न्यूज़ीलैंड में पाई जाने वाली यह नन्ही कीटभक्षी चिड़िया अपनी पंखे के आकार में खुलने वाली पूँछ के लिए मशहूर है, जो माओरी संस्कृति में मृत्यु का संदेश लाने वाली मानी जाती है।
Rhipidura fuliginosa, जिसे माओरी भाषा में पीवाकावाका, तीवाकावाका या पीवाईवाका कहा जाता है, न्यूज़ीलैंड की एकमात्र फैनटेल प्रजाति है। इसकी चार उपजातियाँ हैं—दक्षिण द्वीप में R. f. fuliginosa, उत्तर द्वीप में R. f. placabilis, चैथम द्वीपों में R. f. penita, और लॉर्ड होवे द्वीप की अब विलुप्त हो चुकी R. f. cervina। चैथम द्वीप की उपजाति को मोरीओरी भाषा में तचिताके कहा जाता है।
इसकी संरक्षण स्थिति फिलहाल कम चिंताजनक मानी जाती है, और यह पक्षी अपने शांत व्यवहार तथा मिथकीय महत्व के कारण पढ़ने लायक है।
पहचान और रूप
इस चिड़िया की सबसे पहचानने वाली विशेषता इसकी पंखे के आकार में खुलने वाली पूँछ है, जिसके बाहरी पंख हल्के और बीच के पंख गहरे रंग के होते हैं। यह कुल 16 सेंटीमीटर लंबी होती है, जिसमें आधा हिस्सा केवल पूँछ का होता है, और इसका वज़न लगभग 7.5 ग्राम ही होता है।
ऊपरी शरीर मध्यम से गहरे धूसर या धूसर-भूरे रंग का होता है, जबकि नीचे का हिस्सा पीला-नारंगी दिखता है। गले के नीचे एक गहरी पट्टी छाती पर फैली होती है, और आँख के ऊपर सफेद निशान स्पष्ट दिखते हैं। उपजाति के अनुसार बाहरी पूँछ के पंख या तो सफेद किनारी वाले या पूरी तरह सफेद होते हैं।
कुछ पक्षियों में एक गहरे रंग का रूप भी देखने को मिलता है, जिसे "ब्लैक फैनटेल" कहा जाता है—यह दक्षिण द्वीप के लगभग 4% और उत्तर द्वीप के 1% से भी कम पक्षियों में पाया जाता है, और चैथम द्वीपों में पूरी तरह अनुपस्थित है। इस गहरे रूप में सफेद भाग नहीं होते, केवल आँख के पीछे एक सफेद बिंदु रहता है। किशोर पक्षी वयस्कों जैसे ही दिखते हैं, पर उनका शरीर अधिक भूरा और निशान कम स्पष्ट होते हैं।
वितरण और आवास
यह प्रजाति लगभग 2,67,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है और मुख्यतः अर्ध-खुले वनक्षेत्रों में पाई जाती है। यह जंगलों में रहने वाली प्रजाति है, जो घने पेड़ों वाले क्षेत्रों को पसंद करती है।
यह एक स्थानबद्ध (गैर-प्रवासी) पक्षी है, यानी यह साल भर अपने क्षेत्र में ही रहती है। वर्षभर इसकी उपस्थिति लगभग समान रहती है, हालांकि देखे जाने की संख्या में मौसमी बदलाव मामूली रूप से झलकता है—यह केवल उपस्थिति के आंकड़े हैं, न कि जनसंख्या या पूर्ण वितरण क्षेत्र का माप।

व्यवहार और जीवनशैली
यह चिड़िया जागने के समय लगभग कभी स्थिर नहीं रहती—यह लगातार एक शाखा से दूसरी शाखा पर फुदकती रहती है, कभी-कभी ज़मीन पर भी, पर अधिकतर पेड़ों की टहनियों पर उड़ते कीड़ों की तलाश में। यह इंसानों से डरती नहीं है और जंगलों तथा उपनगरीय बगीचों में लोगों के कुछ मीटर के दायरे में भी उड़ती रहती है, क्योंकि इंसानी हलचल—जैसे चलना या खुदाई—से उड़ने वाले छोटे कीड़े इसे आसान शिकार दे देते हैं।
ठंड के समय में फैनटेल पक्षियों का एक झुंड गर्मी बचाने के लिए आपस में सट कर बैठता है। इसकी निरंतर गतिविधि इतनी मशहूर है कि न्यूज़ीलैंड में बेचैन रहने वाले लोगों को "फैनटेल की पूँछ" कहा जाता है।
इसकी पुकार धात्विक जैसी "चीक" ध्वनि होती है, जो अकेले या अधिकतर बार-बार कर्कश रूप में सुनाई देती है।
घोंसला और प्रजनन
यह प्रजाति मौसमी रूप से प्रजनन करती है—उत्तर द्वीप में अगस्त से मार्च, दक्षिण द्वीप में सितंबर से जनवरी, और चैथम द्वीपों में अक्टूबर से जनवरी तक घोंसले बनाए जाते हैं। एक मौसम में सामान्यतः दो या अधिक बार बच्चे निकाले जाते हैं।
दोनों नर और मादा मिलकर पेड़ों की दोशाखाओं में कप के आकार का सघन घोंसला बनाते हैं, जिसमें मॉस, छाल और रेशे का उपयोग होता है और अक्सर मकड़ी के जाल से इसे पूरा किया जाता है। सामान्यतः तीन से चार क्रीम रंग के अंडे दिए जाते हैं, जिन पर धूसर और भूरे धब्बे होते हैं। अंडों को सेने की अवधि लगभग दो सप्ताह होती है, और यह ज़िम्मेदारी भी दोनों माता-पिता साझा करते हैं।
दूसरी बार का घोंसला बनाना और अंडे सेना तब भी शुरू हो सकता है जब पहली बार के उड़ चुके बच्चों को अब भी भोजन दिया जा रहा हो। नर पक्षी घोंसले से उड़ने के मात्र दो महीने बाद ही प्रजनन शुरू कर सकते हैं। न्यूज़ीलैंड के दो कोयल प्रजातियाँ कभी-कभी इसके घोंसलों में अपने अंडे डाल देती हैं।
वेलिंगटन के शहरी क्षेत्र में देखी गई 81 घोंसला-प्रयासों में से लगभग 45% ही सफल रहे—हर चार में से एक घोंसला छोड़ दिया गया या परित्यक्त हुआ, और इतने ही अनुपात में शिकारियों का शिकार बने। पतली शाखाओं पर बने घोंसले मोटी शाखाओं पर बने घोंसलों की तुलना में जहाज़ी चूहों से बचने में अधिक सफल रहे।
सांस्कृतिक महत्व
माओरी संस्कृति में पीवाकावाका को अनुकूलनशीलता, ऊर्जा और धैर्य का प्रतीक माना जाता है, जो इसके जंगल में फुर्तीले विचरण से जुड़ा है। यह विशेषता माओरी कहावतों में भी दिखती है, जैसे "मी को पीवाईवाका कोए!"—जिसका उपयोग चुगली करने वाले व्यक्ति को ताना देने के लिए होता है, और यह इस पक्षी की मिथकीय भूमिका एक दखलंदाज़ पर्यवेक्षक के रूप में दर्शाता है।
माओरी पौराणिक कथाओं में पीवाकावाका को देवताओं से मृत्यु का संदेश लाने वाला दूत माना जाता है। इसकी उभरी हुई आँखें और अनियमित उड़ान इस कथा से जोड़ी जाती हैं कि माउई ने इसे अपनी पूर्वज माहुइका—अग्नि देवी—का ठिकाना न बताने पर दबा दिया था। बाद में जब माउई हिने-नुई-ते-पो नामक मृत्यु देवी के माध्यम से अमरता पाने का प्रयास करता है, तो फैनटेल पक्षियों का एक झुंड उसे देखकर हँसने लगता है, जिससे देवी जाग जाती है और उसे अपने काले पत्थर के दांतों से कुचल देती है।
तीवाकावाका न्यूज़ीलैंड में बसने वाले पहले माओरी प्रवासियों में से एक का नाम भी है।
रोचक तथ्य
- माओरी पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस चिड़िया को संसार में मृत्यु के आगमन का कारण माना जाता है, क्योंकि माउई का अमरता पाने का प्रयास फैनटेल पक्षियों के हँसने से विफल हो गया।
- सन् 2017 में नॉर्थलैंड में एक पूरी तरह सफेद फैनटेल कैमरे में कैद हुई थी, जिसे विशेषज्ञ अल्बिनो नहीं बल्कि ल्यूसिज़्म (आंशिक रंगहीनता) का मामला मानते हैं।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Aves
- गण
- Passeriformes
- कुल
- Rhipiduridae
- वंश
- Rhipidura
- प्रजाति
- Rhipidura fuliginosa
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- AVONET Bird mass, habitat, migration, diet and range size
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- Wardeh et al. 2015 (EID2)



