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Crocus sativus

Crocus sativus

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

बैंगनी रंग की छह पंखुड़ियों वाला एक क्रोकस फूल, जिसके बीच से तीन लंबे लाल-नारंगी वर्तिकाग्र (केसर के तंतु) बाहर निकले हुए हैंफ़ोटो: Юрий Данилевский (Yuriy Danilevsky), CC BY

एक नज़र में

इसके लिए जाना जाता है
शाकीय पौधा
वर्गीकरण
संघ
Tracheophyta
वर्ग
Liliopsida
गण
Asparagales
कुल
Iridaceae
वंश
Crocus
प्रजाति
Crocus sativus

केसर के मसाले के रूप में विश्वप्रसिद्ध Crocus sativus एक ऐसा पौधा है जो प्रकृति में जंगली रूप में कहीं नहीं पाया जाता—यह पूरी तरह से मानव द्वारा विकसित और उगाई जाने वाली प्रजाति है। आइरिस कुल (Iridaceae) से संबंधित यह शरदकालीन फूल वाला बहुवर्षीय पौधा एक भूमिगत घनकंद (कॉर्म) से उगता है और इसके फूलों के वर्तिकाग्र (stigma) से प्रसिद्ध मसाला केसर प्राप्त होता है।

यह पौधा दुनिया के सबसे पुराने खेती किए जाने वाले फूलों वाले कंदीय पौधों में से एक माना जाता है। इसकी कहानी सिर्फ खेती और भोजन की नहीं, बल्कि पौराणिक कथाओं, चिकित्सा और सैकड़ों वर्षों की मानव सभ्यता से जुड़ी परंपराओं की भी है, जो इसे एक साधारण फूल से कहीं अधिक बनाती है।

पहचान और रूप

Crocus sativus को पहचानने की सबसे आसान कसौटी है इसके बैंगनी फूलों के बीच से निकलने वाले तीन लाल या नारंगी रंग के वर्तिकाग्र (stigma)—यही भाग सूखने पर केसर का मसाला बनता है। यह एक छोटा बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जिसकी ऊँचाई सामान्यतः 10 से 30 सेंटीमीटर के बीच होती है।

पौधा एक भूमिगत घनकंद (कॉर्म) से विकसित होता है, जिससे पत्तियाँ, शल्कपत्र (bracts), उपशल्कपत्र (bracteole) और फूलों की डंडी निकलती हैं। पत्तियाँ सरल होती हैं, गुच्छे (rosette) के रूप में व्यवस्थित होती हैं और उनके किनारे पूर्णतः सम (entire) होते हैं।

फूल शरद ऋतु में खिलते हैं और सामान्यतः बैंगनी रंग के होते हैं, जिनमें छह पंखुड़ियाँ होती हैं। ये फूल बांझ होते हैं, यानी इनसे प्राकृतिक रूप से बीज नहीं बनते। हर फूल में केवल तीन वर्तिकाग्र होते हैं, जिन्हें हाथ से चुनकर केसर तैयार किया जाता है।

वितरण और आवास

Crocus sativus आज पूरे चीन में और इसके अतिरिक्त दुनिया के कई अन्य हिस्सों में खेती के रूप में उगाया जाता है। माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति संकर (हाइब्रिड) रूप में पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में हुई थी, हालाँकि यह किसी भी क्षेत्र में जंगली रूप में स्वाभाविक रूप से मौजूद नहीं है।

महीने-दर-महीने दर्ज की गई उपस्थिति के आँकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि अक्टूबर में देखे जाने की संख्या (333) सबसे अधिक है, इसके बाद नवंबर (144) का स्थान है, जबकि बाकी महीनों में यह संख्या बहुत कम (5 से 39 के बीच) रहती है। यह पैटर्न पौधे के शरदकालीन फूल आने के मौसम से मेल खाता है, जब पौधा सबसे अधिक दिखाई और पहचाना जाता है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये आँकड़े केवल उपस्थिति दर्ज होने की जानकारी देते हैं—इन्हें पौधे की संख्या, बहुतायत या इसके संपूर्ण प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र के प्रमाण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

Crocus sativus के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
333
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

उपयोग और मानव संबंध

Crocus sativus के फूलों के वर्तिकाग्र (stigma) से प्राप्त केसर विश्व का सबसे मूल्यवान मसाला माना जाता है। इसकी मात्रा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 450 ग्राम (एक पौंड) केसर तैयार करने के लिए 50,000 से 75,000 फूलों की आवश्यकता होती है, क्योंकि हर कंद से केवल एक या दो फूल निकलते हैं और हर फूल से केवल तीन वर्तिकाग्र मिलते हैं। वर्तिकाग्र को सुबह के मध्य समय में हाथ से चुना जाता है, जब फूल पूरी तरह खिले होते हैं।

परंपरागत एशियाई चिकित्सा में केसर का उपयोग लंबे समय से होता रहा है। इसमें मौजूद एल्कालॉइड, एंथोसायनिन, कैरोटिनॉइड, फ्लेवोनॉइड, फीनोलिक और टरपीनॉइड जैसे सक्रिय रासायनिक यौगिकों के कारण इसे मूड बेहतर करने वाला (mood-enhancing) प्रभाव देने वाला माना जाता है, जिसमें अवसाद (depression) से पीड़ित व्यक्तियों पर भी प्रभाव देखा गया है। इसके अतिरिक्त, इस पौधे को सजावटी उद्देश्यों के लिए भी उगाया जाता है।

कंदों को लगभग 10 सेंटीमीटर की दूरी पर और 10 सेंटीमीटर गहरे गड्ढों में लगाया जाता है। पौधा पूर्ण सूर्य के प्रकाश और अच्छे जल-निकासी वाली, मध्यम कार्बनिक सामग्री युक्त मिट्टी में सबसे बेहतर बढ़ता है। हर कंद 3 से 5 वर्षों तक जीवित रहता है और प्रत्येक वर्ष स्वयं को बढ़ाता है। ग्रीक पौराणिक कथाओं में भी इस फूल का उल्लेख मिलता है, जो विभिन्न संस्कृतियों में इसके महत्व को दर्शाता है और इसका उपयोग प्राचीन ग्रीक धार्मिक जीवन, स्त्री प्रजनन स्वास्थ्य, सौंदर्य प्रसाधन और इत्र निर्माण में भी होता रहा है।

रोचक तथ्य

  1. ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार, क्रोकस नाम का एक युवक अप्सरा स्मिलैक्स से प्रेम करता था; उनके प्रेम के दुखद अंत के बाद देवताओं ने उसे सुनहरी पंखुड़ियों वाले क्रोकस फूल में बदल दिया।
  2. प्राथमिक ग्रीक परंपरा में, क्रोकस को देवता हर्मीज़ का प्रिय साथी बताया गया है, जो व्यापार, संदेशवाहन और पशुधन के देवता माने जाते हैं।
  3. Crocus sativus एक बांझ त्रिगुणित पौधा है, जो केवल अपने कंदों (कॉर्म) के माध्यम से फैलता है—इसी विशेषता के कारण इसे दुनिया के सबसे पुराने खेती किए जाने वाले फूलों वाले पौधों में से एक माना जाता है।
  4. केवल 450 ग्राम केसर तैयार करने के लिए 50,000 से 75,000 व्यक्तिगत फूलों की आवश्यकता होती है, क्योंकि हर फूल से केवल तीन वर्तिकाग्र प्राप्त होते हैं।
  5. एक समय यह मसाला केवल धनवान लोगों के लिए उपलब्ध विलासिता की वस्तु था, जबकि आज यह दुनिया भर के भोजन और चिकित्सा उपयोगों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

पारिस्थितिकी

वृद्धि का रूप

  • शाकीय पौधा

फ़ोटो

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बैंगनी रंग की छह पंखुड़ियों वाला एक क्रोकस फूल, जिसके बीच से तीन लंबे लाल-नारंगी वर्तिकाग्र (केसर के तंतु) बाहर निकले हुए हैंफ़ोटो: Юрий Данилевский (Yuriy Danilevsky), CC BY

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of Life