Picea abies एक ऊँचा सदाबहार शंकुधारी वृक्ष है, जो पाइन कुल से संबंधित है। यह उत्तरी, मध्य और पूर्वी यूरोप का मूल निवासी है।
संरक्षण की वैश्विक सूची में इसे कम चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है। यूरोप के पहाड़ी और ठंडे जंगलों में यह एक प्रमुख वृक्ष है, और इसे बाहर के कई देशों में भी उगाया जाता है।
यह प्रजाति इसलिए दिलचस्प है कि यह ठंडी जलवायु, गरीब मिट्टी और ऊँचाई वाले इलाकों में भी टिक जाती है।
पहचान और रूप
इस वृक्ष को पहचानने का सबसे उपयोगी संकेत इसकी सुई जैसी पत्तियाँ हैं। ये 12 से 14 मिलीमीटर लंबी, नुकीले सिरे वाली और चारों ओर से गहरे हरे रंग की होती हैं।
यह बहुत बड़ा वृक्ष है। यह 35 से 55 मीटर तक ऊँचा हो सकता है और इसके तने का व्यास 1 से 1.5 मीटर तक होता है। युवा अवस्था में इसकी टहनियाँ नारंगी-भूरी होती हैं।
इसके शंकु 9 से 17 सेंटीमीटर लंबे होते हैं, जो किसी भी स्प्रूस के शंकुओं में सबसे लंबे माने जाते हैं। ये पहले हरे या लालिमा लिए होते हैं और पराग-निषेचन के 5 से 7 महीने बाद भूरे हो जाते हैं। बीज काले होते हैं, 4 से 5 मिलीमीटर लंबे, और उनके साथ हल्के भूरे रंग का लगभग 15 मिलीमीटर लंबा पंख होता है।
इसी प्रजाति से मिलता-जुलता एक संकर रूप साइबेरियाई स्प्रूस के साथ पाया जाता है, जिसे Picea × fennica कहते हैं। इसकी टहनियाँ रोएँदार होती हैं और शंकु के शल्क चिकने और गोल होते हैं।
वितरण और आवास
Picea abies उत्तर में नॉर्वे से लेकर पश्चिम में आल्प्स के पश्चिमी छोर तक फैला है। पूर्व में यह पोलैंड तक और आगे उरल पर्वत तक पाया जाता है, जबकि दक्षिण-पूर्व में कार्पेथियन और बाल्कन पहाड़ों में भी यह उगता है। नॉर्वे में इसकी उत्तरी सीमा आर्कटिक के पास, लगभग 70 डिग्री उत्तर के आसपास है।
यह ठंडी और नम जलवायु में सबसे अच्छा पनपता है और समृद्ध मिट्टी पसंद करता है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त मानी गई है। स्थायी रूप से जलभराव वाली मिट्टी में इसकी वृद्धि रुकती है, फिर भी यह कम जल निकास वाली मिट्टी और दलदली इलाकों में मिल जाता है।
आल्प्स में इसकी ऊँचाई की सीमा इलाके के हिसाब से बदलती है। बवेरियाई आल्प्स में यह 2,000 मीटर तक, ब्लैक फ़ॉरेस्ट में 1,500 मीटर तक और फ़िश्टेलगेबिर्गे पहाड़ों में लगभग 1,051 मीटर तक पाया जाता है। स्विट्ज़रलैंड में ऊँचाई के हिसाब से जंगल बदलते हैं: निचले इलाकों में मिश्रित चौड़े पत्ते वाले वृक्ष, मध्य पहाड़ियों में बीच और सफ़ेद चीड़ जैसे वृक्ष, और ऊपर लगभग 1,670 मीटर तक शुद्ध स्प्रूस वन।
स्कैंडिनेविया के जंगलों में यह स्कॉच पाइन (Pinus sylvestris) के साथ मिश्रित होकर उगता है। यूरोपीय बीच (Fagus sylvatica) और सफ़ेद फ़र (Abies alba) के साथ मिले जंगलों में भी इसकी उपस्थिति मिलती है। इसके नीचे की जमीन पर अक्सर Vaccinium myrtillus और Oxalis जैसी वनस्पतियाँ होती हैं।

वृद्धि और स्वरूप
यह एक तेज़ी से बढ़ने वाला वृक्ष है। अनुकूल परिस्थितियों में युवा अवस्था के पहले 25 वर्षों में यह प्रति वर्ष लगभग 1 मीटर तक बढ़ सकता है।
लगभग 20 मीटर ऊँचाई के बाद इसकी वृद्धि धीमी पड़ जाती है। परिपक्व होने पर इसकी छत्र-संरचना पतली होने लगती है और निचली शाखाएँ धीरे-धीरे सूख जाती हैं।
यूरोप में प्राकृतिक रूप से उगे इस वृक्ष की आयु 300 वर्ष तक हो सकती है। ब्रिटिश द्वीपों और उत्तरी अमेरिका में लगाए गए पेड़ों की आयु इससे काफ़ी कम होती है। नॉर्वे के एक निर्जन क्षेत्र में वृक्ष-वलय गणना से मिले एक व्यक्तिगत पेड़ की आयु लगभग 532 वर्ष आँकी गई। एक जड़-तंत्र से जुड़े क्लोन का एक हिस्सा कार्बन डेटिंग के आधार पर लगभग 9,550 वर्ष पुराना माना गया है।
उपयोग और मानव संबंध
यह वृक्ष यूरोप के वन-उद्योग में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी लकड़ी का उपयोग इमारती काम और कागज़ निर्माण में होता है, और यह यूरोप के सबसे अधिक उपयोग वाले शंकुधारी वृक्षों में गिना जाता है।
यह वृक्ष बगीचों और पार्कों में सजावटी पौधे के रूप में लगाया जाता है। हर साल ओस्लो शहर लंदन, एडिनबरा और वॉशिंगटन को एक-एक पेड़ उपहार में देता है, जो उन शहरों के केंद्रीय चौक में लगाया जाता है। यह भेंट द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली सहायता के प्रति आभार के रूप में दी जाती है।
वायलिन जैसे तार वाले वाद्य बनाने वाले कारीगर इसकी लकड़ी को अच्छा मानते हैं। इसके एक रूप को यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। नॉर्वे की एक कंपनी इसकी लकड़ी से वैनिलिन बनाती है, जो प्राकृतिक वनीला के स्वाद का कृत्रिम विकल्प है। लोक चिकित्सा में इसके राल का उपयोग घावों के लिए होता रहा है।
रोचक तथ्य
- यूनानी पौराणिक कथाओं में स्प्रूस को शिकार और चंद्रमा की देवी आर्टेमिस का पवित्र वृक्ष माना गया है।
- स्कैंडिनेवियाई लोककथाओं में यह वृक्ष सुरक्षा से जुड़ा माना जाता है, और इसे प्रकृति के साथ गहरे प्रतीकात्मक संबंध का हिस्सा समझा जाता है।
- मध्य और उत्तरी यूरोप की लोककथाओं में यह वृक्ष धैर्य, सहनशक्ति और दृढ़ता का प्रतीक है, क्योंकि यह ठंडे और पहाड़ी वातावरण में टिक जाता है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- वृक्ष
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Pinopsida
- गण
- Pinales
- कुल
- Pinaceae
- वंश
- Picea
- प्रजाति
- Picea abies
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits



