यह कवक जीवित कीट प्यूपा के भीतर पनपकर उसे भीतर से समाप्त कर देता है, और फिर उसी मृत भूमिगत प्यूपा से नारंगी-लाल, गदा-आकार का फलनकाय बाहर निकालता है - यही इसका सबसे विशिष्ट जीवन-तरीका है।
Cordyceps militaris कवकों के Cordycipitaceae कुल से संबंधित है और Cordyceps वंश की प्ररूप प्रजाति (type species) है, जिसमें दुनिया भर में सैकड़ों प्रजातियाँ शामिल हैं। इसे सबसे पहले 1753 में कार्ल लीनियस ने Clavaria militaris नाम से वर्णित किया था, और यह उत्तरी गोलार्ध में व्यापक रूप से पाया जाता है।
पारंपरिक चीनी चिकित्सा में इसके उपयोग और इसमें पाए जाने वाले जैव-सक्रिय यौगिकों ने इसे वैज्ञानिक अनुसंधान और वाणिज्यिक खेती, दोनों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
फलन काय और पहचान
सबसे विश्वसनीय पहचान चिह्न इसका गदा-आकार (club-shaped), नारंगी से लाल रंग का फलनकाय है, जो 1 से 8 सेंटीमीटर ऊँचा होता है और भूमिगत मृत कीट प्यूपा से बाहर निकलता है।
फलनकाय की सतह स्ट्रोमा से ढकी होती है, जिसके भीतर वास्तविक फलन संरचनाएँ, पेरिथीशिया, धंसी होती हैं; इस कारण सतह खुरदरी और छिद्रित दिखाई देती है। भीतरी ऊतक सफेद से हल्के नारंगी रंग का होता है।
बीजाणु चिकने, पारदर्शी (hyaline), लंबे धागेनुमा (filiform) और प्रायः पर्व-युक्त (septate) होते हैं; परिपक्व होने पर ये 3–7 माइक्रोमीटर × 1–1.2 माइक्रोमीटर आकार के उप-बीजाणुओं में विभाजित हो जाते हैं। एस्काई लंबी और बेलनाकार होती हैं। कभी-कभी इसकी अनामॉर्फिक अवस्था, Isaria, भी देखी जाती है, और परजीवित कीट के चारों ओर सफेद माइसीलियम का जमाव बन जाता है, हालांकि यह हमेशा उसी प्रजाति का नहीं होता।
समान दिखने वाली प्रजातियों में C. sobolifera, Elaphocordyceps capitata और E. ophioglossoides शामिल हैं, जो कीटों या अन्य कवकों को परजीवित कर समान गदा-आकार संरचनाएँ बनाती हैं, जिससे क्षेत्र में पहचान में भ्रम हो सकता है।
वितरण और आवास
Cordyceps militaris को उत्तरी गोलार्ध में व्यापक रूप से फैला और अपेक्षाकृत सामान्य कवक माना जाता है। यूरोप में इसके फलनकाय अगस्त से नवंबर के बीच दिखाई देते हैं।
GBIF के मासिक अवलोकन आंकड़े इस मौसमी पैटर्न की पुष्टि करते प्रतीत होते हैं - अवलोकनों की संख्या जुलाई (542) से बढ़ना शुरू होकर सितंबर (2766) और अक्टूबर (4732) में चरम पर पहुँचती है, फिर नवंबर (2737) में घटने लगती है। जनवरी से जून तक यह संख्या अपेक्षाकृत कम (67 से 524 के बीच) रहती है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये आंकड़े केवल अवलोकन की उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि प्रचुरता, जनसंख्या आकार या इसकी संपूर्ण मूल वितरण सीमा का प्रमाण।

उपयोग और सांस्कृतिक इतिहास
पारंपरिक चीनी चिकित्सा में Cordyceps militaris का ऐतिहासिक रूप से श्वसन संबंधी समस्याओं, थकान से उबरने, यौन क्षमता और समग्र जीवन-शक्ति में सहायक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। हिमालयी और चीनी लोक-कथाओं में चरवाहों द्वारा इस कवक की खोज का वर्णन मिलता है।
एशिया में इसके फलनकाय को चिकन सूप, पोर्क बोन सूप और हॉट पॉट जैसे व्यंजनों में पकाकर खाया जाता है, और चीन में इसे नोवल फूड के रूप में अनुमोदित किया गया है, जबकि उत्तर अमेरिकी क्षेत्र मार्गदर्शिकाओं में इसे अखाद्य या "संभवतः खाने योग्य" माना जाता है। इसे स्वास्थ्यवर्धक आहार पूरक के रूप में भी व्यापक रूप से बेचा जाता है, हालांकि इसकी सुरक्षा या प्रभावशीलता के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, और प्रसंस्करण तथा लेबलिंग में असंगति के कारण गुणवत्ता में भिन्नता पाई जाती है। इसके स्वास्थ्य दावे काफी हद तक Ophiocordyceps sinensis से इसकी समानता पर आधारित हैं, जिसके प्रभाव भी अप्रमाणित हैं।
इसकी खेती रेशम कीट के प्यूपा, चावल और तरल पोषक माध्यमों सहित कई माध्यमों पर की जा सकती है, और चीन, वियतनाम, ताइवान तथा इंडोनेशिया में इसका व्यावसायिक उत्पादन होता है। यह कवक कॉर्डिसेपिन नामक यौगिक बनाता है, जो एडेनोसिन का एक न्यूक्लियोसाइड एनालॉग है; इसे सुरक्षित बनाए रखने के लिए कवक पेंटोस्टैटिन भी उत्पन्न करता है, जो स्वयं हेयरी सेल ल्यूकेमिया के उपचार में प्रयुक्त कीमोथेरेपी दवा (Nipent) के रूप में उपयोग होता है। इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन CMP18 कच्चा खाने पर विषाक्त हो सकता है, हालांकि पकाने से यह नष्ट हो जाता है।
रोचक तथ्य
- यह कवक कॉर्डिसेपिन नामक यौगिक उत्पन्न करता है, जो एडेनोसिन का एक न्यूक्लियोसाइड एनालॉग है और शोध में रुचि का विषय रहा है।
- कॉर्डिसेपिन को सुरक्षित रखने के लिए यह पेंटोस्टैटिन बनाता है, जो वाणिज्यिक रूप से हेयरी सेल ल्यूकेमिया के उपचार हेतु दवा Nipent के रूप में उपयोग होता है।
- वैज्ञानिकों ने सेल्युलेज़ जीन जोड़कर इसका एक ट्रांसजेनिक रूप विकसित किया है, जो सेल्युलोज़-युक्त अपशिष्ट पर उगकर उसे कॉर्डिसेपिन में बदल सकता है।
- यह Cordyceps वंश की प्ररूप प्रजाति है, जिसमें दुनिया भर में 400 से अधिक जंगली प्रजातियाँ शामिल हैं।
- पुराने चीनी औषधीय ग्रंथों में इसकी भूमिका, "तिब्बत के सुनहरे कीड़े" के नाम से प्रसिद्ध Ophiocordyceps sinensis की तुलना में अपेक्षाकृत छोटी रही है।
- इसे सबसे पहले 1753 में कार्ल लीनियस ने Clavaria militaris नाम से वर्गीकृत किया था।



