Bufo bufo दिन में छिपा रहता है और सांझ ढलते ही सक्रिय होता है, जब यह रात के अंधेरे में विभिन्न अकशेरुकी जीवों का शिकार करता है। यह धीमी और अनाड़ी चाल से चलता है या छोटी-छोटी छलांगें लगाता है, और इसकी धूसर-भूरी त्वचा मस्सेनुमा उभारों से ढकी होती है।
Bufo bufo उभयचर वर्ग (Amphibia), मेंढक व टॉड गण (Anura) तथा बूफोनिडी (Bufonidae) कुल का सदस्य है। यह यूरोप के अधिकांश भाग, पश्चिमी उत्तर एशिया और उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के एक छोटे हिस्से में पाया जाता है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे 'न्यूनतम चिंताजनक' श्रेणी में रखा गया है।
इसकी चुपचाप छिपी जीवनशैली, विषैली ग्रंथियों से सुरक्षा और यूरोप के परिदृश्य में इसकी व्यापक मौजूदगी इसे अध्ययन के लिए एक दिलचस्प विषय बनाती है।
पहचान और रूप
Bufo bufo की पहचान का सबसे उपयोगी लक्षण आँखों के ठीक पीछे तिरछी दिशा में लगी पैरोटॉइड ग्रंथियाँ हैं, जो बुफोटॉक्सिन नामक विषैला पदार्थ स्रावित करती हैं और शिकारियों को दूर रखने का काम करती हैं। इसका शरीर लंबाई में लगभग 15 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है, और चौड़े सिर पर छोटे नथुनों वाला अंतिम सिरे पर मुख होता है। इसमें दाँत नहीं होते, और उभरी हुई आँखों में पीली या ताम्बई परितारिका के साथ क्षैतिज, दरार-जैसी पुतलियाँ होती हैं।
सिर बिना किसी स्पष्ट गर्दन के सीधे शरीर से जुड़ा होता है, और नर में बाहरी स्वर-थैली नहीं होती। चौड़ा, चपटा शरीर ज़मीन के नज़दीक टिका रहता है; अगले पैर छोटे होते हैं और उनकी उंगलियाँ भीतर की ओर मुड़ी होती हैं, जबकि पिछले पैरों की उंगलियाँ लंबी और बिना झिल्ली के होती हैं तथा कोई पूँछ नहीं होती। सूखी त्वचा छोटे मस्सेनुमा उभारों से ढकी रहती है और रंग सामान्यतः भूरा, जैतूनी-भूरा या धूसर-भूरा होता है, जिस पर कभी-कभी गहरे रंग के धब्बे या पट्टियाँ दिखती हैं। नीचे का भाग धूसर और काले धब्बों के साथ मैला सफेद होता है।
मादाएँ नर की तुलना में अधिक भारी-भरकम और अधिक भूरे रंग की होती हैं, जबकि नर अधिक धूसर दिखते हैं; प्रजनन काल में नर की पहली तीन अंगुलियों पर विशेष नुप्शल पैड विकसित हो जाते हैं, जिनका उपयोग वह मादा को जकड़ने के लिए करता है। इसकी सीमा के दक्षिणी हिस्सों के नमूने उत्तरी हिस्सों के नमूनों की तुलना में सामान्यतः बड़े होते हैं।
इसे नैटरजैक टॉड (Bufo calamita) और यूरोपियन ग्रीन टॉड (Bufo viridis) से भ्रमित किया जा सकता है; पहली प्रजाति सामान्यतः छोटी होती है और उसकी पीठ पर एक पीली पट्टी होती है, जबकि दूसरी पर एक विशिष्ट चित्तीदार पैटर्न होता है — दोनों में पैरोटॉइड ग्रंथियाँ एक-दूसरे के समांतर होती हैं, तिरछी नहीं जैसा Bufo bufo में होता है। सामान्य फ्रॉग (Rana temporaria) भी समान दिखता है, पर उसका नथुना कम गोल, त्वचा नम व चिकनी होती है और वह मुख्यतः कूदकर चलता है। Bufo bufo जंगल में लगभग दस से बारह वर्ष जीवित रहता है, जबकि बंदी अवस्था में पचास वर्ष तक जीने के रिकॉर्ड मिले हैं; इसकी उम्र का अनुमान पैर की हड्डियों में वार्षिक वृद्धि-वलयों की गिनती से लगाया जाता है।
वितरण और आवास
Bufo bufo यूरोप के लगभग पूरे महाद्वीप में पाया जाता है, सिवाय आइसलैंड, स्कैंडिनेविया के ठंडे उत्तरी हिस्सों और भूमध्यसागर के कुछ द्वीपों — माल्टा, क्रीट, कोर्सिका, सार्डिनिया और बेलिएरिक द्वीपों — के। इसे आयरलैंड के कुछ हिस्सों में लाया गया है, जहाँ यह अच्छी तरह फल-फूल रहा है। इसकी पूर्वी सीमा साइबेरिया के इरकुत्स्क तक फैली है, और दक्षिणी सीमा उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के मोरक्को, अल्जीरिया व ट्यूनीशिया के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों तक जाती है। पूर्वी एशिया, जापान सहित, में इससे निकट संबंधी एक रूप पाया जाता है।
यह प्रजाति अपनी सीमा के दक्षिणी हिस्सों में 2,500 मीटर तक की ऊँचाई पर पाई जाती है। मुख्यतः यह शंकुधारी, चौड़ी-पत्ती वाले और मिश्रित वनों में, विशेष रूप से नम स्थानों में रहती है, पर खुले खेतों, झाड़ियों, पार्कों और बगीचों में भी मिलती है, और कभी-कभी जल-स्रोतों से दूर सूखे इलाकों में भी पाई जाती है।
सामान्य फ्रॉग (Rana temporaria), एडिबल फ्रॉग (Pelophylax esculentus) और स्मूथ न्यूट (Lissotriton vulgaris) के बाद, Bufo bufo यूरोप का चौथा सबसे सामान्य उभयचर है।
GBIF के मासिक अवलोकन आँकड़े — जो केवल उपस्थिति दर्शाते हैं, आबादी या पूर्ण वितरण नहीं — मार्च में सबसे अधिक (लगभग 1,83,000) और अप्रैल में भी उच्च (लगभग 1,31,000) दर्ज संख्याएँ दिखाते हैं, जो वसंत में प्रजनन-प्रवास के दौरान इसकी बढ़ी हुई दृश्यता के अनुरूप हो सकता है; सर्दियों के महीनों — दिसंबर और जनवरी — में यह संख्या घटकर बस कुछ हज़ार तक रह जाती है, जब अधिकांश टॉड शीतनिद्रा में होते हैं।

प्रजनन और जीवन चक्र
Bufo bufo वसंत में शीतनिद्रा से बाहर आते ही समूह में अपने चुने हुए प्रजनन तालाबों की ओर प्रवास करता है, जबकि आसपास के अन्य उपयुक्त जल-स्रोतों को नज़रअंदाज़ कर देता है। वयस्क हर साल एक ही स्थान का उपयोग करते हैं — किशोरावस्था में चिह्नित किए गए 80% से अधिक नर उसी तालाब में लौटते पाए गए हैं जहाँ वे अंडों से निकले थे। यह अपने रास्ते खोजने के लिए गंध, चुंबकीय और दृष्टि संकेतों का संयोजन उपयोग करता है; प्रयोगों में तीन किलोमीटर से अधिक दूर स्थानांतरित किए गए टॉड भी अपने चुने हुए तालाब तक पहुँचने में सफल रहे।
नर सबसे पहले पहुँचते हैं और कई सप्ताह तक तालाब में रुकते हैं, जबकि मादाएँ केवल संगम व अंडे देने भर के लिए आती हैं। नर आपस में लड़ने के बजाय अपनी आवाज़ की पिच से प्रतिस्पर्धा तय कर सकते हैं, क्योंकि पिच शरीर के आकार का विश्वसनीय संकेत देती है; फिर भी कभी-कभी वास्तविक झगड़े होते हैं — एक तालाब के अध्ययन में, जहाँ नरों की संख्या मादाओं से चार से पाँच गुना अधिक थी, 38% नरों ने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर या मादा पर सवार अन्य नरों को हटाकर संगम का अधिकार पाया। स्वीडन में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि मादाओं की मृत्यु-दर नरों से अधिक होती है, और 41% मादाएँ किसी वसंत में प्रजनन तालाब में नहीं पहुँचती, एक वर्ष चूककर अगली बार प्रजनन करती हैं।
सफल नर मादा की पीठ पर चढ़कर अपने अगले पैरों से उसे बगल के नीचे जकड़ लेता है — इस पकड़ को 'एम्प्लेक्सस' कहा जाता है — और कई दिनों तक इस स्थिति में रहता है, जबकि मादा 1,500 से 6,000 छोटे काले अंडों की एक लंबी, दोहरी माला बिछाती है, जिसे नर साथ-साथ निषेचित करता है। यह माला 3 से 4.5 मीटर लंबी हो सकती है और तालाब के किनारे तैरते जलीय पौधों के तनों में उलझ जाती है।
जल सोखकर फूली इन अंडों की माला से लगभग दस दिन बाद छोटे टैडपोल निकलते हैं, जो शुरू में जिलेटिन युक्त माला के अवशेषों से चिपके रहकर उसी को खाते हैं, फिर जलीय पत्तियों के नीचे टिककर धीरे-धीरे स्वतंत्र रूप से तैरने लगते हैं। ये सामान्य फ्रॉग के टैडपोल से अधिक गहरे रंग के होते हैं और इनका मुख उतना ही चौड़ा होता है जितनी आँखों के बीच की दूरी। कुछ सप्ताहों में पैर विकसित होते हैं और पूँछ धीरे-धीरे शरीर में समा जाती है; लगभग बारह सप्ताह की आयु में ये लघु टॉड बनकर, करीब 1.5 सेंटीमीटर आकार में, तालाब छोड़ देते हैं।
आबादी और पारिस्थितिक भूमिका
हमला होने पर Bufo bufo शरीर को फुलाकर, पिछला हिस्सा ऊँचा उठाकर और सिर नीचा करके एक विशिष्ट रक्षात्मक मुद्रा अपनाता है। इसकी मुख्य सुरक्षा पैरोटॉइड और त्वचा की अन्य ग्रंथियों से निकलने वाले बुफेगिन नामक विष में है, जो अधिकांश शिकारियों को रोकता है, हालांकि ग्रास स्नेक इस विष से प्रभावित नहीं होते। हेजहॉग, चूहे, मिंक और घरेलू बिल्लियाँ भी वयस्क टॉड का शिकार करते हैं, जबकि बगुले, कौवे और शिकारी पक्षी भी इन्हें खाते हैं — कौवे विष से बचने के लिए चोंच से त्वचा छेदकर सीधे लिवर निकाल लेते हैं।
टैडपोल भी मछलियों को रोकने के लिए विषैले पदार्थ स्रावित करते हैं, हालांकि ग्रेट क्रेस्टेड न्यूट इससे अप्रभावित रहते हैं। ड्रैगनफ्लाई लार्वा, गोताखोर बीटल और वाटर बोटमैन जैसे जलीय अकशेरुकी टैडपोल की त्वचा छेदकर उसका रस चूसकर विष से बचते हुए उन्हें खाते हैं। Lucilia bufonivora नामक एक परजीवी मक्खी वयस्क टॉड की त्वचा पर अंडे देती है, और उनसे निकले लार्वा नथुनों में घुसकर अंदर से मांस खाते हैं, जो अक्सर टॉड की मृत्यु का कारण बनता है।
यूरोपियन फिंगरनेल क्लैम (Sphaerium corneum), जो जलीय पौधों पर चढ़ सकता है, कभी-कभी टॉड के पंजे से चिपक जाता है — माना जाता है कि यह इस क्लैम के नए स्थानों तक फैलने का एक तरीका है।
संरक्षण और खतरे
IUCN की रेड लिस्ट में Bufo bufo को 'न्यूनतम चिंताजनक' श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इसका वितरण व्यापक है और अपनी सीमा के अधिकांश भाग में यह एक सामान्य प्रजाति बनी हुई है। पर्णपाती व शंकुधारी वनों, झाड़ियों, घास के मैदानों, पार्कों और बगीचों में ढलने की क्षमता के कारण यह आवास हानि से विशेष रूप से खतरे में नहीं है।
इसके सामने मुख्य खतरे हैं — स्थानीय स्तर पर आवास हानि, प्रजनन के लिए उपयोग होने वाली आर्द्रभूमियों का जल-निकासी, कृषि गतिविधियाँ, प्रदूषण, और सड़कों पर वाहनों से होने वाली मौतें, जिनकी दर यूरोप के उभयचरों में सबसे अधिक मानी जाती है। स्पेन और ब्रिटेन में इसमें काइट्रिडियोमाइकोसिस नामक संक्रामक रोग भी दर्ज किया गया है, जो कुछ आबादियों को प्रभावित कर सकता है।
स्पेन में बढ़ती शुष्कता और आवास हानि के कारण संख्या घटी है और वहाँ इसे 'निकट संकटग्रस्त' माना जाता है; सिएरा डे ग्रेडोस पर्वत श्रेणी की आबादी को ऊँचाई की ओर बढ़ते ऊदबिलाव के शिकार और मेंढक Pelophylax perezi से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना है। ब्रिटेन में इसकी कानूनी खरीद-बिक्री प्रतिबंधित है और धीमी गिरावट के कारण इसे जैवविविधता कार्ययोजना की प्राथमिकता प्रजाति घोषित किया गया है। रूस के बाश्कोर्तोस्तान, तातारस्तान, यमालो-नेनेत्स और इरकुत्स्क ओब्लास्त क्षेत्रों में इसे 'दुर्लभ प्रजाति' माना जाता है, हालांकि 1990 के दशक में मॉस्को ओब्लास्त में इसकी संख्या बढ़ी थी।
शहरी क्षेत्रों में छोटे, विकास से अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में रहने वाली आबादियों में आनुवंशिक विविधता कम और शारीरिक असामान्यताएँ अधिक पाई गई हैं, जिससे लंबे समय में इनकी टिकाऊता प्रभावित हो सकती है। नीदरलैंड में हुए एक अनुमान के अनुसार, वसंत प्रवास के दौरान एक शांत ग्रामीण सड़क पर वाहनों से मरने वाली मादाओं की दर लगभग 30% पाई गई। जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड, ब्रिटेन, उत्तरी इटली और पोलैंड के कुछ हिस्सों में टॉड को सुरक्षित पार कराने के लिए सड़कों के नीचे विशेष सुरंगें बनाई गई हैं।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
संकटमुक्त
सांस्कृतिक महत्व
मध्यकालीन यूरोप में Bufo bufo को अशुभ प्राणी और आत्मिक जगत का द्वार माना जाता था, संभवतः इसलिए क्योंकि यह जल और भूमि दोनों में सहज रहता है और इसकी धूसर, मस्सेदार त्वचा तथा धीमी चाल में लोगों को घिन्न महसूस होती थी। इसे शैतान से जोड़ा गया और शैतान के लिए तीन टॉडों वाला एक काल्पनिक कुलचिह्न भी रचा गया था; इसे डायन का सहयोगी प्राणी माना जाता और लोग सूखे टॉड, उसकी पित्त, मल व रक्त का उपयोग भी करते थे। बास्क क्षेत्र में डायनों के सहयोगी प्राणियों को सुंदर वस्त्र पहने टॉड के रूप में देखा जाता था, जिन्हें डायन बनने का प्रशिक्षण ले रहे बच्चे चराते थे — 1610-1612 में स्पेनिश धर्माधिकारी अलोंसो दे सलाज़ार फ्रिआस ने डायनों के घरों की जाँच में ऐसे वस्त्रधारी टॉड खोजने की कोशिश की, पर कुछ नहीं मिला।
एक अंग्रेज़ी लोककथा में एक बूढ़ी स्त्री, जिसे डायन माना जाता था, अपने ज़मींदार को श्राप देती है; बाद में एक बड़ा टॉड उसकी पत्नी पर गिरता है, जिसे आग में फेंका जाता है पर वह जलकर भी बच निकलता है — उसी रात डायन की झोपड़ी में भी आग लगती है और उसके जलने के निशान टॉड के समान ही पाए जाते हैं। टॉड की लार को विषैला मानकर 'स्वेल्टर्ड वेनम' कहा जाता था, और जॉन मिल्टन ने अपनी कृति 'पैराडाइज़ लॉस्ट' में शैतान को टॉड के रूप में ईव के कान में विष डालते हुए दिखाया; शेक्सपियर के नाटक 'मैकबेथ' में डायनें मंत्र बनाने में टॉड का उपयोग करती हैं, और यह भी माना जाता था कि टॉड के सिर में 'टॉडस्टोन' नाम का एक रत्न होता है जो विष से बचाव की चेतावनी देता है, जिसका उल्लेख शेक्सपियर के 'ऐज़ यू लाइक इट' में भी मिलता है।
आधुनिक साहित्य में इसकी छवि कहीं अधिक सौम्य है: केनेथ ग्राहम के बाल-उपन्यास 'द विंड इन द विलोज़' का पात्र मिस्टर टॉड एक आत्ममुग्ध, मानवाकार टॉड है, जिसे ए. ए. मिल्न ने अपने नाटक 'टॉड ऑफ टॉड हॉल' में भी दर्शाया। जॉर्ज ऑरवेल ने अपने निबंध 'सम थॉट्स ऑन द कॉमन टॉड' में शीतनिद्रा से Bufo bufo के बाहर निकलने को वसंत के सबसे भावुक संकेतों में एक बताया है।
रोचक तथ्य
- जीनस नाम Bufo सीधे लैटिन शब्द 'bufo' से लिया गया है, जिसका शब्दशः अर्थ 'टोड' ही होता है; इसका कोई विशेष सांस्कृतिक या व्यक्तिगत नामकरण-इतिहास नहीं है।
- मध्य अमेरिका की पूर्व-कोलंबियाई सभ्यताओं में Bufo जीनस के टॉडों की त्वचा से निकलने वाले स्राव का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों और उपचार पद्धतियों में किया जाता था।
- ओल्मेक, माया और एज़्टेक संस्कृतियों में लगभग 2000 ईसा पूर्व से टॉड से जुड़े प्रतीक और पौराणिक चित्रण मिलते हैं, जो संबंधित प्रजाति Rhinella marina के बुफोटेनिन-युक्त स्राव के प्रतीकात्मक उपयोग की परिकल्पना को आधार देते हैं।
पारिस्थितिकी
व्यवहार
- निशाचर
- परभक्षी
- प्रवासी
- गोधूलि-सक्रिय
आवास
- वन
- वनभूमि
- घास का मैदान
- शहरी
आहार
- कीटभक्षी



