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Sorbus aucuparia

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

संकटमुक्त

यूरोप में पेड़ों की सबसे उत्तरी सीमा तक, लगभग 70° उत्तरी अक्षांश तक उगने वाला यह पेड़ Sorbus aucuparia है। यह गुलाब कुल का पर्णपाती वृक्ष या झाड़ी है और इसका संबंध मैग्नोलियोप्सिडा वर्ग से है।

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की सूची में इसे कम खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है। यूरोप के लगभग सभी हिस्सों में और काकेशस से लेकर उत्तरी रूस और साइबेरिया तक इसकी उपस्थिति मिलती है। ठंडे पहाड़ी और उत्तरी इलाकों में इसकी मौजूदगी इसे खास बनाती है।

पहचान और रूप

इस पेड़ की सबसे उपयोगी पहचान इसके पंखनुमा संयुक्त पत्ते हैं, जिनमें चार से नौ जोड़ी पत्रक एक केंद्रीय शिरा के दोनों ओर लगे होते हैं और सिरे पर एक अंतिम पत्रक होता है। पत्रक लंबे-भालेनुमा होते हैं और उनके किनारे तीखे दाँतेदार होते हैं। पत्ते एक-एक करके एकांतर क्रम में लगते हैं, जबकि राख के पत्ते आमने-सामने लगते हैं और उनमें उपपर्ण नहीं होते।

यह छोटा पेड़ या झाड़ी आमतौर पर पाँच से 15 मीटर ऊँची होती है। कभी-कभी यह 20 मीटर तक पहुँचती है और असाधारण मामलों में 28 मीटर तक भी। इसका ताज ढीला और लगभग गोल या अनियमित आकार का होता है, और अक्सर इसके कई तने होते हैं। तना पतला और बेलनाकार होता है, जिसका व्यास 40 सेंटीमीटर तक हो सकता है।

पत्तियों की ऊपरी सतह गहरी हरी होती है और निचली सतह धूसर-हरी तथा हल्के रोएँदार होती है। पत्ते पीले होकर शरद में झड़ते हैं, जबकि शुष्क स्थानों पर उनका रंग गहरा लाल हो जाता है।

युवा छाल पीली-धूसर और चमकदार होती है, जो उम्र के साथ धूसर-काली होकर लंबाई में दरारों वाली हो जाती है। लेंटिसेल लंबे और चमकीले नारंगी रंग के होते हैं।

वितरण और आवास

यह पेड़ यूरोप के अधिकांश हिस्सों में मैदानों से लेकर पहाड़ों और वृक्ष-रेखा तक फैला हुआ है। आल्प्स में यह 2,000 मीटर तक की ऊँचाई पर उगता है। उत्तरी नॉर्वे में यह 71वें समानांतर उत्तर तक मिलता है, और आर्कटिक वृक्ष-रेखा के उत्तर में भी इसकी मौजूदगी दर्ज है।

दक्षिणी स्पेन, दक्षिणी ग्रीस, सार्डिनिया, बैलेरिक द्वीप, अज़ोरेस और फ़ैरो द्वीप इसके मूल क्षेत्र में नहीं आते। उत्तरी अमेरिका में इसे सजावटी पौधे के रूप में लाया गया था, और वहाँ यह वॉशिंगटन से अलास्का तक तथा कनाडा और अमेरिका के उत्तर-पूर्व में फैल गया है।

यह पेड़ छाया सह सकता है और हल्के जंगलों, जंगल के किनारों, सड़कों के किनारों और कटे हुए जंगलों में उगता है। यह पहला पेड़ों में से है जो गिरे हुए पेड़ों के ऊपर उगकर जगह बनाता है। इसके बीज आसानी से अंकुरित होते हैं, इसलिए यह चट्टानों, खंडहरों, डाल-संधियों और खोखले पेड़ों में भी उग आता है।

यह पेड़ मध्यम रूप से सूखी से मध्यम नम, अम्लीय, पोषक तत्वों में कम और ढीली मिट्टी पसंद करता है। यह पथरीली, चिकनी, रेतीली या गीली पीट मिट्टी में भी उग सकता है, पर खारी मिट्टी और जलभराव इसे सहन नहीं होते।

Sorbus aucuparia के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
2,34,897
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

पारिस्थितिकी और संबंध

इसके फूल मुख्य रूप से मधुमक्खियों और मक्खियों द्वारा परागित होते हैं। फूलों में बहुत-सा मकरंद होता है, जिसमें फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोज़ अधिक होते हैं। इसके फल लगभग 60 पक्षी प्रजातियों और कई स्तनधारियों का भोजन हैं। स्तनधारियों में हिरण, भेड़, गाय, लोमड़ी, बिज्जू, डोरमाउस और गिलहरी शामिल हैं।

थ्रश और अन्य गायक पक्षी इन फलों को सबसे अधिक पसंद करते हैं। पक्षी बीजों को पचाते नहीं, इसलिए बीज बिना नुकसान के उनके मल के साथ बाहर आते हैं और नए स्थानों पर उगते हैं। देर-गर्मी से लेकर सर्दियों तक बोहेमियन वैक्सविंग, ब्लैकबर्ड, फ़ील्डफ़ेयर और रेडविंग इसके फल खाते हैं।

इसकी जड़ों में अधिकतर आर्बस्कुलर माइकोराइज़ा कवक के साथ सहजीवी संबंध होता है। इसके पत्तों को कीट लार्वा खाते हैं, जिनमें Venusia cambrica जैसे पतंगे और Stigmella वंश के पर्ण-सुरंगक शामिल हैं। मुख्य कीटों में Argyresthia conjugella और Hoplocampa alpina आते हैं। यह पेड़ आग के प्रति संवेदनशील है और अक्सर बड़े जंगली पेड़ों द्वारा इसका स्थान ले लिया जाता है।

उपयोग और मानव संबंध

यह पेड़ लोककथाओं में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। यूरोप में इसे जादुई माना गया और माना गया कि यह बुरी शक्तियों से रक्षा करता है। इसे यात्रियों का पेड़ भी कहा गया, क्योंकि लोग मानते थे कि यह यात्रा में रक्षा करता है। नॉर्स पौराणिक कथाओं में इसका संबंध देवता थोर से जोड़ा जाता है, जिन्हें कथा के अनुसार नदी में डूबने से इसी पेड़ की शाखा ने बचाया था।

इसके फल को पुराने समय में पक्षियों को आकर्षित करके पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। फल स्वाभाविक रूप से कड़वे होते हैं, पर कुछ रूपों में इनसे जैम, जेली और रस बनाए जाते हैं। कुछ कम कड़वी किस्में भी विकसित की गई हैं, जिन्हें खाने योग्य माना जाता है।

इसकी लकड़ी का उपयोग बैलगाड़ी बनाने, खराद और नक्काशी के काम में होता है। लकड़ी लगभग 20 वर्ष की उम्र के पेड़ों से ली जा सकती है।

रोचक तथ्य

  1. ब्रिटेन में सबसे मोटा रोवन स्कॉटिश हाइलैंड्स में किंगुसी के पास पाया गया है, जिसका घेरा 4.31 मीटर है।
  2. आयरलैंड का सबसे ऊँचा ज्ञात पेड़ ग्लेनस्टल एबी, काउंटी लिमेरिक में है, जिसकी ऊँचाई 18 मीटर है।
  3. इस पेड़ के फल औसतन लगभग 100 दिन तक पेड़ पर टिके रहते हैं।
संकटमुक्त

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

वृद्धि का रूप

  • वृक्ष

वर्गीकरण

संघ
Tracheophyta
वर्ग
Magnoliopsida
गण
Rosales
कुल
Rosaceae
वंश
Sorbus
प्रजाति
Sorbus aucuparia

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits