पीली ओट घास (Trisetum flavescens) यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ़्रीका की मूल निवासी है, फिर भी यह उत्तरी अमेरिका और हिमालय क्षेत्र तक पहुँच चुकी है।
यह पोएसी कुल की एक घास है। यह यूरोप के भूमध्यसागरीय क्षेत्र, कॉकेशस, साइबेरिया और पश्चिमी व मध्य एशिया में पाई जाती है। इसकी जलवायु समशीतोष्ण मानी जाती है।
पशुओं के लिए यह घास चारे के रूप में जानी जाती है, पर इसके कुछ गुण पशुओं के लिए हानिकारक भी हैं, जिनका विवरण आगे के भागों में है।
पहचान और रूप
इस घास की सबसे उपयोगी पहचान इसकी संकरी, फैली हुई पुष्पमंजरी है, जो पुष्पक्रम कहलाती है। नई अवस्था में यह हरी-पीली से बैंगनी रंग की होती है और पकने पर चमकीली सुनहरी पीली हो जाती है।
यह बहुवर्षीय घास गुच्छों में उगती है। इसके गुच्छे आम तौर पर 60 से 80 सेंटीमीटर ऊँचे होते हैं, और कभी-कभी ये 1 मीटर से भी ऊँचे हो जाते हैं।
इसके पत्ते और तना घास जैसे हरे होते हैं, जो पुष्पमंजरी के रंग के साथ मिलकर इसे अन्य घासों से अलग करते हैं।
वितरण और आवास
पीली ओट घास का मूल वितरण यूरोप के अधिकांश देशों में फैला है, जिसमें फ़्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पोलैंड, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं। यह भूमध्यसागरीय द्वीपों, जैसे कोर्सिका, सार्डिनिया, सिसिली और क्रीट, में भी मिलती है।
उत्तरी अफ़्रीका में यह मोरक्को, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया में पाई जाती है। पश्चिमी एशिया में इसका क्षेत्र ईरान, इराक, लेबनान-सीरिया, तुर्की और तुर्कमेनिस्तान तक फैला है। अज़ोरेस द्वीप समूह में भी यह मूल रूप से मिलती है।
उत्तरी अमेरिका के कई राज्यों और प्रांतों में, जैसे कैलिफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क, ओंटारियो और क्यूबेक में, यह बाद में लाकर उगाई गई है। हिमालय क्षेत्र के पूर्वी भाग और नेपाल में भी इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है।
वर्ष के अवलोकन जून के आसपास सबसे अधिक मिलते हैं, जिससे गर्मियों के मध्य में इसकी उपस्थिति अधिक दिखाई देती है।

वृद्धि और स्वरूप
पीली ओट घास बहुवर्षीय है, यानी इसकी जड़ें कई वर्षों तक जीवित रहती हैं और हर वर्ष फिर से पत्ते और पुष्पमंजरी निकालती हैं। इसका स्वरूप गुच्छेदार होता है, जिसमें कई तने एक ही जड़ से निकलते हैं।
परिपक्व गुच्छे आम तौर पर 60 से 80 सेंटीमीटर ऊँचे होते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में 1 मीटर से ऊपर भी जा सकते हैं।
पारिस्थितिकी और संबंध
पीली ओट घास कई शाकाहारी जीवों का भोजन है। इसकी पत्तियाँ और तने मुख्य रूप से टिड्डों और झींगुरों के कई समूहों द्वारा खाए जाते हैं, जिनमें Stenobothrus lineatus, Decticus albifrons और Oedipoda caerulescens जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं। भेड़ (Ovis aries) भी इसे चरती है।
इसकी जड़ें कुछ कवक प्रजातियों के साथ सहजीवी संबंध बनाती हैं। इनमें Entrophospora lamellosa, Funneliformis caledonius और Diversispora epigaea जैसी प्रजातियाँ मुख्य हैं, जो पौधे को मिट्टी से पोषक तत्व लेने में मदद करती हैं।
यह घास शीतोष्ण और नम मिट्टी वाले चरागाहों में पनपती है।
उपयोग और मानव संबंध
पीली ओट घास का सबसे बड़ा मानव संबंध चरागाह और पशु-चारे से जुड़ा है। पर इसे पशुओं के लिए विषैला माना गया है, इसलिए इसके चारे का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
घोड़ों में कंडराओं और स्नायुबंधनों में कोमलता, वज़न घटना और गति में कठिनाई देखी गई है। इसलिए पशुपालकों के लिए इस घास की पहचान महत्वपूर्ण है।
रोचक तथ्य
- इसका अंग्रेज़ी नाम येलो ओटग्रास है, और इसके पौधे की पुष्पमंजरी पकने पर सुनहरी पीली हो जाती है, जिससे इसका नाम पड़ा।
- यह घास भूमध्यसागरीय क्षेत्र और साइबेरिया तक फैली है, जो इसे एक विस्तृत क्षेत्र वाली घास बनाती है।
- यह एक विषाणु से भी प्रभावित हो सकती है, जिसे येलो ओट ग्रास मोज़ेक वायरस कहते हैं।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
आवास
वृद्धि का रूप
- घास-रूपी पौधा (ग्रेमिनॉइड)
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Liliopsida
- गण
- Poales
- कुल
- Poaceae
- वंश
- Trisetum
- प्रजाति
- Trisetum flavescens
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Plants of the World Online Native range, life form and climate (WCVP)
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- trophiCH
- GlobalAMFungi



