Cuphophyllus flavipes गिल वाला एक कवक है, जो हाइग्रोफोरेसी कुल में आता है। यह यूरोप में मुख्य रूप से कृषि के लिए अप्रभावित चरागाहों में मिलता है, हालांकि कई स्थानों पर यह दुर्लभ है।
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में इसे सुभेद्य श्रेणी में रखा गया है। इसके आवास को खतरा मुख्यतः बदलती कृषि पद्धतियों से है, जिनसे पुराने छोटी घास वाले चरागाह घट रहे हैं।
यह प्रजाति इसलिए रोचक है कि इसके आवास की स्थिति सीधे इसके अस्तित्व से जुड़ी है। इसे समझकर पता चलता है कि कवकों का संरक्षण भी भूमि उपयोग से गहराई से जुड़ा है।
फलन काय और पहचान
इस कवक के फलनकाय (कवक की बाहरी संरचना) की सबसे भरोसेमंद पहचान इसके तने का निचला हिस्सा है, जो पीला होता है, जबकि ऊपरी भाग सफेद या हल्का धूसर रहता है।
फलनकाय की ऊँचाई 60 मिलीमीटर तक हो सकती है। टोपी फैलने पर शंकु जैसी से लेकर लगभग सपाट या हल्की दबी हुई होती है, और इसका व्यास 40 मिलीमीटर तक जाता है। टोपी की सतह चिकनी होती है और नम होने पर हल्की चिकनाई लिए रहती है, रंग धूसर से भूरा-धूसर होता है।
गिल मोमी, मोटे और तने की ओर नीचे तक उतरे हुए होते हैं। इनका रंग हल्के से गहरे धूसर तक होता है। तना चिकना, हल्का धूसर से सफेद, और छल्ले से रहित होता है। बीजाणु छाप सफेद होती है, और सूक्ष्मदर्शी में बीजाणु चिकने, अंडाकार और लगभग 6 से 7.5 माइक्रोमीटर लंबे और 5 से 6 माइक्रोमीटर चौड़े दिखते हैं।
यूरोप में हाल में वर्णित स्कैंडिनेवियाई Cuphophyllus flavipesoides इससे बहुत मिलता है। उसके तने का निचला भाग भी पीला होता है, पर उसके बीजाणु थोड़े संकरे होते हैं। Cuphophyllus lacmus का रंग भी लगभग समान होता है, पर उसके तने के आधार पर पीलापन नहीं होता।
वितरण और आवास
यह कवक यूरोप में व्यापक रूप से फैला है, पर कई स्थानों पर इसकी उपस्थिति कम है। यह मुख्य रूप से पुराने, कृषि के लिए अप्रभावित चरागाहों और लॉन में उगता है, जहाँ घास छोटी और सघन रहती है।
अन्य यूरोपीय मोमी टोपी कवकों की तरह यह भी ऐसे खुले, कम उर्वरक वाले घास के मैदानों को पसंद करता है। ऐसे आवास अक्सर लंबे समय से बिना गहरी जुताई या भारी खाद के रहते हैं।
अवलोकनों में इसकी उपस्थिति वर्ष के उत्तरार्ध में सबसे अधिक दिखती है, विशेषकर सितंबर और अक्टूबर में। यह केवल उपस्थिति का संकेत है, इसे आबादी का आकार न समझें।

संरक्षण और खतरे
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में Cuphophyllus flavipes को सुभेद्य श्रेणी में रखा गया है। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि इसका आवास वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है।
इसके आवास को सबसे बड़ा खतरा बदलती कृषि पद्धतियों से है। पुराने छोटी घास वाले चरागाह, जो मोमी टोपी कवकों के लिए उपयुक्त होते हैं, इन बदलावों के कारण घट रहे हैं।
इस कवक की जनसंख्या की प्रवृत्ति पर प्रमाणित आंकड़े नहीं हैं, इसलिए इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना कठिन है। फिर भी आवास का घटना ही इसके लिए मुख्य चिंता है।
चरागाहों में अविकसित भूमि को बचाए रखना इस कवक के लिए सबसे सीधा उपाय है।
रोचक तथ्य
- इसका वैज्ञानिक नाम flavipes का अर्थ है "पीले पैर वाला", जो तने के निचले हिस्से के रंग का संकेत देता है।
- इस वंश Cuphophyllus का वर्णन 1985 में फ्रांसीसी कवक विज्ञानी मार्सेल बोन ने किया था।
- इस वंश का नाम "मुड़े हुए गिल" के अर्थ में रखा गया है, क्योंकि उपसर्ग Cupho- का अर्थ मुड़ा हुआ है।
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
आवास
वर्गीकरण
- संघ
- Basidiomycota
- वर्ग
- Agaricomycetes
- गण
- Agaricales
- कुल
- Hygrophoraceae
- वंश
- Cuphophyllus
- प्रजाति
- Cuphophyllus flavipes
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract



