Aspergillus niger की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यह अत्यंत अम्लीय परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है, और यही क्षमता इसे साइट्रिक अम्ल के औद्योगिक उत्पादन में एक प्रमुख जैविक स्रोत बनाती है।
यह Aspergillus वंश के Nigri खंड से संबंधित एक फफूंद है। Aspergillus वंश की प्रजातियाँ मिट्टी, जल, वनस्पति, मलमूत्र, विघटित पदार्थों और वायु में सर्वत्र पाई जाती हैं, और तेज़ी से बढ़कर अंकुरण के कुछ ही दिनों के भीतर बीजाणु उत्पन्न कर सकती हैं।
यही विशिष्ट संयोजन — उच्च उत्पादन दर, स्राव-क्षमता और अम्ल-सहनशीलता — इसे अम्ल, प्रोटीन और जैव-सक्रिय यौगिकों के उत्पादन के लिए एक अनिवार्य औद्योगिक सूक्ष्मजीव बनाता है, जिसकी चर्चा आगे विस्तार से की गई है।
फलन काय और पहचान
चूँकि Aspergillus niger एक सूक्ष्म फफूंद है, इसकी पहचान का सबसे विश्वसनीय आधार इसकी तेज़ वृद्धि दर और शीघ्र बीजाणु-निर्माण है — अंकुरण के बाद कुछ ही दिनों में यह सक्रिय रूप से बीजाणु उत्पन्न करने लगता है।
इसकी उपापचयी विविधता, उच्च स्राव-क्षमता और अनुवाद-पश्चात संशोधन करने की योग्यता इसे Aspergillus वंश की अन्य प्रजातियों से अलग करती है, जो अंततः इसकी अम्ल, प्रोटीन और जैव-सक्रिय यौगिकों के उत्पादन में असाधारण दक्षता के रूप में परिलक्षित होती है।
यह अत्यंत अम्लीय परिस्थितियों को भी सहन करने में सक्षम है, जो इसे साइट्रिक अम्ल जैसे उत्पादों के औद्योगिक उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाता है।
वितरण और आवास
Aspergillus niger लगभग हर प्रकार के पर्यावरण में पाया जाने वाला सर्वव्यापी फफूंद है। यह सामान्यतः मिट्टी, पौधों के अवशेषों और घर के भीतरी वातावरण में पाया जाता है, और सड़ते हुए फलों व सब्जियों पर भी इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है।
GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े इस फफूंद की उपस्थिति के रुझान को दर्शाते हैं — जनवरी में सबसे अधिक 713 अवलोकन और अप्रैल में 667 अवलोकन दर्ज हुए, जबकि वर्ष के मध्य और अंत में यह संख्या घटकर लगभग 128–285 के बीच रह गई। ये आँकड़े केवल उपस्थिति के संकेतक हैं, न कि जनसंख्या घनत्व या पूर्ण वितरण-सीमा के प्रमाण, फिर भी संभावित मौसमी उपस्थिति की ओर सतर्कतापूर्वक संकेत करते हैं।

पारिस्थितिकी और संबंध
Aspergillus niger कई कृषि उत्पादों पर काली फफूंदी उत्पन्न करने वाला एक सामान्य संदूषक है, जो मूंगफली, अंगूर और प्याज़ जैसी फसलों को प्रभावित करता है। यह 15 से 53 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान, तथा pH और आर्द्रता में व्यापक बदलावों को सहन कर सकता है, जिसके कारण यह फसल-कटाई के बाद होने वाली सड़न का एक प्रमुख कारण बनता है और खाद्य उद्योग को आर्थिक क्षति पहुँचाता है। पौधों में संक्रमण होने पर बीज-अंकुरण, जड़ और तने की वृद्धि बाधित होती है, जिससे पौधा परिपक्वता से पहले ही नष्ट हो सकता है; प्याज़ और शोभा-वर्धक पौधों पर यह विशेष रूप से कज्जली फफूंदी (sooty mold) उत्पन्न करता है।
यह फफूंद रोगजनक भी है। इसके बीजाणु वातावरण में सर्वत्र मौजूद होने के कारण मानव द्वारा सामान्यतः श्वास के माध्यम से ग्रहण किए जाते हैं, और प्रतिरक्षा-प्रणाली कमजोर व्यक्तियों या अस्थमा, सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी फेफड़ों की पूर्व-स्थितियों वाले लोगों में एस्परजिलोसिस नामक संक्रमण उत्पन्न कर सकते हैं। पीट धूल में सांस लेने वाले उद्यान-श्रमिकों में यह विशेष रूप से पाया गया है, और आश्चर्यजनक रूप से यह प्राचीन मिस्री ममियों में भी पाया गया है, जिन्हें छेड़े जाने पर इसके बीजाणु श्वास में जा सकते हैं। तुलनात्मक रूप से, Aspergillus flavus, Aspergillus fumigatus और Aspergillus terreus जैसी अन्य प्रजातियों की अपेक्षा A. niger द्वारा निमोनिया उत्पन्न होने की सूचना बहुत कम मिलती है।
उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास
Aspergillus niger एक अनिवार्य वायुजीवी (aerobe) फफूंद है, जो 6 से 47 डिग्री सेल्सियस तापमान और 1.5 से 9.8 तक के pH में जीवित रह सकता है, तथा शुष्कतारागी (xerophilic) प्रकृति के कारण अत्यंत कम जल-मात्रा वाले वातावरण में भी वृद्धि कर सकता है। इसे सामान्यतः Potato Dextrose Agar पर उगाया जाता है, हालाँकि यह Czapek-Dox agar जैसे कई अन्य माध्यमों पर भी वृद्धि कर सकता है।
औद्योगिक स्तर पर इसकी संवर्धन दो प्रमुख विधियों से किया जाता है — ठोस-अवस्था किण्वन (SSF), जिसमें गेहूँ की भूसी, चीनी का अवशेष, चावल के छिलके जैसे कृषि उपोत्पादों का उपयोग होता है और जो अधिक लागत-प्रभावी माना जाता है, तथा निमज्जित किण्वन (SmF), जो द्रव माध्यम में तापमान व pH के सटीक नियंत्रण की अनुमति देता है।
A. niger द्वारा प्रति वर्ष 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक साइट्रिक अम्ल का उत्पादन किया जाता है, साथ ही यह ग्लूकोनिक अम्ल भी उत्पन्न करता है — दोनों को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दैनिक सेवन हेतु स्वीकार्य माना गया है, और अमेरिकी FDA द्वारा इसके किण्वन को "सामान्यतः सुरक्षित" (GRAS) दर्जा प्राप्त है। इससे प्राप्त एंजाइम जैसे ग्लूकोएमाइलेज़ का उपयोग उच्च-फ्रुक्टोज़ कॉर्न सिरप बनाने में, पेक्टिनेज़ का सेब-वाइन स्पष्टीकरण में, अल्फा-गैलेक्टोसिडेज़ का पेट फूलने से बचाने वाले उत्पादों में तथा ग्लूकोज़ ऑक्सीडेज़ का ग्लूकोज़ बायोसेंसर बनाने में होता है; इसके अतिरिक्त फ्रुक्टोओलिगोसैकेराइड्स (FOS) जैसे प्रीबायोटिक यौगिक भी इससे निकाले जाते हैं, और इसे प्राकृतिक खाद्य-रंगकों के संभावित स्रोत के रूप में भी परखा जा रहा है।
रोचक तथ्य
- A. niger के बीजाणु वायुमंडल में 58 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाए गए हैं।
- यह फफूंद 1.5 से 9.8 तक की व्यापक pH सीमा और 6 से 47 डिग्री सेल्सियस तापमान में जीवित रह सकता है, जो इसे अत्यंत अनुकूलनशील बनाता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इससे उत्पादित साइट्रिक अम्ल (E330) और ग्लूकोनिक अम्ल (E574) को दैनिक सेवन के लिए स्वीकार्य घोषित किया है।
- सूक्ष्मदर्शी परीक्षण में इसके गहरे भूरे, खुरदरे किनारों वाले कोनिडिया बीजाणु और भूरे कोनिडियोफोर दिखाई देते हैं, जिनकी पहचान Potato Dextrose Agar, Czapek Yeast Agar और Malt Yeast Agar पर संवर्धन द्वारा की जाती है।
- यह ओटोमाइकोसिस नामक कान के फंगल संक्रमण का एक सामान्य कारण है, जो अस्थायी सुनने में कमी, दर्द और गंभीर मामलों में कान की झिल्ली को क्षति पहुँचा सकता है।
पारिस्थितिकी
आवास
- शहरी
- अशांत भूमि



