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Salamandra salamandra

Salamandra salamandra

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

LCसंकटमुक्त
काली त्वचा और चमकीले चेतावनी-रंगों वाला एक वयस्क समन्दर, आंखों के पीछे उभरी हुई ग्रंथियों के साथ जमीन पर बैठा हुआफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

वज़न
0.019–0.019 kg
जीवनकाल
≤ 24 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Amphibia
गण
Caudata
कुल
Salamandridae
वंश
Salamandra
प्रजाति
Salamandra salamandra

Salamandra salamandra अपने शरीर पर मौजूद ग्रंथियों से शिकारियों की दिशा में सीधे न्यूरोटॉक्सिन की फुहार छोड़ सकता है, जो अधिकांश उभयचरों में नहीं पाई जाने वाली एक असाधारण रक्षा-क्षमता है।

यह उभयचर वर्ग, कॉडेटा गण और सैलामैंड्रिडी कुल का सदस्य है और मुख्य रूप से दक्षिणी व मध्य यूरोप में पाया जाता है। IUCN रेड लिस्ट में इसे 'संकटमुक्त' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।

यह समन्दर सदियों से आग से जुड़ी लोककथाओं का केंद्र रहा है, दशकों तक एक ही शीतकालीन बिल में लौटता है, और इसका जीवनकाल दो दशकों से अधिक तक फैला हो सकता है — जो इसे विज्ञान और संस्कृति दोनों के लिए दिलचस्प बनाता है।

पहचान और रूप

इस समन्दर की सबसे स्पष्ट पहचान इसकी आंखों के पीछे स्थित बड़ी पैरोटॉयड ग्रंथियां और शरीर पर मौजूद चेतावनी-रंगों वाला पैटर्न है, जो शिकारियों को इसकी विषाक्तता के प्रति सचेत करता है।

यह अपेक्षाकृत छोटा और हल्का जीव है, जिसका वजन लगभग 19.1 ग्राम होता है। इसके बावजूद इसकी काया सुगठित और मजबूत दिखाई देती है, जैसा कि इस कुल के अधिकांश स्थलीय समन्दरों में होता है।

वितरण और आवास

यह प्रजाति मुख्य रूप से दक्षिणी और मध्य यूरोप में फैली हुई है, जहां यह सामान्यतः 250 मीटर से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है। बाल्कन क्षेत्र और स्पेन में यह अक्सर इससे भी अधिक ऊंचाई पर मिलती है, जबकि उत्तरी जर्मनी में कभी-कभार यह मात्र 25 मीटर की ऊंचाई पर भी देखी गई है।

यह छायादार वनों को प्राथमिकता देता है, विशेषकर उन क्षेत्रों को जहां प्रजनन के लिए पास में तालाब या नदी-नाले मौजूद हों। दिन के अधिकांश समय यह पत्थरों, गिरे हुए लट्ठों के नीचे या दरारों में छिपकर नमी और सुरक्षा बनाए रखता है।

GBIF के मासिक अवलोकन आंकड़े दर्शाते हैं कि जनवरी में दर्ज संख्या सबसे कम (लगभग 5,123) रहती है, इसके बाद वसंत में तेजी से वृद्धि होकर मई में यह लगभग 40,129 तक पहुंच जाती है, फिर गर्मियों में घटती है और अक्टूबर में एक दूसरी छोटी वृद्धि (लगभग 27,617) दिखाई देती है।

यह आंकड़े केवल उपस्थिति के अवलोकन हैं, जनसंख्या घनत्व या पूर्ण वितरण क्षेत्र के संकेतक नहीं; फिर भी यह पैटर्न सतह पर हल्की रातों और प्रजनन काल के दौरान इसकी अधिक सक्रियता की ओर संकेत करता है।

Salamandra salamandra के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
40,129
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

यह एक शर्मीली प्रजाति है जो अधिकांश समय छायादार दरारों, गिरे हुए लट्ठों या पत्थरों के नीचे छिपकर बिताती है और मुख्यतः हल्की, नम रातों में सक्रिय होती है। अत्यधिक तापमान वाले मौसमों में यह निष्क्रिय रहती है — यूरोप में यह जाड़ों में शीतनिष्क्रियता अपनाती है, जबकि मध्य-पूर्वी आबादियां गर्मियों में शुष्कता के दौरान निष्क्रिय हो जाती हैं।

यह अपने घरेलू क्षेत्र के प्रति वर्षों तक वफादार रहती है और बार-बार उसी शीतकालीन बिल में लौटती है; एक प्रयोग में कुछ व्यक्तियों को लगातार 20 वर्षों तक एक ही गुफा में शीतनिद्रा के लिए लौटते हुए पाया गया। इस तरह की वापसी के लिए दिशा-ज्ञान आवश्यक है, और देखा गया है कि यह समन्दर मार्ग खोजने के लिए स्थलचिह्नों का सहारा लेता है, जिसमें दृश्य संकेत विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं।

शिकारियों से बचाव के लिए यह मुख्यतः अपनी विषाक्तता और चेतावनी-रंगों पर निर्भर करता है। आंखों के पीछे स्थित बड़ी पैरोटॉयड ग्रंथियां और शरीर की लंबाई में फैली विष-ग्रंथियों की पंक्तियां न्यूरोटॉक्सिन स्रावित करती हैं, जिन्हें यह जीव भागने के बजाय सीधे शिकारी की ओर सक्रिय रूप से छिड़क सकता है।

शिकार और आहार

यह समन्दर उपलब्ध रोशनी के अनुसार अपनी शिकार-रणनीति बदलता है: जब कुछ प्रकाश मौजूद होता है, तो यह शिकार की गतिविधि को संकेत मानकर स्थिर शिकार को नजरअंदाज कर देता है, लेकिन पूर्ण अंधेरे में, जहां दृष्टि काम नहीं करती, यह गंध पर निर्भर हो जाता है और गंध का पता चलने पर स्थिर शिकार पर भी हमला कर देता है।

इसका आहार मुख्यतः उन अकशेरुकी जीवों पर निर्भर करता है जो उसके निवास स्थान में सबसे अधिक उपलब्ध होते हैं। इनमें केंचुए और स्लग जैसे मुलायम शरीर वाले जीव, साथ ही मक्खियां, कनखजूरे, गोजर और भृंग जैसे कठोर शरीर वाले कीट-पतंगे शामिल हैं।

कायांतरण के बाद के शुरुआती कुछ हफ्तों में युवा समन्दर अपने पसंदीदा शिकार-प्रकार पर अंकित (इम्प्रिंट) हो जाते प्रतीत होते हैं, जो आगे चलकर उनकी शिकार आदतों को प्रभावित करता है।

प्रजनन और जीवन चक्र

प्रजनन-प्रक्रिया भूमि पर संभोग-प्रदर्शन से शुरू होती है: नर मादा का रास्ता रोककर अपनी ठुड्डी से उसे रगड़ता है, फिर उसके नीचे आकर उसके अगले पैरों को अपनी बाहों में जकड़ लेता है। नर जमीन पर एक शुक्राणु-पैकेट (स्पर्मेटोफोर) छोड़ता है और मादा के जननद्वार को उस पर टिकाने का प्रयास करता है, जिससे आंतरिक निषेचन होता है। प्रजनन काल में नर के जननद्वार के पास सूजी हुई ग्रंथि ही दोनों लिंगों के बीच एकमात्र स्पष्ट अंतर होती है।

मादा निषेचन से पहले शुक्राणु को कुछ समय तक अपने शरीर में सुरक्षित रख सकती है, जिससे गर्मियों के संभोग-काल और अगले वसंत में बच्चों के जन्म के बीच लंबा अंतराल बन जाता है। बंदी अवस्था में मादाएं शुक्राणु को लंबे समय तक संग्रहीत कर बाद में एक और समूह जन्म देने के लिए भी उपयोग कर सकती हैं, हालांकि यह व्यवहार जंगली आबादियों में नहीं देखा गया है।

यह प्रजाति अंडजरायुज की बजाय पूर्णतः जरायुज मानी जाती है: भ्रूण मादा के भीतर ही जर्दी से पोषण पाकर विकसित होते हैं। जन्म के समय लार्वा प्रायः काफी विकसित अवस्था में होते हैं और मादा उन्हें सीधे जल में छोड़ देती है; कुछ उप-प्रजातियों में तो बच्चे कायांतरण पूरा कर चुकी अवस्था में ही जन्म लेते हैं। मध्य-पूर्वी आबादियों में यह चक्र खिसक जाता है — वहां संभोग अक्टूबर से जनवरी के बीच होता है और लार्वा अगले नवंबर-दिसंबर में जन्म लेते हैं, गर्मियों की शुष्क निष्क्रियता के बाद।

समन्दर वर्ष में एक बार प्रजनन करता है, लेकिन 24 वर्ष तक जीवित रह सकने के कारण मादाओं को अपने जीवनकाल में कई बार प्रजनन का अवसर मिलता है।

संरक्षण और खतरे

वैश्विक स्तर पर IUCN ने इस प्रजाति को 'संकटमुक्त' श्रेणी में रखा है, लेकिन 2023 में हुए पुनर्मूल्यांकन में इसे भूतकाल और भविष्य में अनुमानित गिरावट के आधार पर 'सुभेद्य' (Vulnerable) श्रेणी की ओर बढ़ाया गया; CITES के तहत इसे कोई विशेष संरक्षण दर्जा प्राप्त नहीं है।

बेहतर कानूनों ने पालतू व्यापार और शोध के लिए जंगल से पकड़े जाने वाले व्यक्तियों की संख्या घटाने में मदद की है। अब अधिक गंभीर खतरा आवास क्षरण और प्रदूषण से है, क्योंकि सभी उभयचरों की तरह यह भी पर्यावरणीय प्रदूषकों के प्रति संवेदनशील है; अपने घरेलू क्षेत्र और शीतकालीन बिलों के प्रति गहरी निष्ठा के कारण आवास विखंडन भी इसके लिए विशेष जोखिम पैदा करता है।

सबसे विनाशकारी खतरा Batrachochytrium salamandrivorans (Bsal) नामक बाहरी कवक है, जिसकी पहचान पहली बार 2013 में नीदरलैंड्स में हुई। वहां यह प्रजाति पहले ही 1950 के बाद से अपने क्षेत्र में 57% गिरावट झेल चुकी थी, और 2010 के बाद 96% तक की गिरावट दर्ज की गई — एक आबादी 241 व्यक्तियों से घटकर 2011 तक केवल 4 रह गई। यह कवक बेल्जियम, पश्चिमी जर्मनी और स्पेन की S. s. hispanica उप-प्रजाति तक भी फैल चुका है; कुछ स्थानों जैसे जर्मनी के आइफेल पर्वतों में यह प्रजाति अब पूरी तरह लुप्त हो चुकी प्रतीत होती है, हालांकि कुछ आबादियां कम संख्या में बची हुई हैं और एक मामले में आंशिक सुधार भी देखा गया है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

लोक-जादू और परंपरा में समन्दर को चार प्राचीन तात्विक जीवों में से एक माना जाता रहा है, और विडंबना यह है कि नम त्वचा वाला यह अर्ध-जलीय प्राणी अग्नि तत्व से जोड़ा गया। यह विश्वास कि समन्दर आग को सहन कर सकता है और उसे बुझा भी सकता है, प्राचीन यूनान तक जाता है, जहां अरस्तू (384–322 ईसा पूर्व) और उसके उत्तराधिकारी थियोफ्रेस्टस (लगभग 371–287 ईसा पूर्व) ने चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में ही ऐसा वर्णन किया था।

अधिकांश विद्वान मानते हैं कि यह लोककथा Salamandra salamandra से ही उपजी, क्योंकि यह जीव सर्दियों में सड़ी-गली लकड़ी के खोखले लट्ठों में शीतनिद्रा लेता है — जब ऐसी लकड़ी को आग में डाला जाता तो समन्दर भागता हुआ निकलता, जिससे यह भ्रम बना कि वह आग से अक्षत निकल आया।

मानव उपयोग की दृष्टि से यह पालतू व्यापार में लोकप्रिय रहा है और शोध में एक प्रयोगशाला प्रतिरूप के रूप में भी उपयोग किया गया है। इसकी त्वचा से निकलने वाले सैमेंडरिन और सैमेंडरोन जैसे विष-यौगिकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है, जो मनुष्यों के लिए संभावित रूप से खतरनाक हो सकते हैं, फिर भी जीवाणु और फफूंद-रोधी गुणों की दृष्टि से शोध का विषय बने हुए हैं।

रोचक तथ्य

  1. अरस्तू और थियोफ्रेस्टस ने चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में ही समन्दर के आग सहने की मान्यता का उल्लेख कर दिया था।
  2. यह मान्यता संभवतः इस तथ्य से उपजी कि यह जीव सड़ी लकड़ी के लट्ठों में शीतनिद्रा लेता है और आग में डाली गई ऐसी लकड़ी से भागता हुआ दिखाई देता।
  3. कुछ व्यक्ति लगातार 20 वर्षों तक एक ही शीतकालीन गुफा में लौटते पाए गए हैं, जो असाधारण दिशा-स्मृति दर्शाता है।
  4. इसके विष-यौगिक सैमेंडरिन और सैमेंडरोन सिर और पीठ के आसपास केंद्रित होते हैं, और लार्वा अवस्था में ये उत्पन्न नहीं होते — ये केवल वयस्क होने पर बनने लगते हैं।
  5. कुछ उप-प्रजातियों में बच्चे जलीय लार्वा के बजाय पूर्ण कायांतरित अवस्था में ही जन्म लेते हैं।
  6. यह समन्दर 24 वर्ष तक जीवित रह सकता है, जिससे मादाओं को जीवनकाल में कई बार प्रजनन का मौका मिलता है।

पारिस्थितिकी

आहार

  • मांसाहारी

व्यवहार

  • निशाचर
  • परभक्षी
  • एकांतप्रिय
  • शीतनिष्क्रिय

आवास

  • वन
  • वनभूमि
  • मीठा जल

फ़ोटो

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काली त्वचा और चमकीले चेतावनी-रंगों वाला एक वयस्क समन्दर, आंखों के पीछे उभरी हुई ग्रंथियों के साथ जमीन पर बैठा हुआफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaAnimal Diversity WebAnAge