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ऊदबिलाव

Lutra lutra

निकट संकटग्रस्त

ऊदबिलाव एक अर्ध-जलीय स्तनधारी है, जो यूरेशिया और उत्तरी अफ़्रीका के मघरेब क्षेत्र में पाया जाता है। यह उप-परिवार का सबसे व्यापक रूप से फैला सदस्य है, और यूरोप, एशिया के बड़े हिस्से तथा उत्तरी अफ़्रीका के कुछ भागों में नदियों, झीलों और तटों पर मिलता है।

यह मस्टेलिडी परिवार का सदस्य है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में इसे निकट संकटग्रस्त माना गया है। इसके कुछ क्षेत्रों में इसकी स्थिति गंभीर है, जबकि अन्य जगहों पर यह फिर से बढ़ रहा है।

यह जीव मुख्य रूप से मछली खाता है और अपने क्षेत्र की रक्षा में बेहद सख़्त रहता है। पानी और ज़मीन दोनों पर इसका जीवन कैसे चलता है, यह समझना दिलचस्प है।

पहचान और रूप

ऊदबिलाव की सबसे उपयोगी पहचान उसकी दो-रंगी फर है। पीठ पर भूरी और पेट पर क्रीम रंग की फर होती है, जो इसे पानी में ढकने और सुरक्षा देने का काम करती है।

शरीर की लंबाई लगभग 57 से 95 सेंटीमीटर होती है, और पूँछ 35 से 45 सेंटीमीटर लंबी होती है। मादा नर से छोटी होती है। वयस्क का औसत वज़न लगभग होता है, यानी 7 से 12 किलोग्राम के बीच। कोई बड़ा बूढ़ा नर 17 किलोग्राम तक पहुँच सकता है।

इसकी हड्डियों का घनत्व अधिक होता है, जिससे पानी में उछाल कम रहती है और गोता लगाना आसान होता है। लंबा और पतला शरीर इसे तैरने में मदद करता है।

उत्तरी अमेरिकी नदी ऊदबिलाव से इसे अलग पहचाना जा सकता है। इसकी गर्दन छोटी होती है, चेहरा चौड़ा होता है, कानों के बीच की दूरी अधिक होती है और पूँछ लंबी होती है। अधिकतर इलाकों में यही एकमात्र ऊदबिलाव होता है, इसलिए इसे किसी और जीव से भ्रमित करना कम होता है।

वितरण और आवास

ऊदबिलाव का फैलाव यूरोप, उत्तरी अफ़्रीका और एशिया के कुछ भागों तक है, और यह फ़िलिस्तीन क्षेत्र तक पहुँचता है। यह सबसे व्यापक रूप से फैला ऊदबिलाव है। ब्रिटेन और आयरलैंड में यह व्यापक रूप से मिलता है, और लाटविया, नॉर्वे के तट तथा स्पेन और पुर्तगाल के पश्चिमी इलाकों में भी आम है। इटली में यह प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग में रहता है।

यह प्रदूषण-मुक्त ताज़े पानी के स्रोतों में रहता है, जैसे झीलें, नदियाँ, नहरें और तालाब, बशर्ते वहाँ भोजन पर्याप्त हो। अंदलूसिया में यह कृत्रिम गोल्फ़ कोर्स की झीलों का भी उपयोग करता है। यह धाराओं के खुले भागों को पसंद करता है, और तटों पर खारे पानी में भी रहता है। फिर भी अपनी फर साफ़ रखने के लिए इसे नियमित रूप से ताज़ा पानी चाहिए।

भारत में यह हिमालय की तलहटी, दक्षिणी पश्चिमी घाट और मध्य भारत के भू-भाग में मिलता है। नेपाल के पश्चिमी भाग में यह लगभग 1,600 मीटर की ऊँचाई पर बरकोट नदी में और लगभग 1,337 मीटर की ऊँचाई पर तुबांग नदी में दर्ज हुआ है।

सीरिया में यह लताकिया और रक़्क़ा के पहाड़ी नालों में तथा फ़रात घाटी के निचले हिस्से में देर एज़-ज़ोर क्षेत्र में मिला है। किर्गिज़स्तान में इसे लंबे समय तक विलुप्त माना गया, पर 2025 में खान-तेंगिरी प्राकृतिक उद्यान में तुरुक नदी पर एक ऊदबिलाव देखा गया।

Lutra lutra के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
30,401
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

ऊदबिलाव मुख्य रूप से शाम ढलने के बाद और रात में सक्रिय रहता है। यह पानी के नीचे दो मिनट तक गोता लगा सकता है, इसलिए शिकार के लिए इसे अधिक समय पानी में बिताना पड़ता है।

यह अधिकतर अकेला रहता है। जोड़ीदार या माँ और उसके बच्चे केवल अस्थायी रूप से साथ होते हैं। कभी-कभी यह छह जानवरों तक के ढीले समूह में भी दिखता है।

यह अपने क्षेत्र को लेकर बेहद अधिकारवादी है। इसका क्षेत्र एक से चालीस किलोमीटर तक हो सकता है, और आम तौर पर लगभग 18 किलोमीटर। तटों पर क्षेत्र छोटा होता है, क्योंकि वहाँ उपयुक्त पट्टी चौड़ी होती है, जबकि संकरी नदियों पर यह लंबा होता है। क्षेत्र केवल एक ही लिंग के सदस्यों से बचाया जाता है, इसलिए नर और मादा के क्षेत्र आपस में मिल सकते हैं।

ऊदबिलाव खेलने वाला जीव माना जाता है। यह पेट के बल मिट्टी की ढलानों या बर्फ़ के ढेरों से फिसलता है। किशोर और वयस्क दोनों पानी में एक-दूसरे का पीछा करते हैं, दौड़ते हैं और फिसलते हैं। माना जाता है कि इस खेल से युवा ऊदबिलावों को शिकार की तकनीक सिखने में मदद मिलती है।

संचार

ऊदबिलाव ध्वनियों से बात करता है। इसकी पुकारों में चेतावनी, अभिवादन और मिलन के संकेत शामिल हैं, और इनके अलावा लगभग बारह और तरह की पुकारें भी होती हैं। इसकी आवाज़ में छोटी, तीखी सीटी, चीख, सिसकी और दर्द भरी ऊँची चीखें सुनाई देती हैं।

गंध सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। पूँछ के आधार पर जोड़ीदार गंध ग्रंथियाँ होती हैं, जिनसे तेज़, कस्तूरी जैसी गंध आती है। ऊदबिलाव पौधों और लकड़ी के लट्ठों पर यह गंध छोड़ता है, और अपनी फर पर भी इसे लपेटता है। इन गंध-चिह्नों से दूसरे ऊदबिलाव क्षेत्र की सीमा, पहचान और यौन अवस्था का पता लगाते हैं।

स्पर्श भी एक संवेदी माध्यम है। इसकी मूँछें पानी के नीचे मछलियों की हलचल महसूस करती हैं।

शिकार और आहार

ऊदबिलाव शिकार ढूँढने और पकड़ने में पानी के नीचे अपनी मूँछों पर निर्भर रहता है। ये मूँछें मछलियों और दूसरे शिकार की हलचल को महसूस करती हैं, जिससे यह अंधेरे या गंदले पानी में भी शिकार पकड़ लेता है।

मछली इसका मुख्य भोजन है। इसके अलावा यह झींगा जैसे जलीय जीव, सीप, छोटे स्तनधारी, उभयचर, पक्षी और उनके अंडे, कीड़े और केंचुए खाता है। पौधों का सेवन बहुत कम होता है।

दिन में यह कई बार शिकार करता और खाता है, और रोज़ लगभग 1 किलोग्राम भोजन खाता है।

प्रजनन और बच्चों का पालन

ऊदबिलाव का प्रजनन चक्र लगातार चलता है, और मादा का एस्ट्रस चक्र भी निरंतर होता है। मिलन पानी में भी हो सकता है और ज़मीन पर भी। मुख्य मिलन-काल फ़रवरी से मार्च और जुलाई तक रहता है।

गर्भकाल 60 से 70 दिन का होता है। मादा आम तौर पर दो या तीन शावक जन्माती है, और हर शावक का वज़न जन्म के समय 99 से 122 ग्राम होता है। शावकों की आँखें एक महीने बाद खुलती हैं, और दो महीने बाद वे माँद से बाहर निकलने लगते हैं। वे लगभग 3 महीने में दूध छोड़ देते हैं, पर लगभग 13 से 14 महीने तक माँ के साथ रहते हैं।

मादा लगभग 2 से 3 साल की उम्र में यौन परिपक्वता पाती है, और औसत रूप से लगभग ढाई साल में पहली बार प्रजनन करती है। नर का शावकों की देखभाल में सीधा योगदान नहीं होता, पर मादा और शावकों का क्षेत्र आम तौर पर नर के क्षेत्र के भीतर ही होता है।

संरक्षण और खतरे

बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ऊदबिलाव की संख्या उसके पूरे फैलाव में घटी। इसके मुख्य कारण पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफ़ेनिल और ऑर्गेनोक्लोरीन जैसे कीटनाशकों से होने वाला प्रदूषण थे। इसके अलावा आवास का नुकसान और वैध-अवैध शिकार भी खतरे रहे।

यूरोप के कई भागों में अब इसकी संख्या फिर बढ़ रही है। ब्रिटेन में 1994 से 2002 के बीच ऊदबिलाव वाले स्थलों की संख्या में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2011 में इंग्लैंड की हर काउंटी में ऊदबिलाव लौट आए। इस सुधार के पीछे 1979 से यूरोप में सबसे हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध, पानी की गुणवत्ता में सुधार से शिकार की संख्या में वृद्धि और यूरोपीय संघ के आवास निर्देश व कई देशों के राष्ट्रीय कानूनों के तहत मिली कानूनी सुरक्षा शामिल हैं।

जर्मनी में यह जंगल में लगभग विलुप्त माना जाता है और उसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त सूची में रखा गया है। वहाँ 1979 में बनी "Aktion Fischotterschutz" परियोजना आवास संरक्षण के लिए धन जुटाती है, और हानकेनस्ब्यूट्लर ओटर सेंटर बंदी में इसकी देखभाल करता है। पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड में इसे संकटग्रस्त सूची में रखा गया है, और मंगोलिया में गंभीर रूप से संकटग्रस्त।

इबेरिया की नदियों में देशी मीठे पानी की मछलियों की कमी और केंट्रार्चिड जैसी विदेशी प्रजातियों का विस्तार इसके लिए जोखिम हो सकता है, क्योंकि मछली इसका प्रिय भोजन है।

निकट संकटग्रस्त

सांस्कृतिक महत्व

ऊदबिलाव की खाल को मनुष्यों के लिए मूल्यवान माना जाता है।

रोचक तथ्य

  1. ऊदबिलाव की पूँछ के आधार पर जोड़ीदार गंध ग्रंथियाँ होती हैं, जिनकी तेज़ कस्तूरी जैसी गंध उसके क्षेत्र की पहचान का मुख्य साधन है।

फ़ोटो

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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण

व्यवहार

  • निशाचर
  • परभक्षी
  • एकांतप्रिय
  • क्षेत्रीय

आहार

  • मछली-भक्षी (आहार)

वर्गीकरण

संघ
Chordata
वर्ग
Mammalia
गण
Carnivora
कुल
Mustelidae
वंश
Lutra
प्रजाति
Lutra lutra

स्रोत

  1. GBIF Species names and classification
  2. iNaturalist Photos
  3. Wikidata Common names and conservation status
  4. Wikipedia Summary extract
  5. Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
  6. AnAge Longevity