Chrysocyon brachyurus की पीठ पर एक काली, खड़ी होने वाली अयाल होती है, जिसे यह खतरा महसूस होते ही ऊँचा कर लेता है - और यही विशेषता इसे कैनिडे परिवार के भीतर बिल्कुल अनोखा बनाती है। इसकी शारीरिक बनावट लाल फॉक्स जैसी दिखती है, लेकिन यह न तो फॉक्स है, न भेड़िया - यह अपने वंश Chrysocyon की इकलौती जीवित प्रजाति है।
यह स्तनधारी प्राणी मैमेलिया वर्ग, कैनिडे कुल और कार्निवोरा गण से संबंध रखता है। यह मुख्यतः अर्जेंटीना, ब्राज़ील, बोलिविया, पेरू और पैराग्वे की खुली घास भूमियों में पाया जाता है, जबकि उरुग्वे में यह लगभग स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुका है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे 'निकट संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है।
इसके बच्चे जन्म के समय गहरे भूरे-काले रंग के होते हैं, जो बड़े होकर वयस्कों जैसे कांस्य-सुनहरे रंग में बदल जाते हैं - एक ऐसा रूपांतरण जो इस प्राणी की विचित्र जीव-विज्ञान की झलक देता है। नाम में 'वुल्फ' होने के बावजूद इसका व्यवहार, आहार और सामाजिक ढांचा भेड़ियों से बिल्कुल अलग है, जो इसे दक्षिण अमेरिका के सबसे दिलचस्प जंगली मांसाहारियों में गिनने योग्य बनाता है।
पहचान और रूप
Chrysocyon brachyurus की पहचान की सबसे आसान कसौटी इसकी पीठ पर मौजूद काली अयाल और असामान्य रूप से लंबी, काली टांगें हैं, जो इसे किसी भी अन्य जंगली कैनिड से अलग बना देती हैं। कंधे तक इसकी ऊँचाई 110 सेंटीमीटर तक पहुँचती है, जिससे यह जीवित कैनिडों में सबसे ऊँचा माना जाता है।
वयस्क का औसत वज़न लगभग 23 किलोग्राम होता है, सिर-शरीर की लंबाई करीब 100 सेंटीमीटर और पूंछ अतिरिक्त 45 सेंटीमीटर जोड़ती है। इसके कान असामान्य रूप से बड़े और 18 सेंटीमीटर तक लंबे होते हैं, जो घास में शिकार की आवाज़ पकड़ने में सहायक होते हैं।
इसका शरीर पतला और हल्का बना है, जबकि पैर असामान्य रूप से लंबे हैं - यह अनुकूलन इसे ऊँची घास वाली सवाना भूमि में ऊपर से देखने और चलने में मदद करता है। सिर अपेक्षाकृत छोटा और खोपड़ी लंबी होती है, जिसमें एक स्पष्ट सैजिटल क्रेस्ट (कपाल शिखा) पाई जाती है। इसके जबड़ों में कुल 42 दांत होते हैं, जिनमें छोटी ऊपरी कृंतक और लंबी नुकीली केनाइन शामिल हैं।
रंगत में यह सुनहरी-नारंगी से लेकर लाल-भूरे तक होती है, जबकि टांगें और अयाल गहरे काले रंग की होती हैं। पूंछ की नोक पर एक सफेद गुच्छा और गले के नीचे एक सफेद 'बिब' इसकी पहचान में सहायक हैं। नवजात शिशु शुरू में काले रोयें के साथ पैदा होते हैं, जो बड़े होने पर कांस्य-सुनहरे रंग में बदल जाते हैं। दुर्लभ मामलों में पूर्णतः काले (मेलानिस्टिक) वयस्क भी पाए गए हैं - इनमें से पहला फोटोग्राफ 2013 में ब्राज़ील के उत्तरी मिनास जेराइस राज्य में कैमरा-ट्रैप से लिया गया था। इसके पैरों के निशान कुत्ते जैसे दिखते हैं, लेकिन इसके तल्ले अपेक्षाकृत बहुत छोटे होते हैं और तीसरी-चौथी अंगुली के पैड आपस में जुड़े होते हैं - यही विशेषता इसे अन्य दक्षिण अमेरिकी कैनिडों के पैरों के निशान से अलग करती है।
वितरण और आवास
Chrysocyon brachyurus दक्षिण अमेरिका के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें अर्जेंटीना, ब्राज़ील, बोलिविया, पेरू और पैराग्वे शामिल हैं। उरुग्वे में यह अब लगभग स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुका है, और अर्जेंटीना में इसकी ऐतिहासिक सीमा ला प्लाटा नदी के दक्षिण तक फैली हुई थी।
यह प्रजाति खुली घास भूमियों, सवाना, शुष्क झाड़ीदार वनों, दलदली क्षेत्रों, वनों के किनारे वाले इलाकों और नदी तटों में पाई जाती है। इसकी लंबी टांगें और खुले मैदानों के प्रति अनुकूलन इसे इन ऊँची घास वाली परिस्थितियों में शिकार खोजने में मदद करते हैं।
GBIF के अवलोकन आँकड़ों में अप्रैल महीने में दर्ज घटनाओं की संख्या सबसे अधिक रही, जो अन्य महीनों की तुलना में स्पष्ट रूप से ऊँची है। यह आँकड़े केवल उपस्थिति के अवलोकन दर्शाते हैं, जनसंख्या घनत्व या पूर्ण वितरण सीमा नहीं, इसलिए इस मौसमी वृद्धि को सावधानी से ही देखा जाना चाहिए।

व्यवहार और जीवनशैली
Chrysocyon brachyurus मुख्यतः रात्रिचर और सांध्यकालीन प्राणी है, जिसकी सक्रियता सुबह 8 से 10 बजे और शाम 8 से 10 बजे के बीच सबसे अधिक होती है। इसकी गतिविधि तापमान और आर्द्रता से भी प्रभावित होती है - ठंडे या बादलों भरे दिनों में यह दिन में भी सक्रिय रह सकता है। दिन के उजाले में यह घनी झाड़ियों में आराम करता है और खुले मैदानों का उपयोग मुख्यतः रात के शिकार के लिए करता है।
अधिकांश बड़े कैनिडों के विपरीत, जो झुंड बनाते हैं, यह प्राणी अकेला रहता है और शिकार भी एकांत में करता है। नर-मादा जोड़े एक साझा क्षेत्र रखते हैं - औसतन लगभग 27 वर्ग किलोमीटर, जो कभी-कभी 30 वर्ग किलोमीटर तक फैल सकता है - लेकिन दोनों अधिकांश समय स्वतंत्र रूप से घूमते और शिकार करते हैं। जोड़े केवल प्रजनन काल में एक-दूसरे के करीब आते हैं।
क्षेत्र की सीमाओं का सख्ती से पालन किया जाता है, और पड़ोसी जोड़े अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर ही रहते हैं। मूत्र और मल को निश्चित स्थानों पर बार-बार जमा करना इन सीमाओं को चिह्नित करने का मुख्य तरीका है। जब कोई नर मर जाता है या पकड़ लिया जाता है, तो सीमाओं पर घूमते रहने वाले 'खानाबदोश' नर उसकी जगह ले लेते हैं।
बंदी अवस्था में रखे गए जोड़े जंगली जोड़ों की तुलना में अधिक निकटता दिखाते हैं - वे एक-दूसरे को सँवारते हैं और साथ आराम व भोजन करते हैं। बंदी नर प्रसव के दौरान मादा की सहायता करते हैं और शिशुओं की सँवार, भोजन-प्रावधान व रक्षा में भाग लेते हैं। एक ही माँ से जन्मे शिशु लगभग एक महीने की उम्र से आपस में प्रभुत्व का क्रम स्थापित करने लगते हैं।
संचार
Chrysocyon brachyurus तीन तरह की आवाज़ें निकालता है: शाम ढलने के बाद अक्सर सुनी जाने वाली एक गहरी भौंक, एक तेज़ चिंघाड़नुमा फुसफुसाहट, और आक्रामक व्यवहार के दौरान निकलने वाली घुरघुराहट।
जब यह खतरा महसूस करता है या आक्रामकता दिखाता है, तो पीठ की काली अयाल को खड़ा कर लेता है, जिससे इसका शारीरिक आकार बड़ा दिखता है - यह एक दृश्य संकेत है जो प्रतिद्वंद्वियों या शिकारियों को दूर रखने में सहायक होता है।
स्पर्श और गंध दोनों माध्यमों का उपयोग यह प्राणी संचार के लिए करता है। नर और मादा दोनों अपने शिकार मार्गों और भोजन गाड़ने के स्थानों को चिह्नित करने के लिए मूत्र का उपयोग करते हैं, जिसकी गंध इतनी विशिष्ट होती है कि इसे भांग जैसी बताया जाता है - इसी कारण इसे 'स्कंक वुल्फ' का उपनाम भी मिला है। रॉटरडैम चिड़ियाघर में एक बार इस गंध के कारण पुलिस को भांग धूम्रपान करने वालों की खोज में जाना पड़ा था।
शिकार और आहार
शिकार के दौरान Chrysocyon brachyurus अपने बड़े कानों को घुमाकर घास में छिपे शिकार की आवाज़ों को सुनता है, फिर अपने अगले पंजे से ज़मीन पर थपथपाकर शिकार को बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसके बाद यह फॉक्स जैसी शैली में झपट्टा मारकर शिकार को पकड़ता है और गर्दन या पीठ पर काटकर, ज़रूरत पड़ने पर हिंसक ढंग से हिलाकर उसे मार देता है। यह सूर्यास्त से मध्यरात्रि के बीच अकेले शिकार करना पसंद करता है।
यह एक सर्वाहारी प्राणी है और इसके आहार में आर्मडिलो, खरगोश, कृंतक और अन्य छोटे स्तनधारी, मछलियाँ, पक्षी व उनके अंडे, रेप्टाइल, घोंघे व अन्य स्थलीय मोलस्क, कीड़े तथा मौसमी फल और वनस्पति शामिल हैं।
फलों में यह केले, अमरूद और विशेष रूप से टमाटर जैसा फल Solanum lycocarpum खाता है, जो इसके आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। माना जाता है कि यह फल किडनी को संक्रमित करने वाले परजीवी कृमि Dioctophyme renale के विरुद्ध कुछ औषधीय सहायता भी प्रदान करता है। इसके अलावा यह जड़ों और बल्बों के रूप में वनस्पति भी खाता है।
बड़े पालतू पशुओं का शिकार यह शायद ही कभी करता है, लेकिन कभी-कभार नवजात भेड़ या सुअर के बच्चे को पकड़ लेता है। मुक्त घूमने वाले मुर्गे-मुर्गियों का शिकार यह अपेक्षाकृत बार-बार करता है, जिससे मुर्गी पालकों के साथ इसका टकराव बढ़ जाता है।
प्रजनन और बच्चों का पालन
Chrysocyon brachyurus एकनिष्ठ जोड़े बनाता है, हालाँकि नर और मादा प्रजनन काल के अलावा अधिकांश समय स्वतंत्र रूप से रहते हैं। प्रजनन का मौसम फोटोपीरियड से नियंत्रित होता प्रतीत होता है - दक्षिण अमेरिका में यह अगस्त से अक्टूबर के बीच और उत्तरी गोलार्ध के बंदी जीवों में अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है। मादा वर्ष में केवल एक बार मदकाल में आती है, जो एक से चार दिन तक रहता है।
गर्भधारण की अवधि लगभग 60 से 65 दिन होती है। एक बार में सामान्यतः एक से पाँच शिशु जन्म लेते हैं, हालाँकि सात शिशुओं के जन्म का भी रिकॉर्ड है। जंगली मादाएँ घनी वनस्पति में छिपे प्राकृतिक घोंसलों में जन्म देती हैं, और जंगली शिशुओं को उनके माता-पिता के साथ देखना दुर्लभ है। नवजात शिशुओं का वज़न 340 से 430 ग्राम के बीच होता है और वे शुरू में काले रोयें के साथ पैदा होते हैं।
शिशुओं की आँखें और कान जन्म के नौवें दिन तक खुल जाते हैं, चौथे सप्ताह तक वे उभरे हुए कान पा लेते हैं और माता-पिता द्वारा उगला हुआ भोजन लेना शुरू करते हैं। दसवें सप्ताह तक उनका रोयाँ काले से लाल-कांस्य रंग में बदल जाता है, और वे लगभग 15 सप्ताह की उम्र तक स्तनपान छोड़ देते हैं। एक वर्ष की आयु तक उनका शरीर वयस्कों जैसा अनुपात ले लेता है, जब वे यौन परिपक्वता के करीब पहुँचते हैं और अपना जन्म-क्षेत्र छोड़ देते हैं।
दोनों माता-पिता शिशुओं की देखभाल में भाग लेते हैं, हालाँकि यह ज़िम्मेदारी मुख्यतः मादा निभाती है; बंदी अवस्था में नरों को प्रसव के समय सहायता करते और शिशुओं की रक्षा व भोजन-प्रावधान में भाग लेते देखा गया है। जंगल में शिशु मृत्यु दर ऊँची है, और मादाएँ कभी-कभी दो वर्ष तक प्रजनन नहीं करतीं। बंदी अवस्था में यह प्राणी सामान्यतः 12 से 15 वर्ष जीता है, जबकि साओ पाउलो चिड़ियाघर में एक व्यक्ति 22 वर्ष तक जीवित रहा।
संरक्षण और खतरे
Chrysocyon brachyurus को IUCN की रेड लिस्ट में 'निकट संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है - इसका अर्थ है कि यह अभी सीधे विलुप्ति के खतरे में नहीं है, इसकी व्यापक भौगोलिक सीमा और मानव-निर्मित परिवेशों में ढलने की क्षमता के कारण, लेकिन घटती जनसंख्या के चलते इसे निगरानी की आवश्यकता है। 1996 तक इसे 'सुभेद्य' श्रेणी में रखा गया था।
सबसे बड़ा खतरा आवास विनाश है, जिसमें घास भूमियों का प्रति वर्ष जलाया जाना और वनों की कटाई शामिल है। बढ़ते राजमार्ग यातायात के कारण सड़क दुर्घटनाओं में मौतें भी बढ़ रही हैं, और शहरी विस्तार इसके प्राकृतिक आवास को सिकोड़ रहा है। आवास घटने से यह प्राणी शहरी क्षेत्रों में भोजन की खोज में जाने लगा है, जिससे पालतू पशुओं के साथ संपर्क और संक्रामक व परासरी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। मुर्गी पालकों द्वारा प्रतिशोध में हत्या, खेल के लिए शिकार और जीवित पकड़े जाने की घटनाएँ भी इसकी संख्या पर असर डालती हैं।
यह प्रजाति CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध है, जो इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है, और अमेरिका के एंडेंजर्ड स्पीशीज़ एक्ट के अंतर्गत भी संरक्षित है। ब्राज़ील, अर्जेंटीना और उरुग्वे में इसका शिकार करना कानूनन प्रतिबंधित है। ब्राज़ील के भीतर भी संरक्षण स्थिति राज्यों के अनुसार भिन्न है - साओ पाउलो और मिनास जेराइस में इसे 'सुभेद्य' माना जाता है, जबकि पराना, सांता कैटरीना और रियो ग्रांडे दो सुल में इसे क्रमशः 'संकटग्रस्त' और 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त' माना जाता है।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
निकट संकटग्रस्त
सांस्कृतिक महत्व
Chrysocyon brachyurus किसानों के लिए एक अनजाना सहायक भी साबित होता है, क्योंकि यह खरगोश और छोटे कृंतकों जैसे फसल-हानिकारक जंतुओं को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करने में मदद करता है।
कुछ आधुनिक लेखों में इसे प्राचीन बेबीलोनियन पुराकथाओं के प्रतीकों से जोड़ने का प्रयास किया गया है, हालाँकि यह प्राणी विशेष रूप से दक्षिण अमेरिका का ही निवासी है।
रोचक तथ्य
- Chrysocyon वंश में आज केवल यही एक जीवित प्रजाति शेष है।
- इसके मूत्र की भांग जैसी तीव्र गंध के कारण इसे 'स्कंक वुल्फ' कहा जाता है - रॉटरडैम चिड़ियाघर में एक बार इस गंध ने पुलिस को भांग धूम्रपान की तलाश में भेज दिया था।
- पूरी तरह काले (मेलानिस्टिक) रंग वाले एक वयस्क की पहली तस्वीर 2013 में ब्राज़ील के उत्तरी मिनास जेराइस राज्य में कैमरा-ट्रैप से खींची गई थी।
- इसके पैरों के निशान कुत्तों जैसे दिखते हैं, लेकिन तीसरी और चौथी अंगुली के पैड आपस में जुड़े होने के कारण इन्हें अलग पहचाना जा सकता है।
- साओ पाउलो चिड़ियाघर में एक व्यक्ति सामान्य अनुमानित 12-15 वर्ष की जीवन-सीमा से कहीं आगे, पूरे 22 वर्ष तक जीवित रहा।
पारिस्थितिकी
आवास
- आर्द्रभूमि
- झाड़ीदार भूमि
- घास का मैदान
- सवाना
व्यवहार
- निशाचर
- परभक्षी
- एकांतप्रिय
- क्षेत्रीय
आहार
- सर्वाहारी
फ़ोटो
स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaAnimal Diversity WebAnAge



