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ऑस्प्रे

Pandion haliaetus

संकटमुक्त

Pandion haliaetus, जिसे व्यापक रूप से ऑस्प्रे कहा जाता है, एक ऐसा शिकारी पक्षी है जिसका भोजन लगभग पूरी तरह मछली ही होती है, जो शिकारी पक्षियों में असामान्य बात है। यह दैनिक रूप से सक्रिय, भूरे रंग की ऊपरी सतह और मुख्यतः धूसर-सफेद अंडरपार्ट्स वाला बड़ा पक्षी है, जिसकी लंबाई 60 सेंटीमीटर से अधिक और पंख फैलाव लगभग 180 सेंटीमीटर तक होता है।

यह प्रजाति अंटार्कटिका के अलावा दुनिया के सभी शीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मिलती है और इसकी संरक्षण स्थिति "न्यूनतम चिंताजनक" मानी जाती है। इसकी अनूठी शिकार तकनीक और लगभग हर जल-निकाय के पास बस जाने की क्षमता इसे देखने लायक बनाती है।

पहचान और रूप

ऑस्प्रे की सबसे पहचानने योग्य विशेषता उसके सिर पर आँखों से गुजरती गहरे रंग की पट्टी है, जो सफेद सिर पर एक मुखौटे जैसी दिखती है। इसका वज़न 0.9 से 2.1 किलोग्राम के बीच और लंबाई 50 से 66 सेंटीमीटर के बीच होती है, जबकि पंख फैलाव 127 से 180 सेंटीमीटर तक जाता है। इसकी उपजातियाँ आकार में एक-दूसरे से थोड़ा भिन्न हैं।

ऊपरी शरीर गहरे, चमकदार भूरे रंग का होता है जबकि छाती सफेद और कभी-कभी भूरी धारियों से युक्त होती है। आँखों की पुतली सुनहरी से भूरी होती है, चोंच काली और पैर सफेद होते हैं जिनमें काले नाखून लगे होते हैं। उड़ते समय पंखों के नीचे कलाई का हिस्सा काला दिखता है, जो एक उपयोगी पहचान चिह्न है। छोटी पूँछ और लंबे, संकरे पंख इसे गल पक्षी जैसी झलक देते हैं।

नर और मादा लगभग एक जैसे दिखते हैं, पर नर का शरीर पतला और पंख संकरे होते हैं, तथा उसकी छाती की पट्टी कमजोर या अनुपस्थित होती है। जोड़े में यह भेद आसान होता है, अकेले पक्षी में कठिन। किशोर पक्षियों की ऊपरी सतह पर हल्के किनारे और अंडरपार्ट्स पर हल्का भूरापन होता है, और सिर के पंखों पर धारियाँ होती हैं।

एक अनूठी शारीरिक विशेषता यह है कि इसके पैर की बाहरी अंगुलियाँ पीछे घूम सकती हैं, जिससे यह दो अंगुलियाँ आगे और दो पीछे रखकर फिसलनदार मछली को मजबूती से पकड़ सकता है — यह क्षमता उल्लू और ऑस्प्रे में ही पाई जाती है।

वितरण और आवास

ऑस्प्रे लगभग हर महाद्वीप के शीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है, केवल अंटार्कटिका को छोड़कर। यह उत्तरी अमेरिका में अलास्का और न्यूफाउंडलैंड से लेकर दक्षिण में मैक्सिको की खाड़ी और फ्लोरिडा तक प्रजनन करता है और शीत ऋतु में दक्षिण अमेरिका तक जाता है। यूरोप में यह आयरलैंड, स्कैंडिनेविया, फिनलैंड और ब्रिटेन तक ग्रीष्मकाल में फैलता है, आइसलैंड को छोड़कर, और शीत ऋतु में उत्तरी अफ्रीका चला जाता है।

ऑस्ट्रेलिया में यह मुख्यतः स्थानिक रहता है और तटरेखा पर बिखरा हुआ मिलता है, जबकि दक्षिण एशिया और दक्षिणपूर्व एशिया — म्यांमार से इंडोचीन, दक्षिणी चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस तक — में यह असामान्य से लेकर सामान्य शीतकालीन आगंतुक के रूप में मिलता है।

यह प्रजाति नदी-किनारे के वनों, झीलों, तालाबों और मैंग्रोव में रहती है, जहाँ सतह के पास तैरती मछलियों वाला धीमा बहाव वाला खारा या मीठा पानी उपलब्ध हो। घोंसले आमतौर पर किसी जल-निकाय से 3 से 5 किलोमीटर के भीतर बनाए जाते हैं, और यह प्रजाति आसपास की भूमि — वनाच्छादित हो या खुली — के प्रति अपेक्षाकृत उदासीन रहती है। घोंसले के लिए ऐसे स्थान चुने जाते हैं जो जमीन आधारित शिकारियों से सुरक्षित हों, जैसे पानी के ऊपर, छोटे द्वीपों पर या ऊँचे, दृश्यता वाले सूखे पेड़ों पर।

Pandion haliaetus के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
12,22,112
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

ऑस्प्रे अकेले रहने वाला और फैला हुआ पक्षी है जो स्पष्ट रूप से अपने मछली-पकड़ने के क्षेत्र की रक्षा करता है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह अपने घोंसले के इर्द-गिर्द कोई भोजन-क्षेत्र नहीं बचाता, क्योंकि इसका शिकार बिखरा हुआ, गतिशील और अक्सर घोंसले से कई किलोमीटर दूर होता है। इसी कारण ऑस्प्रे कई बार समूह में शिकार करते देखे जाते हैं, जिससे शिकार अधिक प्रभावी हो सकता है। घोंसले घनत्व अत्यंत विरल से लेकर 100 मीटर से कम दूरी वाली ढीली कॉलोनियों तक भिन्न हो सकता है।

यह प्रजाति प्रवासी और स्थानिक दोनों प्रकार की आबादियों में बंटी है। स्थानिक आबादियाँ एक ही स्थान पर प्रजनन और शीतकाल बिताती हैं, जबकि प्रवासी आबादियाँ उत्तर में प्रजनन करती हैं और दक्षिण में शीत ऋतु बिताती हैं, इनके बीच बहुत कम अतिव्यापन होता है — उत्तरी अमेरिका में यह विभाजन लगभग 30 डिग्री उत्तर अक्षांश पर और यूरोप में 38 से 40 डिग्री पर पड़ता है। स्वीडिश ऑस्प्रे पर हुए अध्ययनों में मादाएँ नर से पहले अफ्रीका की ओर प्रवास करती दिखी हैं, और यह पक्षी औसतन 260 से 280 किलोमीटर प्रतिदिन उड़ान भरते हैं, जिसमें अधिकतम दर्ज दूरी 431 किलोमीटर तक रही है।

इस प्रजाति में जलरोधी घने, तेल-युक्त पंख, पानी के भीतर बंद हो सकने वाले नथुने और पंजों पर पीछे की ओर मुड़े कांटेदार शल्क जैसी अनुकूलन क्षमताएँ हैं जो इसे मछली-पकड़ने वाली जीवनशैली के लिए उपयुक्त बनाती हैं।

संचार

ऑस्प्रे संवाद के लिए पाँच तक भिन्न स्वर उपयोग में लाता है, जो लगभग हमेशा किसी विशिष्ट उड़ान या मुद्रा वाले दृश्य प्रदर्शन के साथ जुड़े होते हैं। ये स्वर भोजन-याचना, चेतावनी, प्रेम-प्रदर्शन और घोंसले की रक्षा के लिए इस्तेमाल होते हैं।

एक विशेष प्रदर्शन "स्काई-डांस" है, जिसमें नर मछली या घोंसले की सामग्री लेकर चीखने जैसी आवाज़ के साथ छोटी लहरदार उड़ानें और मंडराने की मुद्राएँ करता है, विशेषकर प्रेम-प्रदर्शन और प्रारंभिक अंडे सेने के दौरान। जब कोई शिकारी या नाव-मनुष्य जैसा खतरा घोंसले के पास आता है, तो चेतावनी स्वर के साथ सीधा खड़े होने की मुद्रा और गोता लगाती उड़ान भी दिखाई जाती है।

शिकार और आहार

ऑस्प्रे मछली का पता उड़ान में लगाता है, पानी की सतह से 10 से 40 मीटर ऊपर पंख फड़फड़ाते और सरकते हुए उड़ान भरता है। जब कोई मछली दिखती है, तो यह क्षण भर मंडराता है, फिर पानी की ओर गोता लगाता है और सतह से टकराने से ठीक पहले पैरों को आगे लाकर व पंखों को पीछे मोड़कर पंजों के सहारे पानी में गिरता है।

पकड़ने के बाद यह लगभग क्षैतिज पंख-फड़फड़ाहट से खुद को और शिकार को पानी से ऊपर उठाता है, फिर हवा में ही मछली को इस तरह घुमाता है कि वह एक पैर के आगे और एक के पीछे, सिर की दिशा में आगे की ओर रहे — इससे मछली को ले जाना अधिक वातांगीय और आसान हो जाता है। इसके गोतों में सफलता दर 24 से 74 प्रतिशत तक रहती है, और यह मध्य-भाटा के समय तथा शांत मौसम में सबसे सफल होता है।

इसका आहार 99 प्रतिशत या अधिक मछली से बना होता है, और उत्तरी अमेरिका में इसके 80 से अधिक विभिन्न शिकार-प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, हालाँकि किसी एक क्षेत्र में सामान्यतः दो-तीन सामान्य प्रजातियाँ ही आहार पर हावी रहती हैं। यह अवसरवादी शिकारी है और जो भी मछली सतह के पास या उथले पानी में सुलभ हो, उसे पकड़ लेता है। कभी-कभी यह पक्षियों, सांपों, गिलहरियों, मस्करैट और यहाँ तक कि छोटे मगरमच्छ जैसी अन्य वस्तुएँ भी खा लेता है, और शव-भक्षण के दुर्लभ मामले भी दर्ज हुए हैं।

घोंसला और प्रजनन

ऑस्प्रे में प्रेम-प्रदर्शन भोजन और घोंसले-स्थल के इर्द-गिर्द केंद्रित होता है। प्रवासी आबादियों में नर मादा से कुछ दिन पहले घोंसले-स्थल पर पहुँचता है और अक्सर घोंसले के पास एक विशिष्ट हवाई प्रदर्शन करता है, जो संभावित साथी को आकर्षित करने या घुसपैठिये को चेतावनी देने के लिए होता है। दोनों साथी घोंसले की सामग्री जुटाते हैं, पर मादा उसे व्यवस्थित करने का अधिकांश काम करती है। घोंसले लकड़ी के तिनकों से बने होते हैं और समुद्री घास, काई या नरम सामग्री से ढके रहते हैं; यह जोड़ा एक ही घोंसले को वर्षों तक, कभी-कभी 70 वर्षों तक भी उपयोग करता रहता है।

प्रजनन ऋतु आबादी के अनुसार बदलती है — स्थानिक आबादियाँ दिसंबर से मार्च के बीच अंडे देती हैं जबकि प्रवासी आबादियाँ अप्रैल-मई में। मादा कई दिनों में फैलाकर दो से चार अंडे देती है, जो सफेद रंग के होते हैं और उनपर लाल-भूरे धब्बे होते हैं। दोनों माता-पिता लगभग 32 से 43 दिन तक अंडों को सेते हैं, और क्योंकि सेवन पहले अंडे से ही शुरू हो जाता है, चूजे क्रमवार निकलते हैं — पहले निकले चूजे बड़े होकर बाद वालों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त रखते हैं।

नवजात चूजे सफेद रुई जैसे पंखों में लिपटे होते हैं, जो लगभग 10 दिन में गहरे धूसर रंग के हो जाते हैं। चूजे 48 से 76 दिन में उड़ना सीख जाते हैं, इसमें प्रवासी आबादी के चूजे जल्दी उड़ना सीखते हैं। उड़ना सीखने के बाद भी वे दो से आठ सप्ताह तक भोजन के लिए घोंसले लौटते रहते हैं। ऑस्प्रे लगभग तीन वर्ष की आयु में यौन परिपक्व हो जाते हैं, पर घोंसले-स्थल की कमी वाले क्षेत्रों में प्रजनन पाँच से सात वर्ष की आयु तक टल सकता है। असामान्य बात यह है कि युवा ऑस्प्रे अपने पहले ग्रीष्मकाल में प्रजनन-क्षेत्र नहीं लौटते, बल्कि शीतकालीन क्षेत्र में ही रुके रहते हैं और अगले वर्ष लौटते हैं।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

ऑस्प्रे का वैश्विक विस्तार अफ्रीका और अमेरिका में ही 96,70,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक है और इसकी वैश्विक आबादी लगभग 4,60,000 पक्षियों की आंकी गई है। हालांकि वैश्विक आबादी का रुझान मात्रात्मक रूप से नहीं मापा गया है, यह घटने के उस स्तर के करीब नहीं मानी जाती जो संकटग्रस्त होने की कसौटी बने। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में स्पेंसर खाड़ी और निचली मर्रे नदी के किनारे पूर्व प्रजनन-क्षेत्र दशकों से खाली पड़े हैं, जो क्षेत्रीय कमी का संकेत देते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र में ऑस्प्रे मछली आबादियों पर कुछ प्रभाव डालने वाला शिकारी है, हालाँकि यह किसी अन्य प्रजाति के आहार का प्रमुख हिस्सा नहीं बनता। इसके घोंसले कई अन्य पक्षी प्रजातियों के लिए उपयोगी होते हैं — ग्रैकल, वृक्ष-अबाबील और गौरैया जैसी छोटी प्रजातियाँ इनके भीतर अपना घर बना लेती हैं, जबकि बड़ी प्रजातियाँ जैसे बगुले, कनाडा हंस और गंजा उकाब वसंत में लौटने से पहले खाली घोंसलों पर कब्ज़ा कर लेती हैं। कुछ उत्तरी वन क्षेत्रों में ऑस्प्रे अपने आवास के लिए बीवर द्वारा बनाए गए बांधों पर निर्भर रहे हैं, जो शिकार के लिए उथले तालाब और घोंसले के लिए मृत पेड़ बना देते हैं।

संरक्षण और खतरे

ऑस्प्रे को IUCN रेड लिस्ट में "न्यूनतम चिंताजनक" श्रेणी में रखा गया है, हालांकि अमेरिका के कई राज्यों में इसे संकटग्रस्त या विशेष चिंता वाली प्रजाति माना जाता है और यह प्रवासी पक्षी अधिनियम व CITES परिशिष्ट II के अंतर्गत संरक्षित है। 19वीं और 20वीं सदी के आरंभ में इसके लिए मुख्य खतरे अंडे-संग्रहकर्ता और गोलीबारी थे, जो बीसवीं सदी के मध्य तक घट गए।

1950 से 1970 के दशक के बीच कीटनाशक DDT के व्यापक उपयोग से ऑस्प्रे आबादी में तीव्र गिरावट आई — इस दौरान न्यूयॉर्क शहर और बॉस्टन के बीच अटलांटिक तट से 90 प्रतिशत प्रजनन जोड़े गायब हो गए, क्योंकि DDT पक्षियों के कैल्शियम चयापचय में बाधा डालकर उनके अंडों के छिलके को पतला और आसानी से टूटने वाला बना देता था। अमेरिका में 1970 के आसपास DDT पर प्रतिबंध लगा दिया गया, हालांकि यह कुछ शीत-प्रवास देशों में अब भी उपयोग होता है।

DDT प्रतिबंध और उत्पीड़न में कमी के बाद ऑस्प्रे आबादी काफी हद तक उबर चुकी है और अब कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच रही है। कृत्रिम घोंसला-मंच, हैकिंग परियोजनाएँ और जलाशयों से बने नए आवास ने इस वृद्धि और विस्तार में भूमिका निभाई है।

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

वैज्ञानिक नाम Pandion haliaetus में "Pandion" ग्रीक पौराणिक कथाओं के एक एथेनियन राजा से लिया गया है, जबकि "haliaetus" का अर्थ ग्रीक भाषा में "मछली पकड़ने वाला उकाब" है। यूरोप के तटीय लोक-विश्वासों में ऑस्प्रे को "सी हॉक" कहा जाता था और इसे यह संकेत माना जाता था कि सतह के पास मछलियों का समूह है, जिससे मछुआरों को मछली खोजने में मदद मिलती थी।

चीनी लोक-कविता "गुआन गुआन जू जियू" में ऑस्प्रे का उल्लेख है, जहाँ इसकी घनिष्ठ एकनिष्ठता के कारण इसे पति-पत्नी के बीच निष्ठा और सामंजस्य का प्रतीक माना गया है। आयरिश कवि विलियम बटलर येट्स ने अपनी कविता में एक भटकते हुए ऑस्प्रे को शोक के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया, और शेक्सपियर के कोरिओलेनस नाटक में भी इसका संदर्भ मिलता है, जो इस मध्यकालीन विश्वास पर आधारित है कि मछलियाँ ऑस्प्रे को देखकर सम्मोहित हो जाती हैं।

हेराल्ड्री में ऑस्प्रे को अक्सर एक सफेद उकाब के रूप में, चोंच या पंजों में मछली लिए, "सी-ईगल" कहा जाता है, और इसे दृष्टि व समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यह 50 से अधिक देशों के डाक टिकटों पर दिखाया गया है, और 1994 में इसे कनाडा के नोवा स्कोशिया प्रांत का प्रांतीय पक्षी घोषित किया गया। इसका नाम कई खेल टीमों, जैसे सिएटल सीहॉक्स, से भी जुड़ा है।

रोचक तथ्य

  1. वैज्ञानिक वर्गीकरण की दृष्टि से ऑस्प्रे अपने कुल Pandionidae और वंश Pandion का एकमात्र सदस्य है, हालांकि कुछ वर्गीकरणकर्ता इसे दो प्रजातियों में बांटते हैं।
  2. रोमन लेखक प्लिनी द एल्डर के अनुसार माना जाता था कि माता-पिता ऑस्प्रे अपने चूजों को सूरज की ओर उड़ने की परीक्षा देते थे और जो असफल होते, उन्हें त्याग देते थे।
  3. गेराल्ड ऑफ वेल्स और अल्बर्टस मैग्नस के लेखन से जुड़ी एक पुरानी किंवदंती में कहा गया था कि ऑस्प्रे के एक पैर पर जाल जैसी झिल्ली और दूसरे पर पंजे होते हैं।
  4. दर्ज सबसे अधिक आयु वाला यूरोपीय जंगली ऑस्प्रे 26 वर्ष 11 महीने तक जीवित रहा, जबकि बंदी अवस्था में अधिकतम दर्ज आयु 32 वर्ष है।

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

व्यवहार

  • परभक्षी
  • एकांतप्रिय
  • दिवाचर
  • प्रवासी

आहार

  • मछली-भक्षी (आहार)

वर्गीकरण

संघ
Chordata
वर्ग
Aves
गण
Accipitriformes
कुल
Pandionidae
वंश
Pandion
प्रजाति
Pandion haliaetus

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
  6. Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
  7. AnAge Longevity