Prunus avium एक फूलने वाला वृक्ष है, जिसे जंगली चेरी, मीठी चेरी या गीन भी कहते हैं। यह गुलाब परिवार Rosaceae का सदस्य है और मूल रूप से पश्चिमी यूरेशिया में पाया जाता है। अन्य क्षेत्रों में इसे फैलाया गया है और वहाँ यह प्राकृतिक रूप से जम गया है।
यह प्रजाति आज दुनिया की ज़्यादातर मीठी खाने योग्य चेरी की पैतृक प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक वर्गीकरण स्पष्ट है और इसे वर्तमान में कम चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है।
पहचान और रूप
Prunus avium एक पर्णपाती वृक्ष है, जो 5 से 25 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। इसके तने का व्यास 1.5 मीटर तक पहुँच सकता है। युवा पेड़ का तना सीधा और मुकुट शंकु जैसा सममित होता है, जबकि पुराने पेड़ का मुकुट गोल या अनियमित हो जाता है।
छाल चिकनी और लाल-भूरी होती है, जिस पर युवा पेड़ में आड़ी भूरी धारियाँ दिखती हैं। पुराने पेड़ में छाल मोटी, गहरी काली-भूरी और दरारों वाली हो जाती है।
पत्तियाँ एकांतर क्रम में लगती हैं और 7 से 14 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। ये अंडाकार होती हैं, किनारे दाँतेदार होते हैं और ऊपर से हरी व लगभग चिकनी होती हैं। पतझड़ में पत्तियाँ नारंगी, गुलाबी या लाल हो जाती हैं।
फूल वसंत की शुरुआत में नई पत्तियों के साथ निकलते हैं। ये शुद्ध सफ़ेद पंखुड़ियों वाले होते हैं और इनका व्यास 2.5 से 3.5 सेंटीमीटर तक होता है। पराग मधुमक्खियों द्वारा होता है।
वितरण और आवास
यह प्रजाति यूरोप, अनातोलिया, माघरेब और पश्चिमी एशिया की मूल निवासी है। इसका प्राकृतिक क्षेत्र ब्रिटिश द्वीपों से दक्षिण में मोरक्को और ट्यूनीशिया तक फैला है। उत्तर में यह नॉर्वे के ट्रॉन्डहाइमसफ्योर्ड क्षेत्र तक जाता है और पूर्व में कॉकेशस व उत्तरी ईरान तक।
हिमालय के पश्चिमी भाग में इसकी एक छोटी और अलग-थलग आबादी भी मिलती है। इसके अलावा यह कई अन्य क्षेत्रों में उगाया जाता है।
उत्तरी अमेरिका, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में यह फैलाव से निकलकर प्राकृतिक रूप से जम गया है। इन जगहों पर यह मूल आवास से बाहर उगता दिखता है।
उपलब्ध प्रेक्षणों में मई के आसपास सबसे अधिक उपस्थिति दिखती है, जबकि नवंबर से फ़रवरी के बीच यह कम दिखती है।

पारिस्थितिकी और संबंध
इसके फल कई तरह के पक्षी और स्तनधारी खाते हैं। वे गूदा पचा लेते हैं और बीज अपनी बीट के साथ दूर तक फैला देते हैं। कुछ कृंतक और कुछ पक्षी, जैसे हॉफिंच, गुठली तोड़कर भीतर का बीज भी खाते हैं।
पत्तियाँ कुछ कीटों का भोजन हैं। इनमें Coleophora anatipennella नाम का पतंगा भी शामिल है, जो शलभ वर्ग का सदस्य है।
पेड़ की छाल में लगे घाव से गोंद निकलता है। यह गोंद घाव को सील कर देता है, जिससे कीट और फफूंद अंदर नहीं जा पाते।
उपयोग और मानव संबंध
इसे फूलों वाले सजावटी वृक्ष के रूप में बहुत उगाया जाता है। अपने आकार के कारण इसे पार्कों में अधिक लगाया जाता है, जबकि सड़क या छोटे बाग़ में कम। सबसे आम रूप दोहरे फूलों वाला 'Plena' है, न कि जंगली एकल फूल वाला रूप।
मानव भोजन के रूप में जंगली चेरी का उपयोग हज़ारों वर्षों से होता रहा है। कांस्य युग की बस्तियों में इसकी गुठलियाँ मिली हैं, जिनमें ब्रिटेन भी शामिल है। 800 ईसा पूर्व तक एशिया माइनर में चेरी की खेती होने लगी थी और उसके बाद यूनान में भी।
इसकी लकड़ी लाल-भूरी और कठोर होती है। इसे खराद के काम, अलमारियों और संगीत वाद्य बनाने में पसंद किया जाता है। उत्तरी अमेरिका में इस लकड़ी से मांस जैसे खाद्य पदार्थों को धुआँ देकर पकाया जाता है। यूरोप में कृषि भूमि पर वनीकरण के लिए भी इसका व्यापक उपयोग होता है।
रोचक तथ्य
- आयरलैंड की प्राचीन कानूनी व्यवस्था में इस वृक्ष को 'Commoners of the Wood' में दूसरे सबसे ऊँचे दर्जे पर रखा गया था।
- यूनानी पौराणिक कथाओं में चेरी को प्रेम और प्रजनन से जोड़ा गया है। एक कथा के अनुसार पहला चेरी वृक्ष एडोनिस के बहते खून से उगा था।
- रोमन लेखक प्लिनी ने लिखा था कि 74 ईसा पूर्व से पहले इटली में चेरी नहीं थी। पुरातात्विक खोजों में यूरोप में प्रागैतिहासिक बीज मिलने से यह दावा गलत साबित हुआ।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- वृक्ष
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Magnoliopsida
- गण
- Rosales
- कुल
- Rosaceae
- वंश
- Prunus
- प्रजाति
- Prunus avium
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract



