Salmo salar का जीवन नदी की ठंडी, उथली धारा में शुरू होता है, पर इसका ज़्यादातर हिस्सा समुद्र में बीतता है। यह Salmonidae परिवार की मछली है और इस परिवार में साइबेरियाई टाइमेन और प्रशांत शिनूक सैल्मन के बाद यह तीसरी सबसे बड़ी प्रजाति है। इसकी लंबाई 1 मीटर तक पहुँच सकती है।
यह उत्तरी अटलांटिक महासागर और उसमें गिरने वाली नदियों में मिलती है। ज़्यादातर आबादियाँ प्रवासी हैं। अंडे और बच्चे नदियों में पलते हैं, जबकि वयस्क मछलियाँ समुद्र में खाती-पीती हैं और मौसम आने पर ऊपर की ओर नदी में लौटती हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में इसे निकट संकटग्रस्त माना गया है।
इसका जीवन दो अलग दुनियाओं को जोड़ता है, मीठे पानी की नदी और खारे समुद्र को। यही कारण है कि यह प्रजाति नदियों की सेहत और समुद्री परिस्थितियों दोनों से गहराई से जुड़ी है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान वयस्क अवस्था में चांदी-नीली चमक और शरीर के ऊपरी हिस्से पर काले धब्बे हैं। ये धब्बे मुख्य रूप से पार्श्व रेखा के ऊपर होते हैं, जबकि पूँछ के पंख पर आमतौर पर धब्बे नहीं होते। इसी से वयस्क को पहचानना सबसे आसान होता है।
समुद्र में दो साल बिताने के बाद ये मछलियाँ आमतौर पर 71 से 76 सेंटीमीटर लंबी और 3.6 से 5.4 किलोग्राम वज़न की होती हैं। चार या उससे अधिक सर्दियाँ समुद्र में बिताने वाली या बार-बार प्रजनन करने वाली मछलियाँ इससे कहीं बड़ी हो सकती हैं। इस प्रजाति का सबसे भारी दर्ज नमूना 1960 में स्कॉटलैंड की होप नदी के मुहाने पर पकड़ा गया था, जिसका वज़न 49.44 किलोग्राम था।
नदी में रहने वाले छोटे बच्चों का रंग वयस्कों से अलग होता है। उनके शरीर पर नीले और लाल धब्बे दिखते हैं। प्रजनन के समय नर मछलियों के रंग में हल्का हरा या लाल आभास आ जाता है और उनका सिर लंबा हो जाता है। शरीर सुडौल और धारा में तैरने के लिए अनुकूल है, और जबड़ों में अच्छी तरह विकसित दाँत होते हैं। इसके अधिकांश पंखों के किनारे काले होते हैं, सिवाय वसा वाले पंख के।
वितरण और आवास
ज़्यादातर सैल्मन का प्राकृतिक प्रजनन स्थल यूरोप और उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट की नदियाँ हैं। यूरोप में यह दक्षिण में स्पेन तक और उत्तर-पूर्व में रूस की पेचोरा नदी तक पाई जाती है। स्वालबार्ड (78 उत्तरी अक्षांश) में यह 2002 से 2006 के बीच और उसके बाद भी बसने लगी है, जिसका कारण वहाँ की बढ़ती गर्मी बताया गया है।
यह ठंडे पानी की मछली है और पानी के तापमान में बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील है। मीठे पानी के आवास और जलवायु में बदलाव सीधे इसके वितरण को प्रभावित करते हैं। समुद्र में यह 4 से 12 डिग्री सेल्सियस तापमान पसंद करती है। अमेरिका में हडसन नदी और हाउसाटोनिक नदी से जुड़ी इसकी दक्षिणी सीमा के बारे में ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं।
उत्तर अमेरिका में सदियों तक इसकी आबादी पर फर उद्योग, लकड़ी की कटाई, बाँधों और मिलों तथा खेती का गहरा असर पड़ा। बीवर लगभग विलुप्त होने तक फँसाए गए और नदियों की सहने की क्षमता घट गई। कनाडा की संसद में 1798 में इसके संरक्षण के लिए एक विधेयक पेश किया गया था। उत्तरी अमेरिका के सबसे दक्षिणी आबादी सबसे पहले गायब हुई।
नदी में बिताए गए शुरुआती एक से चार साल के बाद बच्चे लगभग 15 सेंटीमीटर के होने पर समुद्र की ओर जाने के लिए तैयार होते हैं। उनके शरीर पर चितकबरा रंग चमकदार चाँदी रंग में बदल जाता है। समुद्र में यह समुद्र की सतही धाराओं के सहारे चलती है, न कि हज़ारों किलोमीटर तैरती है।

व्यवहार और जीवनशैली
बच्चे अक्सर झुंड में तैरते हैं, और कई नदियों की मछलियाँ समुद्र में जीवन के बड़े हिस्से के दौरान एक ही इलाके में साथ रहती हैं। सैल्मन की गंध, सुनने और स्वाद की क्षमता बहुत तेज़ है। इन्हीं इंद्रियों से वे भोजन खोजती हैं और खतरे को पहचानती हैं। शरीर पर पानी की लहरों को महसूस करने की क्षमता भी उन्हें खतरे का अंदाज़ा देती है।
बच्चों और छोटी मछलियों के क्षेत्रीय व्यवहार के बारे में ठोस प्रमाण कम हैं। कभी-कभी वे एक-दूसरे के प्रति आक्रामक होती हैं, पर उनका सामाजिक पदानुक्रम अभी स्पष्ट नहीं है। नदी के मुहाने से निकलते समय वे अक्सर झुंड बनाकर चलती हैं।
वयस्क अटलांटिक सैल्मन दूसरी सैल्मन प्रजातियों की तुलना में अधिक आक्रामक मानी जाती हैं और दूसरी मछलियों पर हमला करने की प्रवृत्ति इनमें ज़्यादा होती है।
अपनी जन्मनदी को ढूँढने का तरीका इनकी सबसे रोचक क्षमता है। बच्चों के समय नदी की विशेष गंध उनके मन में बस जाती है और वयस्क होने पर वे उसी गंध के सहारे लौटती हैं। वैज्ञानिक पूरी तरह निश्चित नहीं हैं कि यह कैसे होता है, पर सबसे अधिक माना गया सिद्धांत यही गंध वाला है।
संचार
सैल्मन की संवेदी दुनिया गंध, सुनने और स्वाद पर टिकी है। ये इंद्रियाँ भोजन खोजने, खतरे को पहचानने और अपनी नदी के रास्ते को याद रखने में काम आती हैं।
जन्मनदी की विशिष्ट गंध बच्चों के प्रवास के समय मन में अंकित हो जाती है। यह रासायनिक संकेत वयस्क होने पर उन्हें वापस उसी नदी तक ले जाने में मदद करता है।
दृश्य और स्पर्श संकेत भी इनके संवाद का हिस्सा हैं। पानी की लहरों को शरीर से महसूस करना खतरे की पहचान का साधन है, जबकि रंग और धब्बे भी दृश्य संकेत देते हैं।
शिकार और आहार
नदी में पलने वाले बच्चे मुख्य रूप से जलीय कीटों के लार्वा खाते हैं, जैसे ब्लैकफ़्लाई, स्टोनफ़्लाई, कैडिसफ़्लाई और कायरोनोमिड। देर गर्मियों में ज़मीन के कीड़े भी उनके आहार में महत्वपूर्ण हो जाते हैं। भोजन खोजने के लिए वे गंध, सुनने और स्वाद की तीव्र इंद्रियों पर निर्भर रहती हैं।
नदी से निकलने वाले बच्चे अपनी आबादी के साथ बढ़ते हुए अधिक शिकार वाले इलाकों की ओर जाते हैं। वे मीठे पानी में सक्रिय शिकारी बन जाते हैं, और इसी दौरान शरीर में बदलाव होकर वे समुद्र यात्रा के लिए तैयार होते हैं।
समुद्र में सैल्मन विविध समुद्री जीवों को खाती है। पहले चरण में प्लवक, जैसे यूफ़ासिड, उसका मुख्य भोजन होता है, जबकि एम्फ़िपोड और दशपाद क्रस्टेशियन भी खाए जाते हैं। बड़ी मछलियाँ हेरिंग, एलेवाइव, स्मेल्ट, कैपलिन और छोटे कॉड जैसी मछलियों का शिकार करती हैं।
नदी में लौटने से पहले सैल्मन भोजन लेना बंद कर देती है। मीठे पानी में प्रवेश के बाद वे प्रजनन तक नहीं खातीं, भले ही कृत्रिम मक्खी उनके सामने हो।
प्रजनन और जीवन चक्र
अटलांटिक सैल्मन का प्रजनन अक्टूबर और नवंबर में होता है, और चरम अक्सर अक्टूबर के आखिरी हिस्से में आता है। प्रजनन से पहले नर का सिर लंबा होता है और निचले जबड़े के सिरे पर एक तीखा हुक जैसा उभार बनता है। मादा रेत-बजरी वाले उथले इलाके में घोंसला चुनती है और पूँछ से तेज़ धारा बनाकर उसे खोदती है। इस घोंसले को रेड कहते हैं।
घोंसला तैयार होने पर नर उसके पास आकर अंडे और शुक्राणु छोड़ता है, और इसी दौरान अंडे निषेचित हो जाते हैं। मादा हर बार अंडों को बजरी से ढक देती है, और अंडे लगभग 12.7 से 25.4 सेंटीमीटर की गहराई में दबे रहते हैं। प्रति पाउंड शरीर भार पर मादा लगभग 700 से 800 अंडे देती है। पूरा प्रजनन एक हफ़्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है।
अधिकांश मछलियाँ प्रजनन के बाद मर जाती हैं, पर कई बच जाती हैं और दूसरी बार प्रजनन कर सकती हैं। बहुत कम मछलियाँ तीन या अधिक बार प्रजनन करती हैं। अपरिपक्व बच्चे अप्रैल के आसपास अंडों से निकलते हैं, पर वे बजरी में ही रहते हैं जब तक जर्दी की थैली खत्म न हो जाए। इसके बाद मई या जून में वे बाहर आते हैं।
नवजात बच्चों को अलेविन कहते हैं और वे लगभग 65 मिलीमीटर तक तेज़ बहाव में रहते हैं। फिर वे पार कहलाते हैं और उनकी वृद्धि धीमी रहती है। 12 से 15 सेंटीमीटर होने पर वे स्मोल्ट बनकर समुद्र की ओर जाते हैं। समुद्र में वे तेज़ी से बढ़ते हैं, और कुछ एक साल बाद ग्रिल्स के रूप में लौटते हैं, जबकि अन्य दो साल समुद्र में बिताते हैं। यह प्रजाति अधिकतम 13 वर्ष तक जीवित रह सकती है।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
अधिकांश अटलांटिक सैल्मन आबादियाँ प्रवासी हैं। समुद्र में उनकी सबसे अधिक वृद्धि होती है, जबकि वयस्क मीठे पानी की अपनी जन्मनदियों में अंडे देने लौटते हैं। कुछ आबादियाँ पूरी तरह मीठे पानी में जीवन बिताती हैं, जिन्हें भूमि से घिरी आबादी कहा जाता है। उत्तरी अमेरिका में ऐसी आबादियों को ऊआनानिश कहते हैं।
मीठे पानी में बिताए गए दो से आठ साल के बीच का समय नदी के स्थान पर निर्भर करता है। दक्षिणी नदियों के बच्चे एक साल के होकर समुद्र जाते हैं, जबकि उत्तर की नदियों में यह अवधि चार साल से ज़्यादा भी हो सकती है। उत्तरी क्यूबेक में आठ साल के स्मोल्ट भी देखे गए हैं।
नदी के बच्चों पर शिकार का खतरा बहुत अधिक होता है। लगभग 40 प्रतिशत बच्चे अकेले ट्राउट खा जाते हैं, और अन्य शिकारी मछलियाँ व पक्षी भी इन्हें निशाना बनाते हैं। अंडों और बच्चों का जीवित रहना नदी के आवास की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
समुद्र में सील, ग्रीनलैंड शार्क, स्केट, कॉड और हैलिबट इनके प्रमुख शिकारी हैं। लगभग 250 ग्राम से भारी होने पर पक्षी और अधिकांश मछलियाँ इन्हें नहीं खातीं, लेकिन सील अब भी इनका शिकार करती हैं। इस अवस्था तक पहुँचने की जीवित रहने की दर 14 से 53 प्रतिशत आँकी गई है।
संरक्षण और खतरे
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लाल सूची में Salmo salar को निकट संकटग्रस्त माना गया है। यूरोप की आबादी को एक क्षेत्रीय मूल्यांकन में असुरक्षित पाया गया है, और विश्व स्तर पर इसकी स्थिति भी लगभग वैसी ही मानी गई है। कई स्थानीय आकलनों में आबादी में गिरावट दर्ज की गई है।
मानव गतिविधियाँ इसकी आबादी पर असर डालती हैं। सबसे बड़े खतरे अति-मछली पकड़ने और आवास में बदलाव हैं। ओंटारियो झील में इसकी गिरावट 18वीं और 19वीं सदी में शुरू हुई, जब जंगलों की कटाई, मिट्टी के कटाव और बाँध व मिलों के निर्माण ने नदियों को बदल दिया। 1896 तक झील से यह प्रजाति पूरी तरह लुप्त घोषित कर दी गई।
समुद्री मृत्यु दर 1990 के आसपास पश्चिमी अटलांटिक में दोगुनी से अधिक हो गई। मेन और न्यूफ़ाउंडलैंड जैसे इलाकों में लौटने वाली मछलियों की संख्या तेज़ी से गिरी। ग्रीनलैंड और फ़ैरो द्वीप के पास व्यावसायिक जाल मछली पकड़ने में 1979 से 1990 के बीच पकड़ 40 लाख से घटकर 7 लाख रह गई।
कुछ इलाकों में सुधार भी दिखा है। 2008 में कई नदियों में वापसी की संख्या अच्छी रही, और 2011 में पेनोब्स्कॉट नदी में 3,100 से अधिक मछलियाँ लौटीं। ओंटारियो सरकार ने 2006 में अटलांटिक सैल्मन पुनर्स्थापन कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत झील और सहायक नदियों में 60 लाख से अधिक बच्चे छोड़े गए।
सांस्कृतिक महत्व
मानव समाज में अटलांटिक सैल्मन का सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व गहरा है, हालाँकि इसका मूल्य आँकना कठिन है। आयरलैंड की पौराणिक कथाओं में यह सबसे पूज्य मछली है और इसे आयरिश भाषा में An Bradán Feasa यानी ज्ञान की मछली कहा जाता है।
उत्तर-पश्चिमी तट के कई स्वदेशी समुदायों में सैल्मन को पवित्र दर्जा प्राप्त है। नवजात शिशुओं के नाम और सजावट में इसके शांत और सहज स्वभाव की छवि का उपयोग होता है।
सदियों तक यह मछली भोजन का मुख्य स्रोत रही। नदियों में लकड़ी और पत्थर के बाड़े बनाकर इसे पकड़ा जाता था, और यूरोप में हाथ से बुने जाल से सदियों तक मछली पकड़ी गई। आज यह अत्यंत मूल्यवान खाद्य मछली है और मनोरंजन मछली पकड़ने वालों के बीच भी लोकप्रिय है।
रोचक तथ्य
- 1925 में नॉर्वे में पकड़ी गई एक अटलांटिक सैल्मन की लंबाई 160.65 सेंटीमीटर मापी गई थी, जो इस प्रजाति की अब तक दर्ज सबसे लंबी मछली है।
- स्कॉटलैंड में 1960 में पकड़ी गई मछली का वज़न 49.44 किलोग्राम था, जो सभी उपलब्ध साहित्य में सबसे भारी दर्ज नमूना है।
- इस प्रजाति के जीवन पर आधारित उपन्यास Salar the Salmon हेनरी विलियमसन ने लिखा है, जो इसके नाटकीय जीवन चक्र को कथा में बदलता है।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- गण
- Salmoniformes
- कुल
- Salmonidae
- वंश
- Salmo
- प्रजाति
- Salmo salar
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity



