भूमध्यसागरीय इलाकों में जंगलों, घास के मैदानों और खेतों के बीच रहने वाला Testudo hermanni यूरोप का एक छोटा स्थलीय कछुआ है। यह जीव वर्ग Testudines और परिवार Testudinidae से है।
आईयूसीएन की लाल सूची में इसे निकट संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इसकी आबादी पर निर्माण, अवैध शिकार, जंगल की आग और शाकनाशी रसायनों का दबाव रहा है, इसलिए इसका संरक्षण आज भी चिंता का विषय है।
पहचान और रूप
सबसे उपयोगी पहचान इसके खोल का पैटर्न है। युवा कछुओं और कुछ वयस्कों के खोल पर काले और पीले रंग के आकर्षक पैटर्न होते हैं, जो उम्र के साथ फीके पड़कर भूरे, पुआल जैसे या पीले रंग में बदल सकते हैं। ऊपरी जबड़ा हल्का मुड़ा होता है, और दांत नहीं होते, बस मजबूत सींग जैसी चोंच होती है।
आकार इलाके के हिसाब से बदलता है। पूर्वी उपजाति T. h. boettgeri सबसे बड़ी है, जिसकी लंबाई 28 सेंटीमीटर तक हो सकती है और वज़न 3 से 4 किलोग्राम तक। पश्चिमी उपजाति T. h. hermanni शायद ही 18 सेंटीमीटर से बड़ी होती है, और कुछ वयस्क केवल 7 सेंटीमीटर के होते हैं।
नर और मादा को पूंछ से अलग पहचाना जा सकता है। वयस्क नरों की पूंछ लंबी और मोटी होती है, और उसके सिरे पर सींग जैसा नुकीला कांटा अधिक विकसित होता है। पैरों की शल्कीय त्वचा भूरी से हल्की भूरी होती है, जिस पर कुछ पीले निशान होते हैं।
वितरण और आवास
यह कछुआ मूल रूप से सदाबहार भूमध्यसागरीय ओक के जंगलों में रहता माना जाता है। ये जंगल काफ़ी कट चुके हैं, इसलिए अब यह सूखे घास के मैदानों, शुष्क पहाड़ी ढलानों, चट्टानी ढलानों और खेतों में भी मिलता है। इसे छाया और छिपने की जगहें चाहिए, और नम जगहों से यह आम तौर पर बचता है।
अंदरूनी और तटीय जंगल इसके पसंदीदा आवास हैं। मादाएं घोंसले जंगलों में बनाती हैं, जिससे अंडे शिकारियों से कुछ दूरी पर रहते हैं। आवास आदर्श न होने पर भी इन इलाकों में ज़मीन की वनस्पति के बीच चारा ढूंढना संभव है।
पश्चिमी उपजाति पूर्वी स्पेन, दक्षिणी फ्रांस, बेलेरिक द्वीप, कॉर्सिका, सार्डिनिया, सिसिली और इटली के दक्षिणी व मध्य भाग, जिसमें टस्कनी शामिल है, में मिलती है। पूर्वी उपजाति T. h. boettgeri सर्बिया, कोसोवो, उत्तर मैसेडोनिया, रोमानिया, बुल्गारिया, अल्बानिया, तुर्की और ग्रीस में पाई जाती है। T. h. hercegovinensis बोस्निया और हर्ज़ेगोविना, क्रोएशिया और मोंटेनेग्रो के तटों पर रहती है।
सार्डिनिया पर इसका सबसे पुराना जीवाश्म प्रारंभिक प्लेस्टोसीन का है, पर आनुवंशिक साक्ष्य बताते हैं कि वहां की वर्तमान आबादी हाल के समय में लाई गई। साइप्रस में भी यह इसी तरह लाया गया था। उपस्थिति के प्रेक्षणों का सबसे ऊंचा शिखर मई में दिखता है।

व्यवहार और जीवनशैली
यह दिन में सक्रिय रहता है। सुबह जल्दी यह रात के आश्रय से निकलकर धूप में शरीर गर्म करता है, फिर भूमध्यसागरीय घास के मैदानों में भोजन ढूंढता है। दोपहर की तेज़ धूप में यह अपने छिपने की जगह लौट आता है और देर दोपहर में फिर बाहर निकलकर खाता है। इसकी दिशा-बोध क्षमता अच्छी है, और इसमें समय, सूर्य की स्थिति, पृथ्वी की चुंबकीय रेखाओं और भू-चिह्नों को पहचानने की क्षमता पाई गई है।
सर्दियों में यह फरवरी के अंत तक झाड़ियों या सड़ती लकड़ी के नीचे सूखी पत्तियों में दबकर शीत-निद्रा में रहता है। गर्मियों में ज़रूरत पड़ने पर यह ग्रीष्म-निष्क्रियता में भी जा सकता है। पूरी तरह बढ़े वयस्क चार से पांच महीने तक सो सकते हैं। भूमध्यसागरीय सर्दियां हल्की होती हैं, और इस दौरान इसकी दिल और सांस की दर काफ़ी घट जाती है।
घर का दायरा आबादी के अनुसार बदलता है। मादाओं का दायरा आम तौर पर बड़ा होता है, 0.9 से 7.4 हेक्टेयर तक, जबकि नरों का 0.7 से 4.6 हेक्टेयर तक होता है। आवास के नुकसान से ये दायरे सीमित हो सकते हैं।
संचार
यह दृश्य, स्पर्श, ध्वनि और गंध, चारों माध्यमों से संकेत देता है। प्रजनन में मादाएं दृश्य संकेतों से अच्छे गुणों वाले साथी चुनती हैं। नर ऊंची पिच की आवाज़ों से मादाओं को आकर्षित करते हैं, और यदि मादा इस आवाज़ को स्वीकार करे तो नर उस पर चढ़कर संभोग कर सकता है।
संभोग से पहले कछुए मादाओं द्वारा छोड़े गए गंध संकेतों को सूंघते हैं। यह गंध किस बात का संकेत देती है, यह पूरी तरह ज्ञात नहीं है। गंध-चिह्न और फेरोमोन भी संचार के माध्यम माने गए हैं।
आहार और पोषण
यह मुख्य रूप से शाकाहारी है और ज़मीन की वनस्पति खाता है, जैसे घास, पत्तियां और फूल। पत्तियां इसके भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं।
जब वनस्पति कम हो जाती है, तब यह छोटे कीड़े, घोंघे और स्लग भी खाता है। फल कभी-कभी खाता है, पर केवल पूरक भोजन के रूप में।
भोजन ढूंढते समय यह गंध से पहचानता है कि कौन से पौधे खाने योग्य हैं। भूमध्यसागरीय मैदानों में चारा ढूंढते हुए यह काफ़ी दूरी तक घूमता है।
घोंसला और प्रजनन
प्रजनन का मौसम फरवरी में शीत-निद्रा से निकलने के तुरंत बाद शुरू होता है। संभोग की शुरुआत इसी समय होती है। इस दौरान नर मादा का पीछा करता है, उसे टक्कर मारता है और काटता है, फिर उस पर चढ़ता है। नर और मादा दोनों के एक से अधिक साथी होते हैं, और मौसम में नर आपस में भी टक्कर लड़ते हैं।
मई से जुलाई के बीच मादा ज़मीन में फ्लास्क के आकार का घोंसला खोदती है, जो लगभग 10 सेंटीमीटर गहरा होता है। इसमें वह 2 से 12 गुलाबी-सफेद अंडे देती है। अधिकतर मादाएं एक मौसम में एक से अधिक बार अंडे देती हैं।
अंडों का ऊष्मायन लगभग 90 दिन चलता है और अगस्त के मध्य से सितंबर के बीच बच्चे निकलते हैं। ऊष्मायन का तापमान बच्चों का लिंग तय करता है: 26 °C पर केवल नर, 30 °C पर केवल मादाएं निकलती हैं। आदर्श तापमान पर लगभग 75 प्रतिशत तक अंडे जीवित रह सकते हैं।
मादा अंडों की देखभाल नहीं करती, वह केवल उन्हें ज़मीन के नीचे रखकर सुरक्षा देती है। बच्चे शरद ऋतु की भारी बारिश के बाद सितंबर की शुरुआत में बाहर आते हैं। बारिश न हो तो वे ज़मीन के नीचे ही रहकर अगले वसंत तक इंतज़ार करते हैं। पहले चार से पांच वर्ष वे घोंसले के आसपास ही रहते हैं। वयस्क होने तक इसकी उम्र लगभग 30 वर्ष होती है, और एक बार 31.7 वर्ष तक जीने का मामला भी सामने आया है।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
पारिस्थितिकी में यह छोटे घोंघों और कीड़ों का शिकारी है। वयस्क कछुओं के प्राकृतिक शिकारी बहुत कम हैं, पर नवजात कई प्रजातियों का शिकार बनते हैं, जिनमें काले चूहे, बिज्जू, मैगपाई, लाल लोमड़ी और जंगली सूअर शामिल हैं। बड़े सांप और यूरोपीय सेही भी इनका शिकार करते हैं।
इनके शरीर में गोलकृमि वर्ग का परजीवी Tachygonetria conica रहता है।
संरक्षण और खतरे
आईयूसीएन की लाल सूची में इसे निकट संकटग्रस्त माना गया है। इसकी आबादी निर्माण कार्य, अवैध शिकार, जंगल की आग और शाकनाशी रसायनों से घटी है। निर्माण से आवास सिकुड़ते और टुकड़ों में बंटते हैं, और सड़कें आबादी को अलग करके वाहनों से होने वाली मौतें बढ़ाती हैं। कुछ इलाकों में जंगल की आग से आबादी का 50 प्रतिशत तक हिस्सा खत्म हो गया है।
लंबी उम्र और देर से यौवन तक पहुंचने के कारण इस पर हर नुकसान का असर लंबे समय तक रहता है, और आबादी धीरे-धीरे ही भरती है।
यह वन्यजीव व्यापार पर लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के परिशिष्ट II में है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय निर्यात या आयात के लिए उस सम्मेलन के दस्तावेज़ चाहिए। 1989 और 1990 में चले एक कार्यक्रम में कछुए फिर से छोड़े गए और सड़कों पर बाड़ लगाई गई, जिससे आबादी बढ़ाने में मदद मिली।
सांस्कृतिक महत्व
सर्बिया में लोककथाओं, धर्म और पौराणिक मान्यताओं ने जीवों के प्रति लोगों के रवैये को आकार दिया है। इस प्रजाति के प्रति पारिस्थितिक जागरूकता और अंधविश्वास के अलग-अलग स्तरों का आकलन भी किया गया है।
नवपाषाण काल में इसकी मौजूदगी के संकेत मिलते हैं। यूनानी पौराणिक कथा में हर्मीस द्वारा इसके खाली खोल से लायर बनाने का वर्णन है।
यूरोप से इसका पालतू जानवर के रूप में व्यापार होता है, और एशिया के कुछ देशों में इसे भोजन के रूप में भी खाया जाता है।
रोचक तथ्य
- इसके वर्गीकरण पर अब भी बहस है। Testudo वंश के भीतर और रूसी कछुए से इसके संबंध पूरी तरह तय नहीं हुए हैं।
फ़ोटो
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Testudines
- कुल
- Testudinidae
- वंश
- Testudo
- प्रजाति
- Testudo hermanni
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity



