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Hydnora africana

Hydnora africana

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

जमीन से उगा मोटा, फफूंद जैसा दिखने वाला भूरा-नारंगी फूल, जिसमें तीन मोटी पंखुड़ीनुमा संरचनाएं हैं और कोई पत्तियाँ या तना दिखाई नहीं देता।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0
वर्गीकरण
संघ
Tracheophyta
वर्ग
Magnoliopsida
गण
Piperales
कुल
Hydnoraceae
वंश
Hydnora
प्रजाति
Hydnora africana

Hydnora africana में हरितलवक बिलकुल नहीं पाया जाता, यानी यह पौधा प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता और अपना सारा पोषण किसी अन्य पौधे की जड़ों से चुराकर जीता है। यह इतना असामान्य दिखता है कि इसकी वानस्पतिक संरचना किसी पौधे से अधिक किसी फफूंद जैसी लगती है।

Hydnora africana Hydnoraceae कुल की एक प्रजाति है और दक्षिण अफ्रीका की मूल निवासी है, जहाँ यह Euphorbiaceae कुल के पौधों, विशेष रूप से Euphorbia प्रजातियों की जड़ों पर परजीवी रूप से पलती है। इसका जीवन-चक्र और भूमिगत अस्तित्व इसे पौधों की दुनिया की सबसे अजीब और कम जानी-पहचानी प्रजातियों में से एक बनाता है।

पहचान और रूप

इस प्रजाति की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इसका दृश्य भाग पत्तियों या तने से नहीं बल्कि सीधे परपोषी की जड़ की सतह से निकलने वाले एक मोटे, रसीले फूल से बनता है। भारी वर्षा के बाद जमीन से बाहर निकलने वाला यह फूल आड़ू-नारंगी रंग का होता है और भूमि के ऊपर दिखने वाला भाग नलीनुमा होता है जिसमें तीन खुले छिद्र होते हैं।

फूल में तीन परिदलखंड (perianth segments) होते हैं, जो बाह्यदलों जैसे दिखते हैं और शीर्ष पर आकर आपस में जुड़ जाते हैं, जिससे एक छोटी नली बनती है। इस नली के अगले भाग में पीले-नारंगी रंग की परागकोश-संरचनाएं त्रिकोणीय व्यवस्था में लगी होती हैं, जो पुंकेसर का काम करती हैं; इनके बीच बने अंतराल से भृंग (beetles) नीचे वर्तिकाग्र (stigma) तक फिसल जाते हैं।

फूल के आधार में एक कोष्ठ (cavity) होता है जिसमें सफेद बीजांड भरे रहते हैं, जो बाद में बीज में विकसित होते हैं। पौधे में एक विशेष एंज़ाइम होता है जिससे यह परपोषी की जड़ों को आंशिक रूप से घोल सकता है और उनसे मजबूती से जुड़ जाता है।

फूल की सेपल-संरचनाएं इतनी मजबूत रेशों से बनी होती हैं कि परागणकारी कीट इनमें कई दिनों तक फंसे रहते हैं। जड़ों जैसी दिखने वाली मोटी, रसीली संरचनाएं ही पूरे पौधे का शरीर बनाती हैं, जिससे यह दिखने में पौधे से अधिक फफूंद जैसा प्रतीत होता है।

वितरण और आवास

Hydnora africana दक्षिण अफ्रीका के क्षेत्र में पाया जाता है, जहाँ यह अपने परपोषी Euphorbiaceae कुल के पौधों की जड़ों के पास ज़मीन के भीतर उगता है। इसका अधिकांश जीवन-चक्र मिट्टी के नीचे ही पूरा होता है, और फूल तभी सतह पर दिखाई देता है जब भूमि की नमी और परिस्थितियाँ अनुकूल हों।

GBIF से मिले मासिक अवलोकन आंकड़ों के अनुसार अवलोकनों की संख्या में सितंबर के आसपास स्पष्ट वृद्धि दिखती है, जो संभवतः फूल आने के मौसम से जुड़ी हो सकती है, हालांकि यह आंकड़ा केवल उपस्थिति दर्ज करने वाला है, न कि जनसंख्या या बहुतायत का मापक।

ये आंकड़े प्रजाति के संपूर्ण प्राकृतिक विस्तार या इसकी वास्तविक संख्या का पूर्ण चित्र प्रस्तुत नहीं करते, इसलिए इन्हें केवल संकेतात्मक रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Hydnora africana के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
75
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

प्रजनन और जीवन चक्र

परागण की प्रक्रिया एक जाल जैसी रणनीति पर आधारित है: फूल से निकलने वाली सड़ी हुई दुर्गंध गोबर-भृंगों (dung beetles) और अन्य कीटों को आकर्षित करती है, जो फूल के भीतर घुस जाते हैं और वहां मौजूद कठोर रेशों में फंस जाते हैं।

फंसे हुए कीट फूल की नली में नीचे परागकोशों तक गिरते हैं, जहाँ उनके शरीर पर परागकण चिपक जाते हैं, और वे और नीचे फिसलकर वर्तिकाग्र तक पहुँच जाते हैं, जिससे परागण पूरा होता है। कुछ दिनों तक बंद रहने के बाद फूल खुलता है और फंसे हुए कीटों को मुक्त कर देता है, जो फिर अन्य फूलों तक परागकण पहुँचाते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में किए गए एक प्रयोग में अफ्रीका से लाए गए बीजों को Euphorbia के गमलों में बोया गया, और पहला फूल बीज बोने के साढ़े पाँच वर्ष बाद ही दिखा, जो इस प्रजाति के अत्यंत धीमे और दीर्घकालिक जीवन-चक्र को दर्शाता है।

उपयोग और मानव संबंध

स्थानीय समुदायों द्वारा Hydnora africana का उपयोग भोजन, औषधि और टैनिन के स्रोत के रूप में किया जाता रहा है। दक्षिण अफ्रीका में इसके प्रकंद (rhizome) से बने अर्क का उपयोग पारंपरिक रूप से पेचिश-रोधी (anti-dysenteric) उपचार के रूप में किया जाता है।

यह पौधा टैनिन का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत भी माना जाता है, जो इसके पारंपरिक उपयोगों में इसका महत्व और बढ़ा देता है।

संरक्षण और खतरे

Hydnora africana के लिए किसी औपचारिक संरक्षण स्थिति का उल्लेख उपलब्ध नहीं है, परंतु उपलब्ध जानकारी बताती है कि इसके संरक्षण के लिए ठोस प्रयास अभी तक नहीं किए गए हैं, जबकि प्रजाति पर कई गंभीर खतरे मौजूद हैं।

सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन है, जो इसके यौन प्रजनन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है; यदि परागणकारी कीट लुप्त हो जाएं तो बीज-प्रसार सीमित हो जाएगा। इसके साथ ही, कृषि भूमि के विस्तार के लिए इसके आवासों को तेज़ी से नष्ट किया जा रहा है, और औषधीय उपयोग के लिए इसका अत्यधिक दोहन (overexploitation) हो रहा है।

शोध के अनुसार Hydnora africana की उपस्थिति सबसे अधिक उस महीने की वर्षा पर निर्भर करती है जब वर्षा सबसे अधिक होती है, क्योंकि इसके कोमल, रसीले फूलों को भूमि से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त नमी चाहिए। जैसे-जैसे जलवायु गर्म होती जा रही है, इसके अंकुरण की क्षमता घट रही है, जिससे इसके विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है और इसकी संख्या समय के साथ तेज़ी से घट सकती है।

रोचक तथ्य

  1. प्रजाति नाम africana का अर्थ है "अफ्रीका से", जो इसके मूल क्षेत्र को दर्शाता है।
  2. आणविक अध्ययनों के आधार पर उपकुल Hydnoroideae को एक "आधारभूत एंजियोस्पर्म" (basal angiosperm) माना जाता है, जो इसे सबसे आदिम फूलों वाले पौधों में गिनता है।
  3. Hydnoraceae कुल एंजियोस्पर्म पौधों का ऐसा एकमात्र समूह है जिसमें न तो पत्तियाँ होती हैं और न ही शल्क (scales), और इसके सभी सदस्य अनिवार्य परजीवी (obligate parasites) होते हैं।
  4. इसका फल दक्षिण अफ्रीका के खोइसान (Khoisan) लोगों का एक पारंपरिक भोजन माना जाता है।
  5. यह पौधा अपना पूरा जीवन-चक्र भूमि के भीतर पूरा कर सकता है, और फूल केवल पर्याप्त नमी होने पर ही सतह तोड़कर बाहर निकलता है।

फ़ोटो

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जमीन से उगा मोटा, फफूंद जैसा दिखने वाला भूरा-नारंगी फूल, जिसमें तीन मोटी पंखुड़ीनुमा संरचनाएं हैं और कोई पत्तियाँ या तना दिखाई नहीं देता।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipedia