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मक्का

Zea mays

संकटमुक्त

मक्का की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पौधा अपने आप प्राकृतिक रूप से फैल नहीं सकता — इसके दाने पके भुट्टे से अपने-आप गिरते नहीं, जबकि इसके जंगली पूर्वज तेओसिंटे में ऐसा होता है। इसका मतलब है कि मक्का पूरी तरह मानव हस्तक्षेप पर निर्भर एक फसल बन चुकी है।

Zea mays एक लंबी, मोटी घास है जो Poaceae परिवार से संबंधित है और अनाज उत्पन्न करती है। इसे हिंदी में मक्का कहा जाता है। यह पौधा Plantae जगत, Poales गण की सदस्य है और इसकी संरक्षण स्थिति IUCN के अनुसार "न्यूनतम संकट" (Least Concern) श्रेणी में रखी गई है।

लगभग 9,000 वर्ष पहले दक्षिणी मेक्सिको के आदिवासी समुदायों ने जंगली तेओसिंटे से मक्का को पालतू बनाया था। मूल अमेरिकी समुदाय इसे सेम और कद्दू के साथ "तीन बहनों" की मिश्रित खेती पद्धति में उगाते थे, जो कृषि इतिहास की एक अनोखी और प्रभावी प्रणाली मानी जाती है।

पहचान और रूप

मक्का को पहचानने की सबसे आसान कसौटी इसका एकल, सीधा तना है जिसके ऊपरी सिरे पर परागकण छोड़ने वाला "टैसल" (नर पुष्पगुच्छ) और तने के मध्य भाग में रेशम जैसे बालों वाला भुट्टा (मादा पुष्पगुच्छ) होता है। यह पौधा एकलिंगाश्रयी (monoecious) होता है, यानी एक ही पौधे पर नर और मादा दोनों फूल अलग-अलग स्थानों पर लगते हैं।

पौधे की ऊँचाई 1.2 से 4 मीटर तक होती है। लंबी, संकरी पत्तियाँ तने की गांठों से एकांतर क्रम में निकलती हैं। भुट्टा कई पर्तदार पत्तों (हस्क) से ढका रहता है और इसमें 8 से 32 पंक्तियों में दाने लगते हैं; एक बड़े भुट्टे पर 1,200 तक दाने हो सकते हैं।

आधुनिक किस्मों के दाने आमतौर पर पीले या सफेद होते हैं, लेकिन अन्य किस्मों में नारंगी, लाल, भूरे, नीले, बैंगनी या काले रंग के दाने भी मिलते हैं। पीला रंग कैरोटिनॉइड से, लाल रंग एंथोसायनिन और फ्लोबाफेन से, तथा नारंगी और हरे रंग इन रंगद्रव्यों के मिश्रण से बनते हैं।

मक्का में "शॉर्ट-डे फोटोपेरियोडिज़्म" पाया जाता है, यानी फूल आने के लिए इसे रातों की निश्चित लंबाई और 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले पर्याप्त गर्म दिन चाहिए। उष्णकटिबंधीय किस्मों को अधिक अक्षांश वाले क्षेत्रों में उगाने पर वे बीज बनने से पहले ही अत्यधिक ऊँचाई तक बढ़ जाती हैं। इसकी जड़ें उथली होती हैं, जिससे यह सूखे और तेज़ हवाओं के प्रति संवेदनशील रहता है।

वितरण और आवास

मक्का मूल रूप से अमेरिका की फसल है, लेकिन आज यह विश्व के अधिकांश हिस्सों में व्यापक रूप से उगाई जाती है, जिसमें चीन भी शामिल है जहाँ इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। यह मुख्यतः एक खेती की जाने वाली अनाज फसल है, जो प्राकृतिक जंगली आवासों में स्वतंत्र रूप से नहीं पाई जाती।

मासिक अवलोकन आंकड़ों में जनवरी में सबसे अधिक (16,435) और नवंबर में सबसे कम (4,648) संख्या दर्ज की गई है, जबकि जून में भी एक उल्लेखनीय वृद्धि (11,568) दिखती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये आंकड़े केवल उपस्थिति के अवलोकन दर्शाते हैं, न कि पौधों की वास्तविक जनसंख्या या इसके संपूर्ण वितरण क्षेत्र की जानकारी। इससे यह संकेत मिल सकता है कि सर्दियों की शुरुआत और मध्य-गर्मियों में अवलोकन गतिविधि अधिक रही, लेकिन इसे मौसमी उपस्थिति का सतर्क संकेत ही माना जाना चाहिए, स्पष्ट प्रमाण नहीं।

Zea mays के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
16,435
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

वृद्धि और स्वरूप

मक्का की उत्पत्ति लगभग 9,000 वर्ष पहले दक्षिणी मेक्सिको के बाल्सास नदी घाटी क्षेत्र में हुई मानी जाती है, जहाँ से यह उत्तर और दक्षिण की ओर फैलती गई। यह लगभग 8,000 वर्ष पहले इक्वाडोर के उच्चभूमि क्षेत्रों में, लगभग 7,600 वर्ष पहले मध्य अमेरिका के निचले इलाकों में, और 7,000 से 6,000 वर्ष पहले कोलंबिया की एंडीज़ घाटियों में पहुँची।

प्रारंभिक मक्का के पौधों में एक ही, छोटा भुट्टा लगता था। ओल्मेक और माया सभ्यताओं ने मेसोअमेरिका में मक्का की अनेक किस्मों की खेती की और इसे पकाने, पीसने तथा निक्स्टामलाइज़ेशन प्रक्रिया से संसाधित करने की विधियाँ विकसित कीं। लगभग 3,000 वर्ष पहले तक मक्का ओल्मेक संस्कृति के कैलेंडर, भाषा और पौराणिक कथाओं के केंद्र में आ गई थी।

दक्षिण-मध्य चिली के मापुचे लोग हिस्पैनिक-पूर्व काल में मक्का को क्विनोआ और आलू के साथ उगाते थे। इंका साम्राज्य के विस्तार से पहले ही मक्का का व्यापार और परिवहन दक्षिण में 40° दक्षिणी अक्षांश तक अर्जेंटीना के लाकार विभाग के मेलिन्कीना क्षेत्र तक होता था, जो संभवतः चिली से एंडीज़ पार करके पहुँचा था।

प्रजनन और जीवन चक्र

प्रागैतिहासिक काल में मक्का के प्रजनन से बड़े पौधे और बड़े भुट्टे उत्पन्न करने वाली किस्में विकसित हुईं। आधुनिक प्रजनन की शुरुआत उन किसानों से हुई जिन्होंने अपने खेतों में उच्च उत्पादक किस्मों का चयन किया; जेम्स एल. रीड ने 1860 के दशक में "रीड्स येलो डेंट" किस्म विकसित की। बाद में सी. जी. हॉपकिंस (लगभग 1896), जी. एच. शुल (1909) और डी. एफ. जोन्स (लगभग 1918-1922) ने क्रमशः पंक्ति-चयन, चयनित इनब्रेड रेखाओं से संकर, और अत्यंत सफल डबल-क्रॉस संकर विकसित किए।

1940 के दशक से मक्का की सर्वोत्तम किस्में इनब्रेड रेखाओं से बने प्रथम-पीढ़ी के संकर हैं, जिन्हें उत्पादन, पोषण, सूखा-सहनशीलता तथा कीट-रोग प्रतिरोध जैसे गुणों के लिए अनुकूलित किया गया है। एक किस्म "ओलोतोन" ने नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीवों के साथ सहजीवी संबंध विकसित किया है, जो पौधे को इसकी 29% से 82% तक नाइट्रोजन आवश्यकता की पूर्ति करता है। कुछ किस्मों को कई भुट्टे उत्पन्न करने के लिए विकसित किया गया है, जो एशियाई व्यंजनों में उपयोग होने वाली "बेबी कॉर्न" का स्रोत हैं, तथा एक तेज़ी से फूल देने वाली "मिनी-मक्का" किस्म शोध कार्यों में सहायक है।

अंतरराष्ट्रीय मक्का और गेहूँ सुधार केंद्र (CIMMYT) 1980 के दशक से पारंपरिक प्रजनन कार्यक्रम चला रहा है और अपने "अफ्रीका के लिए सूखा-सहनशील मक्का" परियोजना के माध्यम से अफ्रीका में संकर बीज वितरित करता है। उष्णकटिबंधीय पुरातन किस्में रोग और कीट प्रतिरोधी जीन्स का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई हैं, जिन्हें उत्पादक किस्मों में समाहित किया जाता है।

उपयोग और मानव संबंध

मक्का मध्य अमेरिकी सभ्यताओं में केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन, अस्तित्व और आध्यात्मिकता का प्रतीक रही है। माया संस्कृति में इसे पवित्र माना जाता था और इसकी उपस्थिति सृष्टि की कथाओं तथा कृषि संबंधी अनुष्ठानों में स्पष्ट झलकती है; कई मेसोअमेरिकी समुदाय मानते थे कि मानव की उत्पत्ति स्वयं मक्का से हुई थी, और मक्का देवता उनके पौराणिक कथाओं व रीति-रिवाजों के केंद्र में रहे।

1492 में यूरोपीय आगमन के बाद स्पेनिश खोजकर्ता मक्का को यूरोप ले गए, जहाँ से यह कुछ ही दशकों में स्पेन, इटली, पश्चिम अफ्रीका, फिलीपींस और अन्य क्षेत्रों में फैल गई। 17वीं शताब्दी तक यह दक्षिणी यूरोप में सामान्य किसान भोजन बन गई थी और 18वीं शताब्दी तक दक्षिणी फ्रांस व इटली के किसानों का मुख्य आहार बन गई, विशेष रूप से इटली में "पोलेंटा" के रूप में। हालाँकि, जब यह पश्चिमी कृषि प्रणालियों में एकमात्र मुख्य आहार बनी, तो पेलाग्रा नामक कुपोषण रोग फैला, क्योंकि मूल अमेरिकी लोगों की क्षार-जल में मक्का भिगोने वाली निक्स्टामलाइज़ेशन प्रक्रिया अपनाई नहीं गई थी; यह प्रक्रिया नियासिन नामक बी-विटामिन को मुक्त करती है।

आधुनिक समय में मक्का को "तीन बहनों" की बहुफसली पद्धति में सेम और कद्दू के साथ उगाया जाता रहा है, जिसमें मक्का सेम को सहारा देती है, सेम नाइट्रोजन-स्थिरीकरण से मिट्टी को समृद्ध करती है, और कद्दू भूमि को छाया देकर खरपतवार व वाष्पीकरण रोकता है। आज जीन-संशोधित मक्का (मुख्यतः Bt मक्का) व्यापक रूप से उगाई जाती है; 2016 तक अमेरिका की 92% मक्का फसल आनुवंशिक रूप से संशोधित थी।

रोचक तथ्य

  1. मक्का का पालतूकरण लगभग 9,000 वर्ष पहले दक्षिणी मेक्सिको में जंगली तेओसिंटे से हुआ था, और आज यह अपने जंगली पूर्वज से बहुत अलग दिखती है।
  2. मेसोअमेरिकी संस्कृतियों में यह माना जाता था कि मानव जाति की उत्पत्ति स्वयं मक्का से हुई थी, और मक्का देवता उनके धार्मिक जीवन के केंद्र में रहे।
  3. मक्का देवता से जुड़ी कथाएँ और अनुष्ठान यह दर्शाते हैं कि यह अनाज केवल शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा और विश्वासों को भी पोषित करने वाला माना जाता था।
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फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

वृद्धि का रूप

  • घास-रूपी पौधा (ग्रेमिनॉइड)

वर्गीकरण

संघ
Tracheophyta
वर्ग
Liliopsida
गण
Poales
कुल
Poaceae
वंश
Zea
प्रजाति
Zea mays

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits