अरण्डी (Ricinus communis) अपने वंश Ricinus की एकमात्र प्रजाति है, यानी इस पूरे वंश और उपजनजाति में यह अकेली सदस्य है। यह Euphorbiaceae कुल का एक बहुवर्षीय फूलदार पौधा है, जो व्यापक रूप से अरण्डी तेल के पौधे के नाम से भी जाना जाता है।
यह प्रजाति दुनिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाई जाती है और अक्सर बंजर भूमि या नदी-तटों पर स्वाभाविक रूप से उग आती है। इसकी विषाक्तता, विविध रूप और मानव इतिहास में इसकी भूमिका इसे एक दिलचस्प अध्ययन-विषय बनाती है।
पहचान और रूप
अरण्डी की पहचान का सबसे स्पष्ट लक्षण इसके बड़े, ताड़ के पत्ते जैसे पत्ते हैं, जो 15 से 45 सेंटीमीटर लंबे होते हैं और जिनमें पाँच से बारह गहरी पालियाँ तथा दांतेदार किनारे होते हैं। यह एक तेज़ी से बढ़ने वाला, अंकुर फेंकने वाला झाड़ीनुमा पौधा है जो लगभग 12 मीटर ऊँचाई तक पहुँच सकता है, हालांकि यह ठंड सहन नहीं कर पाता।
पत्तों का रंग विविधता से भरा होता है—कुछ किस्मों में युवा अवस्था में गहरा लाल-बैंगनी या कांसई रंग होता है जो परिपक्व होने पर गहरे हरे में बदल जाता है, जबकि कुछ किस्मों में पौधा जीवनभर बैंगनी-भूरे रंग में ही रहता है। तने और गोलाकार कांटेदार बीज-कैप्सूल भी इसी तरह रंग में भिन्न होते हैं।
फूलों में पंखुड़ियाँ नहीं होतीं; ये एक ही पौधे पर नर और मादा दोनों रूपों में लगते हैं। नर फूल पीले-हरे रंग के होते हैं जिनमें क्रीम रंग के पुंकेसर उभरे रहते हैं, जबकि मादा फूल स्पाइक के सिरे पर लगते हैं और उनमें चमकदार लाल वर्तिकाग्र होते हैं। फल कांटेदार, हरे से लाल-बैंगनी रंग के कैप्सूल होते हैं जिनमें बड़े, अंडाकार, चमकदार और अत्यंत विषैले बीज होते हैं जिन पर भूरे धब्बे होते हैं। इन बीजों पर एक विशेष उभार, कैरंकल, होता है जो चींटियों द्वारा बीज-प्रसार में सहायक होता है।
वितरण और आवास
अरण्डी मूल रूप से भूमध्यसागर के दक्षिणपूर्वी क्षेत्र, पूर्वी अफ्रीका और भारत की मानी जाती है, परंतु आज यह पूरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैली हुई है। उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में यह आसानी से स्वयं स्थापित हो जाती है और कभी-कभी आक्रामक खरपतवार का रूप ले लेती है।
यह मुख्यतः खेती की गई भूमि, बंजर स्थलों और नदी-तटों के पास स्वाभाविक रूप से उगी हुई अवस्था में मिलती है, समुद्र तल से 100 से 500 मीटर तक की ऊँचाई पर, और कभी-कभी लगभग 2,300 मीटर तक भी देखी जाती है।
उपलब्ध अवलोकन आँकड़ों में वर्ष के मध्य महीनों—अप्रैल से जुलाई के आसपास—में दर्शन थोड़े अधिक दर्ज हुए हैं, जो मौसमी उपस्थिति का संकेत दे सकते हैं, हालांकि ये आँकड़े केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, न कि जनसंख्या या पूर्ण वितरण-सीमा।

पारिस्थितिकी और संबंध
अरण्डी कई कीट प्रजातियों के लिए मेज़बान पौधे का काम करती है, जिनमें सामान्य अरण्डी तितली (Ariadne merione), एरी रेशम कीट (Samia cynthia ricini) और अरण्डी सेमी-लूपर पतंगा (Achaea janata) शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य पतंगों की सूंडियाँ भी इसके पत्तों पर निर्भर रहती हैं।
एक कुदकने वाली मकड़ी, Evarcha culicivora, इस पौधे के फूलों से मधुरस लेती है और प्रेम-प्रदर्शन के लिए इसे स्थान के रूप में प्रयोग करती है।
हर बीज के एक सिरे पर एक पीली गुठली होती है जिसमें वसा भरी होती है और जो चींटियों के लिए पोषक होती है। चींटियाँ बीजों को अपने घोंसलों में ले जाती हैं, वसायुक्त भाग खा लेती हैं, और बचे बीज को कचरे के ढेर में फेंक देती हैं, जहाँ से नया पौधा उग आता है।
उपयोग और मानव संबंध
अरण्डी को सार्वजनिक बगीचों और पार्कों में सजावटी पौधे के रूप में व्यापक रूप से उगाया जाता है, विशेष रूप से पारंपरिक फूलों की क्यारियों में एक केंद्रीय पौधे के रूप में। कांच के नीचे शुरुआती बुवाई करने और लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखने से यह एक ही वर्ष में 2 से 3 मीटर तक बढ़ सकता है। कई सजावटी किस्मों जैसे 'कारमेंसिटा', 'गिब्सोनी' और 'न्यू ज़ीलैंड पर्पल' को उनके पत्तों और बीज-कैप्सूलों के रंग के लिए विकसित किया गया है, जबकि अन्य किस्मों को तेल उत्पादन के लिए विकसित किया गया है।
पारंपरिक चिकित्सा और लोक-मान्यताओं में इस पौधे का लंबा इतिहास है; इसकी पत्तियों को कीटनाशक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है और लोक-परंपराओं में इसे बुरी आत्माओं से रक्षा तथा शुद्धिकरण से जोड़ा जाता है। भूमध्यसागरीय और पूर्वी प्राचीन संस्कृतियों की चिकित्सा-पद्धतियों में भी इसका उल्लेख मिलता है, और यह आज भी दुनिया भर की लोक-चिकित्सा में उपयोग होता है।
रोचक तथ्य
- ब्राज़ील में अरण्डी को 'मामोना' कहा जाता है, जो एक बांटू भाषा का शब्द है, और वहाँ इसे कैंडोंबले धर्म में चेचक और संक्रामक रोगों के देवता ओमुलु से जोड़ा जाता है।
- बारहवीं शताब्दी की शार्ङ्गधर संहिता में अरण्डी के बीजों से 'अरंडी घृत' नामक औषधीय घी तैयार किया जाता था, जो बच्चों में भूख बढ़ाने और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद के लिए दिया जाता था।
- तमिल सिद्ध चिकित्सा ग्रंथों में अरण्डी की पत्तियों को पीसकर फोड़े-फुंसियों पर लगाने का उल्लेख मिलता है, जो इसके सामयिक उपयोग की क्रॉस-सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वृद्धि का रूप
- झाड़ी
वर्गीकरण
- संघ
- Tracheophyta
- वर्ग
- Magnoliopsida
- गण
- Malpighiales
- कुल
- Euphorbiaceae
- वंश
- Ricinus
- प्रजाति
- Ricinus communis
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits



