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Parus major

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

संकटमुक्त

यह पक्षी अपनी ज्ञात अधिकतम उम्र लगभग तक जी सकता है, और यह आँकड़ा अक्सर बंदी अवस्था में देखे गए पक्षियों से आया है।

Parus major टिट परिवार Paridae का एक छोटा गाने वाला पक्षी है। यह यूरोप, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और पूर्व में अमूर नदी तक फैला है। उत्तरी अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में भी यह आम है, जहाँ यह आमतौर पर किसी भी तरह के जंगल में साल भर रहता है।

ज़्यादातर पक्षी प्रवास नहीं करते, केवल बहुत कठोर सर्दियों में अपवाद होते हैं। इसकी आबादी को IUCN की रेड लिस्ट में कम से कम चिंता श्रेणी में रखा गया है। यह Parus जीनस की सबसे व्यापक प्रजाति बनी हुई है।

पहचान और रूप

इसकी सबसे उपयोगी पहचान इसका काला गला और सीने पर चौड़ी काली पट्टी है, जो पेट तक जाती है। सिर नीला-काला होता है, गाल सफ़ेद होते हैं, और सीना चमकीला नींबू-पीला होता है।

यह टिट परिवार के बाकी पक्षियों से बड़ा होता है। इसकी लंबाई 12.5 से 14 सेंटीमीटर तक होती है, और इसका वज़न लगभग होता है। पीठ हरी और हल्के जैतूनी रंग की होती है, जबकि पंखों पर नीली-स्लेटी रंगत और एक सफ़ेद पट्टी होती है।

मादा का रंग नर जैसा ही होता है, पर सब कुछ कुछ फीका होता है। उसकी काली पट्टी और गले का काला भाग कम गहरा होता है, और पेट की लकीर पतली और कभी-कभी टूटी हुई होती है। नए पक्षियों की गर्दन और पीठ जैतूनी-भूरी होती है, और उनके पंखों की सफ़ेद कोरें कम साफ़ दिखती हैं।

उप-प्रजातियों में रंग का अंतर काफ़ी होता है। कुछ में ऊपरी भाग अधिक हरा होता है, कुछ में धूसर, और मध्य एशिया की कुछ उप-प्रजातियाँ पीठ पर बहुत अधिक भूरी-धूसर दिखती हैं।

वितरण और आवास

यह मूल रूप से जंगल का पक्षी है, पर यह बगीचों, पार्कों और कब्रिस्तानों में भी अच्छी तरह ढल गया है और मानव बस्तियों के पास रहता है। यूरोप में यह आइसलैंड और उत्तरी स्कैंडिनेविया को छोड़कर लगभग हर जगह मिलता है, और भूमध्यसागर के कई द्वीपों पर भी।

पसंदीदा आवासों में खुले पर्णपाती जंगल, मिश्रित वन, जंगल के किनारे और बगीचे आते हैं। घने जंगलों में, जिनमें कोनिफ़र भी शामिल हैं, यह जंगल की खुली जगहों को पसंद करता है। उत्तरी साइबेरिया में यह बोरियल टैगा में रहता है, जबकि उत्तरी अफ़्रीका में यह मुख्य रूप से ओक के जंगलों में मिलता है। पूर्वी भाग में यह नदी किनारे के विलो और बर्च के जंगलों में अधिक दिखता है।

ऊँचाई वाले इलाकों में यह घने पर्णपाती और शंकुधारी जंगलों से लेकर बिखरे पेड़ों वाले खुले क्षेत्रों तक पाया जाता है। तुर्केस्तान उप-प्रजाति नदी किनारे के विलो और पॉपलर जंगलों, झाड़ियों और नखलिस्तानों में रहती है।

यह आमतौर पर प्रवास नहीं करता। जोड़े अपने इलाके में साल भर रहते हैं, उत्तरी सीमा तक भी। सर्दियों में खराब मौसम होने पर बड़े झुंड, कभी-कभी एक हज़ार पक्षियों तक, उत्तरी यूरोप से बाल्टिक, नीदरलैंड और ब्रिटेन तक जा सकते हैं।

Parus major के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
15,63,099
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

संचार

यह पक्षी अपने वर्ग के बाकी पक्षियों की तरह बहुत आवाज़ करता है, और इसके लगभग 40 प्रकार के स्वर और गीत होते हैं। नर की आवाज़ अधिक सुनाई देती है, जबकि मादा शायद ही कभी बोलती है।

"पिट", "स्पिक" या "चिट" जैसी धीमी एकल ध्वनियाँ साथियों से संपर्क बनाए रखने के लिए होती हैं। वयस्क नर तेज़ "टिंक" की आवाज़ से खतरे का संकेत देते हैं या इलाके के झगड़ों में बोलते हैं। सबसे परिचित गीत "टीचर, टीचर" जैसा लगता है, जो इलाके पर दावा जताने के लिए गाया जाता है।

अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की आवाज़ों में थोड़ा अंतर होता है। दक्षिण एशिया की जो टिट प्रजातियाँ हाल में अलग की गई हैं, वे समशीतोष्ण क्षेत्र के इस पक्षी की पुकार पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं।

शिकार और आहार

यह पक्षी शिकार के लिए पत्तियों से कीड़े चुनकर पकड़ता है। गर्मियों में इसका भोजन मुख्य रूप से कीड़े और मकड़ियाँ होते हैं, और यह पत्तियों के बीच फुदककर उन्हें उठा लेता है।

इसके बड़े शिकार में तिलचट्टे, टिड्डे, झींगुर, लेसविंग, कनखजूरे, बग, चींटियाँ, मक्खियाँ, बीटल, मधुमक्खियाँ, ततैये, घोंघे और वुडलाइस शामिल हैं। प्रजनन के मौसम में यह अपने बच्चों को प्रोटीन से भरपूर सूँडियाँ खिलाने को प्राथमिकता देता है। एक अध्ययन में पाया गया कि यह सेब के बागों में सूँडियों का नुकसान काफ़ी घटा सकता है।

बड़े शिकार को यह "होल्ड-हैमरिंग" से खोलता है। शिकार को पैरों से पकड़कर चोंच से तब तक ठोकता है जब तक वह खाने लायक न हो जाए। इस तरीके से यह लगभग बीस मिनट में हेज़ल नट तोड़ सकता है। सर्दियों में यह चमगादड़ों को भी खाता है, जब वे सो रहे होते हैं और दूसरा भोजन कम होता है।

घोंसला और प्रजनन

यह पक्षी एक ही साथी के साथ जोड़ा बनाता है और अपने इलाके की रक्षा करता है। इसका प्रजनन-स्थल आमतौर पर पेड़ की खोह में होता है, पर कभी-कभी दीवार या चट्टान की दरार में भी। यह नेस्ट बॉक्स को भी आसानी से अपना लेता है।

जनवरी के आसपास इलाके बनते हैं, और देर सर्दी या शुरुआती वसंत में उनकी रक्षा शुरू होती है। मादा खोह के भीतर घोंसला बनाती है, जो पौधों के रेशों, घास, काई, बाल, ऊन और पंखों से बना होता है। कुल मिलाकर प्रजनन अधिकतर जनवरी से सितंबर के बीच होता है, और यूरोप में यह आमतौर पर मार्च के बाद शुरू होता है।

क्लच में अंडों की संख्या अक्सर पाँच से बारह होती है, हालाँकि कभी-कभी यह अठारह तक भी पहुँच सकती है। सफ़ेद अंडों पर लाल धब्बे होते हैं। अंडे सेने का पूरा काम मादा करती है, जबकि नर उसे भोजन देता है। ऊष्मायन अवधि 12 से 15 दिन होती है। बच्चे बिना पंख और बिना आँखों के निकलते हैं, और माता-पिता दोनों मिलकर उन्हें खिलाते हैं।

बच्चे आमतौर पर 16 से 22 दिन में घोंसला छोड़ते हैं, और उसके लगभग आठ दिन बाद वे माता-पिता पर निर्भर नहीं रहते।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

इसकी कुल आबादी का अनुमान 30 करोड़ से 110 करोड़ पक्षियों के बीच है, और इसका फैलाव लगभग 3.24 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। इसने उत्तर में स्कैंडिनेविया और स्कॉटलैंड तक और दक्षिण में इज़राइल और मिस्र तक अपना विस्तार किया है।

शहरों में भी यह आम है। शेफ़ील्ड शहर, जिसकी आबादी लगभग पाँच लाख है, में प्रजनन करने वाली आबादी का अनुमान 17,000 व्यक्ति है। शोर वाले शहरी इलाकों में इसके गीत की आवृत्ति बदल जाती है।

इसकी भूमिका परभक्षी और शिकार दोनों की है। यूरोपीय स्पैरोहॉक इसका शिकारी है, और दूसरे प्रजनन के बच्चों पर खतरा अधिक होता है। बड़े स्पॉटेड कठफोड़वा और ब्रिटेन में ग्रे गिलहरी घोंसलों पर हमला करते हैं। यह पाइड फ़्लाईकैचर से नेस्ट बॉक्स के लिए होड़ करता है, और कभी-कभी उसके नर को मार भी देता है।

सांस्कृतिक महत्व

यह पक्षी बगीचों में बहुत पसंद किया जाता है, क्योंकि यह गिरी या बीज पकड़कर करतब दिखाते हुए खाता है। अपने डिब्बे-आवासों में आसानी से बस जाने के कारण यह ऑर्निथोलॉजी में एक उपयोगी अध्ययन-विषय बन गया है। विशेष रूप से क्लच के आकार जैसे जीवन-इतिहास लक्षणों के विकास को समझने में इसका उपयोग हुआ है।

हिंदू धर्मग्रंथों की कुछ परंपराओं में "पारुस" नाम का उल्लेख मिलता है, जो अहिंसा के सिद्धांत के तहत छोटे कीड़ों तक को हानि न पहुँचाने का उदाहरण माना जाता है।

रोचक तथ्य

  1. इंग्लैंड में कुछ टिट पक्षियों ने दूध की बोतलों के दरवाज़े पर रखे पन्नी के ढक्कन खोलकर ऊपर की मलाई खाना सीख लिया था। यह व्यवहार 1921 में पहली बार देखा गया और अगले दो दशकों में तेज़ी से फैला।
  2. यह पक्षी कभी-कभी पेड़ की छाल के छेद से लार्वा निकालने के लिए चोंच में शंकुधारी पेड़ की सुई का उपयोग करता है।
  3. इसके गीत की संख्या इसके इलाके में घनत्व का भ्रम पैदा करती है, जो एक परिकल्पना के अनुसार इसे दूसरों से बचाती है।
संकटमुक्त

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

व्यवहार

  • परभक्षी
  • क्षेत्रीय
  • आक्रामक
  • सामाजिक

आहार

  • कीटभक्षी

वर्गीकरण

संघ
Chordata
वर्ग
Aves
गण
Passeriformes
कुल
Paridae
वंश
Parus
प्रजाति
Parus major

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
  6. AnAge Longevity