नौ-पट्टी वाला आर्मडिलो (Dasypus novemcinctus) एक ऐसा स्तनधारी है जिसका शरीर हड्डीदार कवच से ढका होता है। यह दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी है और अधिकतम तक जीवित रह सकता है। इसका औसत वजन लगभग होता है।
यह Cingulata गण और Dasypodidae परिवार का सदस्य है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कम संकटग्रस्त प्रजाति माना गया है। इसका फैलाव विशाल है और यह जंगलों, सवाना और मानव-बसे इलाकों में भी रह लेता है, इसलिए इसकी जीवनशैली को समझना बड़े पारिस्थितिक तंत्र को समझने में मदद करता है।
उत्तर अमेरिका से दक्षिण अमेरिका तक इसकी उपस्थिति इसे आर्मडिलो परिवार की सबसे व्यापक प्रजातियों में से एक बनाती है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान इसका कवच है। पीठ, बगल, सिर, पूंछ और पैरों के बाहरी हिस्से पर हड्डीदार प्लेटें होती हैं, जो लचीली त्वचा की पट्टियों से जुड़ी रहती हैं। पेट और पैरों के अंदरूनी हिस्से पर कोई कवच नहीं होता, वहाँ केवल कड़ी त्वचा और मोटे बालों की परत होती है।
वयस्क का वजन आम तौर पर 2.5 से 6.5 किलोग्राम होता है, और सबसे बड़े नमूने लगभग 10 किलोग्राम तक पहुँच सकते हैं। शरीर और सिर की लंबाई 38 से 58 सेमी होती है और पूंछ 26 से 53 सेमी लंबी होती है, जिससे कुल लंबाई 64 से 107 सेमी बनती है। कवच की ऊँचाई लगभग 15 से 25 सेमी होती है।
अगले पैरों की बीच की उंगलियों के नाखून खुदाई के लिए लंबे होते हैं, हालांकि दक्षिण अमेरिका के विशाल आर्मडिलो जितने लंबे नहीं होते। इसके दांत छोटे, खूंटी जैसे दाढ़ हैं जिनमें इनेमल नहीं होता।
तीन-पट्टी वाले आर्मडिलो के विपरीत यह खुद को गेंद की तरह मोड़कर बंद नहीं कर सकता। पट्टियों की संख्या आम तौर पर नौ होती है, पर यह इलाके के अनुसार बदल सकती है।
वितरण और आवास
यह मुख्य रूप से जंगलों और झाड़ी वाले इलाकों में रहता है, जो उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण दोनों क्षेत्रों में मिलते हैं। यह घास के मैदानों और पेड़ों वाले सवाना में भी मिलता है, लेकिन घास के मैदानों की तुलना में जंगलों को ज़्यादा पसंद करता है, क्योंकि वहाँ जंगल की पत्तियों के नीचे छोटे अकशेरुकी जीव आसानी से मिलते हैं।
यह नमी वाले और नदी किनारे के इलाकों में ज़्यादा पाया जाता है। वर्षा कम होने वाले शुष्क इलाकों में यह कम मिलता है। निचले, समुद्र तल के आसपास के मैदानों में इसकी आबादी घनी होती है।
ठंडे इलाकों में इसका जीवन कठिन होता है। जहाँ जनवरी का औसत तापमान लगभग −2°C से नीचे चला जाता है या साल में बहुत से दिन जमे रहते हैं, वहाँ यह आम नहीं है। बिल की गर्मी इसे हल्की सर्दियों वाले शीतोष्ण इलाकों में टिकने में मदद करती है।
मानव निर्मित सड़कों, पुलों और रेल मार्गों के साथ इसने उत्तर-पूर्वी अमेरिका की ओर फैलाव किया है। इसी कारण सड़कों पर इसकी मौतें भी आम हैं।

व्यवहार और जीवनशैली
यह अकेले रहने वाला, मुख्य रूप से रात में सक्रिय जीव है, जो गोधूलि के समय चारे की खोज में निकलता है। कड़ाके की ठंड या बादल वाले दिनों में यह दिन में भी चारा ढूंढता है। उत्तरी सीमा के इलाकों में यह गर्मियों में ज़्यादा सक्रिय रहता है, क्योंकि यह शीतनिद्रा नहीं लेता।
यह बड़े बिल खोदता है। बिल एक से पांच मीटर लंबे और कुछ सेंटीमीटर से लेकर दो मीटर गहरे हो सकते हैं। एक जीव कई बिलों का इस्तेमाल करता है। इनमें से एक बिल घोंसले के लिए होता है और बाकी उथले बिल चारे के जाल की तरह काम करते हैं। सामान्य तौर पर नर और मादा केवल प्रजनन के समय या माँ और छोटे बच्चों के साथ ही बिल साझा करते हैं।
मुसीबत के समय यह पहले स्थिर हो जाता है। खतरा करीब हो तो यह तेज़ी से भाग सकता है या कुछ दूरी तक छलांग लगाकर दौड़ सकता है। सबसे आम बचाव बिल में घुसकर पीठ मोड़ना और पैर टिकाना है, जिससे इसे बाहर खींचना मुश्किल हो जाता है। बिल न मिले तो यह कांटेदार झाड़ियों में छिप जाता है।
जीव नदियाँ पार करने के लिए तैर सकता है या नदी तल पर चलकर जा सकता है। यह लगभग छह मिनट तक सांस रोक सकता है, और निगली हुई हवा से अपनी उछाल को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकता है। लंबी दूरी के पानी को यह पार नहीं कर पाता, क्योंकि इसकी थकान जल्दी हो जाती है।
हर वयस्क का एक घरेलू क्षेत्र होता है। इसका आकार 0.63 से 20.1 हेक्टेयर तक हो सकता है, जो मिट्टी और पानी की उपलब्धता पर निर्भर है। नर प्रजनन क्षेत्र पर अधिकार रखते हैं और दूसरे नरों को दूर रखने के लिए आक्रामक हो सकते हैं।
संचार
इसकी इंद्रियों में गंध सबसे प्रमुख है। यह नाक लगभग ज़मीन के पास रखकर चलता है और सतह के नीचे 20 सेमी तक के अकशेरुकी जीवों की गंध पहचान सकता है। चारा खोजते समय यह पिछले पैरों और पूंछ के सहारे खड़ा होकर हवा सूंघता है।
जोड़े के बीच एक “चकिंग” जैसी आवाज़ सुनी जाती है। सुनने की क्षमता भी अच्छी है, जिसका उपयोग यह शिकारियों या संभावित खतरे से बचने के लिए करता है। दृष्टि कमज़ोर है और केवल पास की चीज़ें साफ़ दिखती हैं।
गंध ग्रंथियों से निकलने वाले स्राव पेशाब, मल और आंखों, नाक और पैरों की ग्रंथियों से निकलते हैं, जिनसे यह अपना इलाका चिह्नित करता है। स्पर्श और रसायन भी संचार के माध्यम हैं, पर इसका स्वाद बोध कमज़ोर माना जाता है।
आहार और पोषण
यह सामान्य और अवसरवादी भोजी है, जो लगभग 500 अलग-अलग खाद्य पदार्थ खाता है। इसके आहार का नब्बे प्रतिशत से अधिक हिस्सा, मात्रा के हिसाब से, जानवरों से आता है। सबसे बड़ा हिस्सा अक्सर भृंग, यानी लार्वा और वयस्क दोनों, का होता है।
इसके भोजन में दीमक, गोजर, कनखजूरे, चींटियाँ, टिड्डे, मकड़ी जैसे जीव, केंचुए और कई अन्य कीट और ज़मीन पर रहने वाले अकशेरुकी शामिल हैं। चींटी के टीलों को खाने के बाद यह अक्सर ज़ोर से लोट लगाता है, शायद चींटियों को शरीर से हटाने के लिए।
सर्दियों में, जब छोटे सरीसृप और उभयचर सुस्त होते हैं, तब इनका शिकार भी करता है। कभी-कभी यह छोटे स्तनधारियों के बच्चे या पक्षियों के अंडे भी खाता है। पौधों से मिलने वाला भोजन, जैसे फल, बीज और फफूंद, कुल आहार के दस प्रतिशत से कम होता है। मृत जीवों का मांस कभी-कभी खाया जाता है, पर इसे अक्सर लाशों में पलने वाले कीड़ों की तलाश होती है।
चारा खोजने में इसकी सबसे बड़ी मदद इसकी गंध है। यह छोटे बिलों में फंसे कीड़ों को ढूंढने के लिए उथले बिलों में भी जाता है।
प्रजनन और बच्चों का पालन
इसका प्रजनन मौसम गर्मियों में होता है। उत्तरी गोलार्ध में जून से जुलाई और दक्षिणी गोलार्ध में नवंबर से दिसंबर के बीच जोड़े बनते हैं। इस दौरान नर मादा के कुछ मीटर के भीतर रहता है और दोनों साथ चारा खोजते हैं। पीठ को छूना, पूंछ हिलाना और मादा का पूंछ उठाना जैसे व्यवहार जोड़े में आम हैं।
एक साल में सामान्यतः एक बार अंडाणु निकलता है, जो आम तौर पर गर्मी की शुरुआत में होता है। मादा के गर्भाशय में एक ही निषेचित कोशिका विकसित होती है, जो लगभग 14 सप्ताह तक गर्भाशय में रहकर रोपण के लिए तैयार होती है। रोपण के बाद वह एक ही साथ चार समान भ्रूणों में बंट जाती है। इसलिए आम तौर पर एक साथ चार समान बच्चे पैदा होते हैं।
गर्भावधि लगभग चार महीने की होती है और बच्चे बसंत में जन्म लेते हैं, जब तापमान गर्म और भोजन भरपूर होता है। बच्चे पैदा होते समय विकसित होते हैं और वयस्कों जैसे दिखते हैं, बस आकार में छोटे होते हैं। जन्म के वज़न लगभग 85 ग्राम होता है। कवच कुछ सप्ताह बाद सख्त होता है।
माँ बच्चों को लगभग दो से तीन महीने तक दूध पिलाती है। बच्चे जल्दी ही माँ के साथ चारा खोजने लगते हैं। पहली गर्मी और शरद ऋतु में भाई-बहन एक ही बिल और चारा क्षेत्र साझा कर सकते हैं। सेक्स परिपक्वता आम तौर पर एक से दो साल में आती है, और पूरी तरह विकसित होने में तीन से चार साल लगते हैं। इसकी अधिकतम जीवन अवधि तक दर्ज प्रजनन के रूप में दी जाती है।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
यह जाति अपनी ऊँची प्रजनन दर और फैलते दायरे के कारण कई इलाकों में बढ़ रही है। कई हिस्सों में आबादी बढ़ने का रुझान है।
पारिस्थितिक तंत्र में यह कीड़ों और अकशेरुकी जीवों को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करता है। कुछ कीट, जो फसलों के लिए हानिकारक हैं, इसके भोजन में आते हैं। इसके परित्यक्त बिलों में सांप और अन्य जीव बस जाते हैं।
यह फैलाव कई परजीवियों और रोगाणुओं का भी वाहक है। इनमें कुष्ठ रोग का जीवाणु Mycobacterium leprae सबसे प्रसिद्ध है। इसके अलावा कुछ फफूंदी, जैसे Paracoccidioides brasiliensis, भी इसके शरीर में पाई गई हैं।
संरक्षण और खतरे
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कम संकटग्रस्त प्रजाति माना गया है। इसकी उच्च प्रजनन दर और बढ़ते फैलाव के कारण इसे अधिकांश हिस्सों में खतरा नहीं माना जाता। अधिकतर इलाकों में इसकी आबादी बढ़ रही है।
सड़क दुर्घटनाएँ इसके लिए सबसे बड़ा दबाव हैं। हर साल हज़ारों जीव सड़कों पर मारे जाते हैं। इसके अलावा शिकार भी होता है, क्योंकि इसका मांस और कवच खाने और सामान बनाने के लिए इस्तेमाल होता है।
फ्लोरिडा में इसे बाहर से लाया गया था, और वहाँ इसके स्थानिक सरीसृपों पर शिकार का दबाव बढ़ने की चिंता जताई गई है। वहाँ यह संकटग्रस्त कछुए के बिल पर भी कब्ज़ा कर सकता है।
सांस्कृतिक महत्व
आर्मडिलो मध्य अमेरिका की मिथकों और लोककथाओं में एक जाना-पहचाना जीव रहा है। इसकी असामान्य बनावट के कारण यह सृष्टि कथाओं से लेकर आधुनिक लोकगीतों तक में दिखता है।
चिकित्सा अनुसंधान में भी इसका महत्व है, क्योंकि यह कई रोगाणुओं को पालता है जो मनुष्यों में बीमारी पैदा करते हैं। इनमें कुष्ठ रोग का जीवाणु और ब्राज़ील में फैलने वाले फफूंद-जनित रोग के कारक सबसे अधिक अध्ययन किए गए हैं।
कुछ इलाकों में इसे इसके मांस और कवच के लिए शिकार किया जाता है। यह कीटों के नियंत्रण में भी सहायक है।
रोचक तथ्य
- यह सांस रोककर लगभग छह मिनट तक पानी के नीचे रह सकता है, और यह क्षमता मूल रूप से गहरी मिट्टी में चारा खोजने के लिए विकसित हुई थी।
- एक ही निषेचित कोशिका से चार समान बच्चे बनते हैं, क्योंकि भ्रूण बंटकर चार बन जाते हैं।
- यह सामान्य जीव अपने शिकारियों से बचने के लिए सबसे पहले बिल खोजता है, और बिल में घुसकर इसे बाहर निकालना लगभग असंभव होता है।
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Mammalia
- गण
- Cingulata
- कुल
- Dasypodidae
- वंश
- Dasypus
- प्रजाति
- Dasypus novemcinctus
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity



