली-युक्त पंजे हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

वज़न
0.491–0.491 kg
जीवनकाल
≤ 45 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Aves
गण
Charadriiformes
कुल
Alcidae
वंश
Fratercula
प्रजाति
Fratercula arctica

अटलांटिक पफिन अपनी चोंच में एक साथ लगभग 12 छोटी मछलियाँ दबाए रख सकता है और अपने बच्चे के लिए दिन में लगभग 40 बार समुद्र से लौटता है। यह इसकी दक्ष तैराकी और जल के भीतर पंखों से चलने की क्षमता को दर्शाता है।

यह ऑक (Alcidae) कुल का समुद्री पक्षी अटलांटिक महासागर का एकमात्र देशज पफिन है; इसके निकट संबंधी टफ्टेड पफिन और हॉर्नड पफिन प्रशांत महासागर में पाए जाते हैं। यह रूस, आइसलैंड, आयरलैंड, ब्रिटेन, नॉर्वे, ग्रीनलैंड, न्यूफ़ाउंडलैंड और लैब्राडोर, नोवा स्कोशिया तथा फ़ैरो द्वीपसमूह में प्रजनन करता है, और पश्चिम में मेन तथा फ्रांस के ब्रिटनी तक इसका दक्षिणी विस्तार है। आइसलैंड के वेस्टमैन द्वीपसमूह में यह सबसे अधिक संख्या में पाया जाता है। बड़ी आबादी और विस्तृत परिसर के बावजूद, IUCN ने इसे "सुभेद्य" (Vulnerable) श्रेणी में रखा है।

भूमि पर यह ऑक पक्षियों की विशिष्ट सीधी मुद्रा में खड़ा रहता है, जबकि समुद्र में यह सतह पर तैरता है और गोताखोरी करते हुए ज़ूप्लैंकटन, छोटी मछलियाँ तथा केकड़े पकड़ता है। यही अनोखा दोहरा जीवन—भूमि पर उपनिवेशी प्रजनक और सागर में एकांत तैराक—इसे अध्ययन के लिए विशेष रूप से रोचक बनाता है।

पहचान और रूप

सबसे पहचानने योग्य विशेषता इसकी विशाल त्रिकोणीय चोंच है, जो बाजू से देखने पर चौड़ी त्रिकोणाकार परंतु ऊपर से देखने पर संकरी दिखती है। चोंच का अगला आधा भाग नारंगी-लाल और पिछला भाग धूसर होता है, जिन्हें पीले शेवरॉन-आकार के उभार और आधार पर एक मांसल पीली पट्टी अलग करती है; दोनों जबड़ों के जोड़ पर एक पीली, झुर्रीदार रोसेट होती है।

चोंच की नोक से पूँछ तक इसकी लंबाई 28 से 30 सेंटीमीटर होती है, पंख फैलाव 47 से 63 सेंटीमीटर तक और भूमि पर खड़े होने की ऊँचाई लगभग 20 सेंटीमीटर होती है। इसका वज़न लगभग 490 ग्राम होता है। नर सामान्यतः मादा से थोड़ा बड़ा होता है, परंतु दोनों का रंग-रूप एक समान रहता है।

शरीर सुगठित, गर्दन मोटी और पंख-पूँछ छोटे होते हैं। माथा, सिर का ऊपरी भाग, गर्दन का पिछला हिस्सा, पीठ, पंख और पूँछ चमकदार काले होते हैं, और गर्दन के चारों ओर एक चौड़ा काला कॉलर होता है। सिर के दोनों ओर हल्के धूसर रंग के लंबे धब्बे होते हैं जो गर्दन के पीछे लगभग मिलते हैं, जिससे आँख से पीछे तक एक धूसर रेखा-सी दिखती है। आँखों के ऊपर सींगनुमा नीली-धूसर त्वचा और नीचे एक आयताकार धब्बा होने से आँखें त्रिकोणाकार प्रतीत होती हैं; परितारिका भूरी या गहरी नीली होती है और चारों ओर लाल घेरा होता है। नीचे का भाग—वक्ष, पेट और पूँछ के नीचे का हिस्सा—सफेद होता है, जबकि पैर और जालीदार पंजे चमकीले नारंगी और पंजों के नाखून काले होते हैं। प्रजनन काल के अंत तक काले पंखों की चमक फीकी पड़ सकती है या हल्की भूरी झलक ले सकती है।

अपरिपक्व पक्षी वयस्क से अधिक धुंधला होता है—चेहरा गहरा धूसर और चोंच की नोक व पैर पीले-भूरे रंग के होते हैं; चोंच पूरी लंबाई तक पहुँच चुकी होती है पर उतनी चौड़ी नहीं होती। अगले कुछ वर्षों में हर वर्ष चोंच अधिक चौड़ी और चमकीली, चेहरे के धब्बे हल्के, तथा पैर और चोंच अधिक चमकीले होते जाते हैं। प्रजनन काल के बाद वयस्क पक्षी एक आंशिक निर्मोक से गुजरते हैं, जिसमें चोंच के चमकीले प्लेट और आँखों के सजावटी अंग झड़ जाते हैं—यह शीतकालीन रूप मनुष्यों को बहुत कम दिखाई देता है क्योंकि पक्षी तब तक सागर में चला जाता है। Fratercula arctica अटलांटिक का एकमात्र देशज पफिन होने के कारण इसे रंग-बिरंगी चोंच से अन्य ऑक प्रजातियों से आसानी से अलग पहचाना जा सकता है।

वितरण और आवास

Fratercula arctica उत्तरी अटलांटिक महासागर के ठंडे जल का पक्षी है, जो उत्तर-पश्चिमी यूरोप, आर्कटिक के किनारों और पूर्वी उत्तर अमेरिका के तटों पर प्रजनन करता है। वैश्विक आबादी का 90 प्रतिशत से अधिक भाग यूरोप में है—47.7 से 57.8 लाख प्रजनन जोड़े, यानी लगभग 95.5 से 116 लाख वयस्क पक्षी। अकेले आइसलैंड में विश्व के 60 प्रतिशत पफिन बसते हैं, विशेषकर वेस्टमैन द्वीपसमूह में। पश्चिमी अटलांटिक की सबसे बड़ी उपनिवेश—अनुमानतः 2,60,000 से अधिक जोड़े—न्यूफ़ाउंडलैंड और लैब्राडोर के विटलेस बे पारिस्थितिक रिज़र्व में स्थित है। अन्य प्रमुख प्रजनन स्थलों में नॉर्वे के उत्तरी व पश्चिमी तट, फ़ैरो द्वीपसमूह, शेटलैंड, ऑर्कनी, ग्रीनलैंड का पश्चिमी तट और न्यूफ़ाउंडलैंड शामिल हैं।

यह प्रजाति समुद्री द्वीपों और दुर्गम चट्टानों पर घास वाली ढलानों में बिल खोदकर बसना पसंद करती है, जो भूमि पर शिकारियों से बचाव में सहायक होते हैं—यही कारण है कि मुख्य भूमि की तुलना में द्वीप अधिक आकर्षक रहते हैं। घोंसले के बिल औसतन 70 से 110 सेंटीमीटर लंबे होते हैं और समुद्र तल से 218 मीटर तक की ऊँचाई पर पाए जाते हैं।

समुद्र में यह पक्षी उत्तरी सागर सहित पूरे उत्तरी अटलांटिक में विचरण करता है और कभी-कभी आर्कटिक वृत्त तक पहुँच जाता है। गर्मियों में इसकी दक्षिणी सीमा उत्तरी फ्रांस से मेन तक फैली होती है, जबकि सर्दियों में यह भूमध्य सागर और उत्तरी कैरोलिना तक दक्षिण की ओर बढ़ सकता है। यह समुद्री क्षेत्र इतना विशाल (1.5 से 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर) है कि प्रत्येक पक्षी के पास औसतन 1 वर्ग किलोमीटर से अधिक स्थान होता है, जिस कारण खुले सागर में इसे देख पाना दुर्लभ है। मेन में टैग किए गए एक पक्षी ने आठ महीनों में लगभग 7,700 किलोमीटर की यात्रा तय की—पहले उत्तर की ओर लैब्राडोर सागर तक, फिर दक्षिण-पूर्व की ओर मध्य-अटलांटिक तक।

GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़ों में जून (82,082) और जुलाई (78,726) में स्पष्ट शिखर दिखता है, जो प्रजनन काल के दौरान तटों पर पक्षियों की मौजूदगी को दर्शाता है, जबकि नवंबर से फरवरी तक संख्या घटकर कुछ हज़ार रह जाती है, जब पक्षी खुले सागर में बिखर जाते हैं। ध्यान रहे कि ये आँकड़े केवल दृश्य उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि वास्तविक जनसंख्या या पूर्ण विस्तार।

Fratercula arctica के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
82,082
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

प्रजनन काल में Fratercula arctica एक सामाजिक पक्षी है जो बड़ी उपनिवेशों में रहता है, हालाँकि कोई स्पष्ट सामाजिक पदानुक्रम नहीं होता—नर केवल अपने क्षेत्र की रक्षा करते हैं। "पेलिकन-चाल" नामक आक्रामक व्यवहार में पक्षी सिर झुकाकर और शरीर तानकर अतिरंजित चाल से चलता है, जो पड़ोसी पफिन को क्षेत्र से दूर रहने का संकेत देता है; इसके विपरीत सिर झुकाकर सावधानी से चलना विनम्रता या अदृश्य बने रहने का संकेत है।

समुद्र में यह पक्षी अकेला रहता है, और यह जीवनकाल का हिस्सा बहुत कम अध्ययनित है। यह पानी में शक्तिशाली पैरों की थपकियों से आगे बढ़ता है और आराम करते समय भी हवा की दिशा में मुँह किए रहता है। इसका ऊपरी हिस्सा काला और निचला सफेद होना—काउंटरशेडिंग—इसे ऊपर से हवाई शिकारियों और नीचे से जलीय शिकारियों दोनों से छिपाता है।

सर्दियों में समुद्र में रहते हुए यह वार्षिक निर्मोक से गुजरता है, जिसमें भूमि पर रहने वाले अधिकांश पक्षियों के विपरीत यह अपने सभी प्राथमिक पंख एक साथ गिरा देता है—इस कारण जनवरी से मार्च के बीच एक से दो महीने के लिए पूर्णतः उड़ान-रहित हो जाता है। सामान्यतः इसकी उड़ान सीधी और पानी की सतह से लगभग 10 मीटर ऊपर होती है, और यह 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति पकड़ सकता है, हालाँकि उड़ान भरने के लिए पानी पर दौड़ना पड़ता है और उतरना अक्सर अनाड़ी होता है—लहर की चोटी से टकराना या शांत पानी में पेट के बल गिरना।

वसंत में वयस्क पक्षी प्रायः उसी उपनिवेश में लौटते हैं जहाँ वे जन्मे थे, और उपनिवेश झाड़ियों जैसी सीमाओं से उप-उपनिवेशों में बँटा होता है। पहले पहुँचने वाले पक्षी चट्टान किनारे की घनी बिलों पर कब्ज़ा कर लेते हैं जहाँ से उड़ान भरना आसान होता है, जबकि देर से आने वाले या अपरिपक्व पक्षी परिधि की ओर धकेल दिए जाते हैं जहाँ शिकार का खतरा अधिक होता है। घोंसले का औसत क्षेत्र 1.75 वर्ग मीटर होता है, जिसे पक्षी सक्रिय रूप से बचाता है; भोजन के लिए यह घोंसले से 66 किलोमीटर तक की लंबी यात्राएँ या दिन में 9 से 17 किलोमीटर की छोटी यात्राएँ करता है, हालाँकि चूज़े की देखभाल के दौरान यात्राएँ छोटी हो जाती हैं ताकि साथी और बिल की जाँच होती रहे।

संचार

Fratercula arctica की पुकारें अपेक्षाकृत सरल हैं और मुख्यतः प्रजनन काल तक सीमित रहती हैं। बिल के भीतर से एक गहरी गुर्राहट जैसी आवाज़ सुनाई देती है, जबकि उपनिवेश में भूमि के ऊपर पक्षी आमतौर पर चुप रहता है; समुद्र में उड़ान के दौरान कभी-कभी मृदु फुसफुसाहट जैसी ध्वनि निकालता है।

दृश्य और स्पर्श संकेत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "बिलिंग" व्यवहार में जोड़ीदार पक्षी बार-बार चोंच को आगे-पीछे रगड़ते हैं, जो साथी के साथ बंधन को मज़बूत करता है और प्रजनन काल भर दोहराया जाता है। प्रभुत्व दिखाने के लिए पक्षी सीधी मुद्रा अपनाता है—वक्ष के पंख फुलाकर, पूँछ ऊँची कर, धीमी अतिरंजित चाल, सिर को झटकते हुए और मुँह खोलकर।

चोंच और चेहरे का चमकीला रंग भी संचार का एक माध्यम है—यह हर वसंत में विकसित होता है और दोनों लिंगों द्वारा देखा जा सकता है, जिससे संभवतः अधिक चमकीले रंग वाले नर बेहतर गुणवत्ता वाली मादाओं को आकर्षित करते हैं।

शिकार और आहार

शिकार के लिए Fratercula arctica पहले ऊँचाई पर उड़ान भरता है, फिर पानी में गोता लगाता है और अपने पंखों को चप्पू की तरह इस्तेमाल कर पानी के भीतर मछलियों का पीछा करता है। एक ही गोते में यह अपनी चोंच में लगभग 12 छोटी मछलियाँ एक साथ पकड़कर रख सकता है।

यह मुख्यतः मांसाहारी और मछली-भक्षी है। इसके आहार अध्ययनों में बड़ी कैपेलिन (Mallotus villosus), सैंड लांस (Ammodytes) और हेरिंग (Clupea harengus) शामिल पाई गई हैं; इसके अलावा यह सैंड ईल (Hyperoplus) भी खाता है, और चूज़ों को कभी-कभी क्रस्टेशियन भी खिलाए जाते हैं।

यह पक्षी दिन में लगभग 40 बार भोजन करता है, और चूज़ों को पालने वाले माता-पिता उनके लिए अधिक मात्रा में मछलियाँ पकड़ते हैं। यह समुद्री खारा पानी भी पी सकता है, जो इसे लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान बिना मीठे पानी के भी सक्षम बनाता है।

घोंसला और प्रजनन

Fratercula arctica आजीवन एक ही साथी के साथ रहता है, हालाँकि यह जुड़ाव साथी की पहचान से अधिक घोंसले की जगह के प्रति निष्ठा पर आधारित प्रतीत होता है। साथी मिलने या पुनर्मिलन पर "बिलिंग" व्यवहार होता है—दोनों पक्षी सिर हिलाते हुए एक-दूसरे के पास आते हैं और चोंच को खड़खड़ाते हैं; यह प्रेमालाप और बंधन-नवीकरण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यह प्रजनन काल भर, कम मात्रा में, जारी रहता है।

यह लगभग 5 वर्ष (3 से 6 वर्ष के बीच) की आयु में यौन परिपक्व होता है। यह उपनिवेशी घोंसला-निर्माता है, जो घास वाली चट्टानी ढलानों पर बिल खोदता है या कभी-कभी दरारों-पत्थरों के बीच घोंसला बनाता है; कई बार यह खरगोश द्वारा खोदी गई बिल पर कब्ज़ा कर लेता है, मूल निवासी को खदेड़कर। मैंक्स शीयरवाटर जैसे अन्य बिल-वासी पक्षी कभी-कभी पफिन के घोंसले में सेंध लगा देते हैं, जिससे अंडा नष्ट हो सकता है।

अंडा देने का समय दक्षिणी उपनिवेशों में अप्रैल से शुरू होता है, जबकि ग्रीनलैंड में यह जून से पहले शायद ही होता है। मादा हर मौसम में एक ही सफेद अंडा देती है, जो औसतन 61 मिलीमीटर लंबा, 42 मिलीमीटर चौड़ा और लगभग 62 ग्राम वज़नी होता है; यदि यह जल्दी नष्ट हो जाए तो एक और अंडा दिया जा सकता है। ऊष्मायन की ज़िम्मेदारी दोनों माता-पिता साझा करते हैं और यह 39 से 45 दिन (औसतन 43 दिन) तक चलता है।

चूज़ा काले रोएँदार पंखों से ढका हुआ, आँखें खुली अवस्था में और तुरंत खड़ा होने में सक्षम होकर जन्म लेता है; जन्म के समय इसका वज़न लगभग 39 से 45 ग्राम होता है और प्रतिदिन लगभग 10 ग्राम बढ़ता है। शुरुआत में माता-पिता चोंच से चोंच खिलाते हैं, बाद में मछली सीधे घोंसले के फर्श पर गिरा देते हैं। चूज़ा 38 से 50 दिन (औसतन 45 दिन) में उड़ान भरने योग्य होकर स्वतंत्र हो जाता है और रात में अकेला ही समुद्र की ओर निकल पड़ता है; यह अगले दो या अधिक वर्षों तक, प्रायः 3 से 6 वर्ष की आयु तक, भूमि पर नहीं लौटता।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

2018 के अनुमान के अनुसार Fratercula arctica की वैश्विक आबादी लगभग 1.2 से 1.4 करोड़ वयस्क पक्षियों की है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक यूरोप में हैं। आइसलैंड में अकेले लगभग 50 लाख प्रजनन जोड़े हैं, जिससे यह पफिन आइसलैंड की सबसे संख्यावान पक्षी प्रजाति बन जाता है।

पारिस्थितिकी तंत्र में यह छोटी मछलियों और समुद्री अकशेरुकियों (मोलस्क व क्रस्टेशियन) का शिकारी है, साथ ही स्वयं सील, बड़ी मछलियों, गल और स्कुआ जैसी प्रजातियों का शिकार बनता है। स्कुआ प्रायः भोजन लेकर लौटते पफिन का पीछा कर उससे मछली गिरवा देते हैं और फिर उसे लपक लेते हैं—यह संबंध पफिन के लिए हानिकारक नहीं, केवल एक उपद्रव है। यह पक्षी पंख के कीट (Dermanyssus gallinae), पिस्सू और चिचड़ी (Ixodes uriae) जैसे परजीवियों का भी मेज़बान होता है, जो चूज़ों और वयस्कों दोनों में आम पाए जाते हैं।

वर्ष 2000 के बाद से आइसलैंड, नॉर्वे, फ़ैरो द्वीपसमूह, ग्रीनलैंड और ब्रिटेन में तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, फेयर आइल उपनिवेश 1986 में लगभग 20,200 पक्षियों का था, पर 2012 तक यह लगभग आधा रह गया। मौजूदा रुझानों के आधार पर यूरोपीय आबादी में 2000 से 2065 के बीच 50 से 79 प्रतिशत तक गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

संरक्षण और खतरे

IUCN रेड लिस्ट में Fratercula arctica को "सुभेद्य" (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है—यह दर्जा 2015 में "न्यूनतम चिंताजनक" से बढ़ाया गया, जब एक समीक्षा में यूरोपीय परिसर में तेज़ और निरंतर गिरावट सामने आई। इसका वितरण क्षेत्र 16,20,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक फैला होने के बावजूद यह गिरावट जारी है।

सबसे गंभीर खतरों में प्लास्टिक निगलने से होने वाली मृत्यु और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं, जिसके कारण मछलियाँ द्वीपों से दूर चली जाती हैं और पफिन में उनका पीछा करने की सहनशक्ति नहीं होती। घोंसला बनाने वाले द्वीपों पर चूहों, बिल्लियों, कुत्तों और लोमड़ियों जैसे बाहरी शिकारियों का प्रवेश भी गंभीर है—उदाहरणस्वरूप, लंडी द्वीप पर चूहों के कारण आबादी 1939 में 3,500 जोड़ों से घटकर 2000 तक केवल 10 जोड़े रह गई थी। अन्य खतरों में मछली पकड़ने के जालों में डूबना, घटता भोजन स्रोत, पारे और आर्सेनिक जैसे भारी धातुओं का संचय, तथा तेल रिसाव शामिल हैं—तेल से सना पंख ऊष्मा-रोधन और उछाल क्षमता खो देता है, और प्रीनिंग के दौरान विषाक्त पदार्थ निगलने से यकृत व गुर्दे को नुकसान पहुँचता है; 1967 के टॉरी कैनियन तेल रिसाव के बाद अगले वर्ष फ्रांस में प्रजनन करने वाले पफिन की संख्या पूर्व स्तर के केवल 16 प्रतिशत रह गई थी।

यह प्रजाति अमेरिकी प्रवासी पक्षी अधिनियम (US Migratory Bird Act) के तहत संरक्षित है, जिसके अंतर्गत इसका शिकार, पीछा या पकड़ना निषिद्ध है, हालाँकि यह CITES या अमेरिकी संघीय सूची में सूचीबद्ध नहीं है। लंडी द्वीप पर चूहों के उन्मूलन के बाद आबादी सुधरनी शुरू हुई और 2005 में 30 वर्षों में पहली बार वहाँ एक चूज़े को पालते देखा गया। स्कॉटिश सीबर्ड सेंटर द्वारा संचालित SOS Puffin परियोजना फ़र्थ ऑफ़ फ़ॉर्थ के द्वीपों पर 700 से अधिक स्वयंसेवकों की मदद से आक्रामक ट्री मैलो पौधे को हटाकर पफिन के घोंसला-स्थलों को पुनर्स्थापित कर रही है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

सुभेद्य

सांस्कृतिक महत्व

ऐतिहासिक रूप से तटीय समुदाय Fratercula arctica को भोजन के रूप में उपयोग करते थे, अक्सर घोंसलों से उड़ान-पूर्व चूज़ों को निकालकर खा लिया जाता था। आइसलैंड में सन् 1900 के आसपास अत्यधिक शिकार के कारण यह प्रजाति लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुँच गई थी, जिसके बाद 30 वर्षों का शिकार-प्रतिबंध लगाया गया।

आज यह प्रजाति मुख्यतः पारिस्थितिक पर्यटन के ज़रिए आर्थिक लाभ देती है—मेन, आइसलैंड, हेब्राइड्स और न्यूफ़ाउंडलैंड में पर्यटक नौका-यात्राओं से उपनिवेशों को देखने आते हैं। मेन में 2012 में पारिस्थितिक पर्यटन से होने वाली आय का अनुमान 4 अरब डॉलर लगाया गया था। रॉकलैंड स्थित प्रोजेक्ट पफिन विज़िटर सेंटर, जिसे नेशनल ऑडुबन सोसाइटी संचालित करती है, तथा सील आइलैंड नेशनल वाइल्डलाइफ़ रेफ्यूज के लाइव कैमरे आगंतुकों को इन पक्षियों के जीवन की जानकारी देते हैं।

यह प्रजाति अपनी उच्च खाद्य-शृंखला स्थिति के कारण वैज्ञानिक अनुसंधान में जैव-संकेतक (bioindicator) के रूप में भी उपयोग की जाती है, क्योंकि यह पारा और आर्सेनिक जैसे प्रदूषक तत्वों को अपने शरीर में संचित करती है। लोकप्रिय संस्कृति में, स्टार वार्स फ़िल्म शृंखला के काल्पनिक जीव "पोर्ग" को अटलांटिक पफिन से प्रेरित माना जाता है।

रोचक तथ्य

  1. वंश नाम "Fratercula" का शाब्दिक अर्थ "छोटा भिक्षु" है, जो इसके काले-सफेद पंखों की तुलना मध्यकालीन भिक्षुओं के वस्त्रों से करता है।
  2. स्टार वार्स फ़िल्म शृंखला के काल्पनिक जीव "पोर्ग" को अटलांटिक पफिन से प्रेरित बताया जाता है।
  3. टैग किए गए एक पफिन ने मात्र आठ महीनों में लगभग 7,700 किलोमीटर की समुद्री यात्रा तय की।
  4. यह पक्षी लगभग 45 वर्ष तक जीवित रह सकता है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • समुद्री
  • तटीय
  • घास का मैदान

व्यवहार

  • परभक्षी
  • क्षेत्रीय
  • सामाजिक
  • प्रवासी

आहार

  • मछली-भक्षी (आहार)

फ़ोटो

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चट्टान पर खड़ा एक अटलांटिक पफिन, जिसके सिर और पीठ पर चमकदार काले पंख, चेहरे पर हल्के धूसर रंग के धब्बे, सफेद वक्ष, नारंगी-लाल व धूसर रंग की बड़ी त्रिकोणीय चोंच, और चमकीले नारंगी पैर व जाली-युक्त पंजे हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of LifeAnimal Diversity WebAnAge