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Eretmochelys imbricata

Eretmochelys imbricata

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

CRगंभीर रूप से संकटग्रस्त
चट्टानी समुद्री तल के ऊपर तैरता एक वयस्क हॉक्सबिल कछुआ, जिसका एम्बर रंग का धारीदार कवच, नुकीली चोंच जैसा मुख और दो पंजों वाले अगले पंख दिखाई दे रहे हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

वज़न
67–67 kg
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Testudines
कुल
Cheloniidae
वंश
Eretmochelys
प्रजाति
Eretmochelys imbricata

Eretmochelys imbricata अपने आहार के कारण एक असामान्य क्षमता रखता है: यह विषैले समुद्री जंतुओं जैसे साइडेरियन को खाता है, जिससे इसके शरीर के मांस में विष जमा हो सकता है - समुद्री कछुओं में ऐसा गुण किसी और प्रजाति में नहीं देखा जाता।

यह Testudines गण और Cheloniidae परिवार से संबंधित एक समुद्री कछुआ है, और अपने वंश Eretmochelys की एकमात्र जीवित प्रजाति है। यह विश्व भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय समुद्री तथा ज्वारनदमुखी पारिस्थितिकी तंत्रों में पाया जाता है, और IUCN द्वारा इसे "गंभीर संकटग्रस्त" (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है।

सदियों से मनुष्यों द्वारा इसके कवच और मांस के लिए शिकार किए जाने के बावजूद यह प्रजाति चट्टानी भित्तियों के पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो इसे केवल एक संकटग्रस्त जीव नहीं बल्कि समुद्री जीवन के संतुलन की एक कड़ी बनाती है।

पहचान और रूप

इस प्रजाति की सबसे स्पष्ट पहचान इसके कवच के पिछले भाग की आरी जैसी दाँतेदार धार है, जो इसके स्कूट (scutes) के एक-दूसरे पर ओवरलैप होने से बनती है। कवच में पाँच केंद्रीय स्कूट और चार जोड़ी पार्श्व स्कूट होते हैं, जो एम्बर रंग की पृष्ठभूमि पर काले और भूरे रंग की अनियमित धारियों से सजे रहते हैं।

वयस्क सामान्यतः लगभग 1 मीटर लंबाई तक बढ़ते हैं और औसतन लगभग 80 किलोग्राम वजन के होते हैं, हालांकि अब तक पकड़ा गया सबसे भारी हॉक्सबिल 127 किलोग्राम का था। इसका सिर लंबा और पतला होता है, जो चोंच जैसे मुख में समाप्त होता है - यह चोंच अन्य समुद्री कछुओं की तुलना में अधिक तीखी और मुड़ी हुई होती है, और इसी विशेषता से इसका नाम पड़ा है। इसके अगले पंखों पर प्रत्येक तरफ दो स्पष्ट पंजे भी दिखाई देते हैं।

रेत में इसके रेंगने से बने निशान असममित (asymmetrical) होते हैं, जबकि हरे समुद्री कछुए और लेदरबैक कछुए के निशान अधिक सममित होते हैं - यह अंतर क्षेत्र में पदचिह्नों से प्रजाति पहचानने का एक उपयोगी तरीका है। नर मादाओं की तुलना में अधिक गहरी रंगत और तीव्र चमक प्रदर्शित करते हैं, जिसका व्यवहारिक महत्व अभी अनुमानित ही है।

वितरण और आवास

यह प्रजाति मुख्यतः प्रवाल भित्तियों और चट्टानी उथले पानी में पाई जाती है, जहाँ यह भित्तियों की गुफाओं और किनारों में दिन के समय विश्राम करती है। इसके अतिरिक्त यह मैंग्रोव, ज्वारनदमुखी और बिना वनस्पति वाले उथले, मटियारे लैगून में भी देखी जाती है। सामान्यतः यह 18 मीटर से अधिक गहराई में नहीं जाती, जबकि युवा कछुए तैरने में सक्षम न होने के कारण समुद्री सारगासो शैवाल के तैरते समूहों में जीवन बिताते हैं।

भौगोलिक रूप से यह प्रजाति अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागरों के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैली है, जिसमें अटलांटिक और इंडो-पैसिफिक की दो प्रमुख उप-आबादियाँ पहचानी गई हैं। अटलांटिक में यह मेक्सिको की खाड़ी से लेकर दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप तक और ब्राज़ील के तटों तक फैली है, जबकि कैरिबियाई क्षेत्र में लेसर एंटिल्स, बारबाडोस, ग्वाडेलूप, कोस्टा रिका के टोर्टुगुएरो और युकातान प्रमुख घोंसला स्थल हैं।

हिंद महासागर में यह पूर्वी अफ्रीका, मदागास्कर, मोज़ाम्बिक, रेड सी और फारस की खाड़ी के तटों पर सामान्य है, और दक्षिण एशियाई तथा दक्षिणपूर्व एशियाई तटों, मलय द्वीपसमूह तथा उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में भी पाई जाती है। प्रशांत क्षेत्र में इसका विस्तार कोरिया और जापान के दक्षिणी तटों से लेकर उत्तरी न्यूज़ीलैंड तक होता है; फिलीपींस के बोराके और सेशेल्स के कज़ीन द्वीप जैसे स्थान महत्वपूर्ण घोंसला स्थल माने जाते हैं।

GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, आबादी या वितरण का पूर्ण चित्र नहीं। फिर भी, अगस्त से अक्टूबर के महीनों में अवलोकनों की संख्या स्पष्ट रूप से अधिक (लगभग 2,600 से 3,500) दिखाई देती है, जो सामान्य घोंसला अवधि जुलाई से अक्टूबर के साथ मेल खाती है और सतर्कतापूर्वक इस मौसम में तटों के निकट अधिक उपस्थिति का संकेत दे सकती है।

Eretmochelys imbricata के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
3,499
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

यह प्रजाति एकांतप्रिय और दैनिक (diurnal) है, हालांकि प्रजनन काल के दौरान यह व्यवहार बदल जाता है। सामान्य दिनों में यह अकेले चट्टानी भित्तियों और महाद्वीपीय शेल्फ में भोजन की खोज में घूमती रहती है।

एक समय यह माना जाता था कि यह प्रजाति जीवनभर एक ही स्थानीय क्षेत्र में रहती है, परंतु हाल के अध्ययनों से पता चला है कि यह अपने जीवनकाल में बहुत लंबी दूरी तक प्रवास करती है, जो इसे एक अत्यंत प्रवासी (migratory) प्रजाति बनाता है।

भित्तियों के भीतर तंग जगहों में घुसने के लिए यह अपने मज़बूत कवच का उपयोग करती प्रतीत होती है, जिससे यह चट्टानों की दरारों और गुफाओं में छिपकर शिकारियों से बच सके।

संचार

यह प्रजाति मुख्यतः दृश्य (visual) और स्पर्शीय (tactile) संकेतों के माध्यम से संवाद करती है, जो विशेष रूप से अनुष्ठानिक संगम व्यवहार (mating rituals) में प्रयुक्त होते हैं।

इसकी बोधन क्षमताओं में दृश्य, स्पर्शीय, ध्वनिक, रासायनिक और चुंबकीय संकेतों की पहचान शामिल है, जिनमें से चुंबकीय क्षेत्रों और चंद्र-कलाओं की भूमिका इस बात में महत्वपूर्ण मानी जाती है कि यह अपने घोंसला-तटों पर वापस कैसे लौटती है, हालांकि इसकी सटीक क्रियाविधि अभी अज्ञात है।

आहार और पोषण

यह प्रजाति मुख्यतः स्पंज (sponges) खाती है, परंतु अत्यधिक चयनात्मकता दिखाती है और केवल कुछ विशेष स्पंज प्रजातियों को ही खाती है, जिनमें से कई अन्य जंतुओं के लिए विषैली होती हैं। जेलीफिश और अन्य साइडेरियन इसके आहार का सामान्य हिस्सा हैं।

सर्वाहारी होने के कारण यह मोलस्क, मछली, समुद्री शैवाल और क्रस्टेशियन भी खाती है। इसके पसंदीदा भोजन क्षेत्र भूरे शैवाल से भरे उथले शोल होते हैं, जहाँ यह आसानी से भोजन ढूंढ पाती है।

इसका आहार इस प्रजाति के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है, क्योंकि विशिष्ट स्पंज-भक्षण भित्तियों की संरचना को प्रभावित करता है।

घोंसला और प्रजनन

संगम दूरस्थ द्वीपों के पास सुरक्षित लैगूनों में होता है, जो घोंसला तटों के निकट स्थित होते हैं, और यह सामान्यतः हर दो से तीन वर्षों में एक बार होता है। अटलांटिक की आबादियों में संगम काल अप्रैल से नवंबर तक चलता है, जबकि सेशेल्स जैसी हिंद महासागरीय आबादियों में यह सितंबर से फरवरी तक होता है।

घोंसला बनाना सामान्यतः जुलाई से अक्टूबर के बीच होता है। मादा रात में समुद्र से भारी शरीर खींचकर तट पर आती है, मलबा साफ करती है और अपने पिछले पंखों से गड्ढा खोदती है। फिर वह अंडे देती है और उन्हें रेत से ढक देती है - पूरी प्रक्रिया में एक से तीन घंटे लगते हैं। कैरिबियाई और फ्लोरिडा के घोंसलों में औसतन लगभग 140 अंडे पाए जाते हैं, और मादा साल में तीन बार लगभग 13 से 15 दिनों के अंतराल पर अंडे देती है।

अंडे लगभग 60 दिनों के बाद फूटते हैं। बच्चे 24 ग्राम से कम वजन के होते हैं, गहरे रंग के होते हैं और उनका हृदयाकार कवच लगभग 2.5 सेंटीमीटर लंबा होता है। वे रात में अंडों से निकलकर चांद के प्रतिबिंब की दिशा में समुद्र की ओर दौड़ते हैं, हालांकि तटीय रोशनी इस दिशा-भावना को भ्रमित कर सकती है। जो बच्चे भोर तक समुद्र तक नहीं पहुँच पाते, वे किनारे के पक्षियों और केकड़ों का शिकार बन जाते हैं।

मादा में यौन परिपक्वता लगभग तीन वर्ष की आयु में दर्ज की गई है, और अंडे देने के बाद माता-पिता की ओर से बच्चों की कोई देखरेख नहीं होती।

आबादी और पारिस्थितिक भूमिका

इस प्रजाति की सटीक आबादी का आकलन करना कठिन है, क्योंकि यह विश्वभर में फैली हुई और अत्यधिक प्रवासी है। कुछ क्षेत्रों में यह दुर्लभ हो चुकी है जबकि अन्य में इसकी संख्या अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है, और प्रारंभिक ऐतिहासिक आबादी के आँकड़े उपलब्ध न होने के कारण गिरावट की सही सीमा जान पाना भी मुश्किल है।

पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है: स्पंजों को खाकर यह भित्तियों में उत्तराधिकार (succession) की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है, जिससे अन्य जीवों के बसने के लिए जगह खाली होती है। इस तरह यह प्रवाल भित्ति आवास की संरचना बनाने में सहायक मानी जाती है।

संरक्षण और खतरे

IUCN ने इस प्रजाति को "गंभीर संकटग्रस्त" (Critically Endangered) घोषित किया है, और यह CITES परिशिष्ट I तथा अमेरिकी संघीय सूची में "संकटग्रस्त" (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है, जिसका अर्थ है कि इसके किसी भी उत्पाद का अंतरराष्ट्रीय व्यापार वैध रूप से प्रतिबंधित है।

सबसे बड़ा खतरा ऐतिहासिक रूप से मनुष्यों द्वारा इसके कवच, मांस और अंडों के लिए किया गया शिकार रहा है, जिसने इसे मुख्य शिकारी के रूप में प्रभावित किया है। चूंकि यह प्रजाति दुनिया भर में फैली और प्रवासी है, इसके संरक्षण के लिए उन सभी देशों के बीच सहयोग आवश्यक है जिनके जलक्षेत्रों में यह पाई जाती है।

कुछ स्थानों पर सुरक्षा उपायों के सकारात्मक परिणाम दिखे हैं - जैसे सेशेल्स के कज़ीन द्वीप पर, जहाँ 1994 से यह प्रजाति कानूनी रूप से संरक्षित है और आबादी में कुछ सुधार देखा गया है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

गंभीर रूप से संकटग्रस्त

सांस्कृतिक महत्व

दुनिया भर के स्थानीय और आदिवासी समुदाय सदियों से समुद्री कछुओं पर विशेष ध्यान देते रहे हैं, और यह प्रजाति कई संस्कृतियों में दीर्घायु, ज्ञान और समुद्र के प्रतीक के रूप में लोककथाओं और पौराणिक कथाओं में दिखाई देती है।

रापा नुई (ईस्टर द्वीप) और अन्य प्रशांत द्वीपीय संस्कृतियों में समुद्री कछुए कला, पौराणिक कथाओं, प्रतीकवाद, लोकपरंपराओं तथा धार्मिक-आत्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

ऐतिहासिक रूप से मनुष्यों ने इसे भोजन के रूप में - मांस और अंडे दोनों के लिए - उपयोग किया है, और इसके शरीर के अंग, विशेष रूप से इसके स्कूट, अंगूठियों और अन्य वस्तुओं के निर्माण में मूल्यवान सामग्री के रूप में उपयोग किए जाते रहे हैं।

रोचक तथ्य

  1. दर्ज किया गया सबसे भारी हॉक्सबिल कछुआ 127 किलोग्राम वजन का था, जो औसत आकार से काफी अधिक है।
  2. रेत पर इसके रेंगने से बने निशान असममित होते हैं, जो इसे हरे समुद्री कछुए और लेदरबैक कछुए से अलग करने में मदद करते हैं।
  3. नए जन्मे बच्चे समुद्र की ओर बढ़ने के लिए चांद के पानी पर पड़ने वाले प्रतिबिंब का सहारा लेते हैं, और कृत्रिम रोशनी इस दिशा-ज्ञान को भ्रमित कर सकती है।
  4. फिलीपींस के दक्षिणपश्चिम में स्थित कुछ द्वीपों का नाम "टर्टल आइलैंड्स" इसी कारण रखा गया है कि वहाँ हॉक्सबिल और हरे समुद्री कछुए दोनों घोंसला बनाते हैं।
  5. प्राचीन काल में रेड सी क्षेत्र के इन कछुओं के कवच और स्कूट का उपयोग अंगूठियाँ बनाने में किया जाता था।

पारिस्थितिकी

आवास

  • आर्द्रभूमि
  • समुद्री
  • तटीय

व्यवहार

  • एकांतप्रिय
  • जलीय
  • दिवाचर
  • प्रवासी

आहार

  • सर्वाहारी

फ़ोटो

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चट्टानी समुद्री तल के ऊपर तैरता एक वयस्क हॉक्सबिल कछुआ, जिसका एम्बर रंग का धारीदार कवच, नुकीली चोंच जैसा मुख और दो पंजों वाले अगले पंख दिखाई दे रहे हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of LifeAnimal Diversity WebAnAge