"दुर्लभ स्वॉलोटेल" नाम के बावजूद यह तितली वास्तव में काफी सामान्य रूप से पाई जाती है—यह विरोधाभासी नाम ब्रिटेन में इसके प्रवासियों की दुर्लभता से जुड़ा है, न कि इसकी वास्तविक संख्या से।
Iphiclides podalirius कीट वर्ग के लेपिडोप्टेरा गण और पैपिलियोनिडे परिवार से संबंधित एक तितली है। इसे "सेल स्वॉलोटेल" या "नाशपाती-वृक्ष स्वॉलोटेल" भी कहा जाता है। IUCN के अनुसार इसकी संरक्षण स्थिति "कम चिंताजनक" है।
इसकी बड़ी, आकर्षक आकृति और धारीदार पंख इसे किसी भी बगीचे या जंगल में आसानी से पहचाने जाने योग्य बनाते हैं, जो इसे देखने लायक एक खास प्रजाति बनाता है।
पहचान और रूप
इस तितली की सबसे पहचानी जाने वाली विशेषता इसके पंखों पर बनी छह बाघ जैसी धारियाँ और पच्चर के आकार के निशान हैं, जो इसे तुरंत अलग पहचान देते हैं।
नर का पंख फैलाव 60 से 80 मिलीमीटर के बीच होता है, जबकि मादाओं में यह 62 से 90 मिलीमीटर तक पहुँच जाता है—यानी मादाएँ सामान्यतः थोड़ी बड़ी होती हैं। यह एक बहुत बड़ी और विशिष्ट दिखने वाली तितली है।
पंखों का आधार रंग मलाईदार सफेद या हल्का पीला होता है। पिछले पंखों के बाहरी किनारे पर नीले अर्धचंद्राकार निशान होते हैं, पीछे के कोने पर एक लंबा नारंगी धब्बा दिखाई देता है, और इसकी एक तुलनात्मक रूप से लंबी पूँछ होती है जो इसे विशिष्ट बनाती है।
यह तितली Papilio machaon, Papilio hospiton, Papilio alexanor और Protographium marcellus जैसी अन्य स्वॉलोटेल प्रजातियों से काफी मिलती-जुलती दिखती है, इसलिए पहचान के समय इन प्रजातियों से भ्रम हो सकता है।
वितरण और आवास
यह तितली पूर्वी पैलिआर्कटिक क्षेत्र और उत्तरी भागों को छोड़कर अधिकांश यूरोप में व्यापक रूप से फैली हुई है। इसका विस्तार उत्तर में लोअर लुसाटिया और मध्य पोलैंड तक, और पूर्व में एशिया माइनर, ट्रांसकॉकेशिया से होते हुए अरब प्रायद्वीप, पाकिस्तान, भारत और पश्चिमी चीन तक पहुँचता है। मध्य स्वीडन और ब्रिटेन में कुछ नमूने दर्ज हुए हैं, लेकिन वे संभवतः भटकी हुई तितलियाँ थीं, नियमित प्रवासी नहीं।
यह प्रजाति बगीचों, कस्बों, खुले वनों और खेतों में पाई जाती है, विशेष रूप से उन जगहों पर जहाँ कँटीली झाड़ियाँ (स्लो) और बाग़ होते हैं। आल्प्स में यह 2,000 मीटर की ऊँचाई तक देखी जाती है, हालाँकि यह आम तौर पर तराई और निचले क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है।
स्लोवाक गणराज्य में मोरावा नदी के बाढ़ क्षेत्र में इस तितली की उपस्थिति को वन-स्टेप वनस्पति वाले संरक्षित ज़ेरोथर्मिक घास के मैदानों का एक अच्छा संकेतक माना गया है, जहाँ कभी कटाई नहीं हुई।
मौसमी देखे जाने के आँकड़े गर्मियों के महीनों में इसकी उपस्थिति बढ़ने का संकेत देते हैं, हालाँकि ये आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, संख्या या पूर्ण वितरण नहीं।

आहार और भोजन की आदतें
यह तितली मुख्य रूप से विभिन्न फूलों से रस चूसकर अपना भोजन प्राप्त करती है। इसके दर्ज किए गए पुष्प साथियों में बेर की प्रजातियाँ जैसे Prunus domestica, Prunus persica, Prunus mahaleb और Prunus avium सबसे अधिक उल्लेखित हैं।
इसके अलावा यह Crataegus monogyna (हॉथॉर्न) और Pyrus communis (नाशपाती) के फूलों से भी रस लेती है। कम मात्रा में यह Origanum vulgare, Anthriscus sylvestris, Callistephus chinensis और Echium vulgare जैसे फूलों पर भी देखी गई है।
बेर और नाशपाती जैसे फलदार वृक्षों के फूलों पर इसकी प्राथमिकता इसके अंग्रेज़ी नाम "नाशपाती-वृक्ष स्वॉलोटेल" से भी जुड़ी हुई प्रतीत होती है, और यही कारण है कि यह बागों में अक्सर देखी जाती है।
संरक्षण और खतरे
IUCN इस प्रजाति को "कम चिंताजनक" श्रेणी में रखता है, यानी वैश्विक स्तर पर इसके विलुप्त होने का तत्काल खतरा नहीं है। कुछ वर्षों में यह तितली काफी प्रचुर मात्रा में दिखाई देती है।
फिर भी, कँटीली झाड़ियों (ब्लैकथॉर्न) की सफाई के कारण यह तितली धीरे-धीरे दुर्लभ होती जा रही है, जो इसके लिए मुख्य खतरा है। कुछ विशेषज्ञ इसे "संवेदनशील" मानते हैं, हालाँकि यह IUCN की रेड लिस्ट में सूचीबद्ध नहीं है।
इस तितली को चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, जर्मनी, हंगरी, लक्ज़मबर्ग, रूस, यूक्रेन, पोलैंड और मैसेडोनिया में क़ानूनी संरक्षण प्राप्त है। ऑस्ट्रिया के कुछ प्रांतों में इसे दुर्लभ और संकटग्रस्त माना जाता है और वहाँ भी संरक्षित है, जबकि आर्मेनिया में इसकी जनसंख्या स्थिर बनी हुई है और वहाँ इसे "कम चिंताजनक" माना गया है। यूरोप भर में इसकी समग्र स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
सांस्कृतिक महत्व
इस तितली का वैज्ञानिक नाम प्राचीन यूनानी पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। Podalirius नाम ट्रोजन युद्ध से संबंधित एक यूनानी चिकित्सक के नाम पर रखा गया है, जो Machaon का भाई था।
इस मिथक से यह भी जुड़ा है कि फलीदार पौधों के एक वंश Podalyria का नाम भी इसी Podalirius के नाम पर रखा गया है, जो दर्शाता है कि इस नाम ने तितली के अलावा वनस्पति जगत को भी प्रभावित किया है।
रोचक तथ्य
- इसके वंश का नाम Iphiclides, Heracles के सौतेले भाई Iphicles की याद दिलाता है, जबकि प्रजाति का नाम podalirius ट्रोजन युद्ध से जुड़े एक यूनानी चिकित्सक के नाम से लिया गया है।
- एक फलीदार पौधों के वंश Podalyria का नाम भी इसी पौराणिक चिकित्सक Podalirius के सम्मान में रखा गया है, जिससे इस तितली का नाम वानस्पतिक जगत से भी जुड़ता है।
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
आहार
- मकरंदाहारी
वर्गीकरण
- संघ
- Arthropoda
- वर्ग
- Insecta
- गण
- Lepidoptera
- कुल
- Papilionidae
- वंश
- Iphiclides
- प्रजाति
- Iphiclides podalirius
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- trophiCH
- Schwarz et al. 2021
- EuPPollNet



