Natrix natrix यूरेशिया में पाया जाने वाला एक अर्ध-जलीय, पूर्णतः विषहीन कोलुब्रिड सांप है, जिसे घास सांप, रिंग्ड सांप या जल सांप भी कहा जाता है। यह प्रायः जल स्रोतों के निकट पाया जाता है और इसका आहार मुख्यतः उभयचरों तक सीमित रहता है।
यह प्रजाति IUCN द्वारा 'न्यूनतम चिंताजनक' श्रेणी में रखी गई है, फिर भी इसका जटिल व्यवहार, इसकी नकल-कला और लोक-कथाओं में इसका स्थान इसे अध्ययन के लिए एक दिलचस्प प्रजाति बनाते हैं।
पहचान और रूप
इसकी सबसे पहचानी जाने वाली विशेषता गर्दन के पीछे मौजूद एक पीले या सफेद रंग का कॉलर है, जिसकी वजह से इसे 'रिंग्ड सांप' भी कहा जाता है। इसका शरीर सामान्यतः गहरे हरे या भूरे रंग का होता है, हालांकि रंगत धूसर से लगभग काले तक भिन्न हो सकती है—ठंडे क्षेत्रों में गहरे रंग के सांप अधिक पाए जाते हैं, संभवतः इसलिए कि गहरा रंग शरीर को अधिक ऊष्मा सोखने में मदद करता है।
यह सांप 1 मीटर या उससे अधिक लंबाई तक बढ़ सकता है, जबकि इसका वजन लगभग 0.094 किलोग्राम होता है। इसका पेट सफेद या हल्के रंग का होता है, जिस पर अनियमित काले धब्बे बने होते हैं—यह विशेषता क्षेत्र में इसकी पहचान के लिए एक उपयोगी संकेत है।
वितरण और आवास
यह प्रजाति मध्य स्कैंडिनेविया से लेकर दक्षिणी इटली तक, मध्य पूर्व और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका तक महाद्वीपीय यूरोप में व्यापक रूप से फैली हुई है। यह जल निकायों से जुड़े क्षेत्रों—तालाबों, झीलों, नदियों, दलदलों और नालों—के आस-पास मिलती है, जो इसे धूप में तापमान बढ़ाने (बास्किंग) और छिपने के लिए उपयुक्त स्थान प्रदान करते हैं। इसके अलावा यह खुले वनों, ऊबड़-खाबड़ घास के मैदानों, नम हीथलैंड, बगीचों और खेतों की सीमाओं पर भी पाई जाती है।
हालांकि यह जल के निकट रहने के लिए जानी जाती है और तेज़ तैराक है, लेकिन प्रमाण बताते हैं कि हर सांप को पूरे मौसम में जल स्रोत की आवश्यकता नहीं होती। इसका पसंदीदा आवास खुले वन और 'सीमांत' क्षेत्र प्रतीत होते हैं, जैसे खेतों के किनारे या वन-सीमा, जो शरण और तापमान नियंत्रण दोनों की सुविधा देते हैं। सर्दियों में यह भूमिगत स्थानों में रहती है जहाँ तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जिससे यह ठंड से जमने से बच जाती है।
ब्रिटेन में पहले इसे उपजाति N. n. helvetica के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन अब इसे एक अलग प्रजाति, बार्ड ग्रास सांप (Natrix helvetica) माना जाता है, और ब्रिटेन में मिलने वाले किसी भी N. natrix के नमूने को आयातित माना जाता है।

शिकार और आहार
यह सांप अपने शिकार को सक्रिय रूप से खोजता है, विशेष रूप से जल स्रोतों के किनारों पर, और इसके लिए यह दृष्टि तथा गंध की सहायता लेता है—गंध पहचानने के लिए यह अपनी जैकबसन अंग का उपयोग करता है। यह शिकार को जीवित ही निगल जाता है और इसके लिए कुंडली में लपेटकर दबाने (कंस्ट्रिक्शन) की विधि का उपयोग नहीं करता।
इसका मुख्य भोजन उभयचर हैं, विशेष रूप से सामान्य टोड और सामान्य मेंढक, हालांकि यह कभी-कभी चींटियों और उनके लार्वा को भी खा लेता है। बंदी अवस्था में इसे हाथ से दी गई बर्थवर्म भी स्वीकार करते देखा गया है, परंतु यह कभी मृत शिकार नहीं खाता—यह इसकी शिकार-प्रवृत्ति की एक विशिष्ट पहचान है।
प्रजनन और जीवन चक्र
वसंत के आगमन के साथ नर सांप पहले सक्रिय होते हैं और अपने शरीर का तापमान बढ़ाने के लिए लंबे समय तक धूप में बास्किंग करते हैं, जो शायद शुक्राणु उत्पादन को अधिकतम करने की एक रणनीति है। मादाएं इसके एक से दो सप्ताह बाद, अप्रैल में या यदि वातावरण अनुकूल हो तो पहले भी, निकलती हैं और नर उनके साथ संगम करते हैं।
मादा जून और जुलाई के बीच 8 से 40 चमड़े जैसे अंडों का एक समूह देती है, जो लगभग दस सप्ताह में फूटते हैं। अंडों के सफलतापूर्वक फूटने के लिए कम से कम 21 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक है, हालांकि 28 डिग्री सेल्सियस और उच्च आर्द्रता अधिक अनुकूल मानी जाती है। इसीलिए मादाएं सड़ती हुई वनस्पति वाले स्थान—जैसे खाद के ढेर—को अंडे देने के लिए प्राथमिकता देती हैं, क्योंकि वहाँ ऐसी गर्मी और नमी स्वाभाविक रूप से बनी रहती है।
जब बच्चे अंडों से निकलते हैं, तब उनकी लंबाई लगभग 18 सेंटीमीटर होती है और वे जन्म के तुरंत बाद स्वतंत्र हो जाते हैं, बिना किसी माता-पिता की देखभाल के।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
प्रजनन के बाद गर्मियों में यह सांप शिकार की तलाश में व्यापक रूप से घूमता है, कभी-कभी एक दिन में कई सौ मीटर तक की दूरी तय करता है। इसका शिकार अक्सर उसके शरीर के आकार के अनुपात में बड़ा होता है, जिससे भोजन के बाद इसकी गतिशीलता कुछ समय के लिए सीमित हो जाती है और यह पचाने तक एक ही स्थान पर बास्किंग करते हुए रुका रहता है। एक सांप को पूरे सक्रिय मौसम में केवल दो या तीन महत्वपूर्ण शिकार की ही आवश्यकता हो सकती है।
सक्रिय मौसम के दौरान यह सांप कम से कम एक बार त्वचा बदलता (एक्डिसिस) है, जिस दौरान इसकी आंखों का रंग दूधिया-नीला हो जाता है—इस अवस्था को 'ब्लू में होना' कहा जाता है। इस दौरान इसकी दृष्टि प्रभावित रहती है, यह शिकार नहीं करता, और अन्य सांपों की तरह अधिक आक्रामक हो जाता है।
आत्मरक्षा में यह अपनी गुदा ग्रंथियों से लहसुन जैसी दुर्गंधयुक्त तरल निकालता है और मृत होने का नाटक (थैनेटोसिस) करता है, जिसमें यह पूर्णतः शिथिल हो जाता है और मुँह-नाक से खून जैसा तरल भी स्रावित कर सकता है। यह फुफकारता है और मुँह खोले बिना ही आक्रामक ढंग से प्रहार करता है, लेकिन आत्मरक्षा में काटना दुर्लभ है। पकड़े जाने पर यह अक्सर अपने पेट की सामग्री उल्टी कर देता है।
संरक्षण और खतरे
यह प्रजाति IUCN की सूची में 'न्यूनतम चिंताजनक' श्रेणी में है, जो दर्शाता है कि वर्तमान में इसके अस्तित्व को कोई गंभीर वैश्विक खतरा नहीं है। इसके प्राकृतिक शिकारियों में कौवे परिवार के पक्षी, सारस, उल्लू और संभवतः अन्य शिकारी पक्षी, लोमड़ी और घरेलू बिल्ली शामिल हैं।
डेनमार्क में इसे संरक्षित किया गया है, जहाँ 1981 में सभी पांच रेप्टाइल प्रजातियों को संरक्षण प्रदान किया गया था। इसकी दो उपजातियां—सार्डिनियन घास सांप (N. n. cetti) और N. n. schweizeri—गंभीर रूप से संकटग्रस्त मानी जाती हैं।
सांस्कृतिक महत्व
बाल्टिक पौराणिक कथाओं में घास सांप (लिथुआनियाई: žaltys, लातवियाई: zalktis) को एक पवित्र प्राणी माना जाता था। इसे अक्सर पालतू जानवर की तरह रखा जाता था, विवाहित जोड़ों के बिस्तर के नीचे या चूल्हे के पास एक विशेष स्थान पर, जहाँ माना जाता था कि यह हाथ से दिया गया भोजन खाता है। 19वीं सदी के अंत तक भी यह विश्वास बना रहा कि घास सांप को मारने से बड़ा दुर्भाग्य आ सकता है, या घायल सांप बदला ले सकता है।
इस परंपरा पर आधारित प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों में लिथुआनियाई लोककथा 'एग्ले, सर्पों की रानी' (Eglė žalčių karalienė) और लातवियाई परी-कथा 'घास सांप की दुल्हन' (Zalkša līgava) शामिल हैं। इन कथाओं में एक सामान्य विषय यह है कि घास सांप मुकुट पहनते हैं—यह इसके पीले धब्बों की ओर संकेत हो सकता है—और सांपों का एक राजा होता है जो सुनहरा मुकुट धारण करता है। आज भी लातविया और लिथुआनिया में कई लोग मानते हैं कि घास सांप सौभाग्य लाते हैं और घर की रक्षा करते हैं, और यह प्रतीक लातविया में शिक्षा व ज्ञान का प्रतीक बनकर सैन्य और शैक्षणिक प्रतीक-चिह्नों में भी दिखाई देता है।
रोमन कवि वर्जिल ने अपनी रचना 'जॉर्जिक्स' (29 ईसा पूर्व) में इस सांप का वर्णन एक बड़े, भयभीत करने वाले सांप के रूप में किया है जो कैलाब्रिया के दलदलों में रहता है और मेंढक व मछलियां खाता है।
रोचक तथ्य
- दक्षिणी यूरोप में घास सांप 2.0 मीटर तक लंबे हो सकते हैं, जिसने कुछ पौराणिक कथाओं में विशाल सर्पों की कल्पना को प्रेरित किया हो सकता है।
- काल्पनिक चरित्र 'नैट्रिक्स' ग्रीक पौराणिक कथाओं की मेडूसा पर आधारित मानी जाती है, जो इस प्रजाति के वैज्ञानिक नाम से जुड़ी है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Squamata
- कुल
- Colubridae
- वंश
- Natrix
- प्रजाति
- Natrix natrix
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- AnAge Longevity



