पूर्वी धूसर कंगारू (Macropus giganteus) ऑस्ट्रेलिया का एक थैलीदार स्तनधारी है। नर का वज़न 69 किलोग्राम तक और लंबाई 2 मीटर से अधिक हो सकती है।
यह Macropodidae परिवार का सदस्य है और ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी एक-तिहाई हिस्से में मिलता है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे कम चिंता वाली प्रजाति माना गया है, और इसकी आबादी कई मिलियन बताई गई है। इसकी अधिकतम ज्ञात आयु तक है।
यह प्रजाति इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया के आम दृश्य का हिस्सा है। शहरों के पास की झाड़ियों से लेकर खुले घास के मैदानों तक, यह आसानी से दिख जाता है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान इसका कोमल धूसर कोट है। यह आमतौर पर नम और अधिक उपजाऊ इलाकों में मिलता है, जहाँ लाल कंगारू कम दिखते हैं।
नर का वज़न आम तौर पर 50 से 66 किलोग्राम के बीच होता है, जबकि मादाएँ 17 से 40 किलोग्राम तक होती हैं। वज़न के संदर्भ में यह लगभग के आसपास है। वयस्क नर की पूँछ 1 मीटर से अधिक लंबी और बहुत मज़बूत होती है।
लाल कंगारू के चेहरे पर काले और सफ़ेद निशान होते हैं, जबकि पूर्वी धूसर कंगारू के चेहरे पर ऐसे निशान नहीं होते। इसकी आँखें बड़ी और चौड़ी खुली दिखती हैं। पेट हल्का चाँदी जैसा या क्रीम रंग का होता है, कभी-कभी लगभग सफ़ेद।
जहाँ इसका क्षेत्र पश्चिमी धूसर कंगारू से मिलता है, वहाँ दोनों में फ़र्क करना कठिन होता है। पश्चिमी धूसर कंगारू गहरा मटमैला भूरा होता है और उसके सिर के आसपास ज़्यादा कंट्रास्ट दिखता है।
वितरण और आवास
पूर्वी धूसर कंगारू ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी हिस्से का निवासी है। यह खुले घास के मैदानों और कम घने जंगलों से लेकर पहाड़ी वनों तक कई तरह के आवासों में रहता है।
यह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के अधिक वर्षा वाले हिस्सों में पाया जाता है, लेकिन अर्ध-शुष्क इलाकों में भी मिल जाता है। तटीय क्षेत्र, उप-उष्णकटिबंधीय वन, पर्वतीय वन और अंदरूनी झाड़ी-क्षेत्र भी इसके आवास हैं।
दिन में यह छाया देने वाली झाड़ियों और वृक्षों के पास आराम करता है, इसलिए खुले मैदान के पास बची हुई झाड़ियाँ इसके लिए ज़रूरी हैं। ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी और पूर्वी तटों के बड़े शहरों के आसपास भी यह अक्सर दिख जाता है।
अवलोकनों के मासिक आँकड़े मार्च से मई और अक्टूबर से दिसंबर के बीच सबसे अधिक हैं, जो इसकी सक्रियता के मौसम को दर्शाते हैं।

व्यवहार और जीवनशैली
पूर्वी धूसर कंगारू झुंड में रहता है। एक झुंड में आम तौर पर एक प्रभुत्वशाली नर, लगभग 2 से 3 मादाएँ उनके बच्चों के साथ, और लगभग 2 से 3 युवा नर होते हैं। खुले सदस्यता वाले ये झुंड औसतन तीन जानवरों के होते हैं।
यह दिन का बड़ा हिस्सा छाया में बिताता है और शाम को धुंधलके के समय बाहर निकलकर भोजन करता है। सुबह की रोशनी तक यह चरता है। दोपहर में झुंड बड़े समूहों में आराम करते हैं और पसंदीदा चरागाहों में छोटे समूह मिलकर चरते हैं।
प्रभुत्व की एक श्रेणी इसके जीवन को तय करती है। प्रभुत्वशाली जानवरों को बेहतर भोजन और छाया मिलती है। यह प्रजाति क्षेत्र की रक्षा नहीं करती, इसलिए इसका घर-क्षेत्र स्थिर नहीं होता।
इसके आने-जाने का तरीका छलांग है। हर छलांग लगभग 9 मीटर तक पहुँच सकती है। इसके पैर इस तरह बने हैं कि तेज़ दौड़ते समय ऊर्जा कम खर्च होती है, और गति 30 मील प्रति घंटा तक पहुँच सकती है।
खतरे की आशंका होने पर मादाएँ, समूह के किनारे वाले जानवर और खुले में दूर बैठे व्यक्ति सबसे ज़्यादा सतर्क रहते हैं। इसके बावजूद बड़े झुंड में सतर्कता में कमी नहीं आती, और बड़े झुंड अधिक सुरक्षा देते हैं।
संचार
पूर्वी धूसर कंगारू आपस में और अपने बच्चों से संवाद के लिए क्लिक जैसी आवाज़ें निकालता है। नर और मादा दोनों यह आवाज़ करते हैं।
ख़तरा महसूस होने पर यह एक गहरी गुर्राती खाँसी जैसी आवाज़ निकालता है। यही आवाज़ नरों के बीच चेतावनी, लड़ाई और प्रभुत्व दिखाने के समय भी सुनाई देती है।
सभी धूसर कंगारू ख़तरे में अपने पिछले पैर ज़मीन पर पटकते हैं। यह पटकना और गुर्राहट दूर तक जाने वाली चेतावनी बन जाती है।
आहार और पोषण
पूर्वी धूसर कंगारू मुख्य रूप से घास खाने वाला शाकाहारी है। वह घास के साथ-साथ पत्तेदार शाकीय पौधे, यानी फॉर्ब्स, भी खाता है। ये चौड़ी पत्तियों वाली जड़ी-बूटियाँ होती हैं जो मैदानों और घास के मैदानों में उगती हैं।
मुख्य भोजन घास ही है, क्योंकि यह उन मैदानों में उगती है जहाँ यह प्रजाति अधिक रहती है। लाल कंगारू के विपरीत, इसके आहार में झाड़ियों की मात्रा कम होती है।
बंदी अवस्था में यह फल भी खा सकता है, लेकिन जंगल में फल इसके सामान्य आहार का हिस्सा नहीं है।
प्रजनन और बच्चों का पालन
पूर्वी धूसर कंगारू मौसमी प्रजनक है। यह आम तौर पर वसंत और गर्मियों की शुरुआत में बच्चे पैदा करता है। प्रजनन में नर और मादा अलग-अलग लिंग के होते हैं, और नर प्रभुत्व के लिए आपस में लड़ते हैं।
मादा के एस्ट्रस में आने पर प्रभुत्वशाली नर उसके पास जाकर उसके थैले और जननांग क्षेत्र को सूँघता है। वह क्लिक जैसी आवाज़ निकालता है और मादा के सिर और पूँछ को पंजों से छूता है। संभोग के बाद नर लगभग एक घंटे की इस पूरी प्रक्रिया में मादा की रक्षा करता है।
गर्भावधि लगभग 36 दिन होती है। जन्म के समय मादा का बच्चा बहुत छोटा होता है और उसे थैले में ले जाया जाता है। थैले में बच्चा लगभग 11 महीने रहता है और इस दौरान माँ का दूध पीता है। इसके बाद वह थैले से बाहर आने लगता है, लेकिन लगभग 9.5 महीने की उम्र तक दूध पर निर्भर रहता है।
मादा का दूध बच्चे की ज़रूरत के अनुसार बदलता रहता है। थैले में बच्चे का दूध और थैले के बाहर वाले बच्चे का दूध अलग होता है, और माँ दोनों को एक साथ बना सकती है। मादा अकेले ही बच्चों की देखभाल करती है। लगभग 11 महीने में बच्चा आत्मनिर्भर होने लगता है। नर लगभग 20 महीने और मादा लगभग 17 महीने में यौन परिपक्वता पाते हैं।
सूखे के समय नर शुक्राणु नहीं बनाते, और मादा तभी गर्भधारण करती है जब बारिश से हरी घास भरपूर हो। सूखे के समय भ्रूण का विकास रुक सकता है, जिसे भ्रूणीय विराम कहते हैं।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
पूर्वी धूसर कंगारू की आबादी कई मिलियन है। ऑस्ट्रेलिया में 2010 में इसकी अनुमानित संख्या लगभग 11.4 मिलियन बताई गई थी। यह अपने ऐतिहासिक क्षेत्र के लगभग पूरे हिस्से में अब भी मौजूद है।
यह ऑस्ट्रेलिया के परिदृश्य में घास चरने वाला प्रमुख जानवर है। यह घास और अन्य पत्तेदार पौधों की वृद्धि और फैलाव को नियंत्रित करता है। यदि इसकी संख्या बिना नियंत्रण के बढ़े, तो मिट्टी सूखने लगती है, पर इसकी संख्या इतनी नहीं कि यह बड़ा पारिस्थितिक खतरा बने।
उपजाऊ इलाकों में यह फ़सलों और विदेशी चरागाह घासों को खाता है, इसलिए किसानों के साथ इसका टकराव भी होता है।
संरक्षण और खतरे
पूर्वी धूसर कंगारू की IUCN रेड लिस्ट श्रेणी कम चिंता है, यानी इस समय इसके विलुप्त होने का तत्काल ख़तरा नहीं माना गया है। ऑस्ट्रेलिया में इसकी संख्या लगभग 2 मिलियन होने का अनुमान है और यह ऑस्ट्रेलिया तथा आसपास के क्षेत्रों में मिलता है।
लगभग 1990 के दशक के अंत में, विशेष रूप से तस्मानिया में, इसकी आबादी में तेज़ गिरावट आई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसे कानूनी सुरक्षा दी, और इसके अधिकांश क्षेत्र अब निजी ज़मीनों पर हैं। इससे आबादी फिर बढ़ने लगी।
ऑस्ट्रेलिया में कंगारू उद्योग बड़ा है, लेकिन हर साल कितने कंगारू मारे जाएँ, यह सरकार की निगरानी और नियमों से तय होता है। कुछ स्थानों पर अधिक संख्या के कारण चराई से ज़मीन को नुकसान होता है, और वहाँ सीमित संख्या में कुल्लिंग भी की गई है। फिर भी यह प्रजाति व्यापक रूप से आम बनी हुई है।
सांस्कृतिक महत्व
पूर्वी धूसर कंगारू ऑस्ट्रेलिया का मूल निवासी है। सदियों से ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी इसका मांस और खाल के लिए शिकार करते आए हैं। यूरोपीय बसने वालों ने भी इसे भोजन के लिए शिकार किया।
इसका मांस और इसके शरीर के अंग मूल्यवान सामग्री का स्रोत हैं। ऑस्ट्रेलिया में कंगारू उद्योग का आकार बड़ा है, और हर साल शिकार की संख्या सरकार के निर्धारित कोटे पर आधारित होती है।
आदिवासी संस्कृतियों में कंगारू एक प्रतीकात्मक जानवर है। इसके कई अर्थ निजी रखे जाते हैं, और वे समुदाय के भीतर ही ज्ञात होते हैं।
रोचक तथ्य
- इसके वैज्ञानिक नाम Macropus का अर्थ ग्रीक शब्दों से है: मैक्रोस का अर्थ लंबा और पूस का अर्थ पैर है, जो इसके लंबे पिछले पैरों का सही वर्णन करता है।
- इस प्रजाति की सबसे तेज़ रफ़्तार दर्ज ऊँचाई पर एक बड़ी मादा ने हासिल की थी, जो 64 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Mammalia
- गण
- Diprotodontia
- कुल
- Macropodidae
- वंश
- Macropus
- प्रजाति
- Macropus giganteus
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity



