Piranga rubra एक ऐसा अमेरिकी पक्षी है जो गर्मियों में दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी मेक्सिको में प्रजनन करता है। सर्दियों में यह मेक्सिको, मध्य अमेरिका और उत्तरी दक्षिण अमेरिका चला जाता है। इसका कुल विस्तार क्षेत्र है।
यह गीतपक्षियों के समूह का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय लाल सूची में इसे सबसे कम चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है। इसकी आबादी उत्तरी अमेरिका में अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती है।
पहले इसे टैनेजर परिवार में रखा जाता था, पर अब यह और इसके जाति-वर्ग के अन्य पक्षी कार्डिनल परिवार में गिने जाते हैं। इसका पंख-रंग और गीत भी इसी परिवार के अन्य सदस्यों से मिलते-जुलते हैं।
पहचान और रूप
नर की सबसे पहचान योग्य विशेषता उसका गुलाबी-लाल रंग है, जो उसके पूरे शरीर पर फैला रहता है। यह रंग भोजन से आता है, क्योंकि सभी पक्षियों के लाल और नारंगी रंग उनके आहार से बनते हैं।
मादा के निचले हिस्से नारंगी-से होते हैं और ऊपरी हिस्सा जैतूनी रंग का। उसके पंख और पूँछ जैतूनी-भूरे होते हैं। इसी वजह से मादा नर से काफी अलग दिखती है।
वयस्क पक्षी की लंबाई लगभग 17 सेंटीमीटर होती है और पंखों का फैलाव 28 से 30 सेंटीमीटर तक। इसकी चोंच मोटी और नुकीली होती है। औसत वज़न 30.1 ग्राम है, जो 25.8 से 33.6 ग्राम के बीच बदलता है।
नर को एक अन्य मिलते-जुलते टैनेजर से अलग करने के लिए चोंच देखी जाती है, क्योंकि उस प्रजाति की चोंच गहरी होती है।
वितरण और आवास
गर्मियों में पूर्वी क्षेत्र में यह मुख्य रूप से मिश्रित ओक और अन्य कठोर लकड़ी वाले पेड़ों के खुले जंगलों में रहता है। पश्चिम में यह चिनार और विलो के पेड़ों वाले नदी-किनारे के जंगलों में पाया जाता है।
यह बगीचों, पार्कों और सड़क किनारे के पेड़ों में भी मिल जाता है। सर्दियों में यह खुले जंगलों के अलावा ऊँची द्वितीयक वनस्पति, गैलरी वन, वन-किनारों, छायादार बागानों और शहर की गलियों के पार्कों व बगीचों में रहता है।
मेक्सिको में इसे नम सदाबहार वन और उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन पसंद हैं। यह आम तौर पर निचले ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मिलता है, हालाँकि पनामा में सर्दियों के दौरान यह 1800 मीटर तक ऊपर चला जाता है।
अप्रैल और मई में इसे सबसे अधिक देखा गया है। यूरोप के पश्चिमी भाग में यह बहुत दुर्लभ भटका हुआ पक्षी है।

व्यवहार और जीवनशैली
यह पक्षी ज़्यादातर पेड़ों की ऊँची शाखाओं में रहता है और अक्सर नज़र में नहीं आता। प्रजनन और प्रवास के मौसम को छोड़कर यह आम तौर पर अकेले रहता है। सर्दियों में यह अकेला रहता है, पर कभी-कभी मिश्रित झुंडों में शामिल हो जाता है।
प्रवास के दौरान इसके झुंड 30 पक्षियों तक के हो सकते हैं। यह ज़्यादातर रात में उड़ता है, जिसका प्रमाण टीवी टावरों से टकराकर मरने वाले पक्षियों की बड़ी संख्या है। दिन में यह कभी-कभी थोड़ी देर सो भी लेता है।
इसकी उड़ान तेज़ और सीधी होती है। यह पेड़ की डाल पर देर तक बैठा रहता है और फिर अचानक झटके से उड़ जाता है। जोड़े बार-बार अपने पंख साफ करते हैं और कभी-कभी धूप सेंकते हैं।
प्रजनन के मौसम में नर अपने घोंसले और भोजन-क्षेत्र की रक्षा करते हैं। आगमन के बाद नर आपस में तेज़ उड़ान में पीछा करते हैं, और इस दौरान उनका शारीरिक टकराव भी हो सकता है। सेने के दौरान नर मादा को वापस घोंसले तक पीछा करते देखे गए हैं।
नर के क्षेत्र में किसी दूसरे नर का गीत सुनाई दे तो वह उसे ढूँढकर सामना करता है। इसका घर-क्षेत्र लगभग 90,000 से 110,000 वर्ग मीटर तक हो सकता है।
संचार
नर का गीत मधुर और सुरीला होता है, जो कई अन्य टैनेजर की कर्कश आवाज़ से अलग सुनाई देता है। वह दिन भर गाता है, खासकर प्रजनन के मौसम में, जब वह मादा को आकर्षित करता है और क्षेत्र स्थापित करता है।
आरंभिक प्रजनन काल में नर प्रतिद्वंद्वी नर के गीत का जवाब उसी तरह गाकर देते हैं। कुछ मादाएँ भी नर के गीत जैसी, पर अस्पष्ट आवाज़ निकालती हैं।
दोनों लिंग एक तेज़, खटखटाती पुकार निकालते हैं, जो अलग-अलग स्थितियों में इस्तेमाल होती है। इसके गीत की शुरुआत सामान्यतः पिक-इ-टुक जैसी तीखी पुकार से होती है।
शिकार और आहार
यह पक्षी मुख्य रूप से कीड़े खाने वाला है और ऊँचे पेड़ों में उड़ते कीड़ों का शिकार करता है। यह अक्सर पेड़ों की चोटी से उड़कर हवा में कीड़ों को पकड़ता है, इसलिए इसे शिकारी की तरह भोजन ढूँढते देखा जा सकता है।
शिकार पकड़ने के बाद यह उसे किसी डाल पर लौटकर लाता है और तब तक पटकता है जब तक वह मर न जाए। मधुमक्खियाँ और ततैये इसके भोजन के मुख्य हिस्से हैं। यह ततैयों के छत्तों पर बार-बार हमला करता है, जब तक वे छत्ता छोड़ न दें, और उनके लार्वा खा जाता है।
कभी-कभी यह ज़मीन पर भी भोजन पकड़ता है। बड़े अकशेरुकी जीवों में घोंघे और स्लग भी खाता है। कुछ मौकों पर इसने छोटे कशेरुकी जीव को भी पकड़ा है।
मौसम बदलने पर इसका आहार बदलता है। देर प्रजनन काल, प्रवास और सर्दियों के क्षेत्र में यह ब्लैकबेरी, मलबेरी और केले जैसे फल भी खाता है।
घोंसला और प्रजनन
नर जोड़ा बनाने के लिए मादा का तेज़ और अचानक पीछा करता है। वह कभी-कभी भोजन लेकर मादा के सामने फुदकता भी है। नर आम तौर पर मादा से कुछ दिन पहले पहुँचते हैं और पूरे गीत के साथ क्षेत्र घेर लेते हैं।
जोड़ा एक ही प्रजनन काल में एक साथी के साथ रहता है, पर अगले वर्ष ज़रूरी नहीं कि वही साथी हो। जोड़े प्रजनन क्षेत्र पहुँचने के बाद बनते हैं और देर गर्मी में बच्चों के उड़ने के बाद अलग हो जाते हैं। यह अप्रैल से अगस्त के बीच प्रजनन करता है और एक वर्ष में एक ही बार अंडे देता है।
घोंसला बनाने का काम आगमन के 2 से 4 सप्ताह बाद शुरू होता है। मादा अकेले घोंसला बनाती है, जबकि नर साथ रहकर स्थान और सामग्री ढूँढने में मदद करता है। घोंसला आम तौर पर 2.5 से 10.5 मीटर ऊँचाई पर एक क्षैतिज डाल पर बनता है।
घोंसले में सूखी घास और बारीक घास लगाई जाती है। पूर्वी क्षेत्र में घोंसले अपेक्षाकृत कमज़ोर और बिखरे हुए होते हैं, जबकि पश्चिम के घोंसले मज़बूत होते हैं।
मादा 3 से 4 अंडे देती है, जो हल्के नीले या हल्के हरे और लाल-भूरे धब्बों वाले होते हैं। अंडे सेने का काम केवल मादा करती है और इसमें 12 से 13 दिन लगते हैं। कुछ जोड़ों में नर मादा को भोजन खिलाता है।
बच्चे निकलने के बाद दोनों माता-पिता उन्हें खिलाते हैं, मुख्यतः पूरे कीड़े। 8 से 10 दिन बाद बच्चे घोंसला छोड़ देते हैं और दसवें दिन तक छोटी, फड़फड़ाती उड़ानें भरने लगते हैं। माता-पिता बच्चों को उड़ने के बाद 2 से 4 सप्ताह तक देखभाल करते हैं।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
उत्तर अमेरिका में इसकी प्रजनन करने वाली आबादी लंबे समय से लगभग स्थिर रही है। यह पक्षी कीड़ों की आबादी को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है, क्योंकि यह मधुमक्खियों, ततैयों और अन्य कीड़ों को खाता है।
यह फलों के बीजों को फैलाकर पौधों के प्रसार में भी मदद करता है। इसकी बाहरी परजीवी जातियों में जूँ और माइट शामिल हैं। कभी-कभी साँप इसका शिकार बनते हैं।
संरक्षण और खतरे
अंतरराष्ट्रीय लाल सूची में यह सबसे कम चिंता वाली श्रेणी में है, यानी इसकी आबादी को तत्काल खतरा नहीं माना गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे संघीय लुप्तप्राय प्रजाति कानून के तहत संरक्षण नहीं मिलता, पर प्रवासी पक्षी अधिनियम के तहत इसकी रक्षा होती है।
इसके लिए सबसे बड़ा मानव-जनित खतरा प्रजनन आवास का नष्ट होना माना गया है। रात के प्रवास में टीवी टावरों से टकराना भी मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारण है।
इसकी दो मान्यता प्राप्त उप-प्रजातियाँ हैं: पश्चिम में Piranga rubra cooperi और पूर्व में Piranga rubra rubra।
सांस्कृतिक महत्व
यह पक्षी उन कीड़ों को खाता है, जिन्हें कुछ लोग कीट मानते हैं, जैसे मधुमक्खियाँ और ततैये। इस तरह यह कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में मनुष्यों के लिए लाभकारी माना जाता है।
रोचक तथ्य
- इस जाति के वर्ग Piranga का नाम फ्रांसीसी पक्षीविद् लुई पियरे विएयो ने 1808 में दिया था।
- Piranga rubra इस वर्ग की प्रकार-प्रजाति है, यानी इसी के आधार पर पूरे वर्ग की पहचान तय हुई।
फ़ोटो
तस्वीरें via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., by Melissa McMasters via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Dan Vickers via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by northerly via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by ian bullock via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Meghan Waldon via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Melissa Meadows via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by jonathan hunsberger via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., by Rita Clare via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0., और by yongestation via iNaturalist, licensed under CC BY 4.0. से हैं; हर तस्वीर पर श्रेय दिया गया है।
पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Aves
- गण
- Passeriformes
- कुल
- Cardinalidae
- वंश
- Piranga
- प्रजाति
- Piranga rubra
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity
- AVONET Bird mass, habitat, migration, diet and range size
- GloBI What it eats, what eats it, parasites and pollinators
- SquamataBase
- HWML Parasite Collection



