Phallus indusiatus अपनी परिपक्व अवस्था में एक जालीदार, घूंघट जैसी संरचना धारण करता है, जिसके कारण इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे बास्केट स्टिंकहॉर्न, बैंबू मशरूम, बैंबू पिथ, लॉन्ग नेट स्टिंकहॉर्न, क्रिनोलिन स्टिंकहॉर्न या वील्ड लेडी। यह Phallaceae परिवार का एक कवक है, जिसे सामान्यतः स्टिंकहॉर्न समूह में रखा जाता है।
इस प्रजाति का वर्णन पहली बार 1798 में फ्रांसीसी वनस्पतिशास्त्री एतिएन पिएर वेंटेनैट ने किया था। इसे अक्सर एक अलग वंश Dictyophora में भी रखा गया, जिसमें इंडुसियम धारण करने वाली अन्य Phallus प्रजातियाँ शामिल थीं।
फलन काय और पहचान
इस कवक की सबसे विशिष्ट पहचान इसका जालीदार, सफेद घूंघट जैसा इंडुसियम है, जो टोपी से नीचे लटकता है और इसके जाल बहुभुजाकार या गोलाकार हो सकते हैं। शुरुआत में यह कवक एक अंडे जैसी भूमिगत संरचना में बंद रहता है, जो सफेद से लेकर भूरे-लाल रंग की होती है और व्यास में लगभग 6 सेंटीमीटर तक हो सकती है। परिपक्व होने पर आंतरिक दबाव के कारण यह बाहरी झिल्ली फट जाती है और कवक तेजी से बाहर निकलता है।
परिपक्व फलनकाय की ऊँचाई लगभग 25 सेंटीमीटर तक होती है। इसकी टोपी 1.5 से 4 सेंटीमीटर चौड़ी होती है, जिसकी सतह जालीदार व गड्ढेदार होती है और उस पर हरी-भूरी, दुर्गंधयुक्त श्लेष्मिक परत (ग्लीबा) चढ़ी रहती है। डंडी 7 से 25 सेंटीमीटर लंबी और 1.5 से 3 सेंटीमीटर मोटी होती है, जो सफेद, खोखली और स्पंजी होती है। इसकी वृद्धि अत्यंत तेज होती है—सुबह 7 से 8 बजे के बीच यह एक घंटे में 12.5 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती है, और 9 बजे तक 21 सेंटीमीटर की ऊँचाई प्राप्त कर लेती है। पूर्ण विकास में 10 से 15 घंटे लगते हैं, परन्तु यह फलनकाय केवल कुछ ही दिनों तक टिकता है।
इससे मिलती-जुलती कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। Phallus multicolor का रंग अधिक चमकीला और आकार छोटा होता है। P. merulinus की टोपी की जालीदार बनावट ग्लीबा हटने के बाद ही स्पष्ट होती है, जबकि P. indusiatus में यह ग्लीबा के नीचे भी दिखाई देती है, और इसका इंडुसियम अधिक लंबा व भारी होता है। P. duplicatus का इंडुसियम छोटा होता है और P. cinnabarinus की गंध अधिक तीव्र होती है और यह अलग प्रकार की मक्खियों को आकर्षित करता है।
वितरण और आवास
यह कवक मुख्यतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। अफ्रीका में यह कांगो, नाइजीरिया, युगांडा और ज़ैरे में मिलता है, जबकि दक्षिण अमेरिका में ब्राज़ील, गुयाना और वेनेज़ुएला में पाया जाता है। मध्य अमेरिका में कोस्टा रीका और टोबैगो में भी इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है। उत्तर अमेरिका में इसका फैलाव केवल मेक्सिको तक सीमित है।
एशिया में यह इंडोनेशिया, नेपाल, मलेशिया, भारत, दक्षिणी चीन, जापान और ताइवान में पाया जाता है, और ऑस्ट्रेलिया में भी इसे एकत्रित किया गया है। यह विशेष रूप से बांस के जंगलों में उगता है, और भारी वर्षा के बाद इसका फलन अधिक देखा जाता है।
उपलब्ध अवलोकन आँकड़ों में वर्ष के मध्य और अंत के महीनों की ओर वृद्धि दिखती है, जो संभवतः वर्षा के मौसम में इसकी अधिक उपस्थिति से जुड़ी हो सकती है, हालाँकि ये आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि इसकी संख्या या पूर्ण वितरण-सीमा।

पारिस्थितिकी और संबंध
अन्य Phallus प्रजातियों की तरह यह भी एक सैप्रोबिक कवक है, यानी यह लकड़ी और पौधों के अवशेषों को विघटित करके पोषण प्राप्त करता है। यह अस्त-व्यस्त भूमि और लकड़ी के चिप्स के बीच एकल रूप में या समूहों में उगता है, और एशिया में विशेष रूप से बांस के जंगलों में भारी वर्षा के बाद फलता है।
सामान्य कवकों की तरह यह अपने बीजाणुओं को बलपूर्वक नहीं बिखेरता, बल्कि एक चिपचिपा, सड़ी हुई गंध जैसा गूदा उत्पन्न करता है, जो कीड़ों को दूर से आकर्षित करता है। Trigona वंश की बिना डंक वाली मक्खियाँ और Drosophilidae तथा Muscidae परिवार की मक्खियाँ इसे देखने आती हैं, जो गूदा खाकर मल के माध्यम से बीजाणुओं को अन्यत्र फैलाती हैं।
इंडुसियम की सटीक भूमिका पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, परन्तु माना जाता है कि यह दृश्य रूप से कीड़ों को आकर्षित करता है और रेंगने वाले कीड़ों के लिए गूदे तक पहुँचने के लिए सीढ़ी जैसा कार्य करता है।
उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास
पूर्वी एशिया में इस कवक को एक स्वादिष्ट व्यंजन तथा कामोत्तेजक माना जाता है। पहले यह जंगल से ही एकत्र किया जाता था, जहाँ यह प्रचुर मात्रा में नहीं मिलता था, इसलिए इसे विशेष अवसरों के लिए सुरक्षित रखा जाता था। चीन के छिंग राजवंश के समय युन्नान प्रांत से इसे शाही महलों में भेजा जाता था, ताकि महारानी सिक्सी की पसंदीदा कवक-युक्त भोजन की इच्छा पूरी हो सके। यह उनकी 60वीं वर्षगांठ पर परोसे गए प्रसिद्ध सूप के आठ प्रमुख सामग्रियों में शामिल था। बाद में, अमेरिकी राजनयिक हेनरी किसिंजर के चीन दौरे पर आयोजित एक राजकीय भोज में भी इसे परोसा गया था।
1979 से चीन में इस कवक की व्यावसायिक खेती की जा रही है, विशेष रूप से फुजियान प्रांत में, जहाँ इसे बांस के अवशेषों और चूरे पर उगाया जाता है। खेती में सुधार के कारण यह पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ता हो गया—1998 में चीन में लगभग 1,100 मेट्रिक टन उत्पादन हुआ, और वर्ष 2000 तक इसकी कीमत घटकर लगभग 10 से 20 अमेरिकी डॉलर रह गई।
चीन के तांग राजवंश की पारंपरिक औषधि-ग्रंथों में इस कवक के औषधीय गुणों का उल्लेख मिलता है, और दक्षिणी चीन के मियाओ समुदाय आज भी इसे पारंपरिक रूप से विभिन्न बीमारियों के उपचार में उपयोग करते हैं। इसमें पाए जाने वाले जैविक रूप से सक्रिय पॉलिसैकेराइड यौगिकों का अध्ययन किया गया है, जिनमें सूजनरोधी गुण पाए गए हैं।
रोचक तथ्य
- इस कवक का फलनकाय इतनी तेजी से बढ़ता है कि यह एक ही घंटे में 12.5 सेंटीमीटर तक ऊँचा हो सकता है।
- इसे चीन में इतना मूल्यवान माना जाता था कि छिंग राजवंश के दौरान इसे विशेष रूप से शाही रसोई के लिए एकत्रित किया जाता था।
- इससे मिलता-जुलता एक निकट संबंधी P. echinovolvatus चीन से खोजा गया, जिसकी बाहरी झिल्ली की सतह कँटीली होती है और जो अधिक गर्म वातावरण में पलता है।
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
व्यवहार
- निशाचर
आवास
वर्गीकरण
- संघ
- Basidiomycota
- वर्ग
- Agaricomycetes
- गण
- Phallales
- कुल
- Phallaceae
- वंश
- Phallus
- प्रजाति
- Phallus indusiatus
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract



