Tremella mesenterica एक जेली जैसा कवक है, जिसका फलन काय पीले-नारंगी रंग का और चिकना होता है। यह Basidiomycota समूह के Tremellaceae कुल का सदस्य है। इसका फलन काय 7.5 सेंटीमीटर तक चौड़ा हो सकता है और इसकी सतह लोबदार या मस्तिष्क जैसी टेढ़ी-मेढ़ी होती है।
यह दुनिया के लगभग हर महाद्वीप में मिलता है, जिनमें उत्तरी, मध्य और दक्षिणी अमेरिका, अफ़्रीका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह मृत टहनियों और पेड़ों की छाल पर उगता है और नम मौसम में फलन काय बनाता है।
इसकी सामान्य उपस्थिति और लकड़ी पर इसका विशिष्ट रूप इसे जंगल में आसानी से पहचाने जाने वाला कवक बनाते हैं। इसके जीवन में लकड़ी सड़ाने वाले दूसरे कवकों से इसका गहरा संबंध भी है।
फलन काय और पहचान
इसका फलन काय अनियमित आकार का होता है और अक्सर मृत टहनियों की छाल फाड़कर बाहर निकलता है। यह 7.5 सेंटीमीटर तक चौड़ा और 2.5 से 5 सेंटीमीटर ऊँचा हो सकता है। इसका आकार गोल से लेकर कई लोबों वाला या मस्तिष्क जैसा होता है।
सूखने पर यह कठोर हो जाता है, जबकि गीला होने पर जेली जैसा नरम पर मज़बूत रहता है। सतह आम तौर पर चिकनी होती है और लोब अर्धपारदर्शी होते हैं। इसका रंग गहरा पीला या चमकीला पीला-नारंगी होता है, जो धीरे-धीरे हल्के पीले रंग में बदल जाता है। कभी-कभी यह रंगहीन और सफ़ेद भी हो सकता है। सूखने पर इसका रंग गहरे लाल या नारंगी जैसा हो जाता है।
सूक्ष्मदर्शी में बेसिडिया अंडाकार से लगभग गोल दिखते हैं और इनकी चौड़ाई आम तौर पर 15 से 21 माइक्रोमीटर होती है। बीजाणु भारी मात्रा में इकट्ठे होने पर सफ़ेद या हल्के पीले दिखते हैं। युवा फलन काय पर चमकीले पीले कोनिडिया की परत भी दिख सकती है।
इसे Tremella aurantia से भ्रमित किया जा सकता है, जो Stereum hirsutum पर परजीवी के रूप में उगता है। Tremella aurantia की सतह मैट होती है, जबकि Tremella mesenterica की सतह चिकनी और फिसलन भरी होती है। सूखने पर Tremella aurantia अपना आकार बनाए रखता है, जबकि Tremella mesenterica सिकुड़कर पतली परत जैसा हो जाता है। Dacrymyces chrysospermus जैसे Dacrymycetaceae कुल के कवकों में बेसिडिया Y-आकार के होते हैं और इनमें दो बीजाणु बनते हैं, जबकि Tremella में बेसिडिया लंबाई में विभाजित होते हैं।
वितरण और आवास
Tremella mesenterica उत्तरी, मध्य और दक्षिणी अमेरिका, अफ़्रीका, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में दर्ज हुआ है। इसका फैलाव व्यापक है और यह कई जलवायु वाले क्षेत्रों में मिलता है।
यह नम से गीले आवासों को पसंद करता है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में यह कभी-कभी मेपल, पॉपलर या पाइन पर मिलता है, लेकिन सबसे अधिक रेड एल्डर पर दिखता है।
यह Peniophora वंश के लकड़ी सड़ाने वाले कुछ कवकों के माइसीलियम पर परजीवी के रूप में पनपता है। कभी-कभी Tremella mesenterica और इसका मेज़बान कवक एक साथ फलन करते हुए मिलते हैं।
वर्ष भर नम मौसम में फलन काय बनते हैं। प्रेक्षणों की संख्या जनवरी, दिसंबर और नवंबर में सबसे अधिक दिखती है, जबकि जून से अगस्त के बीच यह कम दिखता है।

जीवन चक्र
इसके जीवन चक्र में एक यीस्ट जैसा चरण होता है, जो बेसिडियोस्पोर के कलिकायन से बनता है। यही चरण अलैंगिक और लैंगिक प्रजनन के बीच बदलाव को संभव बनाता है।
लैंगिक प्रजनन में दो संगत मेटिंग प्रकार की अगुणित यीस्ट कोशिकाएँ एक-दूसरे को संकेत देती हैं। हर प्रकार एक मेटिंग फेरोमोन छोड़ता है, जो विपरीत प्रकार की कोशिका में विभाजन रोककर एक लंबी मेटिंग नली बनवाता है। यह नली यीस्ट में कलिका निकलने की प्रक्रिया से मिलती-जुलती है।
फलन काय लकड़ी की छाल के नीचे बने प्राइमोर्डियम से निकलते हैं। कभी-कभी एक ही प्राइमोर्डियम से एक से अधिक फलन काय अलग-अलग निकल आते हैं।
उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास
कुछ स्रोतों में इसे खाने योग्य माना गया है, हालाँकि इसका स्वाद लगभग नहीं होता। इसकी जेली जैसी और लचीली बनावट सूप को गाढ़ापन और कुरकुरापन देती है। चीन में शाकाहारी लोग इसका उपयोग एक प्रतिरक्षा-प्रभावी ठंडे सूप में करते हैं, जिसमें कमल के बीज, लिली के कंद और जुजुब जैसी चीज़ें भी डाली जाती हैं।
इस जीनस के कुछ कवक ऐसे बहुशर्करा बनाते हैं जो चिकित्सा क्षेत्र में रुचि का विषय हैं। 1966 में Slodki ने Tremella mesenterica के अगुणित कोशिकाओं से एक अम्लीय बहुशर्करा की खोज की, जो Cryptococcus laurentii के बहुशर्करा से काफ़ी मिलती-जुलती थी। इसे ग्लुकुरोनोज़ाइलोमैनन कहा जाता है, जिसकी संरचना में मैनन की रीढ़ पर ज़ाइलन की शाखाएँ नियमित रूप से जुड़ी होती हैं।
प्रयोगशाला परीक्षणों में इस बहुशर्करा से प्रतिरक्षा-उत्तेजक, मधुमेह-रोधी, सूजन-रोधी, कोलेस्ट्रॉल-घटाने, यकृत-संरक्षक और एलर्जी-रोधी प्रभाव जुड़े हैं। चीन में इस यौगिक के कैंसर-रोकथाम और प्रतिरक्षा बढ़ाने से जुड़े कई पेटेंट दर्ज हैं।
रोचक तथ्य
- इसका नाम लोककथाओं से जुड़ा है, क्योंकि इसका रंग मक्खन जैसा पीला होता है और इसे जादूगरनियों द्वारा लोगों पर टोना करने से जोड़ा गया है।
- आधुनिक संस्कृति में, खासकर वन-यात्रियों और प्रकृति लेखकों के बीच, इसे वन स्वास्थ्य और जैव विविधता का प्रतीक माना जाता है।
- यह मृत लकड़ी को अन्य अपघटक जीवों से जोड़ने में भूमिका निभाता है, इसलिए इसे कवक जीवन की परस्पर निर्भरता का उदाहरण माना जाता है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Basidiomycota
- वर्ग
- Tremellomycetes
- गण
- Tremellales
- कुल
- Tremellaceae
- वंश
- Tremella
- प्रजाति
- Tremella mesenterica
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract



