Ambystoma maculatum के भ्रूणों की कोशिकाओं और उनके आसपास एक हरा शैवाल, Chlorococcum amblystomatis, सहजीवी रूप से रहता पाया गया है — यह किसी कशेरुकी जीव की कोशिकाओं के भीतर एंडोसिम्बायंट सूक्ष्मजीव के रहने का अब तक का एकमात्र ज्ञात उदाहरण है।
यह मोल सैलामैंडर परिवार Ambystomatidae की एक प्रजाति है, जो पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की मूल निवासी है। इसका वितरण नोवा स्कोशिया से लेकर सुपीरियर झील और दक्षिणी जॉर्जिया व टेक्सास तक फैला है। यह ओहायो और दक्षिण कैरोलिना का आधिकारिक राज्य उभयचर है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
अधिकांश समय भूमिगत बिलों में छिपे रहने के बावजूद, यह सैलामैंडर वसंत की पहली बारिश में सैकड़ों की संख्या में तालाबों की ओर निकल पड़ता है — एक ऐसा दृश्य जो इसे उत्तरी अमेरिका के जंगलों की सबसे दिलचस्प वार्षिक घटनाओं में गिना जाता है।
पहचान और रूप
काले शरीर पर सिर से पूँछ तक चलने वाली दो असमान पंक्तियों में पीले-नारंगी धब्बे इस सैलामैंडर की सबसे आसान पहचान हैं। सिर के पास के धब्बे अधिक नारंगी और शरीर के बाकी हिस्सों के धब्बे अधिक पीले रंग के होते हैं।
पूँछ सहित इसकी लंबाई 15 से 25 सेंटीमीटर तक होती है, और मादाएं आमतौर पर नरों से बड़ी होती हैं। शरीर मोटा और सिर चौड़ा होता है, जो इसे अन्य मोल सैलामैंडरों जैसा रूप देता है। मुख्य रंग काला होता है, पर कभी-कभी नीला-काला, गहरा धूसर, गहरा हरा या गहरा भूरा भी देखा गया है। पेट का रंग स्लेटी धूसर और गुलाबी मिश्रित होता है।
लैंगिक भिन्नता स्पष्ट है: बड़े आकार की मादाओं में धब्बे अधिक चमकीले होते हैं, जबकि नरों की पीठ पर अधिक धब्बे होते हैं पर वे कम चमकीले होते हैं। शोध बताते हैं कि शरीर की अच्छी स्थिति वाले सैलामैंडरों में धब्बों का रंग अधिक गहरा होता है, जबकि कमजोर शरीर वाले सैलामैंडरों के धब्बे फीके पड़ जाते हैं।
यह सैलामैंडर सामान्यतः लगभग 20 वर्ष जीता है, पर कुछ व्यक्ति 30 वर्ष तक जीवित पाए गए हैं।
वितरण और आवास
पर्णपाती बाढ़-मैदानी जंगल Ambystoma maculatum का प्रमुख आवास है, खासकर नदियों के किनारे। यह ऊँचाई वाले मिश्रित या शंकुधारी जंगलों में भी पाया जा सकता है, बशर्ते वहाँ पर्याप्त नमी हो और प्रजनन के लिए उपयुक्त तालाब मौजूद हों। वयस्क दिन के अधिकांश समय पत्तों के ढेर, गिरी हुई लकड़ियों या भूमिगत सुरंगों में छिपे रहने के कारण कम ही दिखाई देते हैं।
प्रजनन के लिए यह प्रजाति ऐसे अस्थायी वर्नल पूल्स (मौसमी तालाब) को चुनती है जहाँ मछलियाँ नहीं होतीं, क्योंकि मछलियाँ अंडों और लार्वा को खा जाती हैं। बड़े आकार के तालाबों में अंडों के समूह अधिक पाए गए हैं और लार्वा के जीवित रहने की दर भी अधिक रही है। गैर-प्रजनन काल में यह अच्छी जल-निकासी वाली मिट्टी वाले जंगलों में रहता है, जहाँ छोटे स्तनधारियों द्वारा खोदे गए बिल पहले से मौजूद हों। जिन जंगलों में वृक्षों का छत्र-आवरण 30% से कम होता है, वहाँ यह प्रजाति प्रायः अनुपस्थित पाई गई है।
