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Hirundo rustica

Hirundo rustica

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

LCसंकटमुक्त
स्टील-नीले ऊपरी भाग, रूफस रंग के माथे और गले, गहरे नीले वक्ष-पट्टी तथा गहराई से कांटेदार पूंछ वाला एक वयस्क *Hirundo rustica* पक्षी किसी तार या शाखा पर बैठा हुआफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

वज़न
0.018–0.018 kg
जीवनकाल
≤ 16 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Aves
गण
Passeriformes
कुल
Hirundinidae
वंश
Hirundo
प्रजाति
Hirundo rustica

Hirundo rustica विश्व की सबसे व्यापक रूप से फैली निगल-प्रजाति है, जो सभी महाद्वीपों पर पाई जाती है और जिसके भटके हुए व्यक्ति अंटार्कटिका तक में दर्ज किए गए हैं।

यह Passeriformes गण और Hirundinidae कुल का एक विशिष्ट पक्षी है, जिसकी पहचान नीली-धात्विक पीठ और गहराई से कांटेदार पूंछ से होती है। यह उत्तरी गोलार्ध में प्रजनन करता है और शीत ऋतु में दक्षिणी गोलार्ध के व्यापक क्षेत्रों में प्रवास करता है। IUCN की सूची में इसे "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।

इसकी सुंदर बनावट के साथ-साथ इसका जटिल प्रवास, मानव बस्तियों के साथ इसका घनिष्ठ संबंध, और सदियों से साहित्य व लोक-विश्वासों में इसकी उपस्थिति इसे एक विशेष रूप से रुचिकर पक्षी बनाती है।

पहचान और रूप

इसकी सबसे स्पष्ट पहचान रूफस रंग के माथे, ठुड्डी और गले का गहरे नीले वक्ष-पट्टी से अलग होना और पूंछ का गहराई से कांटेदार आकार है, जो इसे "निगल-पूंछ" (swallow tail) रूप देता है।

नामधारी उपजाति H. r. rustica का वयस्क नर 17 से 19 सेंटीमीटर लंबा होता है, जिसमें 2 से 7 सेंटीमीटर लंबी बाहरी पूंछ की पंख-रज्जुएँ भी शामिल हैं। इसका पंख-फैलाव 32 से 34.5 सेंटीमीटर और वजन 16 से 22 ग्राम के बीच होता है। ऊपरी भाग धात्विक स्टील-नीले रंग का होता है, जबकि निचला भाग हल्के, लगभग सफेद रंग का होता है। पूंछ के बाहरी सिरे पर सफेद बिंदुओं की एक पंक्ति भी दिखाई देती है।

मादा नर से मिलती-जुलती है, परंतु उसकी पूंछ की रज्जुएँ छोटी होती हैं, ऊपरी भाग और वक्ष-पट्टी की चमक कम होती है, और निचला भाग अधिक हल्का होता है। किशोर पक्षी अधिक भूरे रंग के होते हैं, उनका चेहरा हल्का रूफस और निचला भाग अधिक सफेद होता है, तथा उनमें वयस्कों जैसी लंबी पूंछ की रज्जुएँ नहीं होतीं।

लाल चेहरे और नीली वक्ष-पट्टी का यह विशिष्ट संयोजन इसे अफ्रीकी Hirundo प्रजातियों और ऑस्ट्रेलेशिया में सह-अस्तित्व रखने वाली welcome swallow (Hirundo neoxena) से अलग पहचानने में सहायक होता है। अफ्रीका में किशोर पक्षियों की छोटी पूंछ की रज्जुएँ उन्हें red-chested swallow (Hirundo lucida) के किशोरों से भ्रमित कर सकती हैं, परंतु उस प्रजाति की वक्ष-पट्टी संकरी होती है और पूंछ में अधिक सफेद रंग होता है।

वितरण और आवास

यह प्रजाति उत्तरी गोलार्ध में समुद्र तल से लेकर 2,700 मीटर की ऊँचाई तक, तथा काकेशस और उत्तरी अमेरिका में 3,000 मीटर तक प्रजनन करती है, और केवल रेगिस्तानों तथा महाद्वीपों के अत्यंत ठंडे उत्तरी भागों में अनुपस्थित रहती है।

प्रजनन के लिए यह खुले, कम वनस्पति वाले क्षेत्रों को पसंद करती है, जैसे चरागाह, घास के मैदान और कृषि भूमि, विशेष रूप से पानी के निकट। यह घने जंगलों, ढलानदार क्षेत्रों और सघन शहरी बस्तियों से बचती है। घोंसला बनाने के लिए इसे खलिहान, अस्तबल, पुलों के नीचे की जगह या नालियों जैसी सुलभ खुली संरचनाओं और बैठने के लिए तारों, छत की मुंडेरों या नंगी शाखाओं की आवश्यकता होती है। यह अर्ध-समूहीय प्रवृत्ति की होती है और एक जोड़े से लेकर कुछ दर्जन जोड़ों तक के समूहों में बसती है।

सर्दियों में यह रेगिस्तानों और घने जंगलों को छोड़कर लगभग सभी प्रकार के खुले आवासों में पाई जाती है, जैसे सवाना और चारागाह भूमि। वेनेजुएला, दक्षिण अफ्रीका तथा त्रिनिदाद और टोबैगो में यह विशेष रूप से जली हुई या कटी हुई गन्ने की फसलों की ओर आकर्षित होती है। शीतकालीन बसेरे नरकुल-बिस्तरों (reed beds) में बनाए जाते हैं और अत्यंत बड़े हो सकते हैं—नाइजीरिया में एक बसेरे में लगभग 1.5 मिलियन पक्षियों का अनुमान लगाया गया था। ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के बीच इसके प्रवास की पहली पुष्टि 23 दिसंबर 1912 को हुई थी, जब स्टैफर्डशायर में अंकित किया गया एक पक्षी नटाल में पाया गया। भटके हुए व्यक्ति हवाई, बरमूडा, ग्रीनलैंड, त्रिस्तान दा कुन्हा, फॉकलैंड द्वीप और अंटार्कटिका तक दर्ज किए गए हैं।

मासिक अवलोकन आँकड़ों में मई महीने में सबसे अधिक दर्ज संख्या (लगभग 39 लाख) देखी गई है, जो अप्रैल से अगस्त के बीच बढ़ी हुई उपस्थिति दर्शाती है। यह आँकड़े केवल उपस्थिति के अभिलेख हैं, न कि जनसंख्या या पूर्ण वितरण क्षेत्र का माप, परंतु इनसे प्रजनन-काल में उत्तरी गोलार्ध में इसकी बढ़ी हुई सक्रियता का संकेत सावधानी से लिया जा सकता है।

Hirundo rustica के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
39,10,449
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

यह पक्षी दैनिक रूप से सक्रिय (diurnal) और प्रवासी है, तथा बड़े सामाजिक समूहों में तारों या ऊँची संरचनाओं पर बैठा देखा जाता है। यह गीत गाते समय व्यक्तिगत और समूह दोनों रूपों में गाता है, तथा उच्च गुणवत्ता वाले घोंसला-स्थलों की उपलब्धता के कारण समूहीय रूप से प्रजनन करता है।

समूह के भीतर प्रत्येक जोड़ा अपने घोंसले के आसपास का क्षेत्र सुरक्षित रखता है; यूरोपीय आबादी में यह क्षेत्र लगभग 4 से 8 वर्ग मीटर तक होता है। भोजन की खोज के लिए यह घोंसले से अपेक्षाकृत सीमित दूरी तक ही जाता है—पश्चिम वर्जीनिया के एक अध्ययन में पक्षी घोंसले से 1.2 किलोमीटर के भीतर भोजन खोजते पाए गए, जबकि यूरोप में यह दूरी लगभग 500 मीटर तक सीमित रही।

ये अत्यंत झुंडशील पक्षी हैं और बड़े सामुदायिक बसेरों में एकत्रित होते हैं, जहाँ से छोटे-छोटे समूह प्रतिदिन भोजन की खोज के लिए अलग-अलग दिशाओं में निकलते हैं। यह व्यवहार सुरक्षा और चारा-खोज दोनों की दृष्टि से लाभकारी माना जाता है।

संचार

यह पक्षी दृश्य संकेतों और ध्वनियों दोनों के माध्यम से संवाद करता है, तथा भिन्न परिस्थितियों के लिए भिन्न प्रकार की पुकारें रखता है—पूर्वसूचक चेतावनी पुकारें, प्रणय-आह्वान की पुकारें और घोंसले में शिशुओं की पुकारें। बिल्लियों जैसे खतरों के लिए एक तीखी "siflitt" पुकार दी जाती है, जबकि hobby जैसे शिकारी पक्षियों के लिए "flitt-flitt" पुकार का उपयोग होता है। उत्तेजना की स्थिति में या घोंसले से घुसपैठियों को भगाने के लिए "witt" या तेज "splee-plink" जैसी आवाज़ें निकाली जाती हैं। यह अपनी चोंचें आपस में टकराकर एक विशिष्ट क्लिक ध्वनि भी उत्पन्न करता है।

नर अपने छोटे क्षेत्र की रक्षा के लिए और साथी को आकर्षित करने के लिए गाते हैं, यह गायन प्रजनन काल में अप्रैल के अंत से अगस्त तक चलता है। गीत की संरचना में एक "twitter warble" के बाद बढ़ती हुई "P-syllable", फिर एक छोटी "Q-syllable" और स्पंदनों की एक श्रृंखला जिसे "rattle" कहा जाता है, शामिल होती है; कुछ उपजातियों में यह एक अंतिम "Ω-note" के साथ समाप्त होती है।

मादाएँ भी गाती हैं, परंतु उनका गीत नर की तुलना में बहुत छोटा होता है और मुख्यतः प्रजनन-काल के आरंभिक भाग में ही सुनाई देता है; मादाएँ स्वतः, यद्यपि कम आवृत्ति से, गाती हैं और परस्पर प्रतिस्पर्धी गायन (countersinging) भी करती हैं।

शिकार और आहार

यह पक्षी उड़ते हुए ही अपने अधिकांश शिकार को पकड़ता है और यहाँ तक कि उड़ान के दौरान ही घोंसले में अपने शिशुओं को भी भोजन खिला सकता है। इसका शिकार-तरीका अवसरवादी है—यह ट्रैक्टरों और हल चलाने वाली मशीनों के पीछे उड़ते देखा गया है, जहाँ यह मशीनों द्वारा हवा में उड़ाए गए कीड़ों को पकड़ता है।

मक्खियाँ, टिड्डे, झींगुर, ड्रैगनफ्लाई, बीटल और पतंगे जैसे उड़ने वाले कीट इसके आहार का लगभग 99 प्रतिशत भाग बनाते हैं, जो इसे पूर्णतः कीटभक्षी बनाता है।

पानी पीने के लिए यह उड़ते हुए ही किसी जलाशय की सतह को हल्के से छूता है, जिससे इसे भूमि पर उतरने की आवश्यकता नहीं पड़ती—यह इसकी संपूर्ण उड़ान-केंद्रित जीवनशैली का ही एक और उदाहरण है।

घोंसला और प्रजनन

नर मादा से पहले प्रजनन-स्थल पर पहुँचता है और घोंसले के लिए स्थान चुनकर, चक्राकार उड़ान और गायन के माध्यम से उसे मादाओं के सामने प्रदर्शित करता है। कुछ उपजातियों, जैसे H. r. gutturalis में, गहरे रंग का निचला पंख-आवरण अधिक प्रजनन-सफलता से जुड़ा होता है, जबकि अन्य आबादियों में पूंछ की रज्जुओं की लंबाई अधिक महत्त्वपूर्ण होती है—लंबी रज्जुओं वाले नर अधिक दीर्घजीवी और रोग-प्रतिरोधी माने जाते हैं। यह सामाजिक रूप से एकनिष्ठ (monogamous) प्रजाति है, परंतु जोड़े के बाहर मैथुन सामान्य है, जिससे यह आनुवंशिक रूप से बहुसंगमी बन जाती है। अविवाहित नर कभी-कभी किसी जोड़े के साथ पूरे मौसम तक जुड़े रहते हैं और घोंसले की रक्षा, निर्माण या अंडे सेने में सहायता करते हैं।

घोंसला खलिहान, अस्तबल, पुलों या घाटों के नीचे बनाया जाता है, और ऐतिहासिक रूप से चट्टानों तथा गुफाओं में भी बनता था। कटोरे के आकार का यह घोंसला मिट्टी की गोलियों से बनाया जाता है और घास, पंख या शैवाल से भीतर से बिछाया जाता है; इसे बनाने में दोनों साथी लगभग दो सप्ताह का समय लेते हैं। घोंसले उच्च गुणवत्ता वाले स्थलों पर समूहों में बनाए जाते हैं, जहाँ प्रत्येक जोड़ा अपने घोंसले के आसपास 4 से 8 वर्ग मीटर का क्षेत्र सुरक्षित रखता है।

मादा एक बार में 3 से 7 अंडे देती है, औसतन 5, जो सफेद रंग के होते हैं और उन पर लाल-भूरे धब्बे होते हैं। दोनों माता-पिता अंडों को सेते हैं, जो 13 से 15 दिनों में फूटते हैं। नवजात चूजे नंगे और पूर्णतः असहाय होते हैं, और उन्हें एक दिन में लगभग 400 बार तक भोजन दिया जा सकता है, जिसमें कीड़ों को दबाकर एक गोली के रूप में गले में लाया जाता है। चूजे लगभग 20 दिन घोंसले में रहने के बाद उड़ना शुरू करते हैं, और माता-पिता उड़ान भरने के बाद भी लगभग एक सप्ताह तक उनकी देखभाल करते रहते हैं।

एक मौसम में सामान्यतः दो बार प्रजनन होता है, और पहले बच्चों में से किशोर पक्षी कभी-कभी अपने माता-पिता को दूसरी संतान को भोजन देने में सहायता करते देखे गए हैं। दोनों लिंग अपने पहले प्रजनन-मौसम में ही, यानी लगभग एक वर्ष की आयु में, प्रजनन-सक्षम हो जाते हैं। इसकी अधिकतम आयु लगभग 16 वर्ष दर्ज की गई है।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

इस प्रजाति की वैश्विक जनसंख्या लगभग 190 मिलियन व्यक्तियों की अनुमानित है, जो लगभग 250 मिलियन वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली हुई है।

पारिस्थितिकी तंत्र में यह पक्षी उड़ने वाले कीटों की भारी मात्रा का उपभोग करता है, जिससे यह कीट-नियंत्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह अनेक शिकारियों के लिए भोजन का स्रोत भी है—इसके शिकारियों में पेरेग्रीन फाल्कन और अफ्रीकी hobby जैसे बाज़, greater false vampire bat जैसे मांसाहारी चमगादड़, तथा अफ्रीका में tigerfish (Hydrocynus vittatus) शामिल हैं, जो पानी से बाहर उछलकर निचली उड़ान भरते इस पक्षी को पकड़ लेती है। यह ऑस्प्रे के साथ एक परस्पर-लाभकारी संबंध भी बनाता है, जहाँ इसे बड़े ऑस्प्रे घोंसलों के निकट रहकर शिकारी पक्षियों से सुरक्षा मिलती है, और बदले में यह अपनी चेतावनी पुकारों से ऑस्प्रे को खतरे की सूचना देता है।

यह प्रजाति पंख-भक्षी जूँओं (जैसे Brueelia की विभिन्न प्रजातियों) और टेक्सास में पाए जाने वाले swallow bug से भी प्रभावित होती है। इसके घोंसलों में कभी-कभी cowbird द्वारा परजीविता भी दर्ज की गई है, जहाँ cowbird अपना अंडा घोंसले में छोड़ देता है और यह उसे अपने ही अंडों के साथ सेता है।

संरक्षण और खतरे

इसकी विशाल जनसंख्या और व्यापक भौगोलिक फैलाव के कारण इसे IUCN की सूची में "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। ऐतिहासिक रूप से वन-कटाई और मानव बस्तियों से इसे लाभ हुआ है, क्योंकि इससे इसे पसंदीदा खुले आवास और सुरक्षित मानव-निर्मित घोंसला-स्थल मिले हैं।

सबसे बड़ा खतरा कृषि भूमि का कम होना और खेती वाले भवनों का शहरी संरचनाओं में बदलना है, जिससे घोंसला-स्थल घटते हैं और भोजन की उपलब्धता भी कम होती है—जिन स्थानों पर खेती बंद हो जाती है, वहाँ कीट-जनसंख्या में लगभग 50 प्रतिशत की कमी देखी गई है। इसके अतिरिक्त, 1950 के दशक में इज़राइल में DDT के उपयोग से स्थानीय गिरावट आई थी, और 19वीं सदी में अमेरिका में house sparrow के साथ घोंसला-स्थलों के लिए प्रतिस्पर्धा से भी नुकसान हुआ था। यूरोप और एशिया के कुछ भागों में कृषि के गहनीकरण के कारण क्रमिक गिरावट अब भी जारी है।

दक्षिण अफ्रीका के डरबन के निकट माउंट मोरलैंड नरकुल-बिस्तर, जो तीन मिलियन से अधिक पक्षियों—यानी वैश्विक जनसंख्या का लगभग 1 प्रतिशत और यूरोपीय प्रजनन-आबादी का लगभग 8 प्रतिशत—का रात्रि-बसेरा है, 2010 फीफा विश्व कप के लिए एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण से खतरे में आया था; अंततः उन्नत रेडार तकनीक लगाकर विमानों को पक्षियों की उपस्थिति की सूचना देने का समाधान अपनाया गया। जलवायु परिवर्तन भी एक उभरता खतरा है—सूखे से वजन घटता है और पंखों की पुनर्वृद्धि धीमी पड़ती है, तथा सहारा रेगिस्तान के विस्तार से यूरोपीय पक्षियों के लिए प्रवास और कठिन हो सकता है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

यह पक्षी प्राचीन काल से मानव-निर्मित संरचनाओं और पुलों का उपयोग घोंसले के लिए करता आया है; वर्जिल की Georgics (29 ईसा पूर्व) में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसका उत्तर की ओर प्रवास प्राचीन साहित्य में वसंत या ग्रीष्म के आगमन के प्रतीक के रूप में बार-बार दर्शाया गया है—अरिस्तोतल की Nicomachean Ethics में प्रसिद्ध कहावत "एक निगल से वसंत नहीं आता" इसका उदाहरण है। लैटिन कविता Pervigilium Veneris में यह वसंत और प्रेम के आगमन का प्रतीक है, और टी. एस. एलियट ने अपनी कविता "The Waste Land" में फिलोमेला के मिथक के संदर्भ में इसका उल्लेख किया।

नाविकों में पाँच हज़ार समुद्री मील की यात्रा पूरी करने के बाद इस पक्षी का टैटू बनवाने की परंपरा रही है, और दस हज़ार मील पूरे होने पर दूसरा टैटू जोड़ा जाता था, जो सुरक्षित वापसी का प्रतीक माना जाता था। पुराने कृषक-समुदायों में यह विश्वास प्रचलित था कि इसके घोंसले को नुकसान पहुँचाने से गायों का दूध खराब हो सकता है या मुर्गियाँ अंडे देना बंद कर सकती हैं—इस अंधविश्वास ने भी इसके घोंसलों की लंबी उम्र में योगदान दिया, जिनमें से एक घोंसला 48 वर्षों तक निरंतर उपयोग में रहा। यूरोपीय हेराल्ड्री (कुलचिह्न-विद्या) में इसे पैर-रहित रूप में "मार्टलेट" के रूप में दिखाया जाता है, जो भूमिहीन छोटे पुत्रों का प्रतीक है। यह 1960 से एस्टोनिया का और साथ ही ऑस्ट्रिया का भी राष्ट्रीय पक्षी है।

चीनी संस्कृति में यह सौभाग्य और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है और सिक्कों तथा मुद्राओं पर चित्रित किया जाता रहा है; इसे स्थानीय भाषा में "जिया यान" यानी "परिवार का निगल" भी कहा जाता है, जो परिवार के सौभाग्य के शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।

रोचक तथ्य

  1. इसके भटके हुए व्यक्ति हवाई, बरमूडा, ग्रीनलैंड, त्रिस्तान दा कुन्हा, फॉकलैंड द्वीप और यहाँ तक कि अंटार्कटिका में भी दर्ज किए गए हैं।
  2. ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के बीच इसके प्रवास की पहली पुष्टि 23 दिसंबर 1912 को हुई, जब स्टैफर्डशायर में अंकित एक पक्षी नटाल में मिला।
  3. एक घोंसला लगातार 48 वर्षों तक उपयोग में रहा, जिसे हर वर्ष थोड़ा-थोड़ा मरम्मत करके पुनः इस्तेमाल किया गया।
  4. नाविकों में पाँच हज़ार समुद्री मील की यात्रा के बाद इसका टैटू बनवाने और दस हज़ार मील पूरे होने पर दूसरा टैटू जोड़ने की परंपरा रही है।
  5. यह 1960 से एस्टोनिया का और साथ ही ऑस्ट्रिया का भी राष्ट्रीय पक्षी है।
  6. अफ्रीका में tigerfish नामक मछली पानी से बाहर उछलकर निचली उड़ान भरते इस पक्षी को पकड़ लेती है।
  7. नाइजीरिया में एक ही शीतकालीन बसेरे में लगभग 1.5 मिलियन पक्षियों के एकत्रित होने का अनुमान लगाया गया है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • आर्द्रभूमि
  • मीठा जल
  • घास का मैदान
  • शहरी

व्यवहार

  • परभक्षी
  • सामाजिक
  • दिवाचर
  • प्रवासी

आहार

  • कीटभक्षी

फ़ोटो

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स्टील-नीले ऊपरी भाग, रूफस रंग के माथे और गले, गहरे नीले वक्ष-पट्टी तथा गहराई से कांटेदार पूंछ वाला एक वयस्क *Hirundo rustica* पक्षी किसी तार या शाखा पर बैठा हुआफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of LifeAnimal Diversity WebAnAge