यह शार्क अपनी रेतीले तल पर छिपने की आदत के लिए जानी जाती है, और इसका नाम इसकी त्वचा पर बिखरे गहरे भूरे धब्बों से आया है। Scyliorhinus canicula कैटशार्क परिवार Scyliorhinidae की सदस्य है। यह नॉर्वे और ब्रिटिश द्वीपों से लेकर सेनेगल तक के महाद्वीपीय शेल्फ़ और ऊपरी महाद्वीपीय ढलानों पर पाई जाती है, और भूमध्य सागर में भी मिलती है।
यह उथले पानी से लेकर लगभग 400 मीटर गहराई तक रहती है, और मुख्यतः रेतीले, कंकरीले या कीचड़ वाले तल को पसंद करती है। उत्तर-पूर्वी अटलांटिक और भूमध्य सागर में यह सबसे प्रचुर इलास्मोब्रांक प्रजातियों में गिनी जाती है। इसकी अधिकांश आबादियाँ स्थिर हैं।
इसकी अधिकतम ज्ञात आयु [12 वर्ष]{f=lifespan} है, जो अक्सर बंदी अवस्था में दर्ज हुई है। इसका संरक्षण स्तर IUCN के अनुसार Least Concern है।
पहचान और रूप
इसकी सबसे उपयोगी पहचान इसकी त्वचा है, जो सैंडपेपर जैसी खुरदरी होती है। शरीर पतला और सिर गोल-सा होता है। दोनों पृष्ठ पंख पूँछ की ओर, शरीर के पिछले हिस्से में स्थित होते हैं।
ऊपरी भाग भूरा-सलेटी होता है और उस पर गहरे भूरे धब्बे होते हैं। निचला भाग हल्का सलेटी-सफ़ेद होता है। नासिका छिद्र थूथन के नीचे होते हैं और एक घुमावदार खांच से मुँह से जुड़े होते हैं।
वयस्क नर और मादा में सबसे साफ़ अंतर दाँतों का है। नर के दाँत मादा से बड़े होते हैं। पश्चिम अफ़्रीकी जल के नरों के जबड़े अधिक मज़बूत, बड़े और अधिक कैल्सीफ़ाइड होते हैं। वज़न लगभग [726 ग्राम]{f=weight} तक पहुँच सकता है।
वितरण और आवास
यह प्रजाति महाद्वीपीय शेल्फ़ और ऊपरी ढलानों पर रहती है। इसका क्षेत्र नॉर्वे और ब्रिटिश द्वीपों से दक्षिण में सेनेगल तक फैला है, और भूमध्य सागर इसका एक प्रमुख हिस्सा है। यह लगभग 63° उत्तर से 12° उत्तर अक्षांश के बीच पाई जाती है।
यह अधिकतर रेतीले, कंकरीले और कीचड़ वाले तल पर मिलती है। गहराई कुछ मीटर से लेकर लगभग 400 मीटर तक है।
GBIF के मासिक प्रेक्षण आँकड़ों में सबसे अधिक संख्या गर्मी के आसपास दर्ज होती है, जो जुलाई और अगस्त के बीच सबसे ऊँची है।

शिकार और आहार
Scyliorhinus canicula सक्रिय शिकारी है और इसका शिकार बहुत विविध होता है। मुख्य शिकार दशपाद केकड़े, मोलस्का और मछलियाँ हैं। कम मात्रा में इकाइनोडर्म, पॉलीकीट और ट्यूनिकेट भी खाए जाते हैं।
यह शिकार पकड़ने के लिए अपने दाँतों के बीच शिकार को पकड़ कर उसे तेज़ी से सिर और जबड़े की गति से फाड़ती है। किशोर कैटशार्क एक अनोखी तकनीक अपनाते हैं। वे शिकार को अपनी पूँछ के पास के त्वचा-दंतिकाओं पर दबाकर टिकाते हैं और फिर तेज़ सिर और जबड़े की हरकत से उसके निवाले के आकार के टुकड़े फाड़ते हैं। इस व्यवहार को "स्केल रास्पिंग" कहा जाता है। यह तकनीक इसी प्रजाति में पहली बार दर्ज की गई थी।
उम्र के साथ आहार बदलता है। छोटे जीव छोटे केकड़े पसंद करते हैं, जबकि बड़े जीव हर्मिट क्रैब और मोलस्का की ओर झुकते हैं। गर्मियों में इसका भोजन सबसे अधिक होता है, क्योंकि उस समय शिकार अधिक मिलता है।
प्रजनन और जीवन चक्र
यह प्रजाति अंडे देती है। मादा हॉर्नी कवच वाले अंडे देती है, जिनके कोनों से लंबे धागे निकलते हैं। अधिकांश अंडे उथले तटीय पानी में मैक्रोएल्गी पर चिपकाए जाते हैं। तट से दूर जमा किए गए अंडे स्थिर, खड़े अकशेरुकी जीवों पर रखे जाते हैं।
अंडे की आवरण लगभग 4 सेंटीमीटर लंबी और 2 सेंटीमीटर चौड़ी होती है, और 6 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होती। भ्रूण समुद्र के तापमान के अनुसार 5 से 11 महीने में विकसित होता है। नवजात लगभग 9 से 10 सेंटीमीटर के होते हैं।
अंडे देने का समय भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार बदलता है। फ्रांस के भूमध्यसागरीय तट पर मादाएँ मार्च से जून और दिसंबर में अंडे देती हैं। ग्रेट ब्रिटेन के आसपास अंडे वसंत में दिए जाते हैं, और अगस्त से अक्टूबर के बीच अंतराल रहता है। नर लगभग 37.1 से 48.8 सेंटीमीटर और मादा लगभग 36.4 से 46.7 सेंटीमीटर पर यौन परिपक्वता पाते हैं।
संरक्षण और खतरे
Scyliorhinus canicula को IUCN Red List में Least Concern श्रेणी में रखा गया है। इसका कारण यह है कि वैश्विक आबादी में कोई महत्वपूर्ण गिरावट का प्रमाण नहीं है। यह उत्तर-पूर्वी अटलांटिक और भूमध्य सागर की सबसे प्रचुर इलास्मोब्रांक प्रजातियों में है, और अधिकांश क्षेत्रों में इसकी आबादी स्थिर है या बढ़ रही है।
यह तटीय मछली पकड़ने में नियमित रूप से पकड़ी जाती है। वाणिज्यिक मछुआरों और मनोरंजन के लिए मछली पकड़ने वालों द्वारा पकड़ी गई अधिकांश शार्क को वापस समुद्र में छोड़ दिया जाता है। इन छोड़ी गई शार्कों की जीवित रहने की दर लगभग 98% है। कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर कमी हुई हो सकती है, इसलिए लैंडिंग और छोड़े गए आँकड़ों की निगरानी ज़रूरी मानी जाती है।
2003 से स्वीडन के गुलमारन फ़्योर्ड में लाइसे स्थित Havets Hus एक्वेरियम हर वर्ष इन शार्कों को छोड़ता रहा है। अब तक 90 से अधिक शार्कें छोड़ी गई हैं, और इनमें से एक दक्षिणी नॉर्वे में 10 वर्ष बाद मिली। इससे पता चलता है कि ये शार्कें कम से कम 14 वर्ष की आयु तक पहुँच सकती हैं।
रोचक तथ्य
- इसका वैज्ञानिक नाम यूनानी शब्दों से बना है। Scyliorhinus में "skylla" का अर्थ एक प्रकार की शार्क है और "rhinos" का अर्थ नाक है।
- इसे मूल रूप से लिनियस ने Squalus canicula नाम दिया था, जिसे बाद में वर्तमान नाम दिया गया।
- इसके अन्य नामों में रेत-डॉगफ़िश, छोटी-धब्बेदार डॉगफ़िश, रफ़-हाउंड और मॉर्गे शामिल हैं।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Elasmobranchii
- गण
- Carcharhiniformes
- कुल
- Scyliorhinidae
- वंश
- Scyliorhinus
- प्रजाति
- Scyliorhinus canicula
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- AnAge Longevity