प्रजाति का समग्र वितरण नोवा स्कोशिया से सुपीरियर झील और दक्षिणी जॉर्जिया व टेक्सास तक फैला है। पास के तालाबों की आबादियाँ आनुवंशिक रूप से अलग उप-आबादियाँ बनाती हैं — 4.8 किलोमीटर के भीतर की आबादियाँ आपस में अधिक जीन साझा करती हैं, जबकि इससे अधिक दूरी पर यह साझापन घट जाता है।
GBIF के अवलोकन आंकड़े—जो केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, आबादी का आकार नहीं—मार्च और अप्रैल में सबसे अधिक दर्ज प्रविष्टियाँ दिखाते हैं, जो संभवतः वसंत में प्रजनन प्रवास के दौरान सैलामैंडरों के अधिक दिखाई देने से जुड़ा है। सर्दियों के महीनों (नवंबर-जनवरी) में अवलोकन बहुत कम हो जाते हैं, जब यह प्रजाति भूमिगत निष्क्रिय रहती है।

व्यवहार और जीवनशैली
Ambystoma maculatum अधिकांश जीवन भूमिगत बिताता है और मुख्यतः रात्रिचर है। यह मजबूत खोदने वाला जीव नहीं है, बल्कि छोटे स्तनधारियों के पहले से बने बिलों और दरारों का उपयोग करता है, कभी-कभी उन्हें थोड़ा चौड़ा या संशोधित कर लेता है। अधिकांश व्यक्ति मिट्टी की सतह से कुछ सेंटीमीटर नीचे रहते हैं, पर कुछ 1.3 मीटर तक गहराई में भी मिले हैं। यह प्रजाति अपने प्रजनन तालाब के 100 मीटर के दायरे में रहना पसंद करती है, हालांकि कुछ व्यक्ति 250 मीटर दूर तक भी पाए गए हैं।
बर्फ पिघलने के बाद पहली बारिश की रात, यह सैलामैंडर अपने जन्मस्थल तालाब की ओर प्रवास शुरू करता है, भले ही कोई अन्य तालाब नज़दीक क्यों न हो। यह सैकड़ों मीटर दूर ले जाए जाने पर भी अपने तालाब का रास्ता खोज लेता है, जिसमें गंध और स्वाद की इंद्रियाँ मुख्य भूमिका निभाती मानी जाती हैं। यह हर बार लगभग एक ही मार्ग और तालाब के एक ही बिंदु से आना-जाना करता है, और बादल छाए रहने के कारण दृश्य संकेतों की कमी के बावजूद यह दिशा नहीं भटकता। मैसाचुसेट्स के नॉर्थ एमहर्स्ट में स्थानीय अधिकारियों ने सैलामैंडरों को सड़क पार कर वर्नल पूल्स तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए 'हेनरी स्ट्रीट सैलामैंडर सुरंगें' बनाई हैं — इस वार्षिक प्रवास को 'बिग नाइट' के नाम से जाना जाता है।
गैर-प्रजनन काल में वयस्क सैलामैंडर काफी गतिहीन रहते हैं और लगभग 8 से 15 वर्ग मीटर के दायरे में ही भोजन तलाशते हैं। यह एकांतप्रिय जीव है और अपने बिल या भोजन क्षेत्र में किसी दूसरे सैलामैंडर के आने पर आक्रामक प्रतिक्रिया देता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं कि यह क्षेत्र को चिह्नित या सुरक्षित रखता है या नहीं। सर्दियों में यह भूमिगत निष्क्रिय (ब्रूमेशन) अवस्था में चला जाता है और मार्च से मई के बीच प्रजनन काल में ही दोबारा सतह पर दिखाई देता है।
खतरा महसूस होने पर यह पत्तों के ढेर या बिल में छिप जाता है, आवश्यकता पड़ने पर अपनी पूँछ त्याग देता है (ऑटोटॉमी), और पीठ व गर्दन की बड़ी ग्रंथियों से एक दूधिया, विषैला स्राव छोड़ता है। कटे हुए अंग, पूँछ या यहाँ तक कि मस्तिष्क व अंगों के हिस्से भी यह दोबारा उगा सकता है, हालांकि इसमें भारी मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है।
संचार
Ambystoma maculatum मुख्यतः गंध और स्पर्श के माध्यम से संवाद करता है। इसकी दृष्टि कम रोशनी में गति पहचानने के लिए बेहतर मानी जाती है, जबकि गंध की क्षमता इसे अपने बिल और जन्मस्थान तालाब तक पहुँचने में मदद करती है — यह अपने तालाब की गंध को किसी अनजान तालाब की गंध से अलग पहचान सकता है।
प्रजनन के दौरान नर मादा को कुहनी मारकर और रगड़कर स्पर्श व रासायनिक संकेत देते हैं, जबकि मादाएं पानी में नर द्वारा छोड़े गए रासायनिक फेरोमोन से आकर्षित होती हैं।
शिकार और आहार
पानी में निकलते ही Ambystoma maculatum के लार्वा आक्रामक शिकारी बन जाते हैं। ये सामान्यवादी शिकारी हैं जो जो भी छोटा जीव पकड़ सकें, खा लेते हैं — शुरुआत में छोटे कीट और Daphnia जैसे शाखा-पाद क्रस्टेशियन और फेयरी झींगे इनका मुख्य भोजन होते हैं। खतरा महसूस होने पर लार्वा तालाब की तलहटी में पत्तों के बीच छिप जाते हैं, पर सुरक्षित रहने पर वे सक्रिय शिकारी की भूमिका में आ जाते हैं।
जैसे-जैसे लार्वा बड़े होते हैं, ये आइसोपॉड, एम्फिपॉड, बड़े कीट, मेंढक के टैडपोल और यहाँ तक कि अन्य सैलामैंडरों के लार्वा तक का शिकार करने लगते हैं। जब वर्नल पूल सूखने लगते हैं और भीड़भाड़ बढ़ जाती है, तो लार्वा नरभक्षी भी बन सकते हैं और अपनी ही प्रजाति के साथियों पर हमला करते हैं।
वयस्क सैलामैंडर अपनी चिपचिपी जीभ से शिकार को पकड़ता है और मुख्यतः जंगल की जमीन पर मिलने वाले अकशेरुकी जीवों—केंचुए, घोंघे, स्लग, गोजर, कनखजूरे, मकड़ियाँ और विविध कीड़ों—का आहार लेता है। कभी-कभी यह छोटी प्रजाति के सैलामैंडर, जैसे Plethodon cinereus (रेड-बैक्ड सैलामैंडर), का भी शिकार करता है।
प्रजनन और जीवन चक्र
बर्फ पिघलने के बाद पहली बारिश की रात, नर सैलामैंडर मादाओं से पहले प्रजनन तालाब पहुँच जाते हैं, क्योंकि तापमान परिवर्तन पर उनकी प्रतिक्रिया तेज़ होती है। वे मादाओं की तुलना में तालाब में अधिक समय भी बिताते हैं, जिससे अधिक अंडों को निषेचित करने की संभावना बढ़ जाती है। यह प्रजाति बहुपतित्व-बहुपत्नीत्व (polygynandrous) व्यवस्था अपनाती है — प्रत्येक नर कई मादाओं को और प्रत्येक मादा कई नरों के शुक्राणु-पैकेट (स्पर्मेटोफोर) ग्रहण कर सकती है।
तालाब में मादाओं की तुलना में नरों की संख्या अधिक होती है, इसलिए नर एक-दूसरे को धक्का देकर, रगड़कर और अधिक से अधिक स्पर्मेटोफोर (एक नर 80 तक बना सकता है) जमाकर प्रतिस्पर्धा करते हैं, और कभी-कभी दूसरे नरों के स्पर्मेटोफोर को अपने से ढक भी देते हैं। मादाएं इन शुक्राणु-पैकेटों को अपने शरीर में लेकर आंतरिक निषेचन करती हैं।
निषेचन के बाद मादा जलमग्न शाखाओं या जलीय पौधों से जुड़े सघन अंडे-समूह देती है, जो मोटी, पारदर्शी या दूधिया जेली से ढके होते हैं। प्रत्येक मादा वर्ष में लगभग 100 से 300 (औसतन लगभग 200) अंडे कई अलग-अलग समूहों में देती है। अंडे 4 से 7 सप्ताह में फूटते हैं। दक्षिणी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया दिसंबर के अंत में शुरू हो सकती है, जबकि नोवा स्कोशिया जैसे उत्तरी क्षेत्रों में मई की शुरुआत तक चलती है।
नर सैलामैंडर संतान की कोई देखभाल नहीं करते। मादा केवल अंडों को पोषक तत्व और जेली की सुरक्षात्मक परत देकर तथा उन्हें उपयुक्त स्थान पर रखकर अपना योगदान पूरा कर देती है। यह प्रजाति प्रजनन योग्य होने में कई वर्ष लेती है — गर्म क्षेत्रों में 2-3 वर्ष में, जबकि ठंडे उत्तरी क्षेत्रों में नर 5-6 वर्ष और मादा 7 वर्ष तक की आयु में परिपक्व होती हैं।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
Ambystoma maculatum वर्नल पूल पारितंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहाँ यह अन्य प्रजातियों, विशेषकर उभयचरों, की संख्या और विविधता को प्रभावित करता है। ग्रे ट्रीफ्रॉग (Hyla chrysoscelis और Hyla versicolor) उन तालाबों में प्रजनन करने से बचते हैं जहाँ यह सैलामैंडर मौजूद हो। समय और आकार के आधार पर, यह अन्य Ambystoma प्रजातियों की आबादी को भी सीमित कर सकता है।
इसका एक अनोखा पारस्परिक सहजीवी संबंध एककोशिकीय हरे शैवाल Oophila amblystomatis के साथ है, जो इसके अंडों और भ्रूणों के आसपास पाया जाता है।
संरक्षण और खतरे
IUCN रेड लिस्ट में Ambystoma maculatum को "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, और यह अमेरिकी संकटग्रस्त प्रजाति अधिनियम, CITES परिशिष्टों या मिशिगन राज्य सूची में सूचीबद्ध नहीं है। यह अब भी अपेक्षाकृत सामान्य प्रजाति है।
फिर भी इसकी आबादियाँ प्रजनन के लिए वर्नल पूल्स पर पूरी तरह निर्भर होने के कारण संवेदनशील हैं। अम्लीय वर्षा भ्रूणों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है, जबकि आवास विनाश और वनों की कटाई आबादियों को एक-दूसरे से अलग-थलग कर रही है, जिससे आबादियों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान बाधित होता है।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
संकटमुक्त
सांस्कृतिक महत्व
Ambystoma maculatum ओहायो और दक्षिण कैरोलिना का आधिकारिक राज्य उभयचर घोषित है, जो इसे अमेरिकी लोक-पहचान में एक विशेष स्थान देता है।
मनुष्यों के लिए यह सैलामैंडर पारिस्थितिक रूप से उपयोगी भी माना जाता है, क्योंकि यह मच्छरों समेत कई कीट प्रजातियों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता है, जो इसके तालाबों में प्रजनन करती हैं।
रोचक तथ्य
- वैज्ञानिक नाम Ambystoma ग्रीक शब्दों से बना है जिसका अर्थ है 'कुंद मुँह', जबकि maculatum लैटिन में 'धब्बेदार' के लिए प्रयुक्त होता है।
- वयस्क सैलामैंडर का वजन औसतन मात्र लगभग 12.8 ग्राम होता है, भले ही इसकी लंबाई 25 सेंटीमीटर तक पहुँच सकती है।
- शोधों में पाया गया है कि यह सैलामैंडर दृश्य स्थलचिह्नों को भोजन के स्रोतों से जोड़ना सीख सकता है, जो इसे प्रजनन तालाबों तक आने-जाने में दिशा खोजने में भी सहायक होता होगा।
पारिस्थितिकी
आहार
- मांसाहारी
व्यवहार
- निशाचर
- परभक्षी
- बिलकारी
- प्रवासी
आवास
- वन
- मीठा जल
फ़ोटो
स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaAnimal Diversity WebAnAge



