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Candida albicans

Candida albicans

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

सूक्ष्मदर्शी के नीचे दिखाई गई अंडाकार यीस्ट कोशिकाएं, जिनमें से कुछ शाखाओं वाले तंतुनुमा हाइफी और स्यूडोहाइफी रूप में बदल रही हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0
वर्गीकरण
संघ
Ascomycota
वर्ग
Saccharomycetes
गण
Saccharomycetales
कुल
Debaryomycetaceae
वंश
Candida
प्रजाति
Candida albicans

स्वस्थ वयस्कों में से 40 से 60 प्रतिशत के आंत और मुख में सामान्य रूप से मौजूद रहने वाला यह यीस्ट, प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने पर एक घातक रोगजनक बन जाता है। Candida albicans नाम की यह कवक प्रजाति Ascomycota संघ और Saccharomycetes वर्ग से संबंधित है, और यह अपने आप में एक विरोधाभासी जीव है—अधिकांश समय शांत सहजीवी, पर परिस्थितियां बदलते ही आक्रामक संक्रामक एजेंट।

सामान्य अवस्था में यह मानव जठरांत्र मार्ग और मुख गुहा का एक सहजीवी (कमेंसल) निवासी है, पर यह मानव शरीर के बाहर भी जीवित रह सकता है। HIV-संक्रमित रोगियों जैसे प्रतिरक्षा-दमित व्यक्तियों में यह अतिवृद्धि करके कैंडिडायसिस नामक रोग उत्पन्न करता है।

यह प्रजाति चिकित्सा उपकरणों और मानव ऊतकों पर बनने वाले जैव-फिल्मों (बायोफिल्म) में सबसे अधिक पाई जाने वाली कवक प्रजाति है। C. albicans, C. tropicalis, C. parapsilosis और C. glabrata मिलकर मानव कैंडिडायसिस के 50 से 90 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, जो इसकी चिकित्सीय महत्ता को स्पष्ट करता है।

फलन काय और पहचान

Candida albicans की सबसे विश्वसनीय पहचान इसकी बहुरूपता (पॉलीफेनिज्म) है—यह एक ही जीव अंडाकार यीस्ट कोशिकाओं और शाखाओं वाले तंतुनुमा हाइफी रूपों के बीच बदलता रहता है। इसके अतिरिक्त, यह स्वतःस्फूर्त "फेनोटाइपिक स्विचिंग" भी दिखाता है, जिसमें कुछ स्ट्रेन में सात तक भिन्न कालोनी रूप बन सकते हैं; इनमें सबसे अधिक अध्ययन किया गया रूप श्वेत-से-अपारदर्शी (व्हाइट-टू-ओपेक) स्विचिंग है, जो एक एपिजेनेटिक प्रक्रिया है।

मानक प्रयोगशाला माध्यम में यह 10 से 12 माइक्रोन आकार की अंडाकार यीस्ट कोशिकाओं के रूप में बढ़ता है। तापमान, CO2 स्तर, पोषक तत्वों या pH में हल्के बदलाव से यह तंतुनुमा (फिलामेंटस) रूप में बदल जाता है। यीस्ट कोशिकाएं रक्तप्रवाह में फैलने के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि हाइफी कोशिकाएं ऊतकों में प्रवेश करने, अंगों को उपनिवेशित करने और मैक्रोफेज से बचने में सक्षम होती हैं।

अनुकूल न होने वाली परिस्थितियों, जैसे शुष्क या अत्यधिक गर्म मौसम में, स्यूडोहाइफी पर क्लैमाइडोस्पोर नामक बीजाणु बनते हैं जो जीव को कठिन दौर में जीवित रहने में मदद करते हैं। इस रूप-परिवर्तन का नियंत्रण cAMP-PKA संकेत मार्ग और EFG1 नामक प्रतिलेखन नियामक द्वारा होता है, जबकि स्ट्रेन 3153A में पाया गया SIR2 जीन—जो मूल रूप से Saccharomyces cerevisiae में पहचाना गया था—फेनोटाइपिक स्विचिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वितरण और आवास

उपलब्ध GBIF उपस्थिति आंकड़े केवल यह दर्शाते हैं कि किन महीनों में इस जीव के रिकॉर्ड दर्ज हुए, न कि इसकी वास्तविक बहुतायत या पूर्ण वितरण क्षेत्र। मासिक अवलोकन संख्याओं में अक्तूबर (309), सितंबर (268) और अगस्त (249) में सबसे अधिक रिकॉर्ड दर्ज हुए, जबकि जनवरी में भी 244 अवलोकन हुए; इसके विपरीत मार्च (70) और अप्रैल (64) में सबसे कम रिकॉर्ड मिले।

यह उतार-चढ़ाव मौसमी उपस्थिति का संकेत तो दे सकता है, परंतु सावधानी के साथ ही, क्योंकि यह आंकड़ा नमूना संग्रहण या नैदानिक परीक्षण के तरीकों से भी प्रभावित हो सकता है।

यह जीव मुख्यतः मानव जठरांत्र मार्ग और मुख गुहा में सहजीवी के रूप में निवास करता है, परंतु मानव शरीर के बाहर भी जीवित रह सकता है, जो इसके व्यापक पर्यावरणीय सहनशीलता को दर्शाता है।

Candida albicans के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
309
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

जीवन चक्र

Candida albicans की जैव-फिल्म चार चरणों में विकसित होती है। पहले चरण में यीस्ट-रूप कोशिकाएं किसी सतह से चिपकती हैं; दूसरे, मध्यवर्ती चरण में ये कोशिकाएं सूक्ष्म-कालोनियां बनाती हैं और जर्म ट्यूब से हाइफी उभरने लगती हैं। परिपक्वता चरण में जैव-फिल्म का द्रव्यमान बढ़ता है, बाह्यकोशिकीय आधात्री (मैट्रिक्स) जमा होती है और दवा-प्रतिरोध बढ़ जाता है। अंतिम, प्रसार चरण में यीस्ट कोशिकाएं मुक्त होकर आस-पास के वातावरण को उपनिवेशित करती हैं—इस चरण में मुक्त हुई कोशिकाओं में बढ़ी हुई रोगजनकता और दवा-सहनशीलता जैसे नए गुण विकसित हो जाते हैं।

इस प्रक्रिया में Zap1 (जिसे Csr1 या Sur1 भी कहा जाता है) नामक प्रतिलेखन कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो जैव-फिल्म में यीस्ट और हाइफी कोशिकाओं के संतुलन के साथ-साथ जिंक परिवाहकों को भी नियंत्रित करता है। Zrt1 उच्च-अभिरुचि से और Zrt2 निम्न-अभिरुचि से जिंक आयनों का परिवहन करते हैं; कोशिका की जीवन-क्षमता के लिए यह जिंक-नियमन आवश्यक है, क्योंकि अत्यधिक जिंक स्तर कोशिकाओं के लिए विषैला हो सकता है।

पारिस्थितिकी और संबंध

इस प्रजाति की सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षमता यीस्ट और हाइफी रूपों के बीच स्विच करने की है, जो इसका प्रमुख रोगजनकता कारक है। हाइफी रूप में यह अम्लीय मैक्रोफेज फैगोसोम के भीतर बढ़ता है, जिससे झिल्ली में खिंचाव और अंततः शारीरिक विदारण के साथ फैगोसोम का क्षारीकरण होता है, जिसके बाद यह मैक्रोफेज से बच निकलता है।

Hwp1 नामक मैननोप्रोटीन हाइफी की सतह पर स्थित होता है और यह मानव ट्रांसग्लूटामिनेज़ एंजाइम का सब्सट्रेट बनकर जीव को मेजबान उपकला कोशिकाओं से स्थायी रूप से जुड़ने में सक्षम बनाता है—यह जुड़ाव संक्रमण प्रक्रिया का पहला अनिवार्य चरण है। इसके अतिरिक्त, Slr1 नामक RNA-बंधन प्रोटीन हाइफी निर्माण और रोगजनकता को प्रेरित करता है, जबकि कैंडिडालाइसिन नामक 31-अमीनो-अम्ल विषैला पेप्टाइड हाइफी निर्माण के दौरान स्रावित होकर श्लेष्मा संक्रमणों में रोगजनकता बढ़ाता है।

योनि संक्रमण के दौरान PRA1 (pH-नियमित प्रतिजन) जीन की सक्रियता बढ़ जाती है, और इसकी अभिव्यक्ति प्रो-इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन के स्तर से सीधे संबंधित पाई गई है।

उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास

कैंडिडायसिस विश्वभर में अस्पताल में लगने वाला तीसरा या चौथा सबसे सामान्य संक्रमण है, जिसके भारी आर्थिक प्रभाव हैं। अकेले अमेरिका में हर साल लगभग 60,000 सिस्टमिक कैंडिडायसिस के मामले सामने आते हैं, जिनकी उपचार लागत 2 से 4 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है। अन्य कवक संक्रमणों की तुलना में इसकी उच्च व्यापकता के कारण कुल लागत सबसे अधिक है, और संक्रमित रोगियों को गहन चिकित्सा इकाई या अस्पताल में 21 दिन तक अतिरिक्त रहना पड़ सकता है।

इस जीव को लेकर एक सामान्य सांस्कृतिक भ्रांति भी प्रचलित है—यह धारणा कि कैंडिडा संक्रमण केवल महिलाओं को होता है। वास्तव में यह जीव दोनों लिंगों और सभी आयु वर्गों को प्रभावित कर सकता है, जो दर्शाता है कि इसके बारे में जनसामान्य की समझ अक्सर सीमित या भ्रामक होती है।

रोचक तथ्य

  1. एक प्रचलित भ्रांति है कि कैंडिडा संक्रमण केवल महिलाओं को होता है, जबकि वास्तव में यह किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है।
  2. Candida albicans श्लेष्मा-संबंधी कैंडिडायसिस के 80 से 90 प्रतिशत मामलों का कारण है, जिनमें मुख का थ्रश और योनि कैंडिडायसिस शामिल हैं।
  3. सामान्य चिकित्सा व्यवहार में अक्सर कैंडिडायसिस को तभी पहचाना जाता है जब मुख या योनि में थ्रश जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, जिससे इसके व्यापक प्रभाव को कम आंका जा सकता है।

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सूक्ष्मदर्शी के नीचे दिखाई गई अंडाकार यीस्ट कोशिकाएं, जिनमें से कुछ शाखाओं वाले तंतुनुमा हाइफी और स्यूडोहाइफी रूप में बदल रही हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipedia