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Lacerta agilis

Lacerta agilis

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

LCसंकटमुक्त
रेत और झाड़ियों के बीच धूप में बैठी एक वयस्क *Lacerta agilis* छिपकली, जिसकी पीठ और पार्श्व पर आँख के आकार के हल्के केंद्र वाले गहरे धब्बों की पंक्तियाँ हैं और चार छोटे पैर स्पष्ट दिखते हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

एक नज़र में

इसके लिए जाना जाता है
तटीयझाड़ीदार भूमिपर्वतएकांतप्रियक्षेत्रीयआक्रामक
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Squamata
कुल
Lacertidae
वंश
Lacerta
प्रजाति
Lacerta agilis

वसंत के संभोग काल में नर Lacerta agilis के पार्श्व चमकीले हरे रंग के हो जाते हैं और गर्मियों के अंत तक यह रंग फिर फीका पड़ जाता है। यह इस छिपकली की सबसे पहचानी जाने वाली विशेषता है।

Lacerta agilis लैसर्टिडे परिवार की एक छिपकली है, जिसकी कई उपजातियाँ हैं, जिनमें L. a. agilis, L. a. argus और L. a. exigua शामिल हैं। यह यूरोप और रूस के विस्तृत भूभाग में पाई जाती है और वैश्विक स्तर पर इसे IUCN द्वारा "कम चिंताजनक" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, हालांकि ब्रिटेन और स्वीडन जैसे क्षेत्रों में यह गंभीर रूप से संरक्षित है।

इसका आक्रामक नर-नर संघर्ष, पूंछ त्यागकर बचाव करने की क्षमता, और भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार बदलता रंग-रूप इसे कशेरुकी जीवों में एक दिलचस्प अध्ययन विषय बनाता है।

पहचान और रूप

सबसे उपयोगी पहचान चिह्न है पीठ और पार्श्व पर बनी आँख के आकार की धारियाँ, जो हल्के केंद्र वाले गहरे धब्बों के रूप में दिखती हैं और दोनों लिंगों में पाई जाती हैं। यूरोप के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में यह पैटर्न विशेष रूप से स्पष्ट है, जबकि रंग पूरे यूरोपीय और रूसी वितरण क्षेत्र में भिन्न-भिन्न होता है।

आकार में यह लिंगों के बीच थोड़ा भिन्न है: वयस्क नर की कुल शरीर लंबाई अधिकतम 19.3 सेंटीमीटर तक पहुँच सकती है, जबकि मादा अधिकतम 18.5 सेंटीमीटर तक होती है। पश्चिमी उपजातियों L. a. agilis और L. a. argus में पीठ की धारी पतली, टूटी-फूटी या पूरी तरह अनुपस्थित होती है, और L. a. argus में बिना किसी पीठ-चिह्न वाला सादा लाल या भूरी पीठ वाला रूप भी पाया जाता है। इसके विपरीत, पूर्वी उपजाति L. a. exigua के नर प्रजनन काल से बाहर भी पूरी तरह हरे दिख सकते हैं।

नर और मादा के बीच रंग का स्पष्ट अंतर है: मादा का रंग भूरे-सलेटी रंग का होता है और मई से अगस्त के बीच उनका पेट अंडों से भरा हुआ फूला हुआ दिखता है, जबकि नर की बारीक धारियाँ होती हैं और वसंत में केवल उनके पार्श्व हरे रंग के होते हैं (पश्चिमी उपजातियों में)।

खतरे में फंसने पर यह छिपकली अपनी पूंछ स्वयं अलग कर सकती है, जिसे स्वतः-विच्छेदन (autotomy) कहा जाता है। Lacerta agilis दस वर्ष से अधिक जीवित रह सकती है, हालांकि औसत जीवनकाल 5 से 6 वर्ष के बीच होता है।

वितरण और आवास

Lacerta agilis मुख्य रूप से शुष्क, निचले हीथलैंड और तटीय रेत के टीलों में पाई जाती है, जहाँ इसे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और शिकारियों से बचने के लिए विविध संरचनात्मक और तापीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। घना हीदर और मैरम घास इसके लिए आवश्यक आवरण प्रदान करते हैं, जबकि बिना छाया वाले रेत के टुकड़े अंडे देने और छिपने के लिए बिल खोदने हेतु अनिवार्य होते हैं।

महाद्वीपीय यूरोप में यह छिपकली विविध प्रकार के आवासों में मिलती है, जैसे चट्टानी उभार, खेत, पहाड़ियाँ, समुद्र तट, हीथलैंड, रेत के टीले और पथरीले बागान। इसके विपरीत, ब्रिटेन जैसे ठंडे क्षेत्रों में यह अंडों के लिए रेत की गर्मी पर निर्भर होने के कारण मुख्यतः तटीय आवासों तक सीमित है।

नर की गृह-सीमाएँ (home range) एक-दूसरे से भारी मात्रा में ओवरलैप करती हैं, जबकि मादाओं की गृह-सीमाएँ बहुत छोटी होती हैं—सामान्यतः 100 वर्ग मीटर से कम—और पड़ोसी मादाएँ आपस में बिल या धूप सेकने के स्थान भी साझा कर सकती हैं।

GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े मई में सबसे अधिक (लगभग 44,000 से अधिक) देखे गए, और अप्रैल से अगस्त के बीच संख्या ऊँची बनी रही, जबकि नवंबर से जनवरी तक अवलोकन बहुत कम रहे। ये आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं—पूर्ण जनसंख्या या आबादी का आकार नहीं—लेकिन संभवतः यह वसंत और गर्मियों में सक्रियता के मौसमी बदलाव का संकेत देते हैं।

Lacerta agilis के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
44,333
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

जागने के बाद Lacerta agilis लंबे समय तक धूप सेकती है और बीच-बीच में भोजन खोजने के लिए छोटे विश्राम लेती है; खराब मौसम में यह देर से बाहर निकलती है और कम धूप सेकती है। यह अक्सर लट्ठों पर धूप सेकना पसंद करती है, क्योंकि लट्ठे गर्मी को सोखते और धीरे-धीरे छोड़ते हैं और साथ ही शिकारियों व शिकार को देखने के लिए ऊँचा स्थान भी देते हैं। यह खुली रेत या मिट्टी पर धूप सेकने से बचती है और वनस्पति के बीच रहना पसंद करती है, तथा उच्च व निम्न सूर्यताप वाले क्षेत्रों के बीच घूमकर तापमान नियंत्रित करती है।

यह छिपकली धूप सेकने का स्थान शायद ही कभी दूसरों के साथ साझा करती है; नर विशेष रूप से एक-दूसरे के साथ स्थान साझा करने से बचते हैं और कभी-कभार मादा के साथ ही साझा करते देखे जाते हैं। सामाजिक संरचना बहुपत्नी (polygynous) है, जिसमें नर एक साथ कई मादाओं से संभोग करने का प्रयास करते हैं।

नर पहले अपने विरोधी को डराने के लिए चारों पैरों पर उठकर पलटने जैसी प्रदर्शनात्मक क्रिया करते हैं, और यदि विरोधी पीछे नहीं हटता तो वास्तविक संघर्ष शुरू हो जाता है। यदि दो नर बार-बार भिड़ते हैं तो वे एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में पहचान लेते हैं, जिससे बाद के संघर्ष पहले की तुलना में छोटे होते जाते हैं। संभोग का पूरा मौसम वर्ष में केवल 17 दिन तक चलता है, जिसमें एक नर अधिकतम लगभग छह मादाओं से संभोग कर पाता है, क्योंकि हर संभोग के बाद मादा की रक्षा करने में ही मौसम के 18% तक समय लग जाता है।

प्रजनन और जीवन चक्र

हाइबरनेशन समाप्त होने के कुछ सप्ताह बाद वयस्क नर अत्यंत आक्रामक हो जाते हैं और अधिक से अधिक मादाओं से संभोग करने का प्रयास करते हैं। संभोग की क्रिया 2 से 4 मिनट तक चलती है, जिसके बाद नर घंटों या कई दिनों तक उस मादा की रक्षा करता है, इससे पहले कि वह नई साथी खोजने निकले।

मादा एक धूपदार स्थान पर ढीली रेत में अंडे देती है, जहाँ अंडे भूमि की गर्मी से सेते हैं। एक मादा वर्ष में सामान्यतः केवल एक ही समूह में छह से पंद्रह अंडे देती है। अंडे देने का समय मादाओं के बीच भिन्न होता है, लेकिन हर मादा वर्ष-दर-वर्ष अपेक्षाकृत स्थिर समय बनाए रखती है; जो मादाएँ बड़ी और अधिक स्वस्थ होती हैं वे पहले अंडे देती हैं, और उनसे जन्मी संतानें आकार में बड़ी, अधिक सफल और अधिक जीवित रहने वाली पाई गई हैं।

जब मादा अधिक अंडे देती है तो हर अंडे का आकार छोटा हो जाता है, जबकि कम अंडों वाले समूह में अंडे बड़े होते हैं। जब भोजन की कमी नहीं होती, तो अंडों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उपलब्ध संसाधन और अंडे देने के लिए उपलब्ध स्थान दोनों ही अंडों की संख्या और आकार को प्रभावित करते हैं।

एक मादा कई नरों से संभोग कर सकती है, जिससे उसके प्रजनन तंत्र में शुक्राणुओं के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। मादा सक्रिय रूप से उन नरों के शुक्राणु को प्राथमिकता देती है जो उससे दूर के रिश्ते में हैं, जिससे अंतःप्रजनन (inbreeding) के नुकसान से बचाव होता है और एक ही समूह के अंडों में कई पिता हो सकते हैं। निकट संबंधियों के बीच संभोग से जन्मी संतानों में विकृतियाँ देखी गई हैं, जो जंगली और प्रयोगशाला दोनों परिस्थितियों में सामने आई हैं।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

Lacerta agilis को नेवला परिवार के जंतु, लोमड़ी, बिज्जू, शिकारी पक्षी और साँप जैसे कई प्राकृतिक शिकारी खाते हैं, इसके साथ ही घरेलू बिल्लियाँ, तीतर और मुर्गियाँ भी इसका शिकार करती हैं।

इसकी पूंछ का स्वतः-विच्छेदन (autotomy) शिकारियों से बचने की एक महत्वपूर्ण रणनीति है, क्योंकि पूंछ त्यागने के बाद यह छिपकली तेज़ दौड़कर शिकारी से बच सकती है; हालांकि कटी हुई पूंछ बाद में केवल मूल लंबाई के लगभग 80% तक ही फिर से बढ़ती है।

यह छिपकली सामान्य टिक (tick) परजीवियों की एक प्रमुख वाहक भी है, जो विशेष रूप से संभोग काल में अधिक घूमने वाले नरों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनते हैं; जिन नरों की गृह-सीमा बड़ी होती है उन पर परजीवियों का बोझ भी अधिक पाया गया है। इसके अलावा इसके आहार-नाल में ट्रेमाटोड, मेटासर्केरिया, सेस्टोड लार्वा, नेमाटोड और एकारिन जैसे कई अन्य परजीवी भी पाए जाते हैं।

संरक्षण और खतरे

IUCN द्वारा Lacerta agilis को वैश्विक स्तर पर "कम चिंताजनक" श्रेणी में रखा गया है, यानी यह प्रजाति समग्र रूप से विलुप्ति के निकट नहीं मानी जाती, फिर भी यह ब्रिटेन के कानून के अंतर्गत और यूरोप के अधिकांश भागों में गंभीर रूप से संरक्षित है। यह स्थिति रूसी उपजाति L. a. exigua से भिन्न है, जिसका रूसी नाम "साधारण छिपकली" के अर्थ में अनुवादित होता है।

इसके सामने सबसे गंभीर खतरे आवास विनाश, आवास क्षरण और विखंडन हैं, इसके अलावा उचित आवास प्रबंधन की कमी, जलवायु परिवर्तन और अनुपयुक्त आवास प्रबंधन भी इसकी आबादी को प्रभावित करते हैं। स्वीडन में आबादियाँ अत्यधिक खंडित हो गई हैं, जिससे अंतःप्रजनन बढ़ा है और आनुवंशिक विविधता घटी है; वर्ष 2017 तक के आँकड़ों के अनुसार, पिछले लगभग 20 वर्षों में स्वीडिश आबादियों में 20 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

ब्रिटेन में एम्फीबियन एंड रेप्टाइल कंज़र्वेशन ट्रस्ट इसके संरक्षण कार्यों का समन्वय करता है, जिसमें एक सफल कैद-प्रजनन और पुनःस्थापन कार्यक्रम शामिल है, क्योंकि यह ब्रिटेन की केवल छह देशज सरीसृप प्रजातियों में से एक है। स्वीडन में भी एक राष्ट्रीय संरक्षण योजना के अंतर्गत इसका प्रबंधन किया जाता है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

Lacerta agilis के जीनस नाम, Lacerta, का एक दिलचस्प संबंध रात के आकाश से भी है—इसी नाम का एक आधुनिक तारामंडल भी मौजूद है, जिसे खगोलशास्त्री जोहानेस हेवेलियस ने प्रस्तावित किया था।

क्योंकि यह तारामंडल आधुनिक काल में जोड़ा गया था, इसके साथ प्राचीन ग्रीक या रोमन पौराणिक कथाओं जैसी कोई परंपरा नहीं जुड़ी, यद्यपि इसका तारा-समूह प्राचीन काल के लोगों को भी आकाश में स्पष्ट दिखता था। यह संबंध छिपकली की जैविक विशेषताओं से नहीं, बल्कि केवल नामकरण की समानता से जुड़ा एक रोचक तथ्य है, न कि इस छिपकली से जुड़ी कोई सांस्कृतिक या पौराणिक परंपरा।

रोचक तथ्य

  1. Lacerta agilis दस वर्ष से अधिक जीवित रह सकती है, हालांकि इसका औसत जीवनकाल 5 से 6 वर्ष के बीच होता है।
  2. खतरे में पूंछ त्यागने के बाद यह छिपकली नई पूंछ उगाती तो है, लेकिन वह मूल लंबाई के अधिकतम लगभग 80 प्रतिशत तक ही पहुँच पाती है।
  3. जिन नरों की गृह-सीमा बड़ी होती है, विशेषकर संभोग काल में अधिक घूमने के कारण, उन पर टिक जैसे परजीवियों का बोझ भी अधिक पाया जाता है।
  4. मादा जानबूझकर उन नरों के शुक्राणु को प्राथमिकता देती है जो उससे दूर के रिश्ते में होते हैं, ताकि अंतःप्रजनन के नुकसान से बचा जा सके।
  5. इस छिपकली का जीनस नाम, Lacerta, रात के आकाश में मौजूद एक आधुनिक तारामंडल के नाम से भी मेल खाता है, जिसमें कोई पौराणिक कथा नहीं जुड़ी है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • तटीय
  • झाड़ीदार भूमि
  • पर्वत
  • घास का मैदान

व्यवहार

  • एकांतप्रिय
  • क्षेत्रीय
  • आक्रामक
  • दिवाचर

फ़ोटो

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रेत और झाड़ियों के बीच धूप में बैठी एक वयस्क *Lacerta agilis* छिपकली, जिसकी पीठ और पार्श्व पर आँख के आकार के हल्के केंद्र वाले गहरे धब्बों की पंक्तियाँ हैं और चार छोटे पैर स्पष्ट दिखते हैं।फ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of Life