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Larix decidua

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

संकटमुक्त

Larix decidua, जिसे यूरोपीय लार्च कहा जाता है, ऐसा दुर्लभ शंकुधारी वृक्ष है जो पर्णपाती स्वभाव रखता है — अर्थात इसकी सुइयाँ शरद ऋतु में झड़ जाती हैं, जो अधिकांश शंकुधारी वृक्षों से अलग विशेषता है।

यह मध्य यूरोप के पहाड़ी क्षेत्रों, विशेष रूप से आल्प्स और कार्पेथियन पर्वतमाला का मूल निवासी है, तथा उत्तरी पोलैंड के मैदानी क्षेत्रों में इसकी कुछ बिखरी हुई छोटी आबादियाँ भी पाई जाती हैं। संरक्षण की दृष्टि से इसे "निम्न संकट" श्रेणी में रखा गया है।

इसकी सैकड़ों वर्षों तक जीने की क्षमता, ऊँचाई और शरद ऋतु में इसके सुनहरे रूप में बदल जाने की विशेषता इसे पर्वतीय वनों का एक विशिष्ट और स्मरणीय वृक्ष बनाती है।

पहचान और रूप

यूरोपीय लार्च को पहचानने की सबसे आसान कसौटी है इसकी पर्णपाती सुइयाँ, जो हल्के हरे रंग की होती हैं और शरद ऋतु में गिरने से पहले चमकीले पीले रंग में बदल जाती हैं, जिसके बाद शाखाएँ पीली-भूरी नंगी रह जाती हैं।

यह एक मध्यम से बड़ा वृक्ष है, जो सामान्यतः 25 से 45 मीटर ऊँचाई तक बढ़ता है, जबकि कुछ अपवाद स्वरूप वृक्ष 53.8 मीटर तक पाए गए हैं। इसका तना 1.5 मीटर व्यास तक हो सकता है। युवा अवस्था में इसका आकार शंक्वाकार होता है, जो उम्र बढ़ने के साथ चौड़ा और अक्सर अनियमित हो जाता है; मुख्य शाखाएँ समतल से ऊपर की ओर उठी हुई होती हैं, जबकि पार्श्व शाखाएँ अक्सर लटकी हुई रहती हैं।

इसकी टहनियाँ दो प्रकार की होती हैं — 10 से 50 सेंटीमीटर लंबी लंबी शाखाएँ जिनमें कई कलियाँ होती हैं, और मात्र 1-2 मिलीमीटर लंबी छोटी शाखाएँ जिनमें केवल एक कली होती है। सुइयाँ 2 से 4 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। शंकु सीधे खड़े, अंडाकार-शंक्वाकार आकार के होते हैं, जो 2 से 6 सेंटीमीटर लंबे होते हैं; परागण के समय गुलाबी-लाल, फिर हरे से बैंगनी रंग के होते हैं, और परिपक्व होने पर भूरे हो जाते हैं। पुराने शंकु वर्षों तक वृक्ष पर बने रह सकते हैं और धूसर-काले हो जाते हैं।

यह अत्यंत ठंड सहनशील है और -50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर सकता है, तथा आल्प्स में वृक्ष रेखा तक, अर्थात लगभग 2,400 मीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है। यह अपने निकट संबंधी साइबेरियाई लार्च (Larix sibirica) से मिलता है, परंतु उससे भिन्न इसके शंकु शल्कों पर घने रोमों की कमी होती है, जबकि साइबेरियाई लार्च के शंकु शल्क घने रोमयुक्त होते हैं।

वितरण और आवास

यूरोपीय लार्च मुख्यतः एक उपआल्पीय या पर्वतीय प्रजाति है, जो आल्प्स में स्विस स्टोन पाइन और माउंटेन पाइन के साथ पाई जाती है, और कभी-कभी शुद्ध समूहों में भी वृद्धि करती है। मध्यम ऊँचाई पर इसके साथ नॉर्वे स्प्रूस और यूरोपीय सिल्वर फ़र पाए जाते हैं, जबकि सबसे कम ऊँचाई पर यह यूरोपीय बीच के साथ मिलती है।

यह प्रजाति अच्छी जलनिकासी वाली, गहरी, उर्वर मिट्टी में सबसे बेहतर बढ़ती है, विशेष रूप से रेतीली मिट्टी, दोमट, तथा सिल्टी दोमट मिट्टी में। यह जलभराव वाले या अत्यंत नम स्थलों में नहीं पाई जाती। मध्य आल्प्स में इसकी ऊपरी ऊँचाई सीमा लगभग 1,981 से 2,438 मीटर तक तथा निचली सीमा लगभग 427 मीटर के आस-पास मानी गई है।

यह अब उत्तरी यूरोप में, जिनमें ब्रिटेन, स्कैंडिनेविया तथा जर्मनी का अपने मूल क्षेत्र से बाहर का भाग शामिल है, व्यापक रूप से प्राकृतिकीकृत हो चुकी है। साथ ही दक्षिणी कनाडा और उत्तरपूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका के कई राज्यों में भी इसकी उपस्थिति दर्ज है।

मौसमी उपस्थिति के आँकड़ों में गर्मियों के महीनों, विशेष रूप से जुलाई के आसपास, अधिक अवलोकन दर्ज किए गए प्रतीत होते हैं, जो संभवतः इस समय अधिक क्षेत्र-अध्ययन गतिविधि का संकेत हो सकता है, न कि जनसंख्या के आकार का।

Larix decidua के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
34,489
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

पारिस्थितिकी और संबंध

यूरोपीय लार्च के बीज कई पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण भोजन स्रोत हैं, विशेष रूप से सिस्किन, रेडपोल और सिट्रिल फिंच के लिए, जबकि इसकी कलियों और अपरिपक्व शंकुओं को कैपरकैली द्वारा खाया जाता है।

लार्च की सुइयाँ केस-बियरर शलभ Coleophora sibiricella के लार्वा का एकमात्र ज्ञात भोजन हैं, जबकि इसके शंकु शल्क टॉर्ट्रिक्स शलभ Cydia illutana के लार्वा द्वारा खाए जाते हैं।

यह वृक्ष लार्च कैंकर नामक रोग, जो Lachnellula willkommii नामक कवक से होता है, के प्रति संवेदनशील है, जो विशेष रूप से अधिक नमी वाले निचले क्षेत्रों में लगाए गए वृक्षों को प्रभावित करता है।

उपयोग और मानव संबंध

यूरोपीय लार्च को बागानों और उद्यानों में सजावटी वृक्ष के रूप में व्यापक रूप से उगाया जाता है। इसे ब्रिटेन में 1629 से कुछ पहले पहली बार उगाया गया था, और जॉन एवलिन ने इसके व्यापक रोपण को प्रोत्साहित किया। एथॉल के तीन उत्तराधिकारी ड्यूकों ने इसे बड़े पैमाने पर लगाया, और डनकेल्ड में 1737 में लगाया गया एक वृक्ष आज भी खड़ा है।

इसकी लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होने के साथ पतली पट्टियों में लचीली भी होती है, जिस कारण इसे विशेष रूप से नौका-निर्माण में महत्व दिया जाता है — इस उपयोग के लिए 'बोटस्किन लार्च' नाम की लकड़ी गांठ-रहित होनी चाहिए और केवल उन पुराने वृक्षों से मिलती है जिनकी युवावस्था में पार्श्व शाखाएँ काट दी गई थीं। छोटे लार्च खंभों का उपयोग साधारण बाड़ बनाने में किया जाता है।

यूरोपीय लार्च की तेज़ प्रारंभिक वृद्धि और अग्रणी स्वभाव के कारण इसे वनरोपण में 'तैयारी प्रजाति' के रूप में उपयोग किया जाता है, ताकि खुली या परित्यक्त भूमि पर अधिक मांग वाली प्रजातियों को लगाने से पहले भूमि तैयार की जा सके। साइबेरियाई और लैप्प पौराणिक कथाओं में इसे 'विश्व वृक्ष' के रूप में पहचाना जाता था, तथा यूरोपीय लोककथाओं में इसे बुरी आत्माओं से रक्षा करने वाली शक्ति माना जाता था।

रोचक तथ्य

  1. प्राचीन रोमन वास्तुकार विट्रुवियस को यूरोपीय लार्च का भवन-निर्माण सामग्री के रूप में उल्लेख करने वाला सबसे पहला व्यक्ति माना जाता है।
  2. जापानी लार्च के साथ मिलने पर यह सहज रूप से संकरण कर लेता है, जिससे बना संकर 'डनकेल्ड लार्च' अपने दोनों मूल वृक्षों से तेज़ी से बढ़ता है और लार्च कैंकर के प्रति अधिक प्रतिरोधी है।
  3. न्यूज़ीलैंड में इसे एक आक्रामक शंकुवृक्ष माना जाता है, जो उस उच्च भूमि में फैल जाता है जहाँ इसे मूल रूप से भूमि-कटाव रोकने के लिए लगाया गया था।
  4. यह यूरोपीय बोनसाई परंपरा में एक लोकप्रिय प्रजाति है, विशेष रूप से 'वन समूह' शैली के बोनसाई में इसका उपयोग होता है।
संकटमुक्त

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

वृद्धि का रूप

  • वृक्ष

वर्गीकरण

संघ
Tracheophyta
वर्ग
Pinopsida
गण
Pinales
कुल
Pinaceae
वंश
Larix
प्रजाति
Larix decidua

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits