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Bombus terrestris

Bombus terrestris

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

पीली और काली धारियों वाला एक भौंरा फूल पर बैठा है, जिसके उदर के सिरे पर हल्के मटमैले-सफेद रंग का भाग दिखाई देता हैफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

जीवनकाल
≤ 0.27 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Arthropoda
वर्ग
Insecta
गण
Hymenoptera
कुल
Apidae
वंश
Bombus
प्रजाति
Bombus terrestris

Bombus terrestris यूरोप की सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली भौंरा प्रजातियों में से एक है, और इसे व्यावसायिक ग्रीनहाउस परागण के लिए दुनिया भर में इतनी बड़ी मात्रा में स्थानांतरित किया गया है कि यह अब जापान, चिली, अर्जेंटीना और तस्मानिया जैसे क्षेत्रों में एक आक्रामक प्रजाति बन चुकी है।

यह प्रजाति Apidae परिवार और Hymenoptera गण से संबंधित एक सामाजिक (यूसोशल) कीट है, जिसमें पीढ़ियों का ओवरलैप, कार्य-विभाजन और सामूहिक शिशु-पालन पाया जाता है। यह मुख्यतः शीतोष्ण यूरोप में पाई जाती है, साथ ही निकट पूर्व, भूमध्यसागरीय द्वीपों और उत्तरी अफ्रीका में भी इसकी आबादी मौजूद है।

इस भौंरे की रानी केवल एक ही नर के साथ संभोग करती है, जो सामाजिक कीटों में असामान्य है, और श्रमिक भौंरे फूलों के रंगों को याद रखकर बेहद कुशलता से चारा खोजते हैं — यही विशेषताएँ इसे अध्ययन के लिए एक दिलचस्प प्रजाति बनाती हैं।

पहचान और रूप

इस भौंरे की सबसे पहचानने योग्य विशेषता रानी के उदर के सिरे पर मौजूद हल्का मटमैला-सफेद (buff-white) "पूंछ" वाला भाग है। श्रमिक भौंरों का उदर-सिरा सफेद होता है, जो देखने में निकट संबंधी प्रजाति Bombus lucorum के श्रमिकों जैसा ही लगता है, फर्क सिर्फ इतना है कि B. terrestris की पीली पट्टियाँ सीधी तुलना में थोड़ी गहरी दिखती हैं।

आकार में भी स्पष्ट अंतर मिलता है: रानी की लंबाई 20 से 22 मिलीमीटर, नर की 14 से 16 मिलीमीटर, और श्रमिकों की 11 से 17 मिलीमीटर के बीच होती है।

श्रमिक जाति में आकार की विविधता अन्य मक्खियों की तुलना में असाधारण रूप से अधिक है - इनकी थोरैक्स लंबाई 2.3 से 6.9 मिलीमीटर और भार 68 से 754 मिलीग्राम तक बदल सकता है, यानी सबसे छोटे और सबसे बड़े श्रमिक के बीच वजन में दस गुना से भी अधिक का अंतर हो सकता है।

रानी और श्रमिक के बीच अंतर मुख्यतः पूंछ के रंग में है - रानी की पूंछ मटमैली-सफेद होती है, जबकि B. lucorum में यही भाग शुद्ध सफेद रहता है, और यही महीन अंतर दोनों प्रजातियों को अलग पहचानने की कुंजी है।

वितरण और आवास

Bombus terrestris सबसे व्यापक रूप से पूरे यूरोप में पाई जाती है और सामान्यतः शीतोष्ण जलवायु में रहती है। इसकी अनुकूलनशीलता के कारण निकट पूर्व, भूमध्यसागरीय द्वीपों और उत्तरी अफ्रीका में भी इसकी आबादी मौजूद है।

ग्रीनहाउस परागण के लिए एक प्रजाति के रूप में इसे कई देशों में लाया गया, जहाँ से यह कैद से भागकर स्थापित हो गई। जापान, चिली, अर्जेंटीना और तस्मानिया में यह अब एक आक्रामक प्रजाति मानी जाती है, यानी अपने मूल क्षेत्र के बाहर भी यह स्थानीय पारिस्थितिकी में गहराई से घुस चुकी है।

घोंसले सामान्यतः भूमिगत बनाए जाते हैं, जैसे परित्यक्त कृंतक-गड्ढों में। इनमें कंघी जैसी संरचना वाले घोंसले होते हैं, जिनकी अंडा-कोशिकाओं में कई अंडे एक साथ रखे जाते हैं और रानी इन कोशिकाओं को एक-दूसरे के ऊपर परत दर परत बनाती है। एक सामान्य कॉलोनी में औसतन 300 से 400 भौंरे होते हैं, हालांकि श्रमिकों की संख्या में बड़ा अंतर देखा जा सकता है।

GBIF के मासिक अवलोकन आंकड़े बताते हैं कि इस प्रजाति के देखे जाने की संख्या जून-जुलाई में सबसे अधिक रहती है, जिसके बाद अगस्त-सितंबर में यह घटने लगती है और नवंबर-जनवरी में सबसे कम हो जाती है। यह आंकड़े केवल उपस्थिति के अभिलेख हैं, आबादी के आकार या पूर्ण वितरण क्षेत्र के प्रमाण नहीं, इसलिए इन्हें सावधानी से इस मौसमी सक्रियता के संकेत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Bombus terrestris के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
1,46,747
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

Bombus terrestris एक बार में एकनिष्ठ (singly mating) प्रजाति है - रानी अपने जीवन में केवल एक ही नर के साथ संभोग करती है। संभोग के दौरान नर मादा की जनन-नलिका को एक चिपचिपे स्राव से अस्थायी रूप से अवरुद्ध कर देता है, जिससे कई दिनों तक मादा का दोबारा संभोग करना कठिन हो जाता है। यह व्यवहार हैप्लोडिप्लॉइडी से जुड़ी आनुवंशिक निकटता, अतिरिक्त संभोग में लगने वाली ऊर्जा और शिकार के बढ़ते जोखिम के कारण विकसित माना जाता है।

रानी के अलावा श्रमिक भी अंडे दे सकते हैं, लेकिन क्योंकि वे संभोग नहीं करते, उनके सभी अंडे अगुणित होते हैं और केवल नर ही जन्म लेते हैं। पहली संतति में जल्दी जन्मे, बड़े और उम्र में अधिक (कम से कम 30 दिन के) श्रमिक अंडे देने वाले बनने की अधिक संभावना रखते हैं, विशेषकर वे जो चारा खोजने के बजाय रानी के निकट रहते हैं। जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, वृद्ध श्रमिक रानी पर हमला करने और तेज़ भिनभिनाहट से उसे परेशान करने लगते हैं, और अंततः इसी बिंदु पर कॉलोनी को छोड़ दिया जाता है।

कॉलोनी में नर उत्पादन की ओर मुड़ने का समय अलग-अलग होता है, जिससे लिंग-अनुपात में बड़ा फर्क आता है। जल्दी बदलने वाली कॉलोनियों में भविष्य की रानियों की तुलना में नरों की संख्या कहीं अधिक (1.4) होती है, जबकि देर से बदलने वाली कॉलोनियों में यह अनुपात लगभग 1.3 के करीब रहता है। रानी बराबर अनुपात (1) पसंद करती है क्योंकि वह बेटों और बेटियों से समान रूप से संबंधित है, जबकि श्रमिक 3 अनुपात को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वे आपस में अधिक निकटता से जुड़े होते हैं।

रानी अपने अंडाणु-नियंत्रण के लिए श्रमिकों में जुवेनाइल हार्मोन (JH) को दबाकर रखती है, जो अंडे के विकास को नियंत्रित करता है। जिन श्रमिकों के पास रानी नहीं होती, उनमें JH बनाने वाली कॉर्पोरा एलाटा ग्रंथि आकार में स्पष्ट रूप से बढ़ जाती है, जो दिखाता है कि रानी की उपस्थिति ही श्रमिकों के प्रजनन को दबाए रखती है।

आहार और भोजन की आदतें

Bombus terrestris बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के फूलों से नेक्टर और पराग एकत्र करता है, और इसकी सर्वाधिक सक्रियता सुबह लगभग 7 से 8 बजे के बीच देखी जाती है, क्योंकि यह लगभग 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास के परिवेशी तापमान को चारा खोजने के लिए सबसे उपयुक्त मानता है। भौंरों में नीले और पीले रंग के प्रति एक स्वाभाविक झुकाव पाया जाता है, लेकिन अनुभव के साथ वे यह सीख भी लेते हैं कि किस रंग के फूल में अधिक इनाम (नेक्टर) मिलता है और तदनुसार अपनी वरीयता बदलते हैं।

यह प्रजाति ग्रीनहाउस फसलों के व्यावसायिक परागण में विशेष भूमिका निभाती है, और चारा खोजने के दौरान फूल-दर-फूल गति करते हुए यह बड़ी मात्रा में पराग स्थानांतरित करती है।

चारा खोजने के काम में आकार के अनुसार स्पष्ट कार्य-विभाजन (alloethism) देखा जाता है - बड़े आकार के भौंरे अधिकतर घोंसले से बाहर चारा खोजते हैं और अधिक मात्रा में नेक्टर व पराग लेकर लौटते हैं, संभवतः इसलिए कि वे तापमान के उतार-चढ़ाव को बेहतर सहन कर सकते हैं और अधिक दूरी तय कर सकते हैं, जबकि छोटे भौंरे घोंसले के भीतर के कार्यों में लगे रहते हैं।

सफल चारा-खोजी भौंरे लौटकर घोंसले में बिना किसी निश्चित पैटर्न के तेज़ी से इधर-उधर घूमते हैं, जिससे संभवतः एक फेरोमोन फैलता है जो अन्य भौंरों को भोजन खोजने के लिए बाहर निकलने का संकेत देता है - यह हनीबी के नृत्य जैसी व्यवस्थित प्रक्रिया से अलग है। जिन कॉलोनियों में भोजन का भंडार कम होता है, वे इस संकेत के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। भौंरों की घर लौटने की क्षमता भी उल्लेखनीय है - विस्थापित किए जाने पर वे 9.8 से 13 किलोमीटर दूर से भी घोंसले तक लौट सकते हैं, हालांकि अधिकांश चारा-खोज 5 किलोमीटर के दायरे में होती है और औसत दूरी लगभग 663 मीटर मापी गई है। नर भौंरे साथी खोजने के लिए इससे भी अधिक, 2.6 से 9.9 किलोमीटर तक की उड़ान भरते हैं, जिससे संभवतः पराग का प्रवाह-क्षेत्र श्रमिकों की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत हो जाता है।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

Bombus terrestris कई परजीवी और रोगजनकों के लिए एक महत्वपूर्ण मेज़बान का काम करता है, जिससे यह यूरोपीय भौंरा-समुदाय के पारिस्थितिक संतुलन में उलझा हुआ है। कोयल-भौंरे Bombus bohemicus और Bombus vestalis इसके घोंसलों पर कब्ज़ा कर लेते हैं और रानी की जगह अपने अंडे रखवाते हैं, जिनकी परवरिश मूल श्रमिक ही करते हैं - फर्क यह है कि B. bohemicus कई भौंरा प्रजातियों को परजीवित करता है जबकि B. vestalis केवल B. terrestris को ही निशाना बनाता है। इसके अतिरिक्त सूक्ष्मजीव Nosema bombi आंत में संक्रमण फैलाकर भौंरों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है, और मध्य यूरोप में कोनोपिड मक्खियाँ भी इसे परजीवित करती हैं, संभवतः इसलिए कि चारा-खोज में लगने वाली अधिक ऊर्जा-लागत श्रमिकों की प्रतिरक्षा क्षमता को कमज़ोर कर देती है।

एक अन्य सामान्य परजीवी Crithidia bombi है, जिसके प्रति प्रतिरोध बहु-संभोग से प्राप्त अधिक आनुवंशिक विविधता से बढ़ता देखा गया है, हालांकि B. terrestris स्वाभाविक रूप से एकल-संभोगी ही रहता है। सन् 2004 में यूरोप में व्यावसायिक रूप से पाली गई लगभग 10 प्रतिशत रानी भौंरों में डिफॉर्म्ड विंग वायरस (DWV) - जो सामान्यतः हनीबी का रोगजनक है - के कारण विकृत पंखों के साथ मृत पाई गईं, जो यह दर्शाता है कि यह वायरस अब प्रजातियों की सीमा पार कर सकता है।

घोंसले के अंदर बी-मॉथ (Aphomia sociella) की मादाएँ अंडे देना पसंद करती हैं, और उनके निकलने वाले लार्वा अंडों, लार्वा तथा प्यूपा को खाकर कभी-कभी घोंसले के बड़े हिस्से को नष्ट कर देते हैं। इस तरह B. terrestris न केवल एक परागणकर्ता के रूप में बल्कि कई परजीवियों और शिकारियों के लिए भोजन-स्रोत के रूप में भी अपने पारिस्थितिकी-तंत्र में भूमिका निभाता है।

रोचक तथ्य

  1. प्राचीन यूरोपीय संस्कृतियों में भौंरों और मक्खियों को कड़ी मेहनत तथा व्यवस्था का प्रतीक माना जाता था, और इन्हें देवी डेमेटर तथा आर्टेमिस से जोड़ा जाता था।
  2. Bombus terrestris का एक ऐतिहासिक नमूना सन् 1910 में क्रीट (यूनान) के केनिया क्षेत्र से एकत्र किया गया था, जो आज भी संग्रहालय अभिलेखों में संरक्षित है।
  3. हाल के वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भौंरे संभवतः दर्द का अनुभव करने में सक्षम हो सकते हैं, जो इन कीटों की संवेदनशीलता को लेकर एक नई बहस खोलता है।
  4. एक ही कॉलोनी के श्रमिकों के बीच वजन में दस गुना तक का अंतर हो सकता है - यह किसी भी मक्खी प्रजाति में देखी जाने वाली सबसे अधिक शारीरिक विविधताओं में से एक है।

पारिस्थितिकी

व्यवहार

  • बिलकारी
  • सामाजिक
  • दिवाचर

आहार

  • मकरंदाहारी

फ़ोटो

20 फ़ोटो
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पीली और काली धारियों वाला एक भौंरा फूल पर बैठा है, जिसके उदर के सिरे पर हल्के मटमैले-सफेद रंग का भाग दिखाई देता हैफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaAnAge